यह कथा बुद्धि, विवेक और समय पर सही निर्णय के महत्व को बताती है। जलाशय में रहने वाली दो मछलियाँ—शतबुद्धि और सहसबुद्धि—आने वाले संकट को जानकर भी समय रहते स्थान नहीं बदलतीं, जबकि मेढक अपनी सीमित बुद्धि के बावजूद संकट को समझकर तुरंत सुरक्षित स्थान पर चला जाता है। मछुआरों के आने पर दोनों मछलियाँ पकड़ी जाती हैं और मेढक बच जाता है। इस कथा से यह शिक्षा मिलती है कि केवल अधिक बुद्धि होना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसका सही और समय पर उपयोग करना ही जीवन की रक्षा करता है।
Path – Shatabuddhi Sahasabuddhi Katha
कस्मिंश्चित् जलाशये शतबुद्धिः सहसबुद्धिश्चेति द्वौ मत्स्यौ निवसतः स्म।
Kasminścit jalāśaye śatabuddhiḥ sahasabuddhiś ceti dvau matsyau nivasataḥ sma
किसी एक जलाशय में शतबुद्धि और सहसबुद्धि नाम की दो मछलियाँ रहती थीं।
तयोः एकबुद्धिमानकः मण्डूकः मित्रताम् अवहत्।
Tayoḥ ekabuddhimānakaḥ maṇḍūkaḥ mitratām avahat
उन दोनों का एक बुद्धि वाला मित्र मेढक था।
कदाचिज्जालहस्ताः धीवराः तं जलाशयम् उपयाताः।
Kadācij jālahastāḥ dhīvarāḥ taṃ jalāśayam upayātāḥ
एक बार हाथों में जाल लिए मछुआरे उस तालाब पर पहुँचे।
तेषु एको धीवरः अवदत् — एतस्मिन् जलाशये बहवः मत्स्याः सन्ति।
Teṣu eko dhīvaraḥ avadat — etasmin jalāśaye bahavaḥ matsyāḥ santi
उनमें से एक मछुआरे ने कहा—इस तालाब में बहुत मछलियाँ हैं।
अतः तान् गृहीत्वा शीघ्रं जलं क्षेष्यामः।
Ataḥ tān gṛhītvā śīghraṃ jalaṃ kṣeṣyāmaḥ
अतः उन्हें पकड़कर शीघ्र ही तालाब सुखा देंगे।
तच्छ्रुत्वा मत्स्याः दुःखिनः अभवन्।
Tacchrutvā matsyāḥ duḥkhinaḥ abhavan
यह सुनकर मछलियाँ दुखी हो गईं।
तेषु मण्डूकः प्राह — मा शङ्कध्वम्।
Teṣu maṇḍūkaḥ prāha — mā śaṅkadhvam
उनसे मेढक बोला—डरो मत।
अहं धीवराणां भवता।
Ahaṃ dhīvarāṇāṃ bhavatā
मैं तुम्हें मछुआरों से बचा लूँगा।
सहसबुद्धिः अवदत् — मित्र! मा भैषीः।
Sahasabuddhiḥ avadat — mitra mā bhaiṣīḥ
सहसबुद्धि ने कहा—मित्र! मत डरो।
केवलं वचनश्रवणादेव न भवेत्।
Kevalaṃ vacanaśravaṇādeva na bhavet
केवल बातें सुनकर भय नहीं करना चाहिए।
शतबुद्धिरपि अकथयत् — साधु उक्ते त्वया।
Śatabuddhir api akathayat — sādhu ukte tvayā
शतबुद्धि ने भी कहा—तुमने ठीक कहा।
वचनमात्रेण स्वजनस्थानं न त्याज्यम्।
Vacanamātreṇa svajanasthānaṃ na tyājyam
केवल बातों से अपना स्थान नहीं छोड़ना चाहिए।
मण्डूकः आह — भोः! मम एका एव बुद्धिः।
Maṇḍūkaḥ āha — bhoḥ mama ekā eva buddhiḥ
मेढक बोला—अरे! मेरी तो एक ही बुद्धि है।
अहं तु अन्यं जलाशयं गमिष्यामि।
Ahaṃ tu anyaṃ jalāśayaṃ gamiṣyāmi
मैं तो दूसरे तालाब में चला जाऊँगा।
एवमुक्त्वा सः अन्यं जलाशयं गतः।
Evam uktvā saḥ anyaṃ jalāśayaṃ gataḥ
यह कहकर वह दूसरे तालाब चला गया।
प्रभाते धीवराः आगत्य जलमध्ये मत्स्यान् निगृह्य।
Prabhāte dhīvarāḥ āgatya jalamadhye matsyān nigṛhya
सुबह मछुआरे आए और तालाब में मछलियों को पकड़ लिया।
शतबुद्धिः सहसबुद्धिश्च अपि निगृहीतौ।
Śatabuddhiḥ sahasabuddhiś ca api nigṛhītau
शतबुद्धि और सहसबुद्धि दोनों पकड़े गए।
शतबुद्धिः शिरस्थोऽयं लम्बते च सहस्रधीः।
Śatabuddhiḥ śirastho’yaṃ lambate ca sahasradhīḥ
शतबुद्धि सिर पर था और सहसबुद्धि लटक रहा था।
एकबुद्धेः भेदः क्रीडाभिः विमले जले॥
Ekabuddheḥ bhedaḥ krīḍābhiḥ vimale jale
एक बुद्धि वाला सुरक्षित रहा, बाकी खेल में नष्ट हो गए।
Shabdarth – Vocabulary (With Pronunciation)
| Sanskrit | Pronunciation | Hindi Meaning |
|---|---|---|
| मत्स्यौ | Matsyau | दो मछलियाँ |
| शतबुद्धिः | Shatabuddhiḥ | सौ बुद्धि वाला |
| सहसबुद्धिः | Sahasabuddhiḥ | हज़ार बुद्धि वाला |
| मण्डूकः | Maṇḍūkaḥ | मेढक |
| जलाशयः | Jalāśayaḥ | तालाब |
| निवसतः | Nivasataḥ | रहते थे |
| जालहस्ताः | Jālahastāḥ | हाथ में जाल लिए हुए |
| धीवराः | Dhīvarāḥ | मछुआरे |
| उपयाताः | Upayātāḥ | आए |
| गृहीत्वा | Gṛhītvā | पकड़कर |
| क्षेष्यामः | Kṣeṣyāmaḥ | सुखा देंगे |
| तच्छ्रुत्वा | Tacchrutvā | यह सुनकर |
| दुःखिनः | Duḥkhinaḥ | दुखी |
| मा भैषीः | Mā bhaiṣīḥ | मत डरो |
| वचनश्रवणम् | Vacanaśravaṇam | बात सुनना |
| स्वजनस्थानम् | Svajanasthānam | अपना स्थान |
| त्याज्यम् | Tyājyam | छोड़ना चाहिए |
| एकबुद्धिः | Ekabuddhiḥ | एक बुद्धि वाला |
| अन्यं | Anyam | दूसरा |
| गतः | Gataḥ | चला गया |
| निगृहीतौ | Nigṛhītau | पकड़े गए |
| शिरसि | Śirasi | सिर पर |
| लम्बते | Lambate | लटकता है |
| क्रीडाभिः | Krīḍābhiḥ | खेल के कारण |
| विमले | Vimale | स्वच्छ |
Abhyās – अभ्यास
1. उच्चारणं कृत्वा पुस्तिकायां च लिखत
कस्मिंश्चित्, मत्स्यौ, कदाचिज्जालहस्ताः, तच्छ्रुत्वा, अवभयम्, क्षेष्यामः
Kasmiṁścit, matsyau, kadācij-jālahastāḥ, tacchrutvā, avabhayam, kṣeṣyāmaḥ
किसी एक स्थान पर, दो मछलियाँ, किसी समय जाल लिए हुए, यह सुनकर, निर्भयता, नष्ट करेंगे
2. एकपदेन उत्तरत
(क) शतबुद्धिः सहसबुद्धिः कुत्र निवसतः स्म ?
(ka) Śatabuddhiḥ sahasabuddhiḥ kutra nivasataḥ sma?
शतबुद्धि और सहसबुद्धि कहाँ रहते थे?
उत्तर:
जलाशये
Jalāśaye
तालाब में
(ख) जालहस्तः धीवरः कं उपगच्छति ?
(kha) Jālahastaḥ dhīvaraḥ kam upagacchati?
जाल लिए मछुआरा किसके पास जाता है?
उत्तर:
मत्स्यान्
Matsyān
मछलियों के पास
(ग) कस्य एका बुद्धिरासीद् ?
(ga) Kasya ekā buddhir āsīt?
किसकी एक ही बुद्धि थी?
उत्तर:
मण्डूकस्य
Maṇḍūkasya
मेढक की
(घ) जलाशये बहवः के सन्ति ?
(gha) Jalāśaye bahavaḥ ke santi?
तालाब में बहुत से कौन हैं?
उत्तर:
मत्स्याः
Matsyāḥ
मछलियाँ
3. कः उक्तवान् इति लिखत
(क) एतस्मिन् जलाशये बहवः मत्स्याः सन्ति।
Etasmin jalāśaye bahavaḥ matsyāḥ santi
इस तालाब में बहुत सी मछलियाँ हैं।
उत्तर:
धीवरः
Dhīvaraḥ
मछुआरा
(ख) केवलं वचनश्रवणादेव न भेतव्यम्।
Kevalaṁ vacanaśravaṇādeva na bhetavyam
केवल बात सुनकर डरना नहीं चाहिए।
उत्तर:
सहसबुद्धिः
Sahasabuddhiḥ
सहसबुद्धि
(ग) तं सहसबुद्धिः अस्ति।
Taṁ sahasabuddhiḥ asti
वह सहसबुद्धि है।
उत्तर:
शतबुद्धिः
Śatabuddhiḥ
शतबुद्धि
(घ) भोः! मम तु एका एव बुद्धिः।
Bhoḥ! mama tu ekā eva buddhiḥ
अरे! मेरी तो केवल एक ही बुद्धि है।
उत्तर:
मण्डूकः
Maṇḍūkaḥ
मेढक
4. मञ्जूषातः पदानि चित्वा वाक्यानि पूरयत
(क) दौ मत्स्यौ
उत्तर:
निवसतः स्म
Nivasataḥ sma
रहते थे
(ख) एको धीवरः
उत्तर:
अवदत्
Avadat
बोला
(ग) तव सदृशी बुद्धिः कस्यापि
उत्तर:
नास्ति
Nāsti
नहीं है
(घ) अहं त्वां सुबुद्धिप्रभावेण
उत्तर:
रक्षिष्यामि
Rakṣiṣyāmi
रक्षा करूँगा
5. हिन्दीभाषायाम् अनुवादं कुरुत
(क) तदुद्वा मत्स्याः दुःखिताः अभवन्।
Tadudvā matsyāḥ duḥkhitāḥ abhavan
यह सुनकर मछलियाँ दुखी हो गईं।
(ख) अहं त्वां सुबुद्धिप्रभावेण रक्षिष्यामि।
Ahaṁ tvāṁ subuddhiprabhāveṇa rakṣiṣyāmi
मैं तुम्हारी अच्छी बुद्धि के प्रभाव से रक्षा करूँगा।
(ग) अहं तु अत्र न स्थास्यामि।
Ahaṁ tu atra na sthāsyāmi
मैं यहाँ नहीं रहूँगा।
(घ) मण्डूकः स्वप्नेषु अकथयत्।
Maṇḍūkaḥ svapneṣu akathayat
मेढक ने स्वप्न में कहा।
6. समासविग्रहं कृत्वा समासस्य नाम लिखत
जालमध्ये
Jālamadhye
जाल के भीतर
स्वप्ननीषु
Svapnaniṣu
स्वप्नों में
7. विभक्ति वचनं लिखत
त्वया
Tvayā
तुम्हारे द्वारा
धीवराः
Dhīvarāḥ
मछुआरे
शिक्षण-सङ्केतः
यह कथा हमें सिखाती है कि केवल बुद्धि का अहंकार नहीं, बल्कि समय पर सही निर्णय लेना आवश्यक है। जो व्यक्ति संकट को पहले पहचान लेता है, वही सुरक्षित रहता है।वाहनों का संस्कृत में नाम
सवारी = यानम्गाड़ी = शकटः / शकटी
साइकिल = द्विचक्रिका
बैलगाड़ी = गन्त्री
हवाई जहाज = वायूयानम् / विमानम्
जहाज = जलयानम्