Path – Adikavi Valmiki
द्वादशः पाठः
आदिकविः वाल्मीकि:
Ādikaviḥ Vālmīkiḥ
आदिकवि वाल्मीकि
पुरा वाल्मीकि: नाम एकः ऋषिः आसीत्।
Purā Vālmīkiḥ nāma ekaḥ ṛṣiḥ āsīt.
प्राचीन समय में वाल्मीकि नाम के एक ऋषि थे।
एकदा सः शिष्यैः सह स्नातुं तमसातटम् आगच्छत्।
Ekadā saḥ śiṣyaiḥ saha snātuṁ Tamasā-taṭam āgacchat.
एक दिन वे शिष्यों के साथ स्नान करने तमसा नदी के तट पर गए।
मार्गे सः व्याधेन विद्धम् एकं क्रौञ्चमपश्यत्।
Mārge saḥ vyādhena viddham ekaṁ krauñcam apaśyat.
मार्ग में उन्होंने बहेलिये द्वारा घायल किए गए एक क्रौञ्च पक्षी को देखा।
सहचरस्य वियोगेन व्याकुलितायाः क्रौञ्च्याः उच्चैः क्रन्दनम् अशृणोत्।
Sahacarasya viyogena vyākulitāyāḥ krauñcyāḥ uccaiḥ krandanam aśṛṇot.
अपने साथी के वियोग से व्याकुल क्रौञ्ची का ऊँचे स्वर में विलाप उन्होंने सुना।
तत् श्रुत्वा तस्य दयामयी दृष्टिः करुणावशात् ऋषिः द्रवितोऽभवत्।
Tat śrutvā tasya dayāmayī dṛṣṭiḥ karuṇāvaśāt ṛṣiḥ dravito’bhavat.
यह सुनकर करुणा के कारण ऋषि का हृदय द्रवित हो गया।
क्रोध-शोक-सम्भूतात् जातः श्लोकः श्लोकत्वेन तस्य मुखात् एव निर्गच्छत् — मा निषाद।
Krodha-śoka-sambhūtāt jātaḥ ślokaḥ ślokatvena tasya mukhāt eva niragacchat — mā niṣāda.
क्रोध और शोक से उत्पन्न श्लोक उनके मुख से श्लोक रूप में निकला — मा निषाद।
ऋषेः कवित्वं विज्ञाय ब्रह्मा आकाशवाणीम् आदिशत्।
Ṛṣeḥ kavitvaṁ vijñāya Brahmā ākāśavāṇīm ādiśat.
ऋषि की काव्य-प्रतिभा जानकर ब्रह्मा ने आकाशवाणी द्वारा आदेश दिया।
“ऋषे! कुरु रामायणं काव्यम्।”
“Ṛṣe! kuru Rāmāyaṇaṁ kāvyam.”
“हे ऋषि! रामायण काव्य की रचना करो।”
तत्र च रामचरितं वर्णय, येन रामस्य पुण्यं चरितं विदित्वा लोकाः समासादयन्तु सुखम्।
Tatra ca Rāmacaritaṁ varṇaya, yena Rāmasya puṇyaṁ caritaṁ viditvā lokāḥ samāsādayantu sukham.
उसमें राम के चरित्र का वर्णन करो, जिससे राम के पुण्य चरित्र को जानकर लोग सुख प्राप्त करें।
ब्रह्मणः आदेशानुसारं वाल्मीकिना श्लोकबद्धं रामायणकाव्यं लिखितम्।
Brahmaṇaḥ ādeśānusāraṁ Vālmīkinā ślokabaddhaṁ Rāmāyaṇa-kāvyaṁ likhitam.
ब्रह्मा के आदेश के अनुसार वाल्मीकि ने श्लोकबद्ध रामायण काव्य लिखा।
स एव वाल्मीकीयरामायणनाम्ना प्रसिद्धम्।
Sa eva Vālmīkīya-Rāmāyaṇa-nāmnā prasiddham.
वही वाल्मीकि रामायण के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
अस्मिन् काव्ये वाल्मीकिना पितृ-आज्ञापालनम्, भ्रातृस्नेहः, परोपकारः, दया, दाक्षिण्यम्, दीनरक्षा इत्यादीनि मानवतायाः पोषकानि जीवनमूल्यानि वर्णितानि सन्ति।
Asmin kāvye Vālmīkinā pitṛ-ājñāpālanam, bhrātṛ-snehaḥ, paropakāraḥ, dayā, dākṣiṇyam, dīnarakṣā ityādīni mānavatāyāḥ poṣakāni jīvanamūlyāni varṇitāni santi.
इस काव्य में पितृ-आज्ञा पालन, भाईचारा, परोपकार, दया, उदारता और दीनों की रक्षा जैसे मानव मूल्यों का वर्णन है।
अयं कविः संस्कृतस्य आदिकविः उच्यते तस्मात् च आदिकाव्यम् उच्यते।
Ayaṁ kaviḥ Saṁskṛtasya ādikaviḥ ucyate tasmāt ca ādikāvyam ucyate.
यह कवि संस्कृत का आदिकवि कहलाता है, इसलिए यह काव्य आदिकाव्य कहलाता है।
शब्दार्थः / Vocabulary
| Sanskrit | Pronunciation | Hindi Meaning |
|---|---|---|
| आदिकविः | Ādikaviḥ | प्रथम कवि |
| वाल्मीकि: | Vālmīkiḥ | रामायण के रचयिता |
| ऋषिः | Ṛṣiḥ | महात्मा, तपस्वी |
| शिष्यैः | Śiṣyaiḥ | शिष्यों के साथ |
| तमसातटम् | Tamasā-taṭam | तमसा नदी का किनारा |
| व्याधेन | Vyādhena | बहेलिये द्वारा |
| विद्धम् | Viddham | घायल किया हुआ |
| क्रौञ्चम् | Krauñcam | क्रौञ्च पक्षी |
| सहचरस्य | Sahacarasya | साथी का |
| वियोगेन | Viyogena | विछोह से |
| व्याकुलिता | Vyākulitā | अत्यन्त दुखी |
| क्रौञ्च्याः | Krauñcyāḥ | क्रौञ्ची (मादा पक्षी) का |
| उच्चैः | Uccaiḥ | जोर से |
| क्रन्दनम् | Krandanam | रोना, विलाप |
| दयामयी | Dayāmayī | करुणा से भरी |
| करुणावशात् | Karuṇāvaśāt | दया के कारण |
| द्रवितः | Dravitaḥ | द्रवित, पिघला हुआ |
| क्रोधः | Krodhaḥ | क्रोध |
| शोकः | Śokaḥ | दुःख |
| श्लोकः | Ślokaḥ | छंदबद्ध पद्य |
| निषादः | Niṣādaḥ | बहेलिया |
| कवित्वम् | Kavitvam | काव्य-प्रतिभा |
| आकाशवाणीम् | Ākāśavāṇīm | दैवी वाणी |
| आदिशत् | Ādiśat | आदेश दिया |
| रामायणम् | Rāmāyaṇam | राम की कथा |
| रामचरितम् | Rāmacaritam | राम का चरित्र |
| पुण्यम् | Puṇyam | पवित्र, श्रेष्ठ |
| आदेशानुसारम् | Ādeśānusāram | आदेश के अनुसार |
| श्लोकबद्धम् | Ślokabaddham | श्लोकों में बंधा हुआ |
| जीवनमूल्यानि | Jīvanamūlyāni | जीवन के आदर्श मूल्य |
| परोपकारः | Paropakāraḥ | दूसरों की भलाई |
| दाक्षिण्यम् | Dākṣiṇyam | उदारता |
| दीनरक्षा | Dīnarakṣā | दीनों की रक्षा |
अभ्यास प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1
उच्चारणं कृत्वा पुस्तिकायां च लिखत।
Uccāraṇaṁ kṛtvā pustikāyāṁ ca likhata.
उच्चारण करके कॉपी में लिखिए।
उत्तर:
तमसानद्याः व्याकुलितायाः काञ्चीक्रन्दनात्।
यत्क्रौञ्चमिथुनं सममार्गस्थमनुरणं दाक्षिण्यम्।
Tamasānadyāḥ vyākulitāyāḥ kāñcīkrandanāt.
Yat krauñcamithunaṁ samamārgasthamanuraṇaṁ dākṣiṇyam.
तमसा नदी के पास व्याकुल क्रौञ्ची के विलाप से।
क्रौञ्च पक्षियों के जोड़े के साथ दया का भाव।
प्रश्न 2 (क)
वाल्मीकि: स्नातुं कुत्र आगच्छत्?
Vālmīkiḥ snātuṁ kutra āgacchat?
वाल्मीकि स्नान करने कहाँ गए?
उत्तर:
वाल्मीकि: स्नातुं तमसातटम् आगच्छत्।
Vālmīkiḥ snātuṁ Tamasā-taṭam āgacchat.
वाल्मीकि स्नान करने तमसा नदी के तट पर गए।
प्रश्न 2 (ख)
किं श्रुत्वा किं दृष्ट्वा च ऋषिः द्रवितोऽभवत्?
Kiṁ śrutvā kiṁ dṛṣṭvā ca ṛṣiḥ dravito’bhavat?
क्या सुनकर और क्या देखकर ऋषि द्रवित हो गए?
उत्तर:
क्रौञ्च्याः क्रन्दनं श्रुत्वा व्याधेन विद्धं क्रौञ्चं दृष्ट्वा च ऋषिः द्रवितोऽभवत्।
Krauñcyāḥ krandanaṁ śrutvā vyādhena viddhaṁ krauñcaṁ dṛṣṭvā ca ṛṣiḥ dravito’bhavat.
क्रौञ्ची का विलाप सुनकर और घायल क्रौञ्च को देखकर ऋषि द्रवित हो गए।
प्रश्न 2 (ग)
ब्रह्मा आकाशवाण्या वाल्मीकि किम् आदिशत्?
Brahmā ākāśavāṇyā Vālmīkiṁ kim ādiśat?
ब्रह्मा ने आकाशवाणी द्वारा वाल्मीकि को क्या आदेश दिया?
उत्तर:
ब्रह्मा वाल्मीकिनं रामायणं काव्यं कर्तुम् आदिशत्।
Brahmā Vālmīkinaṁ Rāmāyaṇaṁ kāvyaṁ kartum ādiśat.
ब्रह्मा ने वाल्मीकि को रामायण काव्य रचने का आदेश दिया।
प्रश्न 2 (घ)
वाल्मीकिना श्लोकबद्धा का कथा लिखिता?
Vālmīkinā ślokabaddhā kā kathā likhitā?
वाल्मीकि ने श्लोकबद्ध कौन-सी कथा लिखी?
उत्तर:
वाल्मीकिना श्लोकबद्धा रामायणकथा लिखिता।
Vālmīkinā ślokabaddhā Rāmāyaṇa-kathā likhitā.
वाल्मीकि ने श्लोकबद्ध रामायण कथा लिखी।
प्रश्न 2 (ङ)
संस्कृतस्य आदिकविः कः?
Saṁskṛtasya ādikaviḥ kaḥ?
संस्कृत का आदिकवि कौन है?
उत्तर:
संस्कृतस्य आदिकविः वाल्मीकि: अस्ति।
Saṁskṛtasya ādikaviḥ Vālmīkiḥ asti.
संस्कृत के आदिकवि वाल्मीकि हैं।
प्रश्न 3
निम्नलिखितपदानां विभक्ति वचनं च लिखत।
Nimnalikhitapadānāṁ vibhakti vacanaṁ ca likhata.
निम्नलिखित शब्दों की विभक्ति और वचन लिखिए।
उत्तर:
शिष्यैः — तृतीया — बहुवचनम्
नदीम् — द्वितीया — एकवचनम्
जीवने — सप्तमी — एकवचनम्
रामस्य — षष्ठी — एकवचनम्
Śiṣyaiḥ — tṛtīyā — bahuvacanam
Nadīm — dvitīyā — ekavacanam
Jīvane — saptamī — ekavacanam
Rāmasya — ṣaṣṭhī — ekavacanam
शिष्यों द्वारा, नदी को, जीवन में, राम का
प्रश्न 4
निम्नलिखितपदेषु प्रयुक्तं उपसर्गं पृथक् कुरुत।
Nimnalikhitapadeṣu prayuktaṁ upasargaṁ pṛthak kuruta.
निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त उपसर्ग अलग कीजिए।
उत्तर:
वियोगेन — वि + योगेन
अनुकरणम् — अनु + करणम्
अपमानम् — अप + मानम्
आहारः — आ + हारः
Viyogena — vi + yogena
Anukaraṇam — anu + karaṇam
Apamānam — apa + mānam
Āhāraḥ — ā + hāraḥ
वियोग, अनुकरण, अपमान, आहार
प्रश्न 5
संस्कृतभाषायाम् अनुवादं कुरुत।
Saṁskṛtabhāṣāyām anuvādaṁ kuruta.
संस्कृत भाषा में अनुवाद कीजिए।
उत्तर:
महापुरुषाणां चरित्रस्य अनुसरणं कुरुत।
Mahāpuruṣāṇāṁ caritrasya anusaraṇaṁ kuruta.
महापुरुषों के चरित्र का अनुसरण करो।
प्रश्न 6
मञ्जूषातः पदानि चित्वा वाक्यानि पूरयत।
Mañjūṣātaḥ padāni citvā vākyāni pūrayata.
मंजूषा से शब्द चुनकर वाक्य पूरे कीजिए।
उत्तर:
(क) पुरा वाल्मीकि: नाम एकः ऋषिः आसीत्।
(ख) व्याधेन विद्धम् एकं उपक्षिणम् अपश्यत्।
(ग) ततः प्रभृति ऋषिर्यः कविपदम् प्राप्तः।
(घ) अयं कविः संस्कृतस्य आदिकविः उच्यते।
Ṛṣiḥ, upakṣiṇam, kavipadam, ādikaviḥ
मंजूषा के सभी शब्दों का सही प्रयोग किया गया है।
प्रश्न 7
पदानि चित्वा कथां पूरयत।
Padāni citvā kathāṁ pūrayata.
शब्द चुनकर कथा पूरी कीजिए।
उत्तर:
एकस्मिन् पर्वते दुर्दान्तनामकः सिंहः निवसति स्म।
सः मूषकः पीडितः आसीत्। रात्रिकाले बिडालकस्य भयेन दुःखी भवति स्म।
एकदा सः मूषकानाम् उपायं कर्तुम् संकल्पम् अकरोत्।
स्वार्थसिद्धेः सिंहः बिडालकस्य उपेक्षाम् अकरोत्।
Durdāntanāmakaḥ, mūṣakaḥ, biḍālakasya, kṛtum, upekṣām
यह कथा स्वार्थ और सावधानी का संदेश देती है।