इस पाठ में राजा दिलीप के कर्तव्य, त्याग और धर्मनिष्ठा का अत्यन्त प्रभावशाली चित्रण किया गया है। राजा दिलीप अपने गुरु की धेनु की रक्षा के लिए अपने प्राणों का त्याग करने को भी तत्पर हो जाते हैं। सिंह के रूप में आई परीक्षा में राजा का क्षत्रिय धर्म, शरणागत की रक्षा और सत्यनिष्ठा प्रकट होती है। राजा के इस महान त्याग से प्रसन्न होकर धेनु नन्दिनी उन्हें आशीर्वाद देती है। यह पाठ सिखाता है कि सच्चा मनुष्य वही है जो कर्तव्य और धर्म के लिए स्वार्थ का त्याग करे।
Path – Singh Dilipa Samvaad
एकादशः पाठः — सिंह-दिलीपयोः संवादः
Ekādaśaḥ pāṭhaḥ — Siṁha-Dilīpayōḥ saṁvādaḥ
ग्यारहवाँ पाठ — सिंह और दिलीप का संवाद
महाराजः दिलीपः सिंहं हन्तुं धनुः आकृष्य सज्जः भवति।
Mahārājaḥ Dilīpaḥ siṁhaṁ hantuṁ dhanuḥ ākṛṣya sajjaḥ bhavati.
महाराज दिलीप सिंह को मारने के लिए धनुष खींचकर तैयार हो जाते हैं।
सिंहः — (उच्चैः हसन्) महिपाल! तव श्रमः व्यर्थः।
Siṁhaḥ — (uccaiḥ hasan) Mahipāla! tava śramaḥ vyarthaḥ.
सिंह (ज़ोर से हँसते हुए) — हे राजा! तुम्हारा परिश्रम व्यर्थ है।
भवान् मां हन्तुं समर्थः न भविष्यति।
Bhavān māṁ hantuṁ samarthaḥ na bhaviṣyati.
तुम मुझे मारने में सक्षम नहीं हो सकोगे।
दिलीपः — भवान् कः? किं इच्छति?
Dilīpaḥ — bhavān kaḥ? kiṁ icchati?
दिलीप — तुम कौन हो? क्या चाहते हो?
सिंहः — भगवतः शङ्करस्य सेवकः अहं कुम्भोदरः अस्मि।
Siṁhaḥ — bhagavataḥ Śaṅkarasya sevakaḥ ahaṁ Kumbhodaraḥ asmi.
सिंह — मैं भगवान शंकर का सेवक कुम्भोदर हूँ।
अहं एतां धेनुं निगृह्णामि।
Ahaṁ etāṁ dhenuṁ nigṛhṇāmi.
मैं इस गाय को पकड़ रहा हूँ।
दिलीपः — भवान् एवं किम् वदति?
Dilīpaḥ — bhavān evaṁ kim vadati?
दिलीप — आप ऐसा क्यों कहते हैं?
सिंहः — माता पार्वती इमां देवदारुखण्डे प्रव्रत पालयति।
Siṁhaḥ — Mātā Pārvatī imāṁ devadāru-khaṇḍe pravrata pālayati.
सिंह — माता पार्वती इस देवदारु वन में इसका पालन करती हैं।
एकदा एकेन गजेन अन्यवृक्षस्य त्वक् उच्छिद्यमाना गजस्य दुष्कृतेन माता दुःखिता अभवत्।
Ekadā ekena gajena anyavṛkṣasya tvak ucchidyamānā gajasya duṣkṛtena mātā duḥkhitā abhavat.
एक बार हाथी द्वारा दूसरे वृक्ष की छाल छीले जाने से, उसकी दुष्टता के कारण माता पार्वती दुःखी हो गईं।
ततः प्रभृति महादेवस्य रक्षणार्थं अहम् आदिष्टः।
Tataḥ prabhṛti Mahādevasya rakṣaṇārthaṁ aham ādiṣṭaḥ.
तब से महादेव की आज्ञा से मुझे रक्षा के लिए नियुक्त किया गया।
तदा प्रभृति अस्याः गवायाः स्थितोस्मि।
Tadā prabhṛti asyāḥ gavāyāḥ sthito’smi.
तब से मैं इस गाय के पास रहता हूँ।
अधुना भाग्यवशात् एषा धेनुः आगता।
Adhunā bhāgyavaśāt eṣā dhenuḥ āgatā.
अब संयोगवश यह गाय यहाँ आ गई है।
अतएव एतां धेनुं त्यज।
Ataeva etāṁ dhenuṁ tyaja.
इसलिए इस गाय को छोड़ दो।
दिलीपः — कुम्भोदर! देवतानां देवः महादेवः जगतः रक्षकः परिपालकश्च।
Dilīpaḥ — Kumbhodara! devatānāṁ devaḥ Mahādevaḥ jagataḥ rakṣakaḥ paripālakaśca.
दिलीप — कुम्भोदर! देवों के देव महादेव संसार के रक्षक और पालनकर्ता हैं।
परन्तु इयं गुरोः धेनुः।
Parantu iyaṁ guroḥ dhenuḥ.
लेकिन यह मेरे गुरु की गाय है।
मया नियोज्येन रक्षणीया।
Mayā niyojyena rakṣaṇīyā.
इसकी रक्षा करना मेरा कर्तव्य है।
एतदर्थं एतां परित्यज्य मां भक्षय।
Etadarthaṁ etāṁ parityajya māṁ bhakṣaya.
इसलिए इस गाय को छोड़कर मुझे खा लो।
सिंहः — (विस्मितः) विस्तृतं सामर्थ्यं नवं चापि सुन्दरं शरीरं च विहाय किमर्थं भवान् एकस्याः धेनोः रक्षार्थं स्वप्राणान् त्यक्तुम् इच्छति?
Siṁhaḥ — (vismitaḥ) vistṛtaṁ sāmarthyaṁ navaṁ cāpi sundaraṁ śarīraṁ ca vihāya kimarthaṁ bhavān ekasyāḥ dhenoḥ rakṣārthaṁ svaprāṇān tyaktum icchati?
सिंह (आश्चर्य से) — इतनी शक्ति और सुंदर शरीर छोड़कर आप एक गाय की रक्षा के लिए अपने प्राण क्यों देना चाहते हैं?
त्यजतु मूर्खत्वम्।
Tyajatu mūrkhatvam.
इस मूर्खता को छोड़ दीजिए।
धेनोः जीवनस्य अपेक्षा भवतः जीवनं वरम्।
Dhenoḥ jīvanasya apekṣā bhavataḥ jīvanaṁ varam.
गाय के जीवन की अपेक्षा आपका जीवन अधिक मूल्यवान है।
दिलीपः — “क्षत्रात् त्रायते” इति क्षत्रियः कथ्यते।
Dilīpaḥ — “kṣatrāt trāyate” iti kṣatriyaḥ kathyate.
दिलीप — जो क्षति से रक्षा करता है वही क्षत्रिय कहलाता है।
क्षत्रियः सन् मया धेनुः निश्चयेन रक्षणीया।
Kṣatriyaḥ san mayā dhenuḥ niścayena rakṣaṇīyā.
क्षत्रिय होने के नाते मुझे इस गाय की निश्चय ही रक्षा करनी है।
क्षत्रियत्वे नष्टे सति नास्ति किञ्चित् प्रयोजनम् राज्ञः प्राणैः वा।
Kṣatriyatve naṣṭe sati nāsti kiñcit prayojanam rājñaḥ prāṇaiḥ vā.
क्षत्रियत्व नष्ट हो जाने पर राजा के जीवन का कोई प्रयोजन नहीं रहता।
अतएव मम शरीरं भक्षयतु।
Ataeva mama śarīraṁ bhakṣayatu.
इसलिए मेरा शरीर खा लीजिए।
इमां धेनुं त्यज।
Imāṁ dhenuṁ tyaja.
इस गाय को छोड़ दीजिए।
सिंहः — भवतु, स्वशरीरं समर्पयतु।
Siṁhaḥ — bhavatu, svaśarīraṁ samarpayatu.
सिंह — ठीक है, अपना शरीर समर्पित कीजिए।
(यावत् राजा सिंहस्य पुरतः अचलवत् स्वशरीरं समर्पयति तावत् सिंहः अन्तर्हितः भवति।)
(Yāvat rājā siṁhasya purataḥ acalavat svaśarīraṁ samarpayati tāvat siṁhaḥ antarhitaḥ bhavati.)
(राजा जैसे ही अडिग होकर अपना शरीर समर्पित करता है, वैसे ही सिंह अदृश्य हो जाता है।)
नन्दिनी (धेनुः) — राजन्! मया भवान् परीक्षितः।
Nandinī (dhenuḥ) — Rājan! mayā bhavān parīkṣitaḥ.
नन्दिनी — हे राजन्! मैंने आपकी परीक्षा ली।
शरणागतानां परित्राणे भवतः अनुपमा निष्ठा।
Śaraṇāgatānāṁ paritrāṇe bhavataḥ anupamā niṣṭhā.
शरण में आए लोगों की रक्षा में आपकी अनुपम निष्ठा है।
अहं नितरां प्रसन्ना।
Ahaṁ nitarāṁ prasannā.
मैं अत्यन्त प्रसन्न हूँ।
अचिरेण ते कामना पूर्णा भविष्यति।
Acireṇa te kāmanā pūrṇā bhaviṣyati.
शीघ्र ही तुम्हारी कामना पूर्ण होगी।
शब्दार्थ (Vocabulary)
| Sanskrit | Pronunciation | Hindi Meaning |
|---|---|---|
| हन्तुम् | Hantum | मारने के लिए |
| महिपाल | Mahipāl | राजा |
| पालयति | Pālayati | पालन करता है |
| त्वक् | Tvak | छाल |
| दुष्कृतेन | Duṣkṛtena | दुष्टता से |
| रक्षणार्थम् | Rakṣaṇārtham | रक्षा के लिए |
| धेनुः | Dhenūḥ | गाय |
| त्यज | Tyaja | छोड़ो |
| परिपालकः | Paripālakaḥ | पालन करने वाला |
| मूर्खत्वम् | Mūrkhatvam | मूर्खता |
| वरम् | Varam | श्रेष्ठ |
| अन्तर्हितः | Antarhitaḥ | अदृश्य |
| शरणागतानाम् | Śaraṇāgatānām | शरण में आए |
| नितराम् | Nitarām | अत्यंत |
| आशिषा | Āśiṣā | आशीर्वाद |
| क्षत्रियः | Kṣatriyaḥ | रक्षक |
| प्रयोजनम् | Prayojanam | उद्देश्य |
| दातुम् | Dātum | देने के लिए |
| कोऽर्थः | Ko’rthaḥ | क्या लाभ |
| गृहीतः | Gṛhītaḥ | ग्रहण किया |
| आदिष्टः | Ādiṣṭaḥ | आदेशित |
| स्थितोस्मि | Sthito’smi | मैं स्थित हूँ |
| उच्छिद्यमानम् | Ucchidyamānam | छील दिया |
| मामर्थम् | Māmartham | मेरे लिए |
| रक्षणीयम् | Rakṣaṇīyam | बचाने योग्य |
अभ्यास प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1
उच्चारणं कृत्वा पुस्तिकायां च लिखत।
Uccāraṇaṁ kṛtvā pustikāyāṁ ca likhata.
उच्चारण करके कॉपी में लिखिए।
उत्तर:
सिंह-दिलीपयोः, हनिष्यामि, आत्मसमर्पणम्, उच्छिद्यम्, दुष्कृत्या, स्थितोस्मि, परित्यज, त्यजुमिच्छति, जीवितक्षुद्, क्षतात्, क्षत्रियत्वे, अन्तर्हितः
Siṁha-dilīpayoḥ, haniṣyāmi, ātmasamarpaṇam, ucchidyam, duṣkṛtyā, sthitosmi, parityaja, tyajumicchati, jīvitakṣud, kṣatāt, kṣatriyatve, antarhitaḥ
ये सभी शब्द सही उच्चारण के साथ लिखे जाते हैं।
प्रश्न 2 (क)
कुम्भोदरः कस्य सेवकः आसीत्?
Kumbhodaraḥ kasya sevakaḥ āsīt?
कुम्भोदर किसका सेवक था?
उत्तर:
कुम्भोदरः भगवतः शङ्करस्य सेवकः आसीत्।
Kumbhodaraḥ bhagavataḥ Śaṅkarasya sevakaḥ āsīt.
कुम्भोदर भगवान शंकर का सेवक था।
प्रश्न 2 (ख)
माता पार्वती कं वृक्षं पुत्रवत् पालितवती?
Mātā Pārvatī kaṁ vṛkṣaṁ putravat pālitavatī?
माता पार्वती ने किस वृक्ष को पुत्र की तरह पाला?
उत्तर:
माता पार्वती देवदारुवृक्षं पुत्रवत् पालितवती।
Mātā Pārvatī devadāruvṛkṣaṁ putravat pālitavatī.
माता पार्वती ने देवदारु वृक्ष को पुत्र की तरह पाला।
प्रश्न 2 (ग)
क्षतात् कः त्रायते?
Kṣatāt kaḥ trāyate?
चोट या विपत्ति से कौन बचाता है?
उत्तर:
क्षत्रियः क्षतात् त्रायते।
Kṣatriyaḥ kṣatāt trāyate.
क्षत्रिय विपत्ति से बचाता है।
प्रश्न 2 (घ)
राजा कस्य पुरतः अवनत्य स्वशरीरं समर्पयति?
Rājā kasya purataḥ avanatya svaśarīraṁ samarpayati?
राजा किसके सामने झुककर अपना शरीर समर्पित करता है?
उत्तर:
राजा सिंहस्य पुरतः अवनत्य स्वशरीरं समर्पयति।
Rājā siṁhasya purataḥ avanatya svaśarīraṁ samarpayati.
राजा सिंह के सामने झुककर अपना शरीर समर्पित करता है।
प्रश्न 3
निम्नलिखित पदानि निर्देशानुसार परिवर्तयत।
Nimnalikhitāni padāni nirdiśānusāraṁ parivartayata.
दिए गए शब्दों को निर्देशानुसार बदलिए।
उत्तर:
बालकः — बालकाः ।
वानरः — वानरेण ।
कुम्भोदरः — कुम्भोदरम् ।
गजः — गजानाम् ।
Bālakaḥ — bālakāḥ.
Vānaraḥ — vānarena.
Kumbhodaraḥ — kumbhodaram.
Gajaḥ — gajānām.
बालक (बहुवचन),
वानर के द्वारा,
कुम्भोदर को,
हाथियों का।
प्रश्न 4 — वाक्यशुद्धिं कुरुत
प्रश्न 4 (क)
इमं देवदारु वृक्षं पुत्रवत् पालितवती।
Imaṁ devadāru vṛkṣaṁ putravat pālitavatī.
इस देवदारु वृक्ष को पुत्र की तरह पाला।
उत्तर:
इमां देवदारुवृक्षं पुत्रवत् पालितवती।
Imāṁ devadāruvṛkṣaṁ putravat pālitavatī.
उस देवदारु वृक्ष को पुत्र की तरह पाला।
प्रश्न 4 (ख)
तावत् अस्य गवायां स्थितोस्मि।
Tāvat asya gavāyāṁ sthitosmi.
तब तक मैं इस गाय में स्थित हूँ।
उत्तर:
तदा प्रभृति अस्याः गवायाः स्थितोस्मि।
Tadā prabhṛti asyāḥ gavāyāḥ sthitosmi.
तब से मैं इस गाय के पास स्थित हूँ।
प्रश्न 4 (ग)
इयं गुरोः धेनुः मया निश्चयेन रक्षणीया।
Iyaṁ guroḥ dhenuḥ mayā niścayena rakṣaṇīyā.
यह गुरु की गाय है, जिसे मुझे अवश्य बचाना चाहिए।
उत्तर:
इयं गुरोः धेनुः। मया निश्चयेन रक्षणीया।
Iyaṁ guroḥ dhenuḥ. Mayā niścayena rakṣaṇīyā.
यह गुरु की गाय है। मुझे निश्चय ही इसकी रक्षा करनी चाहिए।
प्रश्न 4 (घ)
इमां धेनुं त्यज।
Imāṁ dhenuṁ tyaja.
इस गाय को छोड़ दो।
उत्तर:
इमां धेनुं त्यज।
Imāṁ dhenuṁ tyaja.
इस गाय को छोड़ दो।
प्रश्न 5
सन्धि-विच्छेदं कुरुत।
Sandhi-vicchedaṁ kuruta.
संधि-विच्छेद कीजिए।
उत्तर:
मामर्थम् = माम् + अर्थम् ।
उच्छिद्यमानम् = उत् + छिद्यमानम् ।
स्थितोस्मि = स्थितः + अस्मि ।
Māmartham = mām + artham.
Ucchidyamānam = ut + chidyamānam.
Sthitosmi = sthitaḥ + asmi.
प्रश्न 6
मञ्जूषातः पदानि चित्वा वाक्यानि पूरयत।
Mañjūṣātaḥ padāni citvā vākyāni pūrayata.
मंजूषा से शब्द चुनकर वाक्य पूरे कीजिए।
उत्तर:
(क) इमां देवदारुवृक्षं पुत्रवत् पाल्यवती।
(ख) गजस्य अनया दुष्कृत्या माता अतीव दुःखिता अभवत्।
(ग) भवान् मां हन्तुं समर्थः न भविष्यति।
(घ) क्षतात् त्रायते इति क्षत्रियः।
(ङ) इमां धेनुं त्यज।
Putravat, mātā, bhavān, kṣatāt, tyaja
प्रश्न 7
अधोलिखितपदानि प्रमुख वाक्यरचना कुरुत।
Adholikhitapadāni pramukha vākyaracanā kuruta.
दिए गए शब्दों से वाक्य बनाइए।
उत्तर:
सिंहः वनस्य राजा अस्ति।
राजा प्रजाः पालयति।
सेवकः स्वामिनं सेवते।
छात्रवर्गः अध्ययनं करोति।
Siṁhaḥ vanasya rājā asti.
Rājā prajāḥ pālayati.
Sevakaḥ svāminaṁ sevate.
Chātravargaḥ adhyayanaṁ karoti.
सिंह वन का राजा है।
राजा प्रजा की रक्षा करता है।
सेवक अपने स्वामी की सेवा करता है।
छात्रवर्ग पढ़ाई करता है।