यह पाठ आश्रम-जीवन का सजीव और सुंदर चित्र प्रस्तुत करता है। इसमें सीतापुर जनपद के नैमिषारण्य स्थित प्राचीन आश्रम का वर्णन है, जहाँ ऋषि, मुनि, गुरु और विद्यार्थी मिल-जुलकर रहते थे। आश्रम प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर था—चारों ओर घने वृक्ष, फलदार पौधे, शीतल वायु, पक्षियों का कलरव और समीप बहती गोमती नदी वातावरण को पवित्र और आनंददायक बनाती थी। आश्रम में अनुशासनपूर्ण जीवन व्यतीत किया जाता था, जहाँ विद्यार्थियों के लिए प्रातः उठना, स्नान, अध्ययन, सदाचार और करुणा जैसे नियम थे। स्वास्थ्य के लिए व्यायाम और प्राकृतिक चिकित्सा पर बल दिया जाता था। यह आश्रम त्याग, तपस्या, परोपकार, उदारता और सामूहिक जीवन के आदर्शों की शिक्षा देता है। इस प्रकार पाठ हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य, सरल जीवन और उच्च नैतिक मूल्यों का महत्व समझाता है।
Path – Ashramah
प्रथमः पाठः : आश्रमः
अस्माकं प्रदेशस्य सीतापुरजनपदे नैमिषारण्यं प्राचीनं तीर्थस्थलं अस्ति।
Asmākam pradeśasya Sītāpur-janapade Naimiśāraṇyaṁ prācīnaṁ tīrthasthalam asti.
हमारे प्रदेश के सीतापुर जनपद में नैमिषारण्य नामक प्राचीन तीर्थस्थल है।
तत्र एकस्मिन् आश्रमे ऋषयः मुनयः गुरवः कवयः छात्राश्च निवसन्ति स्म।
Tatra ekasmin āśrame ṛṣayaḥ munayaḥ guravaḥ kavayaḥ chātrāśca nivasanti sma.
वहाँ एक आश्रम में ऋषि, मुनि, गुरु, कवि और छात्र रहते थे।
आश्रमस्य विशाल परिसरः अश्वत्थ-वट-निम्बाशोक-द्रुमाणां गहना छाया भवति स्म।
Āśramasya viśāla parisarah aśvattha-vaṭa-nimba-aśoka-drumāṇāṁ gahanā chāyā bhavati sma.
आश्रम का विशाल परिसर पीपल, बरगद, नीम और अशोक के वृक्षों की घनी छाया से युक्त था।
तत्र फलशालिनः आम्रालक-पनस-पैचकाश्च अपि विपुलाः आसन्।
Tatra phalaśālinaḥ āmrālaka-panasa-paicakāśca api vipulāḥ āsan.
वहाँ आँवला, कटहल और अमरूद जैसे फलदार वृक्ष भी बहुत थे।
पुष्पैः वृक्षैः तत्र पर्यावरणं शुद्धमासीत्।
Puṣpaiḥ vṛkṣaiḥ tatra paryāvaraṇaṁ śuddham āsīt.
फूलों और वृक्षों से वहाँ का वातावरण शुद्ध था।
येन शीतला वायवः मन्दं-मन्दं वहन्ति स्म।
Yena śītalā vāyavaḥ mandaṁ-mandaṁ vahanti sma.
जिससे ठंडी हवाएँ धीरे-धीरे चलती थीं।
काले-काले च मेघः वर्षति स्म।
Kāle-kāle ca meghaḥ varṣati sma.
समय-समय पर बादल वर्षा करते थे।
इदानीमपि तस्मिन् आश्रमे भवन्ति बलवद्वृक्षाः।
Idānīm api tasmin āśrame bhavanti balavad-vṛkṣāḥ.
आज भी उस आश्रम में बड़े-बड़े वृक्ष हैं।
अन्ये च पशवः स्वच्छन्दं चरन्ति।
Anye ca paśavaḥ svacchandaṁ caranti.
और अन्य पशु स्वतंत्र रूप से विचरण करते हैं।
वृक्षेषु पक्षिणां कूजितानि मयूराणां नर्तनं च दृश्यते।
Vṛkṣeṣu pakṣiṇāṁ kūjitāni mayūrāṇāṁ nartanaṁ ca dṛśyate.
वृक्षों पर पक्षियों की चहचहाहट और मोरों का नृत्य दिखाई देता है।
तस्याश्रमस्य समीपे गोमती नदी प्रवहति।
Tasyāśramasya samīpe Gomatī nadī pravahati.
उस आश्रम के पास गोमती नदी बहती है।
स च आश्रमः त्यागं तपस्यां परोपकारं उदारतां च शिक्षयति।
Sa ca āśramaḥ tyāgaṁ tapasyaṁ paropakāraṁ udāratāṁ ca śikṣayati.
यह आश्रम त्याग, तपस्या, परोपकार और उदारता की शिक्षा देता है।
शब्दार्थ
| Sanskrit | Pronunciation | Hindi Meaning |
| अश्वत्थः | Ashvatthaḥ | पीपल |
| विहगः | Vihagaḥ | पक्षी |
| आम्रालकः | Āmrālakaḥ | आँवला |
| पनसः | Panasaḥ | कटहल |
| पैचः | Paicaḥ | अमरूद |
| कूजितम् | Kūjitam | चहचहाहट |
| बलवद्वृक्षः | Balavad-vṛkṣaḥ | बड़ा वृक्ष |
| सम्प्रत्यपि | Sampratyapi | आज भी |
अभ्यास प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1
उच्चारणं कृत्वा पुस्तिकायां च लिखत— नैमिषारण्यं, अश्वत्थः, पक्षिणः, चिकित्सालयः, प्रयच्छति, उदात्तभावम्, सम्प्रत्यपि, आम्रालकम्।
Ucchāraṇaṁ kṛtvā pustikāyāṁ ca likhata— Naimiśāraṇyaṁ, Aśvatthaḥ, Pakṣiṇaḥ, Cikitsālayaḥ, Prayacchati, Udāttabhāvam, Sampratyapi, Āmrālakam.
उच्चारण करके पुस्तिका में लिखिए— नैमिषारण्य, पीपल, पक्षी, चिकित्सालय, देता है, उदात्त भाव, आज भी, आँवला।
उत्तर:
नैमिषारण्यं, अश्वत्थः, पक्षिणः, चिकित्सालयः, प्रयच्छति, उदात्तभावम्, सम्प्रत्यपि, आम्रालकम्।
Naimiśāraṇyaṁ, Aśvatthaḥ, Pakṣiṇaḥ, Cikitsālayaḥ, Prayacchati, Udāttabhāvam, Sampratyapi, Āmrālakam.
सभी शब्द शुद्ध रूप में लिखे गए।
प्रश्न 2 (एकपदेन उत्तरत)
(क) आश्रमस्य समीपे का नदी प्रवहति?
(Ka) Āśramasya samīpe kā nadī pravahati?
(क) आश्रम के पास कौन-सी नदी बहती है?
उत्तर:
गोमती।
Gomatī.
गोमती नदी।
(ख) काले-काले कः वर्षति स्म?
(Kha) Kāle-kāle kaḥ varṣati sma?
(ख) समय-समय पर कौन वर्षा करता था?
उत्तर:
मेघः।
Meghaḥ.
बादल।
(ग) वृक्षेषु कस्य कूजनम् आनन्दं ददाति?
(Ga) Vṛkṣeṣu kasya kūjanam ānandaṁ dadāti?
(ग) वृक्षों पर किसकी चहचहाहट आनंद देती है?
उत्तर:
पक्षिणाम्।
Pakṣiṇām.
पक्षियों की।
(घ) आश्रमे भेदभावं विना के निवसन्ति?
(Gha) Āśrame bhedabhāvaṁ vinā ke nivasanti?
(घ) आश्रम में बिना भेदभाव के कौन रहते हैं?
उत्तर:
सर्वे।
Sarve.
सभी।
प्रश्न 3
(क) आश्रमे स्वच्छन्दं के के विचरन्ति?
(Ka) Āśrame svacchandaṁ ke ke vicaranti?
(क) आश्रम में स्वतंत्र रूप से कौन-कौन विचरण करते हैं?
उत्तर:
पशवः।
Paśavaḥ.
पशु।
(ख) स्वास्थ्यसंरक्षणाय आश्रमे किं किं भवति?
(Kha) Svāsthya-saṁrakṣaṇāya āśrame kiṁ kiṁ bhavati?
(ख) स्वास्थ्य की रक्षा के लिए आश्रम में क्या-क्या होता है?
उत्तर:
व्यायामस्य योग्यता, प्राकृतिकचिकित्सायाः शिक्षणं च भवति।
Vyāyāmasya yogyatā, Prākṛtika-cikitsāyāḥ śikṣaṇaṁ ca bhavati.
व्यायाम की योग्यता और प्राकृतिक चिकित्सा की शिक्षा होती है।
(ग) छात्राणां कृते आश्रमे के के नियमाः आसन्?
(Ga) Chātrāṇāṁ kṛte āśrame ke ke niyamāḥ āsan?
(ग) छात्रों के लिए आश्रम में कौन-कौन से नियम थे?
उत्तर:
आसनम्, प्रातः-स्नानम्, पूर्वम् उत्थानम्, सन्ध्या-ज्ञानम्।
Āsanam, Prātaḥ-snānām, Pūrvam utthānam, Sandhyā-jñānam.
आसन, प्रातः स्नान, शीघ्र उठना और संध्या ज्ञान।
(घ) आश्रमः किं किं शिक्षयति?
(Gha) Āśramaḥ kiṁ kiṁ śikṣayati?
(घ) आश्रम क्या-क्या सिखाता है?
उत्तर:
त्यागं तपस्यां परोपकारं उदारतां च शिक्षयति।
Tyāgaṁ tapasyaṁ paropakāraṁ udāratāṁ ca śikṣayati.
त्याग, तपस्या, परोपकार और उदारता सिखाता है।
प्रश्न 4 (उचितं मेलं)
सूर्योदयात् पूर्वम् — उत्थानम्; स्नानम् — कर्तव्यम्; सहैव — खादनीयम्; पठनम् कक्षायाम् — कर्तव्यम्।
Sūryodayāt pūrvam—utthānam; Snānam—kartavyam; Sahaiva—khādanīyam; Paṭhanam kakṣāyām—kartavyam.
सही जोड़े बनाए गए।
उत्तर:
उपर्युक्त मेल सही हैं।
Uparyukta mela sahī hain.
सभी मिलान सही हैं।
प्रश्न 5 (सन्धि-विच्छेद)
प्राचीनतीर्थस्थलम्
Prācīna-tīrthasthalam
प्राचीन तीर्थ स्थल
उत्तर:
प्राचीनम् + तीर्थस्थलम्
Prācīnam + tīrthasthalam
सन्धि-विच्छेद।
पक्षिणः
Pakṣiṇaḥ
पक्षी
उत्तर:
पक्षि + णः
Pakṣi + ṇaḥ
सन्धि-विच्छेद।
छात्राश्र
Chātrāśra
छात्र + आश्र
उत्तर:
छात्र + आश्र
Chātra + āśra
सन्धि-विच्छेद।
प्रश्न 6 (उदाहरणानुसार)
अलिखत्
Alikhat
उसने लिखा
उत्तर:
लिखति स्म
Likhati sma
लिखता था
अपिबत्
Apibat
उसने पिया
उत्तर:
पिबति स्म
Pibati sma
पीता था
अगच्छत्
Agacchat
वह गया
उत्तर:
गच्छति स्म
Gacchati sma
जाता था
प्रश्न 7
(क) फलदायकानां पञ्च वृक्षाणां नामानि लिखत।
(Ka) Phaladāyakānāṁ pañca vṛkṣāṇāṁ nāmāni likhata.
(क) पाँच फलदार वृक्षों के नाम लिखिए।
उत्तर:
आम्रः, आम्रालकः, पनसः, द्राक्षा, कदली।
Āmraḥ, Āmrālakaḥ, Panasaḥ, Drākṣā, Kadalī.
आम, आँवला, कटहल, अंगूर, केला।
(ख) अनुस्वारसंयुक्तानि पञ्च वाक्यानि लिखत।
(Kha) Anusvāra-saṁyuktāni pañca vākyāni likhata.
(ख) अनुस्वारयुक्त पाँच वाक्य लिखिए।
उत्तर:
अहं विद्यालयं गच्छामि। बालकः पुस्तकं पठति। गुरवः ज्ञानं ददाति। वयं संस्कृतं पठामः। सः फलानि खादति।
Ahaṁ vidyālayaṁ gacchāmi…
पाँच अनुस्वारयुक्त वाक्य।
(ग) जीवने वृक्षाणाम् उपयोगं लिखत।
(Ga) Jīvane vṛkṣāṇām upayogaṁ likhata.
(ग) जीवन में वृक्षों का उपयोग लिखिए।
उत्तर:
वृक्षाः फलानि, छायां, प्राणवायुम्, औषधिं च प्रयच्छन्ति।
Vṛkṣāḥ phalāni, chāyāṁ, prāṇavāyum, auṣadhiṁ ca prayacchanti.
वृक्ष फल, छाया, ऑक्सीजन और औषधि देते हैं।
पाठसार / Moral
यह पाठ आश्रम-जीवन की पवित्रता, प्रकृति से सामंजस्य और अनुशासित जीवन का संदेश देता है।
आश्रम में रहने से मनुष्य में संयम, करुणा, सेवा और त्याग की भावना विकसित होती है।
प्रकृति के समीप रहकर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य भी सुदृढ़ होता है।