Lesson: 14 – Rakshabandhanm

रक्षाबन्धन का पर्व श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के हाथ में रक्षा-सूत्र बाँधकर उनके सुख–समृद्धि और सुरक्षा की कामना करती हैं, तथा भाई उनकी रक्षा का वचन देते हैं। इतिहास में भी रक्षाबन्धन की बड़ी महत्ता दिखाई देती है—रानी कर्णावती ने हुमायूँ को राखी भेजी, और हुमायूँ ने उसे बहन मानकर उसकी रक्षा की। यह पर्व उपकार, भाईचारा, एकता और संस्कारों की भावना को मजबूत करता है। भारत सरकार ने भी इस दिन को ‘संस्कृति दिवस’ के रूप में घोषित किया है, जिससे समाज में प्रेम, सहयोग और परस्पर रक्षण का संदेश फैलता है।

चतुर्दशः पाठः — रक्षाबन्धनम् (Rakṣābandhanam)

पाठः — Line by Line

रक्षाबन्धनं पर्व श्रावणमासस्य पूर्णिमायां तिथौ भवति। (rakṣābandhanaṃ parva śrāvaṇa-māsasya pūrṇimāyāṃ tithau bhavati) रक्षाबन्धन का पर्व श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को होता है।
अस्यां तिथौ भगिन्यः स्वानुजानां अग्रजानां च दक्षिणहस्ते रक्षासूत्राणि बध्नन्ति। (asyāṃ tithau bhaginyaḥ svānujānāṃ agrajānāṃ ca dakṣiṇa-haste rakṣā-sūtrāṇi badhnanti) इस तिथि को बहनें अपने छोटे और बड़े भाइयों के दाएँ हाथ में राखी बाँधती हैं।
भगिन्यः भ्रातॄन्, छात्राः छात्रान्, देशस्य नागरिकाः सैनिकान् रक्षासूत्रं निबध्नन्ते परस्परं रक्षितुं संकल्पयन्तः। (bhaginyaḥ bhrātṝn, chātrāḥ chātrān, deśasya nāgarikāḥ sainikān rakṣā-sūtraṃ nibadhnante parasparaṃ rakṣituṃ saṅkalpayantaḥ) बहनें भाइयों को, विद्यार्थी सहपाठियों को, और देश के नागरिक सैनिकों को रक्षा-सूत्र बाँधते हुए एक-दूसरे की रक्षा का संकल्प लेते हैं।
अस्मिन् दिने या कापि कन्या कस्यापि पुरुषस्य हस्ते रक्षासूत्रं बध्नाति सः पुरुषः तां प्रति भारतेन व्यवहारं करोति। (asmin dine yā kāpi kanyā kasyāpi puruṣasya haste rakṣā-sūtraṃ badhnāti saḥ puruṣaḥ tāṃ prati bhāratena vyavahāraṃ karoti) इस दिन कोई भी कन्या जब किसी पुरुष के हाथ में राखी बाँधती है तो वह पुरुष उसे बहन मानकर उसके प्रति भाई जैसा व्यवहार करता है।
भारतस्य मध्यकालिके इतिहासे रक्षाबन्धनस्य महत्त्वविषये एकः दृष्टान्तः मिलति। (bhāratasya madhya-kālīke itihāse rakṣābandhanasya mahattva-viṣaye ekaḥ dṛṣṭāntaḥ milati) भारत के मध्यकालीन इतिहास में रक्षाबन्धन के महत्व का एक उदाहरण मिलता है।
चित्तौड्गढस्य हिन्दुदासी कर्णावती हुमायूँ नामक मुस्लिमनायकं स्वसारं मन्यते स्म, तस्मै राज्ञे रक्षाबन्धनं प्रेषितवती। (cittoḍgaḍhasya hindudāsī karṇāvatī humāyūṃ nāmaka muslima-nāyakaṃ svasāraṃ manyate sma, tasmai rājñe rakṣābandhanaṃ preṣitavatī) चित्तौड़गढ़ की हिन्दू रानी कर्णावती ने हुमायूँ नामक मुस्लिम शासक को अपना भाई मानकर उसे राखी भेजी।
सः समादरं रक्षासूत्रं स्वीकृत्य तस्याः सम्मानरक्षणं अकरोत्। (saḥ samādaraṃ rakṣā-sūtraṃ svīkṛtya tasyāḥ sammāna-rakṣaṇaṃ akarot) हुमायूँ ने आदर के साथ राखी स्वीकार कर कर्णावती की इज़्ज़त की रक्षा की।
रक्षाबन्धनं पर्व उपकारसंस्कारस्यापि विद्यार्थीणां एकत्वं धारयति। (rakṣābandhanaṃ parva upakāra-saṃskārasya api vidyārthīṇāṃ ekatvaṃ dhārayati) रक्षाबन्धन का पर्व उपकार के संस्कार और विद्यार्थियों में एकता की भावना को भी दृढ़ करता है।
अयं दिवसः भारतशासनने संस्कृतिदिवसत्वेन रूपेण घोषितः। (ayaṃ divasaḥ bhārata-śāsanena saṃskṛti-divasatvena rūpeṇa ghoṣitaḥ) इस दिन को भारत सरकार ने ‘संस्कृति दिवस’ के रूप में भी घोषित किया है।

शब्दावली (Vocabulary — 25+ Words)

संस्कृत Pronunciation हिन्दी अर्थ
रक्षाबन्धनम्rakṣābandhanamरक्षाबन्धन पर्व
पर्वparvaत्यौहार / उत्सव
श्रावणमासःśrāvaṇa-māsaḥश्रावण मास
पूर्णिमाpūrṇimāपूर्णिमा तिथि
तिथि:tithiḥचन्द्र दिवस / तिथि
भगिनीbhaginīबहन
स्वानुजःsvānujahछोटा भाई
अग्रजःagrajaḥबड़ा भाई
दक्षिणहस्तःdakṣiṇa-hastaḥदायाँ हाथ
रक्षासूत्रम्rakṣā-sūtramराखी / रक्षा-सूत्र
बध्नातिbadhnātiबाँधता/बाँधती है
देशःdeśaḥदेश
नागरिकःnāgarikaḥनागरिक
सैनिकःsainikaḥसैनिक
निबध्नन्तिnibadhnantiबाँधते हैं
रक्षितुम्rakṣitumरक्षा करने के लिए
संकल्पयन्तिsaṅkalpayantiसंकल्प करते हैं
मध्यकालिकःmadhya-kālikaḥमध्यकालीन
इतिहासःitihāsaḥइतिहास
दृष्टान्तःdṛṣṭāntaḥउदाहरण
हिन्दुदासीhindudāsīहिन्दू रानी/स्त्री
हुमायूँhumāyūṃमुगल सम्राट हुमायूँ
सम्मानरक्षणम्sammāna-rakṣaṇamसम्मान की रक्षा
उपकारसंस्कारःupakāra-saṃskāraḥउपकार / सेवा का संस्कार
संस्कृतिदिवसःsaṃskṛti-divasaḥसंस्कृति दिवस

अभ्यास-उत्तराणि (Exercise Answers as Cards)

१. उच्चारणं कृत्वा (शब्द-अर्थ रूपेण)

श्रावणमासस्य
(śrāvaṇa-māsasya) श्रावण मास का / से सम्बन्धित
पूर्णिमायाम्
(pūrṇimāyām) पूर्णिमा तिथि में
उपकारसंस्कारस्यापि
(upakāra-saṃskārasya api) उपकार के संस्कार का भी
निषिद्धकार्याणि
(niṣiddha-kāryāṇi) वर्जित / निषिद्ध काम
अनुस्मरणम्
(anusmaraṇam) स्मरण, याद करना
उद्दिष्टः
(uddiṣṭaḥ) नियत / बताया हुआ

२. एकपदेन उत्तरत्

क. रक्षाबन्धनं पर्व श्रावणमासस्य कस्मिं तिथौ भवति?
पूर्णिमायाम् (pūrṇimāyām) श्रावण मास की पूर्णिमा को।
ख. श्रावणीपर्वे हिन्दुजनाः केषां पूजनं कुर्वन्ति?
भगिनीनाम् भ्रातॄणाम् (bhagininām bhrātṝṇām) बहनों और भाइयों का पूजन करते हैं।
ग. भगिन्यः स्वानुजानां अग्रजानां च दक्षिणहस्ते केानि बध्नन्ति?
रक्षासूत्राणि (rakṣā-sūtrāṇi) रक्षा-सूत्र (राखी) बाँधती हैं।
घ. हिन्दुदासी कर्णावती कस्मै राज्ञे रक्षासूत्रं प्रेषितवती?
हुमायूँ-राज्ञे (humāyūṃ-rājñe) सम्राट हुमायूँ को।

३. पूर्णवाक्येन उत्तरत्

क. हुमायूँ समादरं रक्षासूत्रं स्वीकृत्य किम् अकरोत्?
हुमायूँ रक्षासूत्रं स्वीकृत्य तस्याः सम्मानरक्षणं अकरोत्। (humāyūṃ rakṣā-sūtraṃ svīkṛtya tasyāḥ sammāna-rakṣaṇaṃ akarot) हुमायूँ ने राखी स्वीकार कर रानी कर्णावती का सम्मान सुरक्षित रखा।
ख. रक्षाबन्धन-दिवसे एव कस्य संस्कारस्य विद्यार्थीः भवति?
रक्षाबन्धन-दिवसे उपकारसंस्कारस्य विद्यार्थीः भवति। (rakṣābandhana-divase upakāra-saṃskārasya vidyārthīḥ bhavati) रक्षाबन्धन के दिन उपकार (सेवा) का संस्कार सीखा जाता है।
ग. भारतशासनने अयं दिवसः केन रूपेण घोषितः?
अयं दिवसः संस्कृतिदिवसस्य रूपेण घोषितः। (ayaṃ divasaḥ saṃskṛti-divasasya rūpeṇa ghoṣitaḥ) इसे ‘संस्कृति दिवस’ के रूप में घोषित किया गया है।
घ. रक्षाबन्धनदिवसे कन्या: किं कुर्वन्ति?
रक्षाबन्धनदिवसे कन्याः स्वानुजानां रक्षासूत्रं बध्नन्ति। (rakṣābandhana-divase kanyāḥ svānujānāṃ rakṣā-sūtraṃ badhnanti) रक्षाबन्धन के दिन कन्याएँ अपने भाइयों के हाथ में राखी बाँधती हैं।

४. धातु, लकारः, पुरुषः, वचनम्

अकरोत्
कृ धातुः — लङ् लकारः — प्रथमपुरुषः — एकवचनम् (kṛ dhātuḥ, laṅ lakāraḥ, prathama-puruṣaḥ, ekavacanam) ‘किया’; भूतकाल, वह (एकवचन) ने किया।
गच्छन्ति
गम् धातुः — लट् लकारः — प्रथमपुरुषः — बहुवचनम् (gam dhātuḥ, laṭ lakāraḥ, prathama-puruṣaḥ, bahuvacanam) ‘जाते हैं’; वर्तमानकाल, वे (बहुवचन) जाते हैं।
भवेत्
भू धातुः — विधिलिङ् — प्रथमपुरुषः — एकवचनम् (bhū dhātuḥ, vidhiliṅ, prathama-puruṣaḥ, ekavacanam) ‘हो’ / ‘हो सकता है’; एकवचन, कामना या सम्भावना सूचक।

५. विभक्ति एवं वचन

इतिहासे
सप्तमी-विभक्ति: — एकवचनम् (itihāse — saptamī vibhaktiḥ — ekavacanam) ‘इतिहास में’; स्थान सूचक रूप, एकवचन।
पुरोहितेन
तृतीया-विभक्ति: — एकवचनम् (purohitena — tṛtīyā vibhaktiḥ — ekavacanam) ‘पुरोहित के द्वारा’; करण कारक, एकवचन।
बालिका
प्रथमा-विभक्ति: — एकवचनम् (bālikā — prathamā vibhaktiḥ — ekavacanam) ‘बालिका’; कर्ता रूप, एकवचन।
औषधीनाम्
षष्ठी-विभक्ति: — बहुवचनम् (auṣadhīnām — ṣaṣṭhī vibhaktiḥ — bahuvacanam) ‘औषधियों का’; संबंध (सम्प्रदान) दिखाने वाला बहुवचन रूप।

सारांश / Moral

रक्षाबन्धनं पर्व बहिनीनां भ्रातॄणां च स्नेहबन्धनं सुदृढं करोति। (rakṣābandhanaṃ parva bahinīnāṃ bhrātṝṇāṃ ca sneha-bandhanaṃ sudṛḍhaṃ karoti) रक्षाबन्धन का पर्व बहनों और भाइयों के स्नेह-बंधन को मजबूत बनाता है।
अस्य पर्वणः माध्यमेन समाजे परस्पर-रक्षणस्य उपकारभावस्य च संवर्धनं भवति। (asya parvaṇaḥ mādhaymena samāje paraspara-rakṣaṇasya upakāra-bhāvasya ca saṃvardhanaṃ bhavati) इस पर्व के माध्यम से समाज में परस्पर रक्षा और उपकार की भावना बढ़ती है।
एवं रक्षाबन्धनं संस्कृतिदिवसत्वेन अपि अस्मान् देशस्य एकता-परम्परायाः स्मरणं करवति। (evaṃ rakṣābandhanaṃ saṃskṛti-divasatvena api asmān deśasya ekatā-paramparāyāḥ smaraṇaṃ karavati) इस प्रकार रक्षाबन्धन ‘संस्कृति दिवस’ के रूप में हमें देश की एकता और परम्परा का स्मरण कराता है।

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