Lesson: 18 – Et Bālakāḥ -Class: 8

इस पाठ “एत बालकाः” में बालकों को साहस, परिश्रम और सकारात्मक सोच के साथ जीवन-पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी गई है। कवि बालकों से कठिनाइयों और अंधकार को दूर करने, परिश्रम को अपनाने तथा शक्ति और एकता को बनाए रखने का आह्वान करता है। पाठ में बताया गया है कि तप, सेवा, निःस्वार्थ कर्म और पौरुष के द्वारा ही मनुष्य अपने जीवन को सफल बना सकता है। भ्रांतियों को छोड़कर नवमार्ग अपनाने तथा समाज में मंगल और कल्याण का प्रसार करने से ही बालकों का जीवन सार्थक होता है। यह पाठ विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, सेवा-भाव और राष्ट्रहित की भावना विकसित करता है।

Path – Et Bālakāḥ (Ashtādashaḥ Pāṭhaḥ)

एत बालकाः! स्वयं चलाम। Eta bālakāḥ! svayaṁ calāma. हे बालको! आओ, हम स्वयं आगे बढ़ें।
काठिन्यं दूरं करवाम॥1॥ Kāṭhinyaṁ dūraṁ karavāma. कठिनाइयों को हम दूर करें।
एत नयाम नमस्कारकम्। Eta nayāma namaskārakam. आओ, हम विनम्रता और नम्र व्यवहार को अपनाएँ।
दूरं कुम्भीभ्यः अन्धकारकम्॥2॥ Dūraṁ kumbhībhyaḥ andhakārakam. अंधकार को पूरी तरह दूर करें।
एत पताकानि परिश्रम। Eta patākāni pariśrama. आओ, परिश्रम को अपना ध्वज बनाएँ।
शक्तिसमूहं नेव जहाम॥3॥ Śakti-samūhaṁ nēva jahāma. हम अपनी शक्ति को कभी नहीं छोड़ें।
एत सागरं प्रति गच्छाम। Eta sāgaraṁ prati gacchāma. आओ, हम सागर की ओर बढ़ें।
जीवनकलशं ननु विश्रम॥4॥ Jīvana-kalaśaṁ nanu viśrama. जीवन के लक्ष्य को कभी न छोड़ें।
एतादृशं शक्तिं लभ्य। Etādṛśaṁ śaktiṁ labhya. इस प्रकार की शक्ति को प्राप्त करके,
पौरुषेण खलु भाग्यं बन्ध्याम॥5॥ Pauruṣeṇa khalu bhāgyaṁ bandhāma. हम पराक्रम से अपने भाग्य को बाँध लें।
एत विधेय तपो नवीयम्। Eta vidhēya tapō navīyam. आओ, नवीन और उचित तप करें।
पूरयेम वाच्छाकमनीयम्॥6॥ Pūrayēma vāñchā-kamanīyam. सुंदर और श्रेष्ठ इच्छाओं को पूर्ण करें।
सेवामहे जनांश्च निकामम्। Sēvāmahē janāṁśca nikāmam. हम लोगों की निस्वार्थ सेवा करें।
लोभं विना सुधूपाः काम्यम्॥7॥ Lōbhaṁ vinā sudhūpāḥ kāmyam. लोभ के बिना उत्तम कर्म करें।
एत जयेम मनांसि जनानाम्। Eta jayēma manāṁsi janānām. आओ, हम लोगों के हृदय जीतें।
जीवनमिह सफलं बालानाम्॥8॥ Jīvanam iha saphalaṁ bālānām. इस प्रकार बालकों का जीवन सफल बने।
एत विक्रमं भ्रान्तिसमूहं। Eta vikramaṁ bhrānti-samūham. आओ, भ्रमों के समूह को साहस से हटाएँ।
दर्शयेम नवमार्गेण॥8॥ Darśayēma nava-mārgeṇa. नए मार्ग को सबको दिखाएँ।
एत मङ्गलं बहु वितरेम। Eta maṅgalaṁ bahu vitarēma. आओ, बहुत सा कल्याण फैलाएँ।
विघ्नमन्तं लघु क्लृप्तम्॥9॥ Vighna-mantaṁ laghu klṛptam. और सभी बाधाओं का अंत करें।
शब्दार्थ (Vocabulary)
Sanskrit Pronunciation Hindi Meaning
एतEtaआओ / चलो
बालकाःBālakāḥबच्चे
स्वयंSwayamस्वयं
चलामChalāmaचलें
काठिन्यम्Kāṭhinyamकठिनाई
दूरम्Dūramदूर
करवामKaravāmaकरें
नयामNayāmaले चलें
नमस्कारकम्Namaskārakamनम्रता
अन्धकारकम्Andhakārakamअंधकार
पताकानिPatākāniझंडे
परिश्रमPariśramaपरिश्रम
शक्तिसमूहम्Śakti-samūhamशक्ति का समूह
जहामJahāmaछोड़ें
सागरम्Sāgaramसमुद्र
गच्छामGacchāmaचलें
जीवनकलशम्Jīvana-kalaśamजीवन का पात्र
विश्रमViśramaथकान
पौरुषेणPauruṣeṇaपराक्रम से
भाग्यम्Bhāgyamभाग्य
विधेयVidheyपालन करने योग्य
सेवामहेSevāmaheहम सेवा करें
लोभम्Lobhamलालच
जयेमJayemaविजय पाएं
विघ्नम्Vighnamबाधा
अभ्यासः – प्रश्नोत्तर
1. उच्चारणं कृत्वा पुस्तिकायां च लिखत
विधेय, वाच्छा, नमस्कारकम्, अन्धकारम्, पोषणम्, सेवामहे Vidhey, vāchchhā, namaskārakam, andhakāram, poṣaṇam, sevāmahe विधेय, इच्छा, नमस्कार, अँधेरा, पोषण, हम सेवा करते हैं
उत्तर: एते शब्दाः उच्चारणपूर्वक लिखनीयाः। Ete śabdāḥ uccāraṇa-pūrvaka likhanīyāḥ इन शब्दों को उच्चारण के साथ लिखना है।
2. एकपदेन उत्तरत
(क) काठिन्यं किं करवाम ? Kāṭhinyam kiṁ karavāma? कठिनता को हम क्या करें?
उत्तर: दूरम् Dūram दूर
(ख) वयं किं परिश्रम ? Vayaṁ kiṁ pariśrama? हम क्या परिश्रम करें?
उत्तर: पताकानि Patākāni झंडों के लिए
(ग) किं दूरं कर्म ? Kiṁ dūraṁ karma? किसे दूर करें?
उत्तर: अन्धकारम् Andhakāram अँधकार
(घ) किं विश्रम ? Kiṁ viśrama? क्या विश्राम करें?
उत्तर: जीवनकलशम् Jīvana-kalaśam जीवन कलश
3. पूर्णवाक्येन उत्तरत
(क) काठिन्यं दूरं कर्तुं वयं किं करवाम ? Kāṭhinyam dūraṁ kartuṁ vayaṁ kiṁ karavāma? कठिनता दूर करने के लिए हम क्या करते हैं?
उत्तर: काठिन्यं दूरं कर्तुं वयं स्वयं चलाम। Svayaṁ calāma कठिनता दूर करने के लिए हम स्वयं चलते हैं।
(ख) वयं किं नेव जहाम ? Vayaṁ kiṁ neva jahāma? हम क्या नहीं छोड़ते?
उत्तर: शक्तिसमूहं नेव जहाम। Śakti-samūham हम शक्ति समूह नहीं छोड़ते।
(ग) तपः कृत्वा किं पूरयेम ? Tapaḥ kṛtvā kiṁ pūrayema? तप करके क्या पूरा करें?
उत्तर: वाञ्छाकमनीयम् पूरयेम। Vāñchā-kamanīyam इच्छित कार्य पूरा करें।
(घ) भ्रान्तिसमूहं दूरं कृत्वा वयं किं दर्शयेम ? Bhrānti-samūhaṁ dūraṁ kṛtvā vayaṁ kiṁ darśayema? भ्रम दूर करके हम क्या दिखाएँ?
उत्तर: नवमार्गेण विक्रमं दर्शयेम। Navamārgeṇa vikramam नए मार्ग से साहस दिखाएँ।
4. रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणम्
जनानां मनांसि जयेम। Janānāṁ manāṁsi jayema लोगों के मन जीतें।
उत्तर: केषां मनांसि जयेम ? Keṣāṁ manāṁsi? किनके मन जीतें?
मङ्गलं बहु वितरेम। Maṅgalaṁ bahu vitarem बहुत मंगल फैलाएँ।
उत्तर: किं बहु वितरेम ? Kiṁ bahu? क्या अधिक बाँटें?
5. मञ्जूषातः क्रियापदानि चित्वा पूरयत
(क) त्वं नमस्कारकम् Tvaṁ namaskārakam … तुम नमस्कार …
उत्तर: नय Naya ले जाओ
(ख) सः सागरं प्रति Saḥ sāgaraṁ prati … वह सागर की ओर …
उत्तर: गच्छतु Gacchatu जाए
(ग) ते जनानां मनांसि
उत्तर: जयन्तु Jayantu जीतें
6. संस्कृते अनुवादं कुरुत
(क) कठिनता को हम दूर करें।
उत्तर: काठिन्यं वयं दूरं करवाम। Kāṭhinyam dūraṁ karavāma हम कठिनता दूर करें।
(ख) हम सब अन्धकार को दूर करें।
उत्तर: वयं सर्वे अन्धकारं दूरं करवाम। Sarve andhakāram हम सब अँधकार दूर करें।
(ग) सागर की ओर चलें।
उत्तर: सागरं प्रति गच्छाम। Sāgaraṁ prati सागर की ओर चलें।
7. धातुः, लकारः, पुरुषं लिखत
नयाम Nayāma हम ले जाएँ
उत्तर: नी + लोट् + उत्तमपुरुष Nī dhātuḥ नी धातु, आदेश लकार

पाठसार / Moral

यह पाठ बालकों को परिश्रम, सेवा, साहस और सकारात्मक सोच का संदेश देता है। मिलकर कठिनाइयों को दूर करने, अन्धकार मिटाने और समाज के लिए मंगलकारी कार्य करने की प्रेरणा देता है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top