Eid Mahotsavah – Lesson 17 – Class:5

ईद महोत्सव पाठ Class 5 | संस्कृत अध्याय व्याख्या, प्रश्नोत्तर, शब्दार्थ

यह पाठ “ईद महोत्सव” बच्चों को त्योहारों की महत्ता और साम्प्रदायिक सौहार्द्र का संदेश देता है। इसमें बताया गया है कि ईद का त्यौहार केवल मुसलमान ही नहीं, बल्कि हिन्दू, सिख और ईसाई भी मिलकर मनाते हैं। त्योहार हमें एक-दूसरे के धर्म और परंपराओं का सम्मान करना सिखाते हैं। यह अध्याय विद्यार्थियों को भाईचारे, प्रेम, समानता और मिलजुलकर रहने की शिक्षा प्रदान करता है।

रहीमः: करीमः, रेशमा च चन्द्रं द्रष्टुम् इच्छन्ति। Rahīmaḥ: Karīmaḥ, Reśmā ca candraṁ draṣṭum icchanti. यह पंक्ति बताती है कि रहीम, करीम और रेशमा मिलकर चंद्र देखने की इच्छा रखते हैं।
रेशमा — भ्रातरो! ईद्महोत्सवः कदा भविष्यति ? Bhrātaro! Īdmahotsavaḥ kadā bhaviṣyati ? रेशमा पूछ रही है — भाई लोगों! ईद का महोत्सव कब होगा?
करीमः — अध चन्द्रस्य दर्शनम् अभवत्। श्वः एव ईदस्य महोत्सवः भविष्यति। Karīmaḥ — adha candrasya darśanam abhavat. Śvaḥ eva īdasya mahotsavaḥ bhaviṣyati. करीम बताता है — आज चन्द्र का दर्शन हुआ; कल ही ईद का महोत्सव होगा।
रहीमः — सखे इमं निर्णयं कः अकुरोत् ? Rahīmaḥ — sakhe! imaṁ nirṇayaṁ kaḥ akurot? रहीम पूछता है — मित्र यह निर्णय किसने किया?
करीमः — मित्र! इमं निर्णयं दिल्लीतः इमाम्-महोदय: अकरोत् । रात्रौ एव तस्य उद्घोषः अभवत् । Kreemah -Mitra! Imaṁ nirṇayaṁ Dillītaḥ Imām-mahodayaḥ akarot. Rātrau eva tasya udghoṣaḥ abhavat. करीम बताता है — मित्रो! यह निर्णय दिल्ली के इमाम साहब ने किया। रात में उनका उद्घोष हुआ।
रहीमः — श्वः वयं प्रातः एव ‘ईद्गाहम्’ चलिष्यामः । “Rahīmaḥ — shvah vayaṁ prātaḥ eva ‘Īdgāham’ caliṣyāmaḥ.” रहीम कहता है — कल सुबह ही हम ईदगाह (नमाज़ की जगह) की ओर चलेंगे।
करीमः — वयं तत्र गमनाय नूतनवस्त्राणि एव धारयिष्यामः । Karīmaḥ — vayaṁ tatra gamanāya nūtanavastrāṇi eva dhārayiṣyāmaḥ. करीम कहता है — वहाँ जाने के लिए हम नए वस्त्र ही पहनेंगे।
रहीमः — युवां श्वः मम गृहं आगच्छतम् । वयं इतः ‘ईद्गाहम्’ चलिष्यामः । Rahīmaḥ — yuvāṁ śvaḥ mama gṛhaṁ āgacchatam. Vayaṁ itaḥ ‘Īdgāham’ caliṣyāmaḥ. रहीम ने कहा — तुम दोनों कल मेरे घर आना। हम यहाँ से ईदगाह चलेंगे।
रेशमा — भ्रातरो! इतः पश्यताम् । अस्मिन उत्सवे सम्मेलितुं हिन्दू-सिख-ईसाई-धर्मावलम्बिनः जना: अपि सोत्साहम् आगच्छन्ति । तेषां स्वागतम् अस्माकं परमो धर्मः । Reśmā — bhrātaro! itaḥ paśyatām. Asmin utsave sammelituṁ hindū-sikh-īsāī-dharmāvalambinaḥ janāḥ api sotsāham āgacchanti. Teṣāṁ svāgatam asmākaṁ paramo dharmaḥ. रेशमा ने कहा — भाइयो! इधर देखो। इस उत्सव में सम्मिलित होने के लिए हिन्दू, सिख और ईसाई धर्म के लोग भी उत्साहपूर्वक आ रहे हैं। उनका स्वागत करना हमारा सबसे बड़ा धर्म है।

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