इस पाठ “एत बालकाः” में बालकों को साहस, परिश्रम और सकारात्मक सोच के साथ जीवन-पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी गई है। कवि बालकों से कठिनाइयों और अंधकार को दूर करने, परिश्रम को अपनाने तथा शक्ति और एकता को बनाए रखने का आह्वान करता है। पाठ में बताया गया है कि तप, सेवा, निःस्वार्थ कर्म और पौरुष के द्वारा ही मनुष्य अपने जीवन को सफल बना सकता है। भ्रांतियों को छोड़कर नवमार्ग अपनाने तथा समाज में मंगल और कल्याण का प्रसार करने से ही बालकों का जीवन सार्थक होता है। यह पाठ विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, सेवा-भाव और राष्ट्रहित की भावना विकसित करता है।
Path – Et Bālakāḥ (Ashtādashaḥ Pāṭhaḥ)
एत बालकाः! स्वयं चलाम।
Eta bālakāḥ! svayaṁ calāma.
हे बालको! आओ, हम स्वयं आगे बढ़ें।
काठिन्यं दूरं करवाम॥1॥
Kāṭhinyaṁ dūraṁ karavāma.
कठिनाइयों को हम दूर करें।
एत नयाम नमस्कारकम्।
Eta nayāma namaskārakam.
आओ, हम विनम्रता और नम्र व्यवहार को अपनाएँ।
दूरं कुम्भीभ्यः अन्धकारकम्॥2॥
Dūraṁ kumbhībhyaḥ andhakārakam.
अंधकार को पूरी तरह दूर करें।
एत पताकानि परिश्रम।
Eta patākāni pariśrama.
आओ, परिश्रम को अपना ध्वज बनाएँ।
शक्तिसमूहं नेव जहाम॥3॥
Śakti-samūhaṁ nēva jahāma.
हम अपनी शक्ति को कभी नहीं छोड़ें।
एत सागरं प्रति गच्छाम।
Eta sāgaraṁ prati gacchāma.
आओ, हम सागर की ओर बढ़ें।
जीवनकलशं ननु विश्रम॥4॥
Jīvana-kalaśaṁ nanu viśrama.
जीवन के लक्ष्य को कभी न छोड़ें।
एतादृशं शक्तिं लभ्य।
Etādṛśaṁ śaktiṁ labhya.
इस प्रकार की शक्ति को प्राप्त करके,
पौरुषेण खलु भाग्यं बन्ध्याम॥5॥
Pauruṣeṇa khalu bhāgyaṁ bandhāma.
हम पराक्रम से अपने भाग्य को बाँध लें।
एत विधेय तपो नवीयम्।
Eta vidhēya tapō navīyam.
आओ, नवीन और उचित तप करें।
पूरयेम वाच्छाकमनीयम्॥6॥
Pūrayēma vāñchā-kamanīyam.
सुंदर और श्रेष्ठ इच्छाओं को पूर्ण करें।
सेवामहे जनांश्च निकामम्।
Sēvāmahē janāṁśca nikāmam.
हम लोगों की निस्वार्थ सेवा करें।
लोभं विना सुधूपाः काम्यम्॥7॥
Lōbhaṁ vinā sudhūpāḥ kāmyam.
लोभ के बिना उत्तम कर्म करें।
एत जयेम मनांसि जनानाम्।
Eta jayēma manāṁsi janānām.
आओ, हम लोगों के हृदय जीतें।
जीवनमिह सफलं बालानाम्॥8॥
Jīvanam iha saphalaṁ bālānām.
इस प्रकार बालकों का जीवन सफल बने।
एत विक्रमं भ्रान्तिसमूहं।
Eta vikramaṁ bhrānti-samūham.
आओ, भ्रमों के समूह को साहस से हटाएँ।
दर्शयेम नवमार्गेण॥8॥
Darśayēma nava-mārgeṇa.
नए मार्ग को सबको दिखाएँ।
एत मङ्गलं बहु वितरेम।
Eta maṅgalaṁ bahu vitarēma.
आओ, बहुत सा कल्याण फैलाएँ।
विघ्नमन्तं लघु क्लृप्तम्॥9॥
Vighna-mantaṁ laghu klṛptam.
और सभी बाधाओं का अंत करें।
शब्दार्थ (Vocabulary)
| Sanskrit | Pronunciation | Hindi Meaning |
|---|---|---|
| एत | Eta | आओ / चलो |
| बालकाः | Bālakāḥ | बच्चे |
| स्वयं | Swayam | स्वयं |
| चलाम | Chalāma | चलें |
| काठिन्यम् | Kāṭhinyam | कठिनाई |
| दूरम् | Dūram | दूर |
| करवाम | Karavāma | करें |
| नयाम | Nayāma | ले चलें |
| नमस्कारकम् | Namaskārakam | नम्रता |
| अन्धकारकम् | Andhakārakam | अंधकार |
| पताकानि | Patākāni | झंडे |
| परिश्रम | Pariśrama | परिश्रम |
| शक्तिसमूहम् | Śakti-samūham | शक्ति का समूह |
| जहाम | Jahāma | छोड़ें |
| सागरम् | Sāgaram | समुद्र |
| गच्छाम | Gacchāma | चलें |
| जीवनकलशम् | Jīvana-kalaśam | जीवन का पात्र |
| विश्रम | Viśrama | थकान |
| पौरुषेण | Pauruṣeṇa | पराक्रम से |
| भाग्यम् | Bhāgyam | भाग्य |
| विधेय | Vidhey | पालन करने योग्य |
| सेवामहे | Sevāmahe | हम सेवा करें |
| लोभम् | Lobham | लालच |
| जयेम | Jayema | विजय पाएं |
| विघ्नम् | Vighnam | बाधा |
अभ्यासः – प्रश्नोत्तर
1. उच्चारणं कृत्वा पुस्तिकायां च लिखत
विधेय, वाच्छा, नमस्कारकम्, अन्धकारम्, पोषणम्, सेवामहे
Vidhey, vāchchhā, namaskārakam, andhakāram, poṣaṇam, sevāmahe
विधेय, इच्छा, नमस्कार, अँधेरा, पोषण, हम सेवा करते हैं
उत्तर:
एते शब्दाः उच्चारणपूर्वक लिखनीयाः।
Ete śabdāḥ uccāraṇa-pūrvaka likhanīyāḥ
इन शब्दों को उच्चारण के साथ लिखना है।
2. एकपदेन उत्तरत
(क) काठिन्यं किं करवाम ?
Kāṭhinyam kiṁ karavāma?
कठिनता को हम क्या करें?
उत्तर:
दूरम्
Dūram
दूर
(ख) वयं किं परिश्रम ?
Vayaṁ kiṁ pariśrama?
हम क्या परिश्रम करें?
उत्तर:
पताकानि
Patākāni
झंडों के लिए
(ग) किं दूरं कर्म ?
Kiṁ dūraṁ karma?
किसे दूर करें?
उत्तर:
अन्धकारम्
Andhakāram
अँधकार
(घ) किं विश्रम ?
Kiṁ viśrama?
क्या विश्राम करें?
उत्तर:
जीवनकलशम्
Jīvana-kalaśam
जीवन कलश
3. पूर्णवाक्येन उत्तरत
(क) काठिन्यं दूरं कर्तुं वयं किं करवाम ?
Kāṭhinyam dūraṁ kartuṁ vayaṁ kiṁ karavāma?
कठिनता दूर करने के लिए हम क्या करते हैं?
उत्तर:
काठिन्यं दूरं कर्तुं वयं स्वयं चलाम।
Svayaṁ calāma
कठिनता दूर करने के लिए हम स्वयं चलते हैं।
(ख) वयं किं नेव जहाम ?
Vayaṁ kiṁ neva jahāma?
हम क्या नहीं छोड़ते?
उत्तर:
शक्तिसमूहं नेव जहाम।
Śakti-samūham
हम शक्ति समूह नहीं छोड़ते।
(ग) तपः कृत्वा किं पूरयेम ?
Tapaḥ kṛtvā kiṁ pūrayema?
तप करके क्या पूरा करें?
उत्तर:
वाञ्छाकमनीयम् पूरयेम।
Vāñchā-kamanīyam
इच्छित कार्य पूरा करें।
(घ) भ्रान्तिसमूहं दूरं कृत्वा वयं किं दर्शयेम ?
Bhrānti-samūhaṁ dūraṁ kṛtvā vayaṁ kiṁ darśayema?
भ्रम दूर करके हम क्या दिखाएँ?
उत्तर:
नवमार्गेण विक्रमं दर्शयेम।
Navamārgeṇa vikramam
नए मार्ग से साहस दिखाएँ।
4. रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणम्
जनानां मनांसि जयेम।
Janānāṁ manāṁsi jayema
लोगों के मन जीतें।
उत्तर:
केषां मनांसि जयेम ?
Keṣāṁ manāṁsi?
किनके मन जीतें?
मङ्गलं बहु वितरेम।
Maṅgalaṁ bahu vitarem
बहुत मंगल फैलाएँ।
उत्तर:
किं बहु वितरेम ?
Kiṁ bahu?
क्या अधिक बाँटें?
5. मञ्जूषातः क्रियापदानि चित्वा पूरयत
(क) त्वं नमस्कारकम्
Tvaṁ namaskārakam …
तुम नमस्कार …
उत्तर:
नय
Naya
ले जाओ
(ख) सः सागरं प्रति
Saḥ sāgaraṁ prati …
वह सागर की ओर …
उत्तर:
गच्छतु
Gacchatu
जाए
(ग) ते जनानां मनांसि
उत्तर:
जयन्तु
Jayantu
जीतें
6. संस्कृते अनुवादं कुरुत
(क) कठिनता को हम दूर करें।
उत्तर:
काठिन्यं वयं दूरं करवाम।
Kāṭhinyam dūraṁ karavāma
हम कठिनता दूर करें।
(ख) हम सब अन्धकार को दूर करें।
उत्तर:
वयं सर्वे अन्धकारं दूरं करवाम।
Sarve andhakāram
हम सब अँधकार दूर करें।
(ग) सागर की ओर चलें।
उत्तर:
सागरं प्रति गच्छाम।
Sāgaraṁ prati
सागर की ओर चलें।
7. धातुः, लकारः, पुरुषं लिखत
नयाम
Nayāma
हम ले जाएँ
उत्तर:
नी + लोट् + उत्तमपुरुष
Nī dhātuḥ
नी धातु, आदेश लकार