धरती हमारी मातृरूपा है, जिसने हमें पर्वत, वन, जल, वायु जैसे बहुमूल्य प्राकृतिक उपहार दिए हैं, परंतु मनुष्य स्वार्थ के कारण इन संसाधनों का दुरुपयोग कर प्रकृति और पर्यावरण को प्रदूषित कर रहा है। बढ़ती जनसंख्या व शहरीकरण से वन कट रहे हैं, जिससे प्राणवायु की कमी और अनेक विपत्तियाँ उत्पन्न हो रही हैं। अतः वसुधा की रक्षा करना, वृक्षों को बचाना और पर्यावरण को स्वच्छ रखना हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य है, क्योंकि धरती सुरक्षित होगी तभी मानव जीवन सुखी और सुरक्षित रहेगा।
1. पाठ (संस्कृत पंक्तियाँ)
2. शब्दार्थ (स्पष्ट रूप में)
| संस्कृत शब्द | उच्चारण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| प्रदत्तानि | pradattāni | प्रदान की गई (दी गई चीजें) |
| तत्सर्वम् | tat sarvam | वे सब / समस्त |
| मातृरूपा | mātrūrūpā | माता के समान |
| स्वार्थ | svārtha | अपने लाभ हेतु |
| क्रियमानम् | kriyamānam | किया जा रहा |
| विनश्यन्ति | vinaśyanti | नष्ट हो जाते हैं |
| छित्वा | chittvā | काटकर |
| अविचारितेन | avicāritena | बिना विचार किए |
| गरियसीत् | gariyasīt | बढ़ गया / बढ़ती हुई |
| पृथिव्या: | pṛthivyāḥ | पृथ्वी की |
| समापत्तीनि | samāpattīni | आपत्तियाँ / दुर्घटनाएँ |
| वसुधा | vasudhā | धरती |
| रक्षणम् | rakṣaṇam | रक्षा / सुरक्षा |
| प्रकृति | prakṛti | प्रकृति / स्वाभाविक परिवेश |
| वृक्ष | vṛkṣa | वृक्ष / पेड़ |
| प्रदूषितम् | pradūṣitam | प्रदूषित / दूषित |
| वर्धमाना | vardhamānā | बढ़ती हुई |
| शहरीकरण | śaharīkaraṇa | शहर बनाना / शहरीकरण |
| निवारणाय | nivāraṇāya | रोकने हेतु |
| विपत्तयः | vipattayaḥ | विपत्तियाँ / आपदाएँ |
| प्रकृतिप्रदत्तानि | prakṛtipradattāni | प्रकृति द्वारा दिए गए |
| प्राणवायुः | prāṇavāyuḥ | जीवनदायी हवा / ऑक्सीजन |
| पर्वताः | parvatāḥ | पर्वत / पहाड़ |
| वनानि | vanāni | वन / जंगल |
| निवासाय | nivāsāya | रहने के लिए / निवास हेतु |
3. अभ्यास: प्रश्न — उत्तर
3.1 एकपदेन उत्तरत
यथा — का अस्माकं मातृरूपा? धरित्री — dharitrī — धरती
(क) धरातले कानि सन्ति? पर्वताः (वनानि, पवनः, जलम् आदि) — parvatāḥ (vanāni, pavanaḥ, jalam ādī) — पर्वत, वन, हवा, जल आदि
(ख) कस्मात् सौन्दर्यं विह्वलं भवति? प्रकृतेः विकारणात् — prakṛteḥ vikāraṇāt — प्रकृति के बिगड़ने के कारण
(ग) शुद्धप्राणवायुः कं ददति? वृक्षाः — vṛkṣāḥ — वृक्ष
3.2 पूर्णवाक्येन उत्तरत
पृथिव्या: अपरं नाम किम्? पृथिव्या: अपरं नाम धरित्री। — pṛthivyāḥ aparaṃ nāma dharitri. — पृथ्वी का दूसरा नाम धरित्री है।
(क) प्राकृतिकसाधनानां दुरुपयोगं कः करोति? मनुष्यः प्राकृतिकसाधनानां दुरुपयोगं करोति। — manuṣyaḥ prakṛtikasādhanānām durupayogaṃ karoti. — मनुष्य प्राकृतिक साधनों का दुरुपयोग करता है।
(ख) पर्यावरणस्य महती हानि: कथं भवति? वृक्षविनाशेन पर्यावरणस्य महती हानि: भवति। — vṛkṣavināśena paryāvaraṇasya mahatī hāniḥ bhavati. — वृक्षों के विनाश से पर्यावरण को बड़ी हानि होती है।
(ग) का सर्वथा वन्दनीया सेवनीया च? धरित्री सर्वथा वन्दनीया सेवनीया च। — dharitri sarvathā vandanīyā sevanīyā ca. — धरती का सम्मान और सेवा दोनों ही करनी चाहिए।
(घ) विपत्तीनां निवारणाय कस्याः रक्षणम् आवश्यकम्? धरित्री–रक्षणम् आवश्यकम्। — dharitri–rakṣaṇam āvaśyakaṃ. — विपत्तियों को रोकने के लिए धरती की रक्षा आवश्यक है।
3.3 मञ्जूषात् विशेषण चुनकर वाक्य पूरयत — (उदाहरण)
अधुना विश्वस्य वर्धमाना जनसंख्या शोकनीयाः। — adhunā viśvasya vardhamānā janasankhyā śokanīyāḥ. — आज विश्व की बढ़ती हुई जनसंख्या चिंताजनक है।
अस्माभिः वसुधाया: रक्षणम् कर्तव्यम्। — asmābhiḥ vasudhāyāḥ rakṣaṇam kartavyam. — हमारी तरफ़ से धरती की रक्षा करनी चाहिए।
वृक्षाणां विनाशेन पर्यावरणं प्रदूषितम् भवति। — vṛkṣāṇāṃ vināśena paryāvaraṇaṃ pradūṣitam bhavati. — वृक्षों के विनाश से पर्यावरण प्रदूषित हो जाता है।
4. अन्य भाग
4.1 चित्र-वाक्य
4.2 अनुवाद
6. संस्कृत भाषायां अनुवादं कुरुत
4.3 शिक्षण-सूचक
- इण्टरनेट माध्यमेन पृथ्वी-दिवस (22 अप्रैल) पर चर्चा करायें।
- वृक्षों का महत्त्व (प्राणवायु, फल, छाया) विद्यार्थियों से पूछें और नोट बनाएं।
- कक्षा में ‘वसुधा रक्षत’ नारे पर पोस्टर बनवायें।
4.4 स्मरणीय वाक्य
5. फलों के संस्कृत नाम (संस्कृत ↔ हिन्दी)
| संस्कृत नाम | हिन्दी नाम |
|---|---|
| आम्रम् (āmram) | आम |
| जम्बूफलम् (jambūphalam) | जामुन |
| स्फुटी (sphuṭī) | तरबूज / खरबूजा प्रकार |
| दाडिमम् (dāḍimam) | अनार |
| पनसम् (panasam) | कटहल |
| कन्दः (kandaḥ) | कन्द (प्रकार) |
| सीताफलम् (sītāphalam) | शरीफा |
| शृङ्गाटकः (śṛṅgāṭakaḥ) | सिंघाड़ा |
| बदरी (badarī) | बेर |
| कदलीफलम् (kadalīphalam) | केला |
| क्षुद्रद्राक्षा (kṣudradrākṣā) | किशमिश |
| अम्लिका (amlikā) | इमली |
| मण्डूकी (maṇḍūkī) | मुंगफली / मूँगफली |
| आम्रातकम् (āmrātakam) | अमरूद |
| बादामम् (bādāmam) | बादाम |
| आमलकम् (āmalakam) | आँवला |
| खर्जूरम् (kharjūram) | खजूर |
| निम्बूक (nimbūka) | निम्बू |
| शुक्तखर्जूरम् (śukta-kharjūram) | छुहाड़ा |
| द्राक्षा (drākṣā) | अंगूर / द्राक्ष |
| अक्षोटकर्म (akṣoṭakarma) | अखरोट |
| ककटी (kakaṭī) | ककड़ी |
| खर्वूजः (kharvūjaḥ) | खरबूजा |
| बदर (badara) | सेब |
| नारिकेलम् (nárikelam) | नारियल |
| रुचिफलम् (ruciphalam) | नाशपाती |
| नारङ्गम् (nārangam) | नारंगी / संतरा |
6. पाठ का Moral / संदेश
7. Vocabulary (कम से कम 25 शब्द)
| संस्कृत | उच्चारण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| धरित्री | dharitrī | धरती |
| वसुधा | vasudhā | धरती |
| मातृरूपा | mātrūrūpā | माता के समान |
| प्रकृतेः | prakṛteḥ | प्रकृति की |
| प्रदत्तानि | pradattāni | प्रदान की गई चीजें |
| वनानि | vanāni | वन / जंगल |
| वृक्ष | vṛkṣa | पेड़ |
| प्राणवायुः | prāṇavāyuḥ | प्राणवायु / ऑक्सीजन |
| प्रदूषितम् | pradūṣitam | प्रदूषित / गंदा |
| विनाश | vināśa | नाश / तबाही |
| रक्षणम् | rakṣaṇam | रक्षा / संरक्षण |
| विपत्तयः | vipattayaḥ | विपत्तियाँ / आपदाएँ |
| जनसंख्या | janasankhyā | जनसंख्या |
| शहरीकरण | śaharīkaraṇa | शहरीकरण |
| उद्यान | udyāna | उद्यान / बगीचा |
| क्रीडति | krīḍati | खेलता / खेलती है |
| स्मरणीयम् | smaraṇīyam | याद रखने योग्य |
| स्वच्छं | svacchaṃ | स्वच्छ |
| जल | jala | पानी |
| निवास | nivāsa | रहने की जगह |
| प्रकृतिप्रदत्त | prakṛtipradatta | प्रकृति द्वारा दिया गया |
| सत्यमेव | satyameva | सत्य ही |
| माता | mātā | माँ |
| पुत्रः | putraḥ | बेटा / पुत्र |
| पर्वत | parvata | पहाड़ / पर्वत |