राघव! माधव! सीते! ललिते!
rāghava! mādhava! sīte! lalite!
राघव! माधव! सीता! ललिता!
विमानयानं रचयाम।
vimānayānaṃ racayāma.
आओ हम विमान (हवाई जहाज) बनाएँ।
नीले गगने विपुले विमले
nīle gagane vipule vimale
नीले आकाश में विस्तृत और स्वच्छ
वायुविहारं करवाम ॥ १ ॥
vāyuvihāraṃ karavāma || 1 ||
हम हवा में भ्रमण (वायुविहार) करेंगे।
उत्तर्वर्षं तुड्गं भवनं
uttarvarṣaṃ tuḍgaṃ bhavanaṃ
ऊँचा वृक्षों जैसा भवन
क्रीत्वा काञ्चनं खगु याम।
krītvā kāñcanaṃ khagu yāma.
बनाकर हम सुनहरे पंखों के साथ चलेंगे।
कृत्वा हिमवनं सोपानं
kṛtvā himavanaṃ sopānaṃ
हिमालय के समान शिखरों के सीढ़ी बनाकर
चन्द्रलोकं प्रविवाम ॥ २ ॥
candrālokaṃ pravivāma || 2 ||
हम चन्द्रलोक में प्रवेश करेंगे।
शुक्लचन्द्रः सूर्य गुरुरिति
śuklacandraḥ sūrya guru-iti
श्वेत चन्द्र और सूर्य तथा गुरु (तारागण)
गृहाण हि सर्वं गृणागम।
gṛhāṇa hi sarvaṃ gṛṇāgama.
वह सब (सौन्दर्य) ग्रहण कर लो/ले लो।
विविधाः सुन्दरतराः सृष्ट्वा
vividhaḥ sundaratārāḥ sṛṣṭvā
विभिन्न और भी सुंदर तारों को बनाकर/सृष्टि कर के
मोतिकहारं रचयाम ॥ ३ ॥
motikahāraṃ racayāma || 3 ||
हम मोती का हार बनाएँगे।
अम्बुदमालाम् अम्बरशोभां
ambudamālāṃ ambarśobhāṃ
बादलों की माला और आकाश की शोभा
आदायैव हि प्रतियाम।
ādāyai eva hi pratiyāma.
यह सब लेकर ही हम लौटेंगे।
दुःख–पीडित–कृषिकजनानां
duḥkha-pīḍita-kṛṣikajanānāṃ
दुःखी और पीड़ित कृषक (किसान) जनों के
गृहेषु हर्षं जनयाम ॥ ४ ॥
gṛheṣu harṣaṃ janayāma || 4 ||
हम उनके घरों में हर्ष (खुशी) लाएँगे।
अभ्यास 1 – उच्चारणं कृत्वा पुस्तिकायां लिखत । (Complete list)
विमानयानम्vimānayānamहवाई जहाज (विमान)
वायुविहारम्vāyuvihāramहवा में भ्रमण, हवाई यात्रा
करवामkaravāmaहम करें / चलाएँ
उत्तर्वर्षम्uttarvarṣamऊँचा भाग / ऊँचा वृक्ष
तुड्गगम्tuḍgagamऊँचा
क्रीत्वाkrītvāकरके
क्रान्त्वाकाशम्krāntvākāśamआकाश को पार करना
हिमवन्तम्himavantamहिमालय
सोपानम्sopānamसीढ़ी
चन्द्रलोकम्candrālokamचन्द्रलोक
शुक्लचन्द्रःśuklacandraḥश्वेत चन्द्र
सूर्यःsūryaḥसूर्य
गुरुguruगुरु / बड़ा तारा
सुन्दरतराःsundaratārāḥसुंदर तारे
मोतिकहारम्motikahāramमोती का हार
अम्बुदमालाम्ambudamālāmमेघ-माला
अम्बरशोभाम्ambarśobhāmआकाश की शोभा
आदायैवādāyai evaलेकर ही
प्रतियामpratiyāmaलौटें
दुःखितduḥkhitaदुःखी
गणेषुgaṇeṣuसमूहों में
हर्षम्harṣamखुशी
जनयामjanayāmaलाएँगे
अभ्यास 2 — एकपदेन उत्तरत
यथा — वयं किं रचयाम ?
विमानयानम्vimānayānamहवाई जहाज
(क) कीदृखे गगने वायुविहारं करवाम ?
नीले गगनेnīle gaganeनीले आकाश में
(ख) वयं विमानं कुत्र प्रविवाम ?
चन्द्रलोकम्candrālokamचन्द्रलोक में
(ग) वयं कीदृखे भवनं क्रीत्वा आकाशं याम ?
उत्तर्वर्षं तुड्गं भवनंuttarvarṣaṃ tuḍgaṃ bhavanaṃऊँचा वृक्ष-सा भवन
अभ्यास 3 — रिक्तस्थान पूरयत
(क) नीले गगने विपुले विमले
नीले गगने विपुले विमले — वायुविहारं करवाम।nīle gagane vipule vimale — vāyuvihāraṃ karavāma.नीले आकाश में विस्तृत और स्वच्छ, हम वायुविहार करेंगे।
(ख) — (वाक्य)
उत्तर्वर्षं तुड्गं भवनं क्रीत्वा क्रान्त्वाकाशं याम।uttarvarṣaṃ tuḍgaṃ bhavanaṃ krītvā krāntvākāśaṃ yāma.ऊँचा वृक्ष-सा भवन बनाकर हम आकाश को पार करेंगे।
(ग) अम्बुदमालाम् अम्बरशोभाम्
अम्बुदमालाम् अम्बरशोभाम् — आदायैव हि प्रतियाम।ambudamālām ambarśobhām — ādāyai eva hi pratiyāma.मेघमाला और आकाश की शोभा लेकर ही हम लौटेंगे।
अभ्यास 4 — चित्रवर्ग्य पदं चित्वा
(क) छात्रः, शिक्षकः, भिक्षुकः, प्राचार्यः
छात्रःchātraḥयदि चित्र में विद्यार्थी दिखे → छात्रः
(ख) शुकः, कपोतः, वानरः, काकः
कपोतःkapotaḥयदि चित्र में कबूतर/पक्षी दिखे → कपोतः
(ग) पत्रम्, पुष्पम्, मित्रम्, फलम्
पुष्पम्puṣpamयदि चित्र में फूल दिखे → पुष्पम्
(यदि असली चित्र दें तो मैं बिलकुल सटीक उत्तर बदल दूँगा)
अभ्यास 5 — पर्यायपदानि योजयत
| पाठ शब्द | पर्याय (संस्कृत) | हिन्दी अर्थ |
| विमले | जलदः | स्वच्छ / शुद्ध |
| गगने | निर्मले | आकाश में — निर्मल |
| सूर्यः | दिवाकरः | सूर्य |
| चन्द्रः | निशाकरः | चन्द्र / रात के प्रकाशक |
| अम्बुदः | निशाकरः / मेघमाला | बादल / मेघमाला |
अभ्यास 6 — तुकान्त पदानि चिनुत
विपुले — विमलेvipule — vimale(तुकान्त युग्म)
अम्बुदमालाम् — अम्बरशोभाम्ambudamālām — ambarśobhām(दोनों का समापन ‘-ām’)
मोतिकहारम् — चन्द्रलोकम्motikahāram — candrālokam(छंद/लय अनुसार मेल)