चन्द्रशेखर आजाद भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के साहसी और अदम्य योद्धा थे। जालियाँवाला बाग कांड की क्रूरता ने उनके मन में ब्रिटिश शासकों के विरुद्ध संघर्ष की ज्वाला प्रज्वलित की। वे कम उम्र में ही आंदोलनों में सम्मिलित हुए और अनेक यातनाएँ सहते हुए भी “भारत माता की जय” का उद्घोष करते रहे। अंत में उन्होंने स्वयं को गोली मारकर ‘आजाद’ नाम की अपनी प्रतिज्ञा को सच्चा सिद्ध किया और राष्ट्र के लिए अमर हो गए।
द्वादशः पाठः — चन्द्रशेखरः आजादः
पाठ्यांशः (Lesson Text)
“तव किं नाम अस्ति?”
(tava kiṃ nāma asti?)
“तुम्हारा नाम क्या है?”
“आजादः।”
(ājādaḥ)
“आज़ाद।”
“कस्तव पिता?”
(kas tava pitā?)
“तुम्हारे पिता कौन हैं?”
“स्वाभिमानः।”
(svābhimānaḥ)
“स्वाभिमान ही मेरे पिता हैं।”
“क्व निवासस्थानम्?”
(kva nivāsasthānam?)
“तुम्हारा निवास-स्थान कहाँ है?”
“कारागारः।”
(kārāgāraḥ)
“जेल ही मेरा घर है।”
न्यायाधीशस्य प्रश्नानाम् एतादृशानि उत्तराणि भारतस्य परतन्त्रताकाले यः अघच्छत् सः आसीत् चन्द्रशेखरः ‘आजादः’।
(nyāyādhīśasya praśnānām etādṛśāni uttarāṇi bhāratasya paratantratākāle yaḥ aghacchat sa āsīt candraśekharaḥ “ājādaḥ”.)
ऐसे प्रश्नों के उत्तर देने वाला बालक परतन्त्र भारत के समय का क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आज़ाद था।
संस्कृतस्य एव छात्रः नाम्ना चन्द्रशेखरः तदानीं वाराणस्यां वसति स्म।
(saṃskṛtasya eva chātraḥ nāmnā candraśekharaḥ tadānīṃ vārāṇasyāṃ vasati sma.)
वह संस्कृत का विद्यार्थी था, नाम चन्द्रशेखर, जो उस समय वाराणसी में रहता था।
एकादशवर्षदेशीयः अयं यदा ‘जालियावाला’-काण्डस्य नृशंसताम् अशृणोत् तदा एव प्रतिज्ञाम् अकरोत्— “येन केनापि प्रकारेण इदं कुवशासनतन्त्रम् उन्मूलनीयं” इति।
(ekādaśa-varṣa-deśīyaḥ ayaṃ yadā “jāliāvālā”-kāṇḍasya nṛśaṃsatām aśṛṇot tadā eva pratijñām akarot — “yena kenāpi prakāreṇa idaṃ kuvaśāsanatanttram unmūlanīyaṃ” iti.)
लगभग ग्यारह वर्ष की आयु में जालियाँवाला बाग कांड की क्रूरता सुनते ही उसने प्रतिज्ञा की— “किसी भी प्रकार इस अत्याचारी शासन-तंत्र को जड़ से उखाड़ना होगा।”
कालेन सह भारते ब्रिटिश-धुरन्धरः आगच्छत्, तस्य शासनस्य सक्ताय आयोजनं कृत्वा, तस्य बहिष्काराय भारतीयाः जनाः निष्ठुरम् अकुर्वन्।
(kālena saha bhārate briṭiś-dhurandharaḥ āgacchat, tasya śāsanasya saktāya āyojanaṃ kṛtvā, tasya bahiṣkārāya bhāratīyāḥ janāḥ niṣṭhuram akurvan.)
समय बीतने पर ब्रिटिश शासक भारत आए; उनके स्वागत के लिए आयोजन हुआ, परन्तु उनके बहिष्कार के लिए भारतीयों ने दृढ़ निश्चय किया।
वाराणस्यां कर्मीसङ्गलेशे प्रसिद्धस्य संस्कृतविद्यालयस्य प्राङ्गणे आजादः बहिष्कारान्दोलनेन सम्मिलितः।
(vārāṇasyāṃ karmīsaṅgaleśe prasiddhasya saṃskṛta-vidyālayasya prāṅgaṇe ājādaḥ bahiṣkār-āndolanena sammilitaḥ.)
वाराणसी के प्रसिद्ध “कर्मीसंघ” के संस्कृत विद्यालय के प्रांगण में आज़ाद बहिष्कार आंदोलन में सम्मिलित हुए।
राजपुरुषैः सः कारागारे नीतः, कापट्येन दण्डनानन्तरं न्यायालयम् आनितः, न्यायाधीशेन पञ्चदशवर्षीयः बालकः वेददण्डेन ताडितः तथा कारागाराय नीतः।
(rājapuruṣaiḥ saḥ kārāgāre nītaḥ, kāpaṭyena daṇḍanānantaraṃ nyāyālayam ānitaḥ, nyāyādhīśena pañcadaśa-varṣīyaḥ bālakaḥ vedadaṇḍena tāḍitaḥ tathā kārāgārāya nītaḥ.)
सरकारी कर्मचारियों ने उसे जेल ले जाकर कपटपूर्वक दण्ड दिया, न्यायालय में उपस्थित कर न्यायाधीश ने पन्द्रह वर्ष के उस बालक को बेंतों से खूब पीटा और फिर जेल भेज दिया।
ताड्यमानः सः पुनः पुनः “भारत-माता की जय” इति घोषं कृत्वा यावत् मूर्छितः नाभवत् तावत् नादं अकरोत्।
(tāḍyamānaḥ saḥ punaḥ punaḥ “bhārata-mātā kī jaya” iti ghoṣaṃ kṛtvā yāvat mūrcchitaḥ nābhavat tāvat nādaṃ akarot.)
मार खाते हुए भी वह बार-बार “भारत माता की जय” का नारा लगाता रहा, जब तक कि वह मूर्छित न हो गया।
अन्ये राजपुरुषाः तं सर्वतः आकृष्य प्रयागस्य अल्फ्रेड-वाटिकायां घेरितवन्तः, भूशुण्डिगुलिका तस्य जङ्घायां प्रविष्टा, अन्ते आत्मनः ‘आजाद्’ इति नाम साधयितुं स्वयमेव अन्तिमां गुलिकां आत्मनि क्षिप्तवान्।
(anye rājapuruṣāḥ taṃ sarvataḥ ākṛṣya prayāgasya alfred-vāṭikāyāṃ gheritavantaḥ, bhuśuṇḍi-gulikā tasya jaṅghāyāṃ praviṣṭā, ante ātmanaḥ “ājād” iti nāma sādhayituṃ svayameva antimāṃ gulikāṃ ātmani kṣiptavān.)
बाद में अंग्रेज अधिकारियों ने उसे प्रयाग की अल्फ्रेड वाटिका में चारों ओर से घेर लिया; गोली उसकी जाँघ में लगी, और अंत में अपने “आज़ाद” नाम को सत्य करने के लिए उसने स्वयं को अंतिम गोली मार ली।
एवं सः स्वातन्त्र्ययज्ञे स्वप्राणानाम् आहुति दत्त्वा महान् वीरः अभवत्।
(evaṃ saḥ svātantrya-yajñe svaprāṇānām āhuti dattvā mahān vīraḥ abhavat.)
इस प्रकार उसने स्वाधीनता की यज्ञ-वेदी पर अपने प्राणों की आहुति देकर महान् वीर का स्थान प्राप्त किया।
शब्दावली / Vocabulary (25+ शब्द)
| संस्कृत | Pronunciation | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| आजादः | ājādaḥ | स्वतन्त्र, आज़ाद |
| स्वाभिमानः | svābhimānaḥ | स्वाभिमान, आत्मसम्मान |
| कारागारः | kārāgāraḥ | जेल, कारागार |
| न्यायाधीशः | nyāyādhīśaḥ | जज, न्यायाधीश |
| परतन्त्रता | paratantratā | गुलामी, पराधीनता |
| संस्कृतविद्यालयः | saṃskṛta-vidyālayaḥ | संस्कृत स्कूल |
| एकादशवर्षदेशीयः | ekādaśa-varṣa-deśīyaḥ | लगभग ग्यारह वर्ष का |
| नृशंसता | nṛśaṃsatā | क्रूरता |
| प्रतिज्ञा | pratijñā | प्रतिज्ञा, व्रत |
| कुवशासनतन्त्रम् | kuvaśāsana-tanttram | अत्याचारी शासन-तंत्र |
| उन्मूलनीयं | unmūlanīyam | जड़ से उखाड़ना चाहिए |
| बहिष्कारान्दोलनम् | bahiṣkār-āndolanam | बहिष्कार आन्दोलन |
| राजपुरुषः | rājapuruṣaḥ | सरकारी अधिकारी |
| कापट्येन | kāpaṭyena | कपट से, छल से |
| वेददण्डः | vedadaṇḍaḥ | बेंत का डण्डा |
| ताडितः | tāḍitaḥ | पीटा गया |
| कारागाराय नीतः | kārāgārāya nītaḥ | जेल ले जाया गया |
| भूशुण्डिगुलिका | bhuśuṇḍi-gulikā | बन्दूक की गोली |
| जङ्घा | jaṅghā | जाँघ |
| स्वातन्त्र्ययज्ञः | svātantrya-yajñaḥ | स्वतंत्रता का यज्ञ |
| आहुति | āhuti | बलि, आहुति |
| वीरः | vīraḥ | वीर, बहादुर |
| सप्तविंशे दिनाङ्के | saptaviṃśe dināṅke | सत्ताईसवीं तारीख को |
| प्रयागः | prayāgaḥ | प्रयाग (इलाहाबाद) |
| वाराणसी | vārāṇasī | वाराणसी नगर |
अभ्यास-समाधानाः (Exercises with Answers)
1. लिखत शब्द (उच्चारण + अर्थ)
एकादशवर्षदेशीयः
(ekādaśa-varṣa-deśīyaḥ)
लगभग ग्यारह वर्ष का बालक
कापट्येनदिनानन्तरम्
(kāpaṭyena-dinānantaram)
कपट के साथ दण्ड देने के बाद
अल्पव्यस्कमपि
(alpavayaskam api)
कम उम्र का होते हुए भी
स्वातन्त्र्ययज्ञः
(svātantrya-yajñaḥ)
स्वतन्त्रता का यज्ञ
बहिष्कारान्दोलनम्
(bahiṣkār-āndolanam)
बहिष्कार का आन्दोलन
गृहितकर्षः
(gṛhita-karṣaḥ)
पकड़ में आया व्यक्ति
2. एकपदेन उत्तरत्
(क) ‘आजादस्य पूर्णं नाम किम्?’
उत्तरम्: चन्द्रशेखरः आजादः
(uttaram: candraśekharaḥ ājādaḥ)
उत्तर: चन्द्रशेखर आज़ाद
(ख) कस्य स्वातन्त्र्य बहिष्काराय जनाः निष्ठुरम् अकुर्वन्?
उत्तरम्: ब्रिटिश-शासनस्य
(uttaram: briṭiś-śāsanasya)
उत्तर: अंग्रेज़ी शासन के
(ग) वैद्यनाथकाले आजादः किम् उदघोषयत्?
उत्तरम्: भारतमाता जय
(uttaram: bhārata-mātā jaya)
उत्तर: “भारत माता की जय”
(घ) अल्फ्रेड-वाटिका कस्मिन् नगरे अस्ति?
उत्तरम्: प्रयागे
(uttaram: prayāge)
उत्तर: प्रयाग (इलाहाबाद) में
3. पूर्णवाक्येन उत्तरत्
(क) कदा व्ययोद्धूलं लालालाजपतिरस्य गौरशः अटाड्यन्?
उत्तरम्: पंचमे दिने लालालाजपतिरस्य गौरशः अटाड्यन्।
(uttaram: pañcame dine lālālājapatirasya gauraśaḥ aṭāḍyan.)
उत्तर: पाँचवें दिन लालालाजपत राय की मृत्यु का समाचार प्रकट हुआ।
(ख) कदा प्राङ्गणे आजादः बहिष्कारान्दोलनं समाचालयत्?
उत्तरम्: वाराणस्यां संस्कृतविद्यालयस्य प्राङ्गणे आजादः बहिष्कारान्दोलनं समाचालयत्।
(uttaram: vārāṇasyāṃ saṃskṛta-vidyālayaśya prāṅgaṇe ājādaḥ bahiṣkār-āndolanaṃ samācalayat.)
उत्तर: वाराणसी के संस्कृत विद्यालय के प्रांगण में आज़ाद ने बहिष्कार आन्दोलन चलाया।
(ग) लालालाजपतिरस्य मृत्यौ मुख्यं कारणं कैः अमासरत्?
उत्तरम्: शेखर-नामानाम् अमायारैः राजपुरुषैः मुख्यं कारणं घोषितम्।
(uttaram: śekhara-nāmānām amāyāraiḥ rājapuruṣaiḥ mukhyaṃ kāraṇaṃ ghoṣitam.)
उत्तर: ब्रिटिश अधिकारियों ने ही लालालाजपत राय की मृत्यु का मुख्य कारण बताया।
(घ) ‘कस्तव पिता?’ इति प्रश्नस्य उत्तर किम् अघच्छत्?
उत्तरम्: ‘स्वाभिमानः’ इति उत्तरम् अघच्छत्।
(uttaram: “svābhimānaḥ” iti uttaram aghacchat.)
उत्तर: उसने उत्तर दिया— “स्वाभिमान।”
4. अधोलिखित-क्रियापदानां लकारः
अघच्छत्
लकारः: लङ् (भूतकालः)
(lakāraḥ: laṅ, bhūtakālaḥ)
भूतकाल, लङ् लकार
उच्छिन्नम्
रूपम्: क्त-प्रत्ययान्त (भूत कर्म)
(rūpam: kta-pratyayānta, bhūta karma)
भूतकालीन कृदन्त रूप “उखड़ा हुआ”
अकरोत्
लकारः: लङ् (भूतकालः)
(lakāraḥ: laṅ, bhūtakālaḥ)
भूतकाल, किया
पञ्चत्वम् अगच्छत्
लकारः: लङ् (भूतकालः)
(lakāraḥ: laṅ, bhūtakālaḥ)
मृत्यु को प्राप्त हुआ – भूतकाल
सारांश / Moral
चन्द्रशेखरः आजादः स्वाभिमानस्य प्रतीकः आसीत्, यस्य जीवनं देशभक्तेः आदर्शं दर्शयति।
(candraśekharaḥ ājādaḥ svābhimānasya pratīkaḥ āsīt, yasya jīvanaṃ deśabhakteḥ ādarśaṃ darśayati.)
चन्द्रशेखर आज़ाद स्वाभिमान के प्रतीक थे, जिनका जीवन सच्ची देशभक्ति का आदर्श दिखाता है।
सः स्वातन्त्र्यस्य कृते स्वप्राणान् अहूय, जनानाम् हृदये साहसस्य ज्वालां प्रज्वलितवान्।
(saḥ svātantryasya kṛte svaprāṇān ahūya, janānām hṛdaye sāhasasya jvālāṃ prajvalitavān.)
उन्होंने स्वतंत्रता के लिए प्राणों की आहुति देकर लोगों के हृदय में साहस की ज्योति जगा दी।
अस्माकं कर्तव्यं अस्ति यत् तस्य वीरस्य त्यागं स्मृत्वा राष्ट्रसेवायां सदैव तत्पराः भवेम।
(asmākaṃ kartavyaṃ asti yat tasya vīrasya tyāgaṃ smṛtvā rāṣṭra-sevāyāṃ sadaiva tatparāḥ bhavema.)
हमारा कर्तव्य है कि उस वीर के बलिदान को स्मरण कर सदैव राष्ट्र-सेवा के लिए तत्पर रहें।