यह पाठ “स्फुटपद्यानि” जीवन को सही दिशा देने वाले नीति-वचनों का संग्रह है। इन श्लोकों के माध्यम से मनुष्य को अच्छे-बुरे का भेद समझाया गया है। पहले श्लोक में बताया गया है कि कौआ और कोयल दोनों काले होते हैं, परंतु वसंत ऋतु आने पर उनकी वाणी से अंतर स्पष्ट हो जाता है—अर्थात व्यक्ति की पहचान उसके गुणों से होती है, रूप से नहीं। दूसरे श्लोक में कहा गया है कि दुष्ट व्यक्ति विद्या, धन और शक्ति का उपयोग विवाद, अहंकार और दूसरों को कष्ट देने में करता है, जबकि सज्जन व्यक्ति इन्हीं साधनों का प्रयोग ज्ञान, दान और रक्षा के लिए करता है।
तीसरे श्लोक में लोभ को सभी बुराइयों की जड़ बताया गया है, क्योंकि लोभ से क्रोध, काम, मोह और अंततः विनाश उत्पन्न होता है। चौथे श्लोक में महापुरुषों के गुणों का वर्णन है—उनका मुख प्रसन्नता का स्थान होता है, हृदय दयालु होता है और वाणी अमृत समान होती है; ऐसे लोग निश्चय ही वंदनीय होते हैं। पाँचवें श्लोक में जीवन के संरक्षण के सिद्धांत बताए गए हैं—धर्म सत्य से सुरक्षित रहता है, विद्या अभ्यास से, रूप स्वच्छता से और कुल सदाचार से सुरक्षित रहता है।
Path – Sphuṭa-padyāni
पञ्चमः पाठः – स्फुटपद्यानि
काकः कृष्णः पिकः कृष्णः को भेदः पिककाकयोः।
Kākaḥ kṛṣṇaḥ pikaḥ kṛṣṇaḥ ko bhedaḥ pikakākayoḥ
कौआ काला है, कोयल भी काली है, कोयल और कौए में क्या अंतर है?
वसन्तसमये प्राप्ते काकः काकः पिकः पिकः॥1॥
Vasanta-samaye prāpte kākaḥ kākaḥ pikaḥ pikaḥ
वसंत ऋतु आने पर कौआ कौआ ही रहता है और कोयल कोयल ही पहचानी जाती है।
विद्या विवादाय धनं मदाय शक्तिः परेषां परिपीडनाय।
Vidyā vivādāya dhanam madāya śaktiḥ pareṣām paripīḍanāya
दुष्ट व्यक्ति के लिए विद्या विवाद के लिए, धन अहंकार के लिए और शक्ति दूसरों को सताने के लिए होती है।
खलस्य साधोर्विपरीतमेतद् ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय॥2॥
Khalasya sādhau viparītametad jñānāya dānāya ca rakṣaṇāya
जबकि सज्जन के लिए ये ज्ञान, दान और रक्षा के लिए होते हैं।
लोभात् क्रोधः प्रभवति लोभात् कामः प्रजायते।
Lobhāt krodhaḥ prabhavati lobhāt kāmaḥ prajāyate
लोभ से क्रोध उत्पन्न होता है और लोभ से ही काम उत्पन्न होता है।
लोभात् मोहश्च नाशश्च लोभः पापस्य कारणम्॥3॥
Lobhāt mohaśca nāśaśca lobhaḥ pāpasya kāraṇam
लोभ से मोह और विनाश होता है, लोभ पाप का कारण है।
वदनं प्रसाद-सदनं सदयं हृदयं सुधामुचो वाचः।
Vadanam prasāda-sadanam sadayam hṛdayam sudhā-muco vācaḥ
जिसका मुख प्रसन्नता से भरा हो, हृदय दयालु हो और वाणी अमृत बरसाने वाली हो—
करणं परोपकरणं येषां केषां न ते वन्द्याः॥4॥
Karaṇam paropakāraṇam yeṣām keṣām na te vandyāḥ
जो दूसरों का उपकार करते हैं, वे कौन वंदनीय नहीं हैं?
सत्येन रक्ष्यते धर्मो विद्या योगेन रक्ष्यते।
Satyena rakṣyate dharmo vidyā yogena rakṣyate
सत्य से धर्म की रक्षा होती है, विद्या अभ्यास से सुरक्षित रहती है।
मृजया रक्ष्यते रूपं कुलं वृत्तेन रक्ष्यते॥5॥
Mṛjayā rakṣyate rūpam kulam vṛttena rakṣyate
स्वच्छता से रूप सुरक्षित रहता है और सदाचार से कुल की रक्षा होती है।
शब्दार्थ (Vocabulary)
| Sanskrit | Pronunciation | Hindi Meaning |
| पिकः | Pikaḥ | कोयल |
| काकः | Kākaḥ | कौआ |
| वसन्तसमयः | Vasanta-samayaḥ | वसंत ऋतु |
| विद्या | Vidyā | ज्ञान |
| धनम् | Dhanam | धन |
| मदः | Madaḥ | अहंकार |
| शक्तिः | Śaktiḥ | शक्ति |
| खलः | Khalaḥ | दुष्ट |
| साधुः | Sādhuḥ | सज्जन |
| दानम् | Dānam | दान |
| लोभः | Lobhaḥ | लालच |
| क्रोधः | Krodhaḥ | क्रोध |
| मोहः | Mohaḥ | आसक्ति |
| नाशः | Nāśaḥ | विनाश |
| वदनम् | Vadanam | मुख |
| हृदयम् | Hṛdayam | हृदय |
| वाचः | Vācaḥ | वाणी |
| वन्द्यः | Vandyaḥ | पूजनीय |
| सत्यम् | Satyam | सत्य |
| धर्मः | Dharmaḥ | धर्म |
| योगः | Yogaḥ | अभ्यास |
| मृजा | Mṛjā | स्वच्छता |
| रूपम् | Rūpam | सुंदरता |
| कुलम् | Kulam | वंश |
| वृत्तम् | Vṛttam | सदाचार |
अभ्यास प्रश्नोत्तर
1. उच्चारणं कृत्वा पुस्तिकायां च लिखत
साधोर्विपरीतमेतत्, रक्षणाय, मोहः, सुधामुचः, रक्ष्यते, मृजया
Sādhōr-viparītametat, rakṣaṇāya, mohaḥ, sudhāmucaḥ, rakṣyate, mṛjayā
इन शब्दों का शुद्ध उच्चारण करके कॉपी में लिखिए।
उत्तर:
एते शब्दाः शुद्धोच्चारणेन पुस्तिकायां लिखिताः।
Ete śabdāḥ śuddhoccāraṇena pustikāyāṃ likhitāḥ
ये शब्द सही उच्चारण के साथ कॉपी में लिखे गए।
2. एकपदेन उत्तरत
(क) काकस्य कीदृशः वर्णः भवति ?
Kākasya kīdṛśaḥ varṇaḥ bhavati?
कौए का रंग कैसा होता है?
उत्तर:
कृष्णः।
Kṛṣṇaḥ
काला।
(ख) साधोः विद्या किमर्थं भवति ?
Sādhoḥ vidyā kimartham bhavati?
सज्जन की विद्या किस लिए होती है?
उत्तर:
ज्ञानाय।
Jñānāya
ज्ञान के लिए।
(ग) लोभः कस्य कारणम् ?
Lobhaḥ kasya kāraṇam?
लोभ किसका कारण है?
उत्तर:
पापस्य।
Pāpasya
पाप का।
3. पूर्णवाक्येन उत्तरत
(क) कस्मिन् समये काकपिकयोः भेदः स्पष्टः भवति ?
Kasmin samaye kāka-pikayoḥ bhedaḥ spaṣṭaḥ bhavati?
किस समय कौए और कोयल का अंतर स्पष्ट होता है?
उत्तर:
वसन्तसमये काकपिकयोः भेदः स्पष्टः भवति।
Vasanta-samaye kāka-pikayoḥ bhedaḥ spaṣṭaḥ bhavati
वसंत ऋतु में कौए और कोयल का अंतर स्पष्ट होता है।
(ख) कुलं केन रक्ष्यते ?
Kulam kena rakṣyate?
कुल की रक्षा किससे होती है?
उत्तर:
कुलं वृत्तेन रक्ष्यते।
Kulam vṛttena rakṣyate
कुल की रक्षा सदाचार से होती है।
(ग) लोभात् किं प्रभवति ?
Lobhāt kiṃ prabhavati?
लोभ से क्या उत्पन्न होता है?
उत्तर:
लोभात् क्रोधः प्रभवति।
Lobhāt krodhaḥ prabhavati
लोभ से क्रोध उत्पन्न होता है।
4. श्लोकांशान् योजयत
खलस्य साधोर्विपरीतमेतत्
Khalasya sādhor-viparītametat
दुष्ट और सज्जन का स्वभाव विपरीत होता है
उत्तर:
ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय।
Jñānāya dānāya ca rakṣaṇāya
सज्जन ज्ञान, दान और रक्षा के लिए होते हैं।
5. आम् / न लिखत
(क) विद्या योगेन रक्षति।
Vidyā yogena rakṣati
विद्या अभ्यास से सुरक्षित रहती है।
उत्तर:
आम्
Ām
हाँ
(ख) साधोः विद्या विवादाय भवति।
Sādhoḥ vidyā vivādāya bhavati
सज्जन की विद्या विवाद के लिए होती है।
उत्तर:
न
Na
नहीं
(ग) लोभः पापस्य कारणं भवति।
Lobhaḥ pāpasya kāraṇaṃ bhavati
लोभ पाप का कारण होता है।
उत्तर:
आम्
Ām
हाँ
6. संस्कृतभाषायाम् अनुवादं कुरुत
(क) लोभ मोह और नाश का कारण है।
Lobh moha aur nāś kā kāraṇ hai
हिंदी वाक्य
उत्तर:
लोभात् मोहः नाशश्च भवति।
Lobhāt mohaḥ nāśaśca bhavati
लोभ से मोह और विनाश होता है।
7. लघुवाक्येषु प्रयोगं कुरुत
(क) धनम्
Dhanam
धन
उत्तर:
धनं मदाय न भवति।
Dhanaṃ madāya na bhavati
धन अहंकार के लिए नहीं होना चाहिए।
पाठसार / Moral
यह पाठ सिखाता है कि व्यक्ति की पहचान गुणों से होती है, न कि रूप से।
दुष्ट व्यक्ति विद्या और शक्ति का दुरुपयोग करता है, जबकि सज्जन उन्हें समाजहित में लगाता है।
लोभ सभी बुराइयों की जड़ है।
सत्य, सदाचार और दया से जीवन और कुल की रक्षा होती है।