Lesson: 17- Prayana-Geetam – Class: 6

यह पाठ प्रयाण-गीतम् राष्ट्रप्रेम, वीरता और कर्तव्यनिष्ठा पर आधारित प्रेरणादायक कविता है। इसमें किशोर सैनिकों के उत्साह, आत्मविश्वास और स्वतंत्रता की रक्षा करने के संकल्प का वर्णन किया गया है। तिरंगे ध्वज की शोभा, अशोक चक्र का तेज और साहस से भरपूर हृदय—इन सबका सुंदर चित्रण इस गीत में मिलता है। सम्पूर्ण पाठ युवाओं को आगे बढ़ने, राष्ट्रसेवा करने और कभी न रुकने की प्रेरणा देता है।

सप्तदशः पाठः — प्रयाण-गीतम्

पदं पदं प्रवर्धते
किशोरयूगलसैनिकः।
जयद्व-कामनायुतः
विजेतृगीतगायुकः॥१॥
(padaṃ padaṃ pravardhate, kiśorayugalasainikaḥ |
jayadv-kāmanāyutaḥ, vijetṛ-gīta-gāyukaḥ ||1||)
कदम-कदम पर बढ़ता हुआ दो किशोरों का सैनिक-दल, विजय की कामना से युक्त है और विजय-गीत गाता है।
स्वतन्त्रा-प्रवर्तकः
स्वतन्त्रदेशरक्षकः।
स्वतन्त्रा-सुवर्ण-जन्य-वर्ण-मोद-वर्धकः॥
पदं पदं प्रवर्धते॥२॥
(svatantrā-pravartakaḥ, svatantra-deśarakṣakaḥ |
svatantrā-suvarṇa-janya-varṇa-moda-vardhakaḥ ||
padaṃ padaṃ pravardhate ||2||)
वह स्वतंत्रता को आगे बढ़ाने वाला, स्वतंत्र देश का रक्षक और स्वतंत्रता रूपी स्वर्ण से उत्पन्न आनन्द को बढ़ाने वाला है; वह कदम-कदम आगे बढ़ रहा है।
अशोक-चक्रशोभिनः
करे ध्वजः त्रिवर्णिकः।
हृदि प्रतापवीरताः
अदम्यसाहसान्विताः॥
पदं पदं प्रवर्धते॥३॥
(aśoka-cakra-śobhinaḥ, kare dhvajaḥ trivarṇikaḥ |
hṛdi pratāpa-vīratāḥ, adamya-sāhasānvitāḥ ||
padaṃ padaṃ pravardhate ||3||)
उसके हाथ में अशोक-चक्र से सुशोभित तिरंगा ध्वज है, हृदय में रण-वीरता और अदम्य साहस भरे हैं; वह कदम-कदम आगे बढ़ रहा है।
न मार्गरोधने क्षमाः
समुद्रपर्वतादिकाः।
समस्तवीरशायकः
यथा सुवीरनाशकः॥
पदं पदं प्रवर्धते॥४॥
(na mārgarod hane kṣamāḥ, samudra-parvatādikāḥ |
samasta-vīra-śāyakaḥ, yathā suvīra-nāśakaḥ ||
padaṃ padaṃ pravardhate ||4||)
मार्ग रोकने में समुद्र और पर्वत भी समर्थ नहीं हैं; वह श्रेष्ठ वीरों के बाण की तरह शत्रु-विनाशक बनकर कदम-कदम आगे बढ़ता है।

शब्दावली (Vocabulary – 25+ Words)

संस्कृत Pronunciation हिन्दी अर्थ
प्रयाण-गीतम्prayāṇa-gītamप्रस्थान/यात्रा का गीत
पदं पदंpadaṃ padaṃकदम-कदम
प्रवर्धतेpravardhateआगे बढ़ता है
किशोरkiśoraकिशोर, नवयुवक
युगल-सैनिकःyugala-sainikaḥदो–दो का सैनिक-दल
जयद्व-कामनायुतःjayadv-kāmanā-yutaḥविजय की कामना से युक्त
विजेतृvijetṛविजेता
गीतगायुकःgīta-gāyukaḥगीत गाने वाला
स्वतन्त्राsvatantrāस्वतंत्रता
प्रवर्तकःpravartakaḥप्रारम्भ करने वाला, प्रेरक
स्वतन्त्रदेशरक्षकःsvatantra-deśa-rakṣakaḥस्वतंत्र देश की रक्षा करने वाला
सुवर्णsuvarṇaसोना
वर्ण-मोदःvarṇa-modaḥरंगों की आनन्द-छटा
अशोक-चक्रःaśoka-cakraḥअशोक चक्र (ध्वज का चक्र)
शोभिनःśobhinaḥशोभायुक्त, सुशोभित
ध्वजःdhvajaḥझण्डा
त्रिवर्णिकःtrivarṇikaḥतीन रंगों वाला
प्रताप-वीरताःpratāpa-vīratāḥरण-वीरता, पराक्रम
अदम्य-साहसान्वितःadamya-sāhas-ānvitaḥअदम्य साहस से युक्त
समुद्रपर्वतादिकाःsamudra-parvatādikāḥसमुद्र, पर्वत आदि
मार्गरोधनम्mārgarodhanamमार्ग रोकना
क्षमाःkṣamāḥसमर्थ / सक्षम
समस्तवीरशायकःsamasta-vīra-śāyakaḥसभी वीरों का बाण
सुवीर-सायकःsuvīra-sāyakaḥश्रेष्ठ वीर का बाण
समस्तवीरनाशकःsamasta-vīra-nāśakaḥशत्रु-वीरों का नाश करने वाला
गुल्मःgulmaḥसैन्य-दल

अभ्यासः (Exercises with Answers)

१. उच्चारणं कृत्वा पुस्तिकायां च लिखत

विजेतृ विजेतृ (vijetṛ) विजय प्राप्त करने वाला (विजेता)
गीतगायुकः गीतगायुकः (gīta-gāyukaḥ) गीत गाने वाला
त्रिवर्णिकः त्रिवर्णिकः (trivarṇikaḥ) तीन रंगों वाला (तिरंगा)
समस्तवीरनाशकः समस्तवीरनाशकः (samasta-vīra-nāśakaḥ) सब शत्रु-वीरों का नाश करने वाला
अदम्यसाहसान्वितः अदम्यसाहसान्वितः (adamya-sāhas-ānvitaḥ) अदम्य साहस से युक्त
प्रवर्धते प्रवर्धते (pravardhate) आगे बढ़ता है, उन्नति करता है

२. एकपदेन उत्तरत (One-word Answers)

(क) पदं पदं प्रवर्धते? किशोरयूगलसैनिकः (kiśora-yugala-sainikaḥ) दो किशोरों से बना सैनिक-दल।
(ख) ध्वजः कीदृशः अस्ति? त्रिवर्णिकः (trivarṇikaḥ) तीन रंगों वाला ध्वज (तिरंगा)।
(ग) के मार्गरोधने क्षमाः न सन्ति? समुद्रपर्वतादिकाः (samudra-parvatādikāḥ) समुद्र और पर्वत आदि भी रास्ता रोकने में समर्थ नहीं हैं।
(घ) किशोरयूगलसैनिकः कः इव समस्तवीरनाशकः अस्ति? सुवीरसायकः (suvīra-sāyakaḥ) श्रेष्ठ वीर के बाण की तरह शत्रु-विनाशक है।

३. वाक्यानि पूरयत (Fill in the Sentences)

(क) किशोरगुल्मः पदं पदं प्रवर्धते। (kiśora-gulmaḥ padaṃ padaṃ pravardhate) किशोरों का सैनिक-दल कदम-कदम आगे बढ़ रहा है।
(ख) विजेतृगीतिः सैनिकान् प्रेरयति। (vijetṛ-gītiḥ sainikān prerayati) विजय-गीत सैनिकों को प्रेरित करता है।
(ग) स्वतन्त्रदेशः रक्षणीयः अस्ति। (svatantra-deśaḥ rakṣaṇīyaḥ asti) स्वतंत्र देश की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।
(घ) वर्णमोडः हृदयम् आनन्दयति। (varṇa-modaḥ hṛdayam ānandayati) तिरंगे की रंग-बिरंगी छटा हृदय को आनन्द देती है।

४. विलोम-पदानि लिखत (Opposites)

रक्षकः — अरक्षकः (arakṣakaḥ) जो रक्षा न करे, रक्षक का विलोम।
क्षमाः — अक्षमाः (akṣamāḥ) असमर्थ, अक्षम।
वीरता — कातरता / भीरुता (kātaratā / bhīrutā) डरपोकपन, वीरता का विलोम।

५. हिन्दीभाषायां अनुवादं कुरुत (Translate into Sanskrit)

(क) भारतीय ध्वज में अशोक चक्र शोभित है। भारतीयध्वजे अशोकचक्रं शोभति। (bhāratīya-dhvaje aśoka-cakraṃ śobhati) भारतीय ध्वज पर अशोक चक्र सुशोभित है।
(ख) राष्ट्रीय ध्वज में तीन रंग हैं। राष्ट्रियध्वजे त्रयः वर्णाः सन्ति। (rāṣṭrīya-dhvaje trayaḥ varṇāḥ santi) राष्ट्रीय ध्वज में तीन रंग होते हैं।
(ग) राष्ट्रसेनिकोः जय हो। राष्ट्रसेनिकानां जयः भवतु। (rāṣṭra-senikānāṃ jayaḥ bhavatu) राष्ट्र के सैनिकों की जय हो।

६. विभक्ति-वचनम् लिखत (Case & Number)

किशोरान् द्वितीया-विभक्ति, बहुवचनम् (dvitīyā-vibhakti, bahuvacanam) कर्मकारक, बहुवचन (किशोरों को / किशोरों का समूह)।
अशोकस्य षष्ठी-विभक्ति, एकवचनम् (ṣaṣṭhī-vibhakti, ekavacanam) सम्बन्धकारक — “अशोक का”。
शभ्ने (शमीने आदि) सप्तमी-विभक्ति, एकवचनम् (saptamī-vibhakti, ekavacanam) अधिकरणकारक — “स्तम्भ पर / ध्वज-दण्ड में”।
चक्रात् पञ्चमी-विभक्ति, एकवचनम् (pañcamī-vibhakti, ekavacanam) अपादानकारक — “चक्र से”।

७. पदानि प्रयुज्य वाक्यरचना (Sentence Making)

सैनिकः सैनिकः देशस्य रक्षकः अस्ति। (sainikaḥ deśasya rakṣakaḥ asti) सैनिक देश का रक्षक होता है।
गायकः गायकः राष्ट्रगीतं गायति। (gāyakaḥ rāṣṭragītaṃ gāyati) गायक राष्ट्रगीत गाता है।
रक्षकः रक्षकः नागरिकान् रक्षति। (rakṣakaḥ nāgarikān rakṣati) रक्षक नागरिकों की रक्षा करता है।
ध्वजः ध्वजः राष्ट्रस्य गौरवं वहति। (dhvajaḥ rāṣṭrasya gauravaṃ vahati) ध्वज राष्ट्र की गरिमा को धारण करता है।

सारांश / नीति (Moral Summary)

किशोरयूगलसैनिकः राष्ट्ररक्षणाय साहसपूर्वकं पदं पदं प्रवर्धते। (kiśora-yugala-sainikaḥ rāṣṭra-rakṣaṇāya sāhasapūrvakaṃ padaṃ padaṃ pravardhate) किशोर सैनिक-दल साहसपूर्वक राष्ट्र की रक्षा के लिए कदम-कदम आगे बढ़ता है।
त्रिवर्णध्वजः अशोकचक्रशोभितः अस्माकं स्वातन्त्र्यस्य गौरवं सूचयति। (trivarṇa-dhvajaḥ aśoka-cakra-śobhitaḥ asmākaṃ svātantryasya gauravaṃ sūcayati) अशोक चक्र से सुशोभित तिरंगा हमारे स्वातंत्र्य और गौरव का प्रतीक है।
समुद्रपर्वतादयः अपि निवारयितुं न शक्ताः; दृढसंकल्पः सदैव विजयमार्गे प्रवर्धते। (samudra-parvatādayaḥ api nivārayituṃ na śaktāḥ; dṛḍha-saṅkalpaḥ sadaiva vijaya-mārge pravardhate) समुद्र और पर्वत भी सच्चे संकल्प को नहीं रोक सकते; दृढ़ निश्चय वाला सदैव विजय-पथ पर आगे बढ़ता है।

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