इस पाठ “निबन्धतरोः साक्ष्यमपु” में सत्य, न्याय और ईमानदारी का महत्त्व बताया गया है। कथा में मनोहर और धर्मदत्त नामक दो मित्रों का वर्णन है, जिनमें मनोहर सरल, सत्यनिष्ठ और ईमानदार था, जबकि धर्मदत्त चालाक और छलपूर्ण स्वभाव का था। दोनों ने अर्जित धन को वृक्ष के कोटर में छिपाया, परन्तु बाद में धर्मदत्त ने धोखे से सारा धन निकाल लिया और मनोहर पर ही चोरी का आरोप लगा दिया। विवाद राजा के पास पहुँचा, जहाँ सत्य की परीक्षा हुई। वृक्ष के कोटर ने स्वयं साक्ष्य देकर सत्य को प्रकट कर दिया और मनोहर निर्दोष सिद्ध हुआ। राजा ने धर्मदत्त को दंड दिया और मनोहर को सम्मान प्रदान किया। यह पाठ सिखाता है कि सत्य कभी छिपता नहीं और अंततः न्याय की विजय होती है।
दशमः पाठः – निम्बतरो: साक्ष्यमपु
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निम्बतरो: साक्ष्यमपु
Nimbataroḥ sākṣyamapu
वृक्ष से गवाही / प्रमाण
पुरा एकस्मिन् ग्रामे मनोहरः धर्मदत्तश्च द्वे मित्रे प्रतिवसतः।
Purā ekasmin grāme Manoharaḥ Dharmadattaśca dve mitre prativasataḥ.
प्राचीन समय में एक गाँव में मनोहर और धर्मदत्त नामक दो मित्र रहते थे।
तौ विदेशागमनं अर्जयित्वा नीतवन्तौ।
Tau videśāgamanam arjayitvā nītavantau.
वे दोनों विदेश जाकर धन कमा कर लाए।
तौ विचारवन्तौ यत् गृहे इदं धनं सुरक्षितं न स्यात्।
Tau vicāravantau yat gṛhe idaṃ dhanaṃ surakṣitaṃ na syāt.
उन्होंने विचार किया कि घर में यह धन सुरक्षित नहीं रहेगा।
एवं विमृश्य तद् धनं एकस्य वृक्षस्य मूले गत्वा निधितवन्तौ।
Evaṃ vimṛśya tad dhanaṃ ekasya vṛkṣasya mūle gatvā nidhitavantau.
ऐसा सोचकर वे उस धन को एक वृक्ष की जड़ में दबा आए।
यस्य आवश्यकता भविष्यति स अपरः सह आगत्य निष्कासयति।
Yasya āvaśyakatā bhaviṣyati sa aparaḥ saha āgatya niṣkāsayati.
जिसे आवश्यकता होगी, वह दूसरे के साथ आकर धन निकालेगा।
मनोहरः सरलः सत्यनिष्ठः च आसीत् किन्तु धर्मदत्तः अतीव चतुरः छलबुद्धिः आसीत्।
Manoharaḥ saralaḥ satyaniṣṭhaḥ ca āsīt kintu Dharmadattaḥ atīva caturaḥ chalabuddhiḥ āsīt.
मनोहर सरल और सत्यनिष्ठ था, पर धर्मदत्त अत्यन्त चालाक और छलपूर्ण बुद्धि वाला था।
धर्मदत्तः अन्येषु निमग्नः गत्वा सर्वं धनम् आहृतवान्।
Dharmadattaḥ anyeṣu nimagnaḥ gatvā sarvaṃ dhanam āhṛtavān.
अवसर पाकर धर्मदत्त सारा धन निकाल ले गया।
धर्मदत्तः मनोहरम् अवोचत् – “मित्र! चल, किञ्चित् धनम् आहर्तुम्।”
Dharmadattaḥ Manoharam avocat – mitra! cala, kiñcit dhanam āhartum.
धर्मदत्त ने मनोहर से कहा – मित्र! चलो थोड़ा धन निकालें।
तौ अपि वृक्षस्य अन्तिकम् आगतवन्तौ।
Tau api vṛkṣasya antikam āgatavantau.
वे दोनों वृक्ष के पास पहुँचे।
तत्र धनं नास्ति।
Tatra dhanaṃ nāsti.
वहाँ धन नहीं था।
धर्मदत्तः मनोहरम् आक्षेपवान् यत् सः धनम् अपहृतम् इति।
Dharmadattaḥ Manoharam ākṣepavān yat saḥ dhanam apahṛtam iti.
धर्मदत्त ने मनोहर पर धन चुराने का आरोप लगाया।
ततस्तौ विवादेन राजानं प्रति गतवन्तौ।
Tatastau vivādena rājānaṃ prati gatavantau.
फिर दोनों विवाद लेकर राजा के पास गए।
द्वयोः विवादं श्रुत्वा राजा अवदत्।
Dvayoḥ vivādaṃ śrutvā rājā avadat.
दोनों का विवाद सुनकर राजा ने कहा।
सत्यं न कथयति धर्मदत्तः इति प्रसङ्गः आसीत्।
Satyaṃ na kathayati Dharmadattaḥ iti prasaṅgaḥ āsīt.
यह बात सामने आई कि धर्मदत्त सत्य नहीं बोल रहा है।
राजा सैनिकान् आदिश्य अवदत्।
Rājā sainikān ādiśya avadat.
राजा ने सैनिकों को आदेश दिया।
सैनिकाः खननं कृत्वा बहिः आनयन्ति।
Sainikāḥ khananaṃ kṛtvā bahiḥ ānayanti.
सैनिकों ने खुदाई कर धन बाहर निकाल लिया।
तत्र वृक्षस्य मूले सर्वं निधित्वा आसीत्।
Tatra vṛkṣasya mūle sarvaṃ nidhitvā āsīt.
वहाँ वृक्ष की जड़ में सारा धन दबा हुआ था।
राजा सर्वं अपि ज्ञातवान्।
Rājā sarvaṃ api jñātavān.
राजा ने सब कुछ जान लिया।
स पितरं पुत्रस्य कारागारे निषिद्धवान्।
Sa pitaraṃ putrasya kārāgāre niṣiddhavān.
राजा ने पुत्र को कारागार में बंद कर दिया।
तत्सर्वं धनं सुपुत्राय मनोहराय समर्पितवान्।
Tatsarvaṃ dhanaṃ suputrāya Manoharāya samarpitavān.
सारा धन मनोहर को सौंप दिया गया।
छलबुद्धिः न दीर्घकालं आह्लादं करोति।
Chalabuddhiḥ na dīrghakālaṃ āhlādaṃ karoti.
छलपूर्ण बुद्धि लंबे समय तक सुख नहीं देती।
अन्ततः सत्यस्य एव विजयः भवति।
Antataḥ satyasya eva vijayaḥ bhavati.
अन्त में सत्य की ही विजय होती है।
अभ्यास – सभी प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1
उच्चारणं कृत्वा पुस्तिकायां च लिखत –
Uccāraṇaṃ kṛtvā pustikāyāṃ ca likhata.
उच्चारण करके पुस्तिका (कॉपी) में लिखिए।
(क) धर्मदत्तः निषिद्धवान् द्रव्यमध्ये।(ख) मतेयम् निष्कासयति सत्यनिष्ठः।
(ग) छलबुद्धिः आह्लादं आहरिष्यति। Dharmadattaḥ niṣiddhavān dravyamadhye.
Mateyam niṣkāsayati satyaniṣṭhaḥ.
Chalabuddhiḥ āhlādaṃ āhariṣyati. धर्मदत्त ने धन के बीच में छिपा दिया।
सत्यनिष्ठ व्यक्ति धन को बाहर निकालता है।
छलपूर्ण बुद्धि सुख को नष्ट कर देती है।
उत्तर:
एते वाक्यानि शुद्धोच्चारणेन लिखनीयानि।
Ete vākyāni śuddhoccāraṇena likhanīyāni.
इन वाक्यों को शुद्ध उच्चारण के साथ लिखना चाहिए।
प्रश्न 2
एकपदेन उत्तरत –
Ekapadena uttarata.
एक शब्द में उत्तर दीजिए।
यथा – मनोहरस्य मित्रं कः आसीत्?
Yathā – Manoharasya mitraṃ kaḥ āsīt?
जैसे – मनोहर का मित्र कौन था?
उत्तर:
धर्मदत्तः।
Dharmadattaḥ.
धर्मदत्त।
(क) तौ अर्जितधनं कुत्र निषिद्धवन्तौ? Tau arjitadhanaṃ kutra niṣiddhavantau? दोनों ने कमाया हुआ धन कहाँ छिपाया?
उत्तर:
वृक्षस्य मूले।
Vṛkṣasya mūle.
वृक्ष की जड़ में।
(ख) मनोहरस्य स्वभावः कीदृशः आसीत्? Manoharasya svabhāvaḥ kīdṛśaḥ āsīt? मनोहर का स्वभाव कैसा था?
उत्तर:
सरलः।
Saralaḥ.
सरल।
(ग) अन्येषु सर्वं धनं कः आहृतवान्? Anyeṣu sarvaṃ dhanaṃ kaḥ āhṛtavān? अवसर पाकर सारा धन किसने निकाल लिया?
उत्तर:
धर्मदत्तः।
Dharmadattaḥ.
धर्मदत्त।
(घ) वृक्षकूटे कः आसीत्? Vṛkṣakūṭe kaḥ āsīt? वृक्ष के कोटर में कौन था?
उत्तर:
निबन्धः।
Nibandhaḥ.
वृक्ष का कोटर (निबन्ध)।
प्रश्न 3
मञ्जूषातः क्रियापदानि चित्वा वाक्यानि पूरयत –
Manjūṣātaḥ kriyāpadāni citvā vākyāni pūrayata.
मञ्जूषा से उचित क्रियापद चुनकर वाक्य पूरे कीजिए।
(क) तौ विदेशात् धनं नीतवन्तौ।
Tau videśāt dhanaṃ nītavantau.
वे दोनों विदेश से धन ……… लाए।
उत्तर:
तौ विदेशात् धनं अर्जयित्वा नीतवन्तौ।
Tau videśāt dhanaṃ arjayitvā nītavantau.
वे दोनों विदेश से धन कमाकर लाए।
(ख) धर्मदत्तः अतीव चतुरः आसीत्। Dharmadattaḥ atīva caturaḥ āsīt. धर्मदत्त अत्यन्त चतुर ……… था।
उत्तर:
धर्मदत्तः अतीव चतुरः छलबुद्धिः आसीत्।
Dharmadattaḥ atīva caturaḥ chala-buddhiḥ āsīt.
धर्मदत्त अत्यन्त चतुर और छलपूर्ण बुद्धि वाला था।
(ग) ततः तौ विवादेन प्रति गच्छतः। Tataḥ tau vivādena prati gacchataḥ. इसके बाद वे विवाद लेकर ……… के पास गए।
उत्तर:
ततः तौ विवादेन राजानं प्रति गच्छतः।
Tataḥ tau vivādena rājānaṃ prati gacchataḥ.
इसके बाद वे विवाद लेकर राजा के पास गए।
(घ) निबन्धः न वदति। Nibandhaḥ na vadati. निबन्ध ……… नहीं बोलता।
उत्तर:
निबन्धः असत्यं न वदति।
Nibandhaḥ asatyaṃ na vadati.
निबन्ध असत्य नहीं बोलता।
(ङ) स पिता पुत्रं च कारागारे । Sa pitā putraṃ ca kārāgāre . उस पिता ने पुत्र को कारागार में ………।
उत्तर:
स पिता पुत्रं च कारागारे निषिद्धवान्।
Sa pitā putraṃ ca kārāgāre niṣiddhavān.
उस पिता ने पुत्र को कारागार में बंद कर दिया।
प्रश्न 4
रेखाङ्कित पदेषु कारकस्य नाम लेखं कुरुत –
Rekhāṅkita padeṣu kārakasya nāma lekhaṃ kuruta.
रेखांकित शब्दों का कारक लिखिए।
(क) तौ विदेशात् धनं अर्जयित्वा नीतवन्तौ।
Tau videśāt dhanaṃ arjayitvā nītavantau.
वे विदेश से धन कमाकर लाए।
उत्तर:
विदेशात् – अपादान कारकम्
Videśāt – Apādāna kārakam
कहाँ से – अपादान कारक।
(ख) स अन्येषु सह आगत्य निष्कासयति। Sa anyeṣu saha āgatya niṣkāsayati. वह दूसरों के अवसर पर जाकर निकालता है।
उत्तर:
अन्येषु – अधिकरण कारकम्
Anyeṣu – Adhikaraṇa kārakam
कहाँ पर – अधिकरण कारक।
(ग) द्वौ अपि वृक्षस्य अन्तिकम् आगतवन्तौ। Dvau api vṛkṣasya antikam āgatavantau. दोनों वृक्ष के पास पहुँचे।
उत्तर:
वृक्षस्य अन्तिकम् – अधिकरण कारकम्
Vṛkṣasya antikam – Adhikaraṇa kārakam
स्थान बताने वाला कारक।
(घ) राजा सैनिकान् आदिश्य अवदत्। Rājā sainikān ādiśya avadat. राजा ने सैनिकों को आदेश दिया।
उत्तर:
सैनिकान् – कर्म कारकम्
Sainikān – Karma kārakam
जिस पर क्रिया होती है।
(ङ) सैनिकाः जनं आनिवर्तन्ते। Sainikāḥ janaṃ ānivartante. सैनिक व्यक्ति को बाहर लाते हैं।
उत्तर:
जनं – कर्म कारकम्
Janaṃ – Karma kārakam
कर्म का बोध।
प्रश्न 6
रेखाङ्कितपदानि अधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत –
Rekhāṅkita-padāni adhikṛtya praśna-nirmāṇaṃ kuruta.
रेखांकित शब्दों को लेकर प्रश्न बनाइए।
(क) एकस्मिन् ग्रामे द्वे मित्रे प्रतिवसतः।
Ekasmin grāme dve mitre prativasataḥ.
एक गाँव में दो मित्र रहते थे।
उत्तर:
कस्मिन् ग्रामे द्वे मित्रे प्रतिवसतः?
Kasmin grāme dve mitre prativasataḥ?
किस गाँव में दो मित्र रहते थे?
(ख) तौ विदेशात् धनं अर्जयित्वा नीतवन्तौ। Tau videśāt dhanaṃ arjayitvā nītavantau. वे धन कमाकर लाए।
उत्तर:
तौ विदेशात् धनं किं कृत्वा नीतवन्तौ?
Tau videśāt dhanaṃ kiṃ kṛtvā nītavantau?
वे विदेश से धन क्या करके लाए?
(ग) धर्मदत्तः अतीव चतुरः छलबुद्धिः आसीत्। Dharmadattaḥ atīva caturaḥ chalabuddhiḥ āsīt. धर्मदत्त बहुत चालाक था।
उत्तर:
धर्मदत्तः कीदृशः आसीत्?
Dharmadattaḥ kīdṛśaḥ āsīt?
धर्मदत्त कैसा था?
प्रश्न 7
संस्कृतभाषायाम् अनुवादं कुरुत –
Saṃskṛta-bhāṣāyām anuvādaṃ kuruta.
हिंदी वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद कीजिए।
(क) एक गाँव में दो मित्र रहते थे।
Ek gā̃v meṃ do mitra rahte the.
एक गाँव में दो मित्र रहते थे।
उत्तर:
एकस्मिन् ग्रामे द्वौ मित्रौ प्रतिवसतः।
Ekasmin grāme dvau mitrau prativasataḥ.
एक गाँव में दो मित्र रहते थे।
(ख) वे दोनों विदेश से धन अर्जित कर ले आए। Ve dono videś se dhan kamākar lāe. वे विदेश से धन कमाकर आए।
उत्तर:
तौ विदेशात् धनं अर्जयित्वा नीतवन्तौ।
Tau videśāt dhanaṃ arjayitvā nītavantau.
वे दोनों विदेश से धन कमाकर लाए।
(ग) मनोहर सरल और सत्यनिष्ठ था। Manohar saral aur satyaniṣṭh thā. मनोहर ईमानदार था।
उत्तर:
मनोहरः सरलः सत्यनिष्ठः च आसीत्।
Manoharaḥ saralaḥ satyaniṣṭhaḥ ca āsīt.
मनोहर सरल और सत्यनिष्ठ था।
(घ) सैनिक वृक्ष के कोटर में स्थित व्यक्ति को बाहर ले आए। Sainik vṛkṣ ke koṭar meṃ sthit vyakti ko bāhar lāe. सैनिक व्यक्ति को बाहर लाए।
उत्तर:
सैनिकाः वृक्षकूटे स्थितं जनं बहिः आनयन्।
Sainikāḥ vṛkṣakūṭe sthitaṃ janaṃ bahiḥ ānayan.
सैनिक वृक्ष के कोटर में स्थित व्यक्ति को बाहर ले आए।