इस वैदिक वन्दना में तेज, ओज, बल और वीर्य की प्रार्थना की गई है—ये सभी गुण सूर्य के प्रमुख प्रतीक हैं। आगे “मित्र, वरुण, अर्यमा” जैसे देवताओं का उल्लेख है, जो आदित्य (सूर्य-परिवार) के ही नाम हैं। “विष्णुरुरुक्रमः” भी वैदिक परंपरा में सूर्य के विराट स्वरूप से जुड़ा माना जाता है। इसलिए यह वन्दना सूर्य को केंद्र में रखकर की गई प्रार्थना है।
परंतु अंत में इन्द्र, बृहस्पति आदि देवताओं और “ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः” के माध्यम से यह वन्दना समस्त ब्रह्मांडीय शक्तियों और सार्वभौमिक शांति की कामना बन जाती है।
Path – Vedic Vandana
वैदिक-वन्दना
तेजोजसि तेजो मयि धेहि
Tejo-jasi tejo mayi dhehi
हे तेजस्वरूप! मुझमें तेज स्थापित करो।
वीर्यमसि वीर्य मयि धेहि।
Veeryamasi veerya mayi dhehi
तुम शक्ति हो, मुझमें शक्ति प्रदान करो।
बलमसि बलं मयि धेहि।
Balamasi balaṁ mayi dhehi
तुम बल हो, मुझमें बल दो।
ओजोसि ओजो मयि धेहि।
Ojosि ojo mayi dhehi
तुम ओज हो, मुझमें ओज प्रदान करो।
पथेमं शरदः शतम्। जीवेम शरदः शतम्।
Pathem sharadaḥ shatam, jeevem sharadaḥ shatam
हम सौ वर्षों तक देखें और सौ वर्षों तक जीवित रहें।
शृणुयाम शरदः शतम्। प्रब्रवाम शरदः शतम्।
Shṛṇuyām sharadaḥ shatam, prabravām sharadaḥ shatam
हम सौ वर्षों तक सुनें और सौ वर्षों तक बोलें।
अदीना स्याम शरदः शतम्। भूयश्च शरदः शतात्।
Adeena syām sharadaḥ shatam, bhūyaśca sharadaḥ shatāt
हम सौ वर्षों तक समर्थ रहें और उससे भी अधिक जीएँ।
ॐ शं नो मित्रः शं वरुणः।
Om sham no mitraḥ sham varuṇaḥ
मित्र और वरुण देव हमारे लिए कल्याणकारी हों।
शं नो भवत्वर्यमा। शं न इन्द्रो बृहस्पतिः।
Sham no bhavatvaryamā, sham na indro bṛhaspatiḥ
अर्यमा, इन्द्र और बृहस्पति हमारे लिए मंगलकारी हों।
शं नो विष्णुरुरुक्रमः।
Sham no viṣṇur urukramaḥ
विशाल पग वाले विष्णु हमारे लिए शुभ हों।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
Om shāntiḥ shāntiḥ shāntiḥ
तीनों तापों की शांति हो।
शब्दार्थ
| Sanskrit | Pronunciation | Hindi Meaning |
|---|---|---|
| तेजोजसि | Tejojasi | तेज स्वरूप |
| मयि | Mayi | मुझमें |
| धेहि | Dhehi | प्रदान करो |
| वीर्यम् | Veeryam | शक्ति |
| बलम् | Balam | बल |
| ओजः | Ojaḥ | ओज |
| शतम् | Shatam | सौ |
| पश्येम | Pashyema | देखें |
| जीवेम | Jeevema | जीवित रहें |
| शृणुयाम | Shṛṇuyām | सुनें |
| प्रब्रवाम | Prabravām | बोलें |
| अदीना | Adeena | समर्थ |
| भूयः | Bhūyaḥ | अधिक |
| मित्रः | Mitraḥ | मित्र देव |
| वरुणः | Varuṇaḥ | वरुण देव |
| इन्द्रः | Indraḥ | इन्द्र देव |
| विष्णुः | Viṣṇuḥ | विष्णु देव |
| उरुक्रमः | Urukramaḥ | विशाल पग वाले |
| शान्तिः | Shāntiḥ | शांति |
| अनुगृहीता | Anugṛhītā | कृतज्ञ |
| विलम्बः | Vilambaḥ | देरी |
| अध्यापिका | Adhyāpikā | शिक्षिका |
| पुरस्कारः | Puraskāraḥ | इनाम |
| अल्पाहारः | Alpāhāraḥ | नाश्ता |
| मध्याह्नभोजनम् | Madhyāhna bhojanam | दोपहर का भोजन |
प्रभा: निर्मले! कथं धावसि घु?
Prabhā: Nirmale! kathaṁ dhāvasi ghu?
प्रभा: निर्मला! तुम कैसे दौड़ रही हो?
निर्मला: विद्यालयं गच्छामि भगिनि!
Nirmalā: vidyālayaṁ gacchāmi bhagini
निर्मला: मैं विद्यालय जा रही हूँ बहन!
प्रभा : ज्ञातमस्तु तथापि सावधानं गच्छ। पतिष्यसि खलु।
Prabhā: jñātamastu tathāpi sāvadhānaṁ gaccha
प्रभा: ठीक है, फिर भी सावधानी से जाओ। गिर जाओगी।
निर्मला : बाढमस्तु अनुगृहीता अस्मि।
Nirmalā: bāḍhamastu anugṛhītā asmi
निर्मला: ठीक है, मैं आभारी हूँ।