Lesson: 6 – Kim Tvam Jānāsi Bhavataḥ – Class : 8
इस पाठ में एक प्राध्यापक और नाविक के संवाद के माध्यम से यह बताया गया है कि केवल पुस्तकीय ज्ञान […]
इस पाठ में एक प्राध्यापक और नाविक के संवाद के माध्यम से यह बताया गया है कि केवल पुस्तकीय ज्ञान […]
यह पाठ “स्फुटपद्यानि” जीवन को सही दिशा देने वाले नीति-वचनों का संग्रह है। इन श्लोकों के माध्यम से मनुष्य को
यह पाठ “अस्माकं पर्वाणि” भारत के प्रमुख पर्वों का परिचय कराता है। इसमें दीपावली, गुरु नानक जयंती, क्रिसमस और ईद-उल-फितर
यह पाठ “मातृदेवो भव” माता के प्रति कर्तव्य और सम्मान का संदेश देता है। इसमें सतीश नामक बालक खेल को
यह पाठ आश्रम-जीवन का सजीव और सुंदर चित्र प्रस्तुत करता है। इसमें सीतापुर जनपद के नैमिषारण्य स्थित प्राचीन आश्रम का
इस वैदिक वन्दना में तेज, ओज, बल और वीर्य की प्रार्थना की गई है—ये सभी गुण सूर्य के प्रमुख प्रतीक
यह पाठ वीरता, साहस और आत्मबल का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। वैदिक युग में ‘खेल’ नामक राजा था, जिसकी
Path – Yaksha Yudhishthira Samvada त्रयोदशः पाठः : यक्ष–युधिष्ठिर–संवादः यक्ष उवाच Yakṣa uvāca यक्ष ने कहा। भावार्थ: यक्ष प्रश्नों के
इस पाठ में राजा दिलीप के कर्तव्य, त्याग और धर्मनिष्ठा का अत्यन्त प्रभावशाली चित्रण किया गया है। राजा दिलीप अपने
इस पाठ “निबन्धतरोः साक्ष्यमपु” में सत्य, न्याय और ईमानदारी का महत्त्व बताया गया है। कथा में मनोहर और धर्मदत्त नामक