“न कोऽपि तुच्छः” (Na Ko’pi Tucchaḥ) Lesson :16 –

न कोऽपि तुच्छः — संस्कृत नैतिक कहानी (गजः पिपीलिका च)

इस संस्कृत नैतिक कथा में गज (हाथी) और पिपीलिका (चींटी) के माध्यम से यह सिखाया गया है कि
संसार में कोई भी प्राणी तुच्छ या छोटा नहीं होता। परिस्थिति चाहे जैसी भी हो, हर जीव का अपना महत्व है।
सहयोग और आपसी सम्मान से बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान संभव है।

🐘एकदा वने एकः गजः पिपीलिका च मिलतः ।
(उच्चारण: ekadā vane ekaḥ gajaḥ pipīlikā ca milataḥ) (हिन्दी अर्थ: एक बार जंगल में एक हाथी और एक चींटी मिले।)
🗣️हे पिपीलिके! मम मार्गात् दूरी भव, अन्यथा अहम् त्वां मर्दयिष्यामि ।
(उच्चारण: he pipīlike! mama mārgāt dūrī bhava, anyathā aham tvāṃ mardayiṣyāmi) (हिन्दी अर्थ: हे चींटी! मेरे रास्ते से हट जाओ, वरना मैं तुम्हें कुचल दूँगा।)
🌧️तदेव वने तीव्रवर्षा आरभ्यते। गजः पिपीलिका च एका गुहायां प्रविशतः ।
(उच्चारण: tadeva vane tīvravarṣā ārabhyate. gajaḥ pipīlikā ca ekā guhāyāṃ praviśataḥ) (हिन्दी अर्थ: उसी जंगल में तेज वर्षा आरम्भ हुई। हाथी और चींटी एक गुहा में छिपे।)
🪨तीव्रवर्ष्य–कारणात् एका विशालशिला गुहायाः द्वारे पतति ।
(उच्चारण: tīvravarṣya-kāraṇāt ekā viśāla-śilā guhāyāḥ dvāre patati) (हिन्दी अर्थ: तेज बारिश के कारण एक बड़ी चट्टान गुहा के द्वार पर गिर जाती है।)
💪गजः अनेकैः प्रयत्नैः अपि तां शिलां मार्गात् दूरं कर्तुं न शक्नोति।
(उच्चारण: gajaḥ anekaiḥ prayatnaiḥ api tāṃ śilāṃ mārgāt dūraṃ kartuṃ na śaknoti) (हिन्दी अर्थ: हाथी कई प्रयास करता है पर वह चट्टान को रास्ते से दूर नहीं कर पाता।)
🐜पिपीलिका लघु–आकार–कारणेन बहिः गन्तुं समर्था भवति ।
(उच्चारण: pipīlikā laghu-ākāra-kāraṇena bahiḥ gantuṃ samarthā bhavati) (हिन्दी अर्थ: चींटी अपने छोटे आकार के कारण बाहर जाने में सक्षम होती है।)
🤝पिपीलिका भो मित्राणि! आगच्छन्तु — आगच्छन्तु शिलां दूरीकर्तुं सहाय्यं कुर्वन्तु ।
(उच्चारण: pipīlikā bho mitrāṇi! āgacchantu — āgacchantu śilāṃ dūrīkartuṃ sahāyyaṃ kurvantu) (हिन्दी अर्थ: चींटी कहती है — मित्रों आओ, चट्टान को दूर करने में सहायता करो।)
🧑‍🤝‍🧑पिपीलिके! क्षम्यताम्। संसारे आकारेण कोऽपि न तुच्छः न च श्रेष्ठः; सर्वे समानाः भवन्ति।
(उच्चारण: pipīlike! kṣamyatām. saṃsāre ākāreṇa ko’pi na tucchaḥ na ca śreṣṭhaḥ; sarve samānāḥ bhavanti) (हिन्दी अर्थ: चींटी कहती है — क्षमा करें। संसार में आकार के कारण कोई तुच्छ या श्रेष्ठ नहीं होता; सभी समान हैं।)

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