यह पाठ विश्वबन्धुत्व की भावना का महत्त्व स्पष्ट करता है। लेखक बताता है कि सम्पूर्ण मानवता एक परिवार है। भाईचारे के बिना न शान्ति सम्भव है और न ही सुख। आज विज्ञान की प्रगति के बावजूद अशान्ति का कारण विश्वबन्धुत्व का अभाव है। यदि सभी मनुष्य परस्पर प्रेम, त्याग और सहयोग की भावना अपनाएँ, तो सम्पूर्ण विश्व में शान्ति और सुख स्थापित हो सकता है।
Path – Vishvabandhutvam
षोडशः पाठः – विश्वबन्धुत्वम्
विश्वस्य सर्वेषां जनानां प्रति बन्धुतायाः भावः विश्वबन्धुत्वम् इति कथ्यते।
Viśvasya sarveṣāṁ janānāṁ prati bandhutāyāḥ bhāvaḥ viśvabandhutvam iti kathyate.
विश्व के सभी लोगों के प्रति भाईचारे की भावना को विश्वबन्धुत्व कहा जाता है।
शान्तिमयजीवनाय विश्वबन्धुत्वस्य भावना महत्त्वं भजते।
Śāntimaya-jīvanāya viśvabandhutvasya bhāvanā mahatvaṁ bhajate.
शान्तिपूर्ण जीवन के लिए विश्वबन्धुत्व की भावना अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है।
सर्वजनहितं सर्वजनसुखं च बन्धुत्वं विना न सम्भवति।
Sarvajana-hitaṁ sarvajana-sukhaṁ ca bandhutvaṁ vinā na sambhavati.
भाईचारे के बिना सभी का हित और सुख सम्भव नहीं है।
विश्वबन्धुत्वम् अधिकृत्य केनापि मनीषिणा निर्दिष्टम्—
Viśvabandhutvam adhikṛtya kenāpi manīṣiṇā nirdiṣṭam.
विश्वबन्धुत्व के विषय में किसी विद्वान ने कहा है—
अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्।
Ayaṁ nijaḥ paro veti gaṇanā laghucetasām.
यह अपना है और वह पराया है—ऐसी सोच छोटे हृदय वालों की होती है।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥
Udāracaritānāṁ tu vasudhaiva kuṭumbakam.
उदार चरित्र वालों के लिए पूरी पृथ्वी ही परिवार है।
साम्प्रतम् जगति सर्वत्र कलहस्य अशान्तेः च साम्राज्यं व्याप्तम् अस्ति।
Sāmpratam jagati sarvatra kalahasya aśānteḥ ca sāmrājyaṁ vyāptam asti.
वर्तमान समय में संसार में हर ओर कलह और अशान्ति फैली हुई है।
येन साधनसम्पन्नः अपि मानवः सुखस्य स्थाने दुःखं एव अनुभवति।
Yena sādhana-sampannaḥ api mānavaḥ sukhasya sthāne duḥkham eva anubhavati.
जिससे साधनों से सम्पन्न मनुष्य भी सुख के स्थान पर दुःख ही अनुभव करता है।
अस्य प्रधानं कारणं बन्धुतायाः अभावः एव।
Asya pradhānaṁ kāraṇaṁ bandhutāyāḥ abhāvaḥ eva.
इसका मुख्य कारण भाईचारे का अभाव ही है।
“सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः।”
Sarve bhavantu sukhinaḥ, sarve santu nirāmayāḥ.
सब लोग सुखी हों और सब निरोग हों।
“सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग् भवेत्॥”
Sarve bhadrāṇi paśyantu mā kaścid duḥkhabhāg bhavet.
सब कल्याण देखें और कोई भी दुःखी न हो।
अभ्यासः
प्रश्न 1
वसुधैव कुटुम्बकम् केषां मते भवति ?
Vasudhaiva kuṭumbakam keṣāṁ mate bhavati?
वसुधैव कुटुम्बकम् किसके मत में होता है?
उत्तर:
वसुधैव कुटुम्बकम् उदारचरितानां मते भवति।
Vasudhaiva kuṭumbakam udāracaritānāṁ mate bhavati.
वसुधैव कुटुम्बकम् उदार चरित्र वालों के मत में होता है।
प्रश्न 2
मानवः मानव प्रति कीदृशं आचरणं कुर्यात् ?
Mānavaḥ mānava prati kīdṛśaṁ ācaraṇaṁ kuryāt?
मनुष्य को मनुष्य के प्रति कैसा आचरण करना चाहिए?
उत्तर:
मानवः मानवेन प्रति बन्धुत्वपूर्णं आचरणं कुर्यात्।
Mānavaḥ mānavena prati bandhutvapūrṇaṁ ācaraṇaṁ kuryāt.
मनुष्य को मनुष्य के प्रति भाईचारे का व्यवहार करना चाहिए।
प्रश्न 3
सर्वेषु मानवेṣu समानं किं प्रवहति ?
Sarveṣu mānaveṣu samānaṁ kiṁ pravahati?
सभी मनुष्यों में समान रूप से क्या प्रवाहित होता है?
उत्तर:
सर्वेषु मानवेṣu समानं रक्तं प्रवहति।
Sarveṣu mānaveṣu samānaṁ raktaṁ pravahati.
सभी मनुष्यों में समान रूप से रक्त प्रवाहित होता है।
प्रश्न 4
बन्धुत्वं विना किं न सम्भवति ?
Bandhutvaṁ vinā kiṁ na sambhavati?
भाईचारे के बिना क्या सम्भव नहीं है?
उत्तर:
बन्धुत्वं विना सर्वजनहितं सर्वजनसुखं च न सम्भवति।
Bandhutvaṁ vinā sarvajana-hitaṁ sarvajana-sukhaṁ ca na sambhavati.
भाईचारे के बिना सबका हित और सुख सम्भव नहीं है।
प्रश्न 5
एकः देशः अन्येन देशेन सह कीदृशं व्यवहारं कुर्यात् ?
Ekaḥ deśaḥ anyena deśena saha kīdṛśaṁ vyavahāraṁ kuryāt?
एक देश को दूसरे देश के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए?
उत्तर:
एकः देशः अन्येन देशेन सह बन्धुतायाः व्यवहारं कुर्यात्।
Ekaḥ deśaḥ anyena deśena saha bandhutāyāḥ vyavahāraṁ kuryāt.
एक देश को दूसरे देश के साथ भाईचारे का व्यवहार करना चाहिए।
प्रश्न 6
विश्वबन्धुत्वं किमर्थं आवश्यकं वर्तते ?
Viśvabandhutvaṁ kimarthaṁ āvaśyakaṁ vartate?
विश्वबन्धुत्व क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
विश्वशान्तेः सुखस्य च कारणं विश्वबन्धुत्वम् अस्ति।
Viśvaśānteḥ sukhasya ca kāraṇaṁ viśvabandhutvam asti.
विश्वशान्ति और सुख का कारण विश्वबन्धुत्व है।
प्रश्न 7
निम्नलिखितशब्दानां लघुवाक्येषु प्रयोगं कुरुत—संसारे, सर्वेषु, बन्धुत्वे।
Nimnalikhita-śabdānāṁ laghuvākyesu prayogaṁ kuruta.
निम्न शब्दों का छोटे वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
उत्तर:
संसारे शान्तिः आवश्यकम् अस्ति।
सर्वेषु मानवेसु समानं रक्तं प्रवहति।
बन्धुत्वे सुखं शान्तिः च निहिता अस्ति। Saṁsāre śāntiḥ āvaśyakam asti.
Sarveṣu mānaveṣu samānaṁ raktaṁ pravahati.
Bandhutve sukhaṁ śāntiḥ ca nihitā asti. संसार में शान्ति आवश्यक है।
सभी मनुष्यों में समान रक्त प्रवाहित होता है।
भाईचारे में ही सुख और शान्ति निहित है।
सर्वेषु मानवेसु समानं रक्तं प्रवहति।
बन्धुत्वे सुखं शान्तिः च निहिता अस्ति। Saṁsāre śāntiḥ āvaśyakam asti.
Sarveṣu mānaveṣu samānaṁ raktaṁ pravahati.
Bandhutve sukhaṁ śāntiḥ ca nihitā asti. संसार में शान्ति आवश्यक है।
सभी मनुष्यों में समान रक्त प्रवाहित होता है।
भाईचारे में ही सुख और शान्ति निहित है।
पाठसार / Moral
यह पाठ सिखाता है कि सम्पूर्ण मानवता एक परिवार है। विश्व में शान्ति और सुख के लिए विश्वबन्धुत्व अनिवार्य है। स्वार्थ, अहंकार और द्वेष को त्यागकर प्रेम और सहयोग अपनाना चाहिए। सभी मनुष्यों के प्रति समान भाव ही सच्ची मानवता है।अभ्यासः (प्रश्न 1 से 7)
प्रश्न 1
एकपदेन उत्तरत—
Ekapadena uttarata.
एक शब्द में उत्तर दीजिए।
(क) वसुधैव कुटुम्बकम् केषां मते भवति ?
(Ka) Vasudhaiva kuṭumbakam keṣāṁ mate bhavati?
वसुधैव कुटुम्बकम् किसके मत में होता है?
उत्तर:
उदारचरितानाम्।
Udāracaritānām.
उदार चरित्र वालों के।
(ख) मानवः मानव प्रति कीदृशं आचरणं कुर्यात् ?
(Kha) Mānavaḥ mānava prati kīdṛśaṁ ācaraṇaṁ kuryāt?
मनुष्य को मनुष्य के प्रति कैसा आचरण करना चाहिए?
उत्तर:
बन्धुत्वपूर्णम्।
Bandhutvapūrṇam.
भाईचारे से पूर्ण।
(ग) एकः देशः अन्येन देशेन सह कीदृशं व्यवहारं कुर्यात् ?
(Ga) Ekaḥ deśaḥ anyena deśena saha kīdṛśaṁ vyavahāraṁ kuryāt?
एक देश दूसरे देश के साथ कैसा व्यवहार करे?
उत्तर:
बन्धुतायाः।
Bandhutāyāḥ.
भाईचारे का।
(घ) सर्वेषु मानवेṣu समानं किं प्रवहति ?
(Gha) Sarveṣu mānaveṣu samānaṁ kiṁ pravahati?
सभी मनुष्यों में समान क्या बहता है?
उत्तर:
रक्तम्।
Raktam.
रक्त।
(ङ) जनाः परस्परं कलहं किमर्थं कुर्वन्ति ?
(Ṅa) Janāḥ parasparaṁ kalahaṁ kimarthaṁ kurvanti?
लोग आपस में झगड़ा क्यों करते हैं?
उत्तर:
स्वार्थपरायणतया।
Svārthaparāyaṇatayā.
स्वार्थ के कारण।
प्रश्न 2
पूर्णवाक्येन उत्तरत—
Pūrṇavākyena uttarata.
पूर्ण वाक्य में उत्तर दीजिए।
(क) बन्धुत्वं विना किं न सम्भवति ?
(Ka) Bandhutvaṁ vinā kiṁ na sambhavati?
भाईचारे के बिना क्या संभव नहीं है?
उत्तर:
बन्धुत्वं विना सर्वजनहितं सर्वजनसुखं च न सम्भवति।
Bandhutvaṁ vinā sarvajana-hitaṁ sarvajana-sukhaṁ ca na sambhavati.
भाईचारे के बिना सबका हित और सुख संभव नहीं है।
(ख) संयुक्तराष्ट्रः कीदृशं प्रयत्नं करोति ?
(Kha) Saṁyuktarāṣṭraḥ kīdṛśaṁ prayatnaṁ karoti?
संयुक्त राष्ट्र किस प्रकार का प्रयास करता है?
उत्तर:
संयुक्तराष्ट्रः शान्तिस्थापनार्थं सततं प्रयत्नं करोति।
Saṁyuktarāṣṭraḥ śāntisthāpanārthaṁ satataṁ prayatnaṁ karoti.
संयुक्त राष्ट्र शांति की स्थापना के लिए निरंतर प्रयास करता है।
(ग) कीदृशी भावना नितान्तम् अपेक्षिता वर्तते ?
(Ga) Kīdṛśī bhāvanā nitāntam apekṣitā vartate?
किस प्रकार की भावना अत्यंत आवश्यक है?
उत्तर:
विश्वबन्धुत्वस्य भावना नितान्तम् अपेक्षिता वर्तते।
Viśvabandhutvasya bhāvanā nitāntam apekṣitā vartate.
विश्व-बंधुत्व की भावना अत्यंत आवश्यक है।
(घ) सर्वेषां नियन्ता कः ?
(Gha) Sarveṣāṁ niyantā kaḥ?
सबका नियंता कौन है?
उत्तर:
सर्वेषां नियन्ता एकः अस्ति।
Sarveṣāṁ niyantā ekaḥ asti.
सबका नियंता एक ही है।
प्रश्न 3
विभक्तिं वचनं च लिखत—
Vibhaktiṁ vacanaṁ ca likhata.
विभक्ति और वचन लिखिए।
उत्तर:
कलहस्य — षष्ठी — एकवचनम्
अखिलान् — द्वितीया — बहुवचनम्
जनान् — द्वितीया — बहुवचनम्
रेलयानेन — तृतीया — एकवचनम् — प्रत्येक पद की विभक्ति और वचन लिखे गए हैं।
अखिलान् — द्वितीया — बहुवचनम्
जनान् — द्वितीया — बहुवचनम्
रेलयानेन — तृतीया — एकवचनम् — प्रत्येक पद की विभक्ति और वचन लिखे गए हैं।
प्रश्न 4
सन्धि-विच्छेदं कुरुत—
Sandhi-vicchedaṁ kuruta.
संधि-विच्छेद कीजिए।
उत्तर:
केनापि — केन + अपि
तदेव — तत् + एव
वेति — वा + इति
वसुधैव — वसुधा + एव
समरसः — सम + रसः — सभी शब्दों का संधि-विच्छेद किया गया है।
तदेव — तत् + एव
वेति — वा + इति
वसुधैव — वसुधा + एव
समरसः — सम + रसः — सभी शब्दों का संधि-विच्छेद किया गया है।
प्रश्न 5
मञ्जूषातः पदानि चित्वा वाक्यानि पूरयत—
Mañjūṣātaḥ padāni citvā vākyāni pūrayata.
मंजूषा से शब्द चुनकर वाक्य पूरे कीजिए।
उत्तर:
(क) ज्ञानबलेन मानवाः इदानीं वायुपथेन आकाशं विचरन्ति।
(ख) विनाशाय द्रव्यः विनाशलीलां जानन्ति।
(ग) उदारचरितानां तु कुटुम्बकम्।
(घ) अशान्तस्य कदापि सुखं न । — रिक्त स्थानों में उपयुक्त शब्द भरे गए हैं।
(ख) विनाशाय द्रव्यः विनाशलीलां जानन्ति।
(ग) उदारचरितानां तु कुटुम्बकम्।
(घ) अशान्तस्य कदापि सुखं न । — रिक्त स्थानों में उपयुक्त शब्द भरे गए हैं।
प्रश्न 6
संस्कृतभाषायाम् अनुवादं कुरुत—
Saṁskṛtabhāṣāyām anuvādaṁ kuruta.
संस्कृत भाषा में अनुवाद कीजिए।
(क) एक देश दूसरे देश के साथ बन्धुता का व्यवहार करें।
(Ka) Ek deśa dūsre deśa ke sāth bandhutā kā vyavahār kare.
एक देश दूसरे देश के साथ भाईचारे का व्यवहार करे।
उत्तर:
एकः देशः अन्येन देशेन सह बन्धुतायाः व्यवहारं कुर्यात्।
Ekaḥ deśaḥ anyena deśena saha bandhutāyāḥ vyavahāraṁ kuryāt.
एक देश दूसरे देश के साथ भाईचारे का व्यवहार करे।
(ख) विश्वबन्धुत्व ही सुख का एकमात्र कारण है।
(Kha) Viśvabandhutva hī sukh kā ekamātra kāraṇ hai.
विश्व-बंधुत्व ही सुख का एकमात्र कारण है।
उत्तर:
विश्वबन्धुत्वं एव सुखस्य एकमात्रं कारणम् अस्ति।
Viśvabandhutvaṁ eva sukhasya ekamātraṁ kāraṇam asti.
विश्व-बंधुत्व ही सुख का एकमात्र कारण है।
(ग) सभी मनुष्यों का हृदय विशाल हो।
(Ga) Sabhī manuṣyoṁ kā hṛdaya viśāl ho.
सब मनुष्यों का हृदय विशाल हो।
उत्तर:
सर्वेषां मानवानां हृदयं विशालं भवतु।
Sarveṣāṁ mānavānāṁ hṛdayaṁ viśālaṁ bhavatu.
सभी मनुष्यों का हृदय विशाल हो।
(घ) सभी मनुष्य सुखी रहें।
(Gha) Sabhī manuṣya sukhī raheṁ.
सभी मनुष्य सुखी रहें।
उत्तर:
सर्वे मानवाः सुखिनः भवन्तु।
Sarve mānavāḥ sukhinaḥ bhavantu.
सभी मनुष्य सुखी रहें।
(ङ) उदार चरित्र वालों के लिए पृथ्वी ही परिवार है।
(Ṅa) Udār caritra vāloṁ ke lie pṛthvī hī parivār hai.
उदार स्वभाव वालों के लिए पृथ्वी ही परिवार है।
उत्तर:
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्।
Udāracaritānāṁ tu vasudhaiva kuṭumbakam.
उदार चरित्र वालों के लिए पृथ्वी ही परिवार है।
प्रश्न 7
निम्नलिखितशब्दानां लघुवाक्येषु प्रयोगं कुरुत—
Nimnalikhita-śabdānāṁ laghuvākyesu prayogaṁ kuruta.
निम्न शब्दों का छोटे वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
संसारे —
Saṁsāre
संसार में
उत्तर:
संसारे सर्वे मानवाः शान्तिं इच्छन्ति।
Saṁsāre sarve mānavāḥ śāntiṁ icchanti.
संसार में सभी मनुष्य शांति चाहते हैं।
सर्वेषु —
Sarveṣu
सबमें
उत्तर:
सर्वेषु मानवेṣu समानं रक्तं प्रवहति।
Sarveṣu mānaveṣu samānaṁ raktaṁ pravahati.
सभी मनुष्यों में समान रक्त बहता है।
बन्धुत्वे —
Bandhutve
भाईचारे में
उत्तर:
बन्धुत्वे एव विश्वस्य कल्याणं निहितम् अस्ति।
Bandhutve eva viśvasya kalyāṇaṁ nihitam asti.
भाईचारे में ही विश्व का कल्याण निहित है।