
The Crow’s Effort – काकस्य उद्यमः (कौए की मेहनत और सफलता)
काकस्य उद्यमः पाठ में प्यासे कौए की प्रसिद्ध कथा है। कौआ घड़े में कंकड़ डालकर पानी ऊपर लाता है और अपनी प्यास बुझाता है। यह कहानी सिखाती है कि बुद्धि और परिश्रम से ही सफलता मिलती है, केवल इच्छा करने से नहीं।
एकस्मिन् वने एकः काकः आसीत्।
ekasmin vane ekaḥ kākaḥ āsīt.
एक जंगल में एक कौआ रहता था।
एकदा सः पिपासया आकुलः अभवत्।
ekadā saḥ pipāsayā ākulaḥ abhavat.
एक बार वह प्यास से व्याकुल हो गया।
सः जलाशयं अन्वेष्टुं वने इतस्ततः अभ्रमत्, किन्तु सुदूर यावत् कुत्रापि जलाशयं न अपश्यत्।
saḥ jalāśayaṁ anveṣṭuṁ vane itastataḥ abhramat, kintu sudūra yāvat kutrāpi jalāśayaṁ na apaśyat.
वह जलाशय खोजने के लिए जंगल में इधर-उधर भटका, लेकिन बहुत दूर तक भी उसे कहीं कोई जलाशय दिखाई नहीं दिया।
अन्ते सः एकं घटम् अलभत। तस्मिन् घटे स्वल्पं जलम् आसीत्।
ante saḥ ekaṁ ghaṭam alabht. tasmin ghaṭe svalpaṁ jalam āsīt.
अन्त में उसे एक घड़ा मिला। उस घड़े में थोड़ा-सा पानी था।
अतः सः जलं पातुं असमर्थः अभवत्।
ataḥ saḥ jalaṁ pātuṁ asamarthaḥ abhavat.
इसलिए वह पानी पीने में असमर्थ रहा।
अथ सः एकम् उपायम् अचिन्तयत्।
atha saḥ ekam upāyam acintayat.
तब उसने एक उपाय सोचा।
सः दूरत् पाषाण-खण्डानि आनीय घटे अक्षिपत्।
saḥ dūrataḥ pāṣāṇa-khaṇḍān ānayan ghaṭe adhikṣipat.
वह दूर से पत्थरों के टुकड़े को लाकर घड़े में डालने लगा।
एवं क्रमेण जलम् उपरि समागच्छत्।
evaṁ krameṇa jalam upari samāgacchat.
इस प्रकार धीरे-धीरे पानी ऊपर आ गया।
काकः जलं पीत्वा सुखी अभवत्।
kākaḥ jalaṁ pītvā sukhī abhavat.
कौआ पानी पीकर सुखी हो गया।
उद्यमस्य प्रभावेण काकः सफलः अभवत्।
udyamasya prabhāvena kākaḥ saphalaḥ abhavat.
परिश्रम के प्रभाव से कौआ सफल हुआ।
उद्यमस्य प्रभावेण एव सर्वे जीवने सफलाः भवन्ति।
udyamasya prabhāveṇa eva sarve jīvane saphalaḥ bhavanti
परिश्रम के प्रभाव से ही सब लोग जीवन में सफल होते हैं।
उक्तं च— “उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।”
uktaṁ ca — “udyamena hi siddhyanti kāryāṇi na manorathaiḥ.”
कहा भी गया है— “कार्य परिश्रम से ही सिद्ध होते हैं, केवल इच्छाएँ करने से नहीं।”
शब्दावली • New Words
| Word | Pronunciation | Meaning (हिन्दी) |
|---|---|---|
| काकः | kākaḥ | कौआ |
| वने | vane | जंगल में |
| एकदा | ekadā | एक बार |
| पिपासा / पिपासया | pipāsā / pipāsayā | प्यास / प्यास से |
| आकुलः | ākulaḥ | व्याकुल |
| जलाशयम् | jalāśayam | सरोवर/जलाशय |
| अन्वेच्छन् | anvechchan | खोजते हुए |
| इतस्ततः | itastataḥ | इधर-उधर |
| अभ्रमत् | abhramat | भटका |
| न अपश्यत् | na apaśyat | न देखा |
| अन्ते | ante | अन्त में |
| घटः/घटम् | ghaṭaḥ/ghaṭam | घड़ा |
| अलक्षत | alakṣata | देखा/दिख पड़ा |
| स्वल्पम् | svalpam | थोड़ा |
| जलम् | jalam | पानी |
| पातुम् | pātum | पीने के लिए |
| असमर्थः | asamarthaḥ | असमर्थ |
| उपायम् | upāyam | उपाय |
| अचिन्तयत् | acintayat | सोचा |
| दूरतः | dūrataḥ | दूर से |
| पाषाणखण्डः | pāṣāṇa-khaṇḍaḥ | पत्थर का टुकड़ा |
| आनयन् | ānayan | लाते हुए |
| अधिक्षिपत् | adhikṣipat | डालता गया |
| क्रमेण | krameṇa | क्रमशः/धीरे-धीरे |
| उपरि | upari | ऊपर |
| समागच्छत् | samāgacchat | आने लगा |
| पीत्वा | pītvā | पीकर |
| सुखी | sukhī | प्रसन्न |
| उद्यमः | udyamaḥ | परिश्रम/प्रयत्न |
| प्रभावेन | prabhāvena | प्रभाव से |
| सफलः | saphalaḥ | सफल |
| सिद्ध्यन्ति | siddhyanti | सफल होते हैं |
| कार्याणि | kāryāṇi | कार्य |
| मनोरथः | manorathaḥ | मात्र इच्छा/कल्पना |
मूल-शिक्षा • Moral
English: Consistent effort and presence of mind turn difficulties into success; wishes alone achieve nothing.
हिन्दी: बुद्धि और परिश्रम से कठिनाईयाँ दूर होती हैं; केवल इच्छा करने से कुछ नहीं होता।
Quote: “उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।”
✍️१. प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत — (Solved)
(क) काकः कुत्र आसीत्?
kākaḥ kutra āsīt? — Where did the crow live?
उत्तरः: एकस्मिन् वने काकः आसीत्।
ekasmin vane kākaḥ āsīt. — कौआ एक जंगल में रहता था।
(ख) सः कया आकुलः अभवत्?
saḥ kayā ākulaḥ abhavat? — He was troubled by what?
उत्तरः: सः पिपासया आकुलः अभवत्।
saḥ pipāsayā ākulaḥ abhavat. — वह प्यास से व्याकुल था।
(ग) सः किं कर्तुं असमर्थः अभवत्?
saḥ kiṁ kartuṁ asamarthaḥ abhavat? — What could he not do?
उत्तरः: सः जलं पातुं असमर्थः अभवत्।
saḥ jalaṁ pātuṁ asamarthaḥ abhavat. — वह पानी पीने में असमर्थ था।
(घ) कार्याणि केन सिद्ध्यन्ति?
kāryāṇi kena siddhyanti? — By what are works accomplished?
उत्तरः: उद्यमेन कार्याणि सिद्ध्यन्ति।
udyamena kāryāṇi siddhyanti. — कार्य परिश्रम से सिद्ध होते हैं।
🧩२. वाक्यानि पूरयत — (Solved)
क. एकदा सः पिपासया ____ अभवत्।
उत्तरः: आकुलः — ākulaḥ
ख. अन्ते सः एकं घटम् ____ ।
उत्तरः: अलक्षत — alakṣata
ग. घटे स्वल्पं ____ आसीत्।
उत्तरः: जलम् — jalam
घ. उद्यमस्य प्रभावेन एव सर्वे जीवने ____ भवन्ति।
उत्तरः: सफला: — saphalāḥ — सफल
🔁३. क्रियापदानि परिवर्तयत — (Present → Past)
भ्रमति → अभ्रमत् bhramati → abhramat भटकता है → भटका
चिन्तयति → अचिन्तयत् cintayati → acintayat सोचता है → सोचा
क्षिपति → अक्षिपत् kṣipati → akṣipat फेंकता/डालता है → डाला
भवति → अभवत् bhavati → abhavat होता है → हुआ
🌳४. चित्रं दृष्ट्वा वाक्यानि पूरयत — (Solved)
शब्दाः: छाया:, जीवनम्, वृक्ष:, परोपकाराय, जनस्य:
(क) यथा— अहम् वृक्षः अस्मि।
उत्तरः: अहं जनस्य परोपकाराय फलानि यच्छामि।
ahaṁ janasya paropakārāya phalāni yacchāmi. — मैं लोगों के उपकार के लिए फल देता हूँ।
(ख)
उत्तरः: अहं पथिकस्य छायाṁ यच्छामि।
ahaṁ pathikasya chāyāṁ yacchāmi. — मैं पथिक को छाया देता हूँ।
(ग)
उत्तरः: मम जीवनम् एव परोपकाराय भवति।
mama jīvanam eva paropakārāya bhavati. — मेरा जीवन ही परोपकार के लिए है।