पाठ 17 – समाजनिर्माणे नारीणां भूमिका
इस पाठ में प्राचीन एवं आधुनिक काल में समाज निर्माण में स्त्रियों की भूमिका को स्पष्ट किया गया है। वैदिक […]
Build Strong Roots, Grow with Wisdom
Knowledge gives humility and humility leads to greatness.
इस पाठ में प्राचीन एवं आधुनिक काल में समाज निर्माण में स्त्रियों की भूमिका को स्पष्ट किया गया है। वैदिक […]
यह पाठ विश्वबन्धुत्व की भावना का महत्त्व स्पष्ट करता है। लेखक बताता है कि सम्पूर्ण मानवता एक परिवार है। भाईचारे
Lesson 15 – Sanskritam (Class 7) पञ्चदशः पाठः भारतीयैकता-साधकम् संस्कृतम् भारतीयत्व-सम्पादकम् संस्कृतम् ज्ञान-पुञ्ज-प्रभादर्शकं संस्कृतम् सर्वदानन्द-सन्दोहदं संस्कृतम्॥1॥ Bhāratīyaikatā-sādhakam saṁskṛtam | Bhāratīyatva-sampādakam
यह पाठ वीरता, साहस और आत्मबल का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। वैदिक युग में ‘खेल’ नामक राजा था, जिसकी
Lesson 13 – Yaksha Yudhishthira Samvada (Class 7) त्रयोदशः पाठः : यक्ष–युधिष्ठिर–संवादः यक्ष उवाच Yakṣa uvāca यक्ष ने कहा। भावार्थ:
Lesson 12 – Adikavih Valmikih (Class 7) द्वादशः पाठः आदिकविः वाल्मीकि: Ādikaviḥ Vālmīkiḥ आदिकवि वाल्मीकि पुरा वाल्मीकि: नाम एकः ऋषिः
इस पाठ में राजा दिलीप के कर्तव्य, त्याग और धर्मनिष्ठा का अत्यन्त प्रभावशाली चित्रण किया गया है। राजा दिलीप अपने
इस पाठ “निबन्धतरोः साक्ष्यमपु” में सत्य, न्याय और ईमानदारी का महत्त्व बताया गया है। कथा में मनोहर और धर्मदत्त नामक
यह पाठ जीवन को सही दिशा देने वाले सुभाषित श्लोकों का संग्रह है। इसमें क्षमा, सत्य, प्रिय वचन और सत्संग
‘प्रहेलिका’ पाठ में रोचक पहेलियों के माध्यम से बुद्धि, तर्क और भाषा–कौशल का विकास किया गया है। इन प्रहेलिकाओं में