यह पाठ ‘प्रियं भारतम्’ भारतवर्ष की प्राकृतिक सुंदरता, विशालता और गौरव का वर्णन करता है।
भारत नदियों के हार, हिमालय पर्वत, अनेक प्रदेशों, भाषाओं और वेशों से सुशोभित है।
विदेशों में भी भारत का उज्ज्वल यश गाया जाता है, इसलिए वह सदा पूजनीय और रक्षणीय है।
हम भारतीय अपने देश को प्रणाम करते हैं, धर्म का पालन करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर
देश के लिए धन और जीवन तक अर्पित करने को तत्पर रहते हैं।
Path – Priyam Bharatam
द्वादशः पाठः
Dvādaśaḥ pāṭhaḥ
बारहवाँ पाठ
प्रियं भारतम्
Priyaṁ Bhāratam
प्रिय भारत
प्रकृत्या सुरम्यं विशालं प्रकामम्।
Prakṛtyā suramyaṁ viśālaṁ prakāmam
प्रकृति से अत्यन्त सुन्दर और विशाल।
सरितां हारैः ललामं निकामम्।
Saritāṁ hāraiḥ lalāmaṁ nikāmam
नदियों के हारों से अत्यधिक सुशोभित।
हिमाद्रिशैलैः पदे चैव सिक्तम्।
Himādriśailaiḥ pade caiva siktam
हिमालय पर्वतों से चरणों में सिंचित।
प्रियं भारतं सर्वथा दर्शनीयम्॥1॥
Priyaṁ bhārataṁ sarvathā darśanīyam
प्रिय भारत हर प्रकार से देखने योग्य है।
धनानां निधानं धरायाः प्रधानम्।
Dhanānāṁ nidhānaṁ dharāyāḥ pradhānam
यह पृथ्वी का प्रमुख धन-भण्डार है।
इदं भारतं देवलोकं तुल्यम्।
Idaṁ bhārataṁ devalokaṁ tulyam
यह भारत देवलोक के समान है।
यशो यस्य शुभं विदेशेषु गीतम्।
Yaśo yasya śubhaṁ videśeṣu gītam
जिसका उज्ज्वल यश विदेशों में गाया जाता है।
प्रियं भारतं तत् सदा पूजनीयम्॥2॥
Priyaṁ bhārataṁ tat sadā pūjanīyam
वह प्रिय भारत सदा पूजनीय है।
अनेकाः प्रदेशाः अनेकाः च वेषाः।
Anekāḥ pradeśāḥ anekāḥ ca veṣāḥ
अनेक प्रदेश और अनेक वेश हैं।
अनेकानि रूपाणि भाषा अनेकाः।
Anekāni rūpāṇi bhāṣā anekāḥ
अनेक रूप और अनेक भाषाएँ हैं।
परं यत्र सर्वे वयं भारतीयाः।
Paraṁ yatra sarve vayaṁ bhāratīyāḥ
परन्तु जहाँ हम सब भारतीय हैं।
प्रियं भारतं तत् सदा रक्षणीयम्॥3॥
Priyaṁ bhārataṁ tat sadā rakṣaṇīyam
वह प्रिय भारत सदा रक्षणीय है।
वयं भारतीयाः स्वदेशे नमामः।
Vayaṁ bhāratīyāḥ svadeśe namāmaḥ
हम भारतीय अपने देश को प्रणाम करते हैं।
परं धर्ममेव सदा मानयामः।
Paraṁ dharmameva sadā mānayāmaḥ
और सदा धर्म का ही पालन करते हैं।
तदर्थं धनं जीवनं चार्पयामः।
Tadarthaṁ dhanaṁ jīvanaṁ cārpayāmaḥ
उसके लिए धन और जीवन भी अर्पित करते हैं।
प्रियं भारतं मे सदा वन्दनीयम्॥4॥
Priyaṁ bhārataṁ me sadā vandanīyam
मेरा प्रिय भारत सदा वन्दनीय है।
शब्दार्थः
| Sanskrit | Pronunciation | Hindi Meaning |
|---|---|---|
| सुरम्यम् | Suramyam | सुन्दर |
| प्रकामम् | Prakāmam | अत्यन्त |
| ललामम् | Lalāmam | सुन्दर |
| निकामम् | Nikāmam | अत्यधिक |
| सरिताहारैः | Saritāhāraiḥ | नदी-हारों से |
| हिमाद्रिः | Himādriḥ | हिमालय |
| पदे | Pade | चरणों में |
| सिक्तम् | Siktam | समृद्ध |
| दर्शनीयम् | Darśanīyam | देखने योग्य |
| निधानम् | Nidhānam | भण्डार |
| धरायाः | Dharāyāḥ | पृथ्वी का |
| अनेकाः | Anekāḥ | बहुत सी |
| नमामः | Namāmaḥ | प्रणाम करते हैं |
| तदर्थम् | Tadartham | उसके लिए |
अभ्यास प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1
उच्चारणं कृत्वा पुस्तिकायां च लिखत—
Uccāraṇaṁ kṛtvā pustikāyāṁ ca likhata
उच्चारण करके कॉपी में लिखिए।
उत्तर:
प्रकृत्या सरिताहारैः हिमाद्रिशैलैः ।
शुभं रक्षणीयं चार्पयामः ॥ Prakṛtyā saritāhāraiḥ himādriśailaiḥ ।
Śubhaṁ rakṣaṇīyaṁ cārpayāmaḥ ॥ प्रकृति, नदियों के हार और हिमालय पर्वतों से युक्त शुभ भारत की रक्षा करनी चाहिए।
शुभं रक्षणीयं चार्पयामः ॥ Prakṛtyā saritāhāraiḥ himādriśailaiḥ ।
Śubhaṁ rakṣaṇīyaṁ cārpayāmaḥ ॥ प्रकृति, नदियों के हार और हिमालय पर्वतों से युक्त शुभ भारत की रक्षा करनी चाहिए।
प्रश्न 2(क)
भारतस्य ललाटे किमस्ति ?
Bhāratasya lalāṭe kim asti?
भारत के मस्तक पर क्या है?
उत्तर:
भारतस्य ललाटे हिमाद्रिः अस्ति।
Bhāratasya lalāṭe himādriḥ asti
भारत के मस्तक पर हिमालय है।
प्रश्न 2(ख)
कस्य शुभं यशः विदेशेषु गीतम् अस्ति ?
Kasya śubhaṁ yaśaḥ videśeṣu gītam asti?
किसका शुभ यश विदेशों में गाया जाता है?
उत्तर:
भारतस्य शुभं यशः विदेशेषु गीतम् अस्ति।
Bhāratasya śubhaṁ yaśaḥ videśeṣu gītam asti
भारत का शुभ यश विदेशों में गाया जाता है।
प्रश्न 2(ग)
भारते कियन्तः वेषाः सन्ति ?
Bhārate kiyantaḥ veṣāḥ santi?
भारत में कितने वेश हैं?
उत्तर:
भारते अनेकाः वेषाः सन्ति।
Bhārate anekāḥ veṣāḥ santi
भारत में अनेक वेश हैं।
प्रश्न 2(घ)
वयं भारतीयाः के नमामः ?
Vayaṁ bhāratīyāḥ ke namāmaḥ?
हम भारतीय किसे प्रणाम करते हैं?
उत्तर:
वयं भारतीयाः स्वदेशं नमामः।
Vayaṁ bhāratīyāḥ svadeśaṁ namāmaḥ
हम भारतीय अपने देश को प्रणाम करते हैं।
प्रश्न 3(क)
भारते कियन्तः प्रदेशाः कियत्यः भाषाः सन्ति ?
Bhārate kiyantaḥ pradeśāḥ kiyatyaḥ bhāṣāḥ santi?
भारत में कितने प्रदेश और कितनी भाषाएँ हैं?
उत्तर:
भारते अनेकाः प्रदेशाः अनेकाः भाषाः च सन्ति।
Bhārate anekāḥ pradeśāḥ anekāḥ bhāṣāḥ ca santi
भारत में अनेक प्रदेश और अनेक भाषाएँ हैं।
प्रश्न 3(ख)
इदं भारतं कस्य निधानं केन च तुल्यम् ?
Idaṁ bhārataṁ kasya nidhānaṁ kena ca tulyam?
यह भारत किसका भण्डार है और किसके समान है?
उत्तर:
इदं भारतं धनानां निधानं देवलोकं च तुल्यम्।
Idaṁ bhārataṁ dhanānāṁ nidhānaṁ devalokaṁ ca tulyam
यह भारत धन का भण्डार है और देवलोक के समान है।
प्रश्न 3(ग)
वयं भारतीयाः किं किम् अर्पयामः ?
Vayaṁ bhāratīyāḥ kiṁ kim arpayāmaḥ?
हम भारतीय क्या-क्या अर्पित करते हैं?
उत्तर:
वयं भारतीयाः धनं जीवनं च अर्पयामः।
Vayaṁ bhāratīyāḥ dhanaṁ jīvanaṁ ca arpayāmaḥ
हम भारतीय धन और जीवन अर्पित करते हैं।
प्रश्न 3(घ)
वयं सदा कं धर्मं मानयामः ?
Vayaṁ sadā kaṁ dharmaṁ mānayāmaḥ?
हम सदा किस धर्म का पालन करते हैं?
उत्तर:
वयं सदा धर्ममेव मानयामः।
Vayaṁ sadā dharmameva mānayāmaḥ
हम सदा धर्म का ही पालन करते हैं।
प्रश्न 4
संस्कृते अनुवादं कुरुत—
Saṁskṛte anuvādaṁ kuruta
संस्कृत में अनुवाद कीजिए।
उत्तर:
(क) प्रियं भारतं सर्वथा दर्शनीयम्।
Priyaṁ bhārataṁ sarvathā darśanīyam
प्रिय भारत हर प्रकार से देखने योग्य है।
(ख) भारतं देवलोकं तुल्यम्।
Bhārataṁ devalokaṁ tulyam
भारत देवलोक के समान है।
(ग) अस्मिन् अनेकाः प्रदेशाः सन्ति।
Asmin anekāḥ pradeśāḥ santi
इसमें बहुत से प्रदेश हैं।
(घ) वयं भारतीयाः स्वदेशं नमामः।
Vayaṁ bhāratīyāḥ svadeśaṁ namāmaḥ
हम भारतीय अपने देश को प्रणाम करते हैं।
Priyaṁ bhārataṁ sarvathā darśanīyam
प्रिय भारत हर प्रकार से देखने योग्य है।
(ख) भारतं देवलोकं तुल्यम्।
Bhārataṁ devalokaṁ tulyam
भारत देवलोक के समान है।
(ग) अस्मिन् अनेकाः प्रदेशाः सन्ति।
Asmin anekāḥ pradeśāḥ santi
इसमें बहुत से प्रदेश हैं।
(घ) वयं भारतीयाः स्वदेशं नमामः।
Vayaṁ bhāratīyāḥ svadeśaṁ namāmaḥ
हम भारतीय अपने देश को प्रणाम करते हैं।
प्रश्न 5
मञ्जूषातः पदानि चित्वा वाक्यानि पूरयत—
Mañjūṣātaḥ padāni citvā vākyāni pūrayata
मंजूषा से शब्द चुनकर वाक्य पूरे कीजिए।
उत्तर:
(क) प्रियं भारतं दर्शनीयम्।
Priyaṁ bhārataṁ sarvathā darśanīyam
प्रिय भारत हर प्रकार से दर्शनीय है।
(ख) इदं भारतं तुल्यम्।
Idaṁ bhārataṁ devalokaṁ tulyam
यह भारत देवलोक के समान है।
(ग) अनेकानि रूपाणि, भाषा ।
Anekāni rūpāṇi, bhāṣā anekāḥ
अनेक रूप हैं, भाषाएँ अनेक हैं।
(घ) वयं भारतीयाः नमामः।
Vayaṁ bhāratīyāḥ svadeśaṁ namāmaḥ
हम भारतीय अपने देश को प्रणाम करते हैं।
(ङ) तदर्थं धनं जीवनं च ।
Tadarthaṁ dhanaṁ jīvanaṁ ca arpayāmaḥ
उसके लिए धन और जीवन अर्पित करते हैं।
Priyaṁ bhārataṁ sarvathā darśanīyam
प्रिय भारत हर प्रकार से दर्शनीय है।
(ख) इदं भारतं तुल्यम्।
Idaṁ bhārataṁ devalokaṁ tulyam
यह भारत देवलोक के समान है।
(ग) अनेकानि रूपाणि, भाषा ।
Anekāni rūpāṇi, bhāṣā anekāḥ
अनेक रूप हैं, भाषाएँ अनेक हैं।
(घ) वयं भारतीयाः नमामः।
Vayaṁ bhāratīyāḥ svadeśaṁ namāmaḥ
हम भारतीय अपने देश को प्रणाम करते हैं।
(ङ) तदर्थं धनं जीवनं च ।
Tadarthaṁ dhanaṁ jīvanaṁ ca arpayāmaḥ
उसके लिए धन और जीवन अर्पित करते हैं।
प्रश्न 6
विशेष्यैः सह यथायोग्यं विशेषणानि योजयत—
Viśeṣyaiḥ saha yathāyogyaṁ viśeṣaṇāni yojayata
विशेष्य के साथ उपयुक्त विशेषण जोड़िए।
उत्तर:
भारतम् — अनेकम्
Bhāratam — anekam
भारत — अनेक
यशः — शुभम्
Yaśaḥ — śubham
यश — शुभ
भाषा — अनेकाः
Bhāṣā — anekāḥ
भाषाएँ — अनेक
प्रदेशाः — अनेकाः
Pradeśāḥ — anekāḥ
प्रदेश — अनेक
Bhāratam — anekam
भारत — अनेक
यशः — शुभम्
Yaśaḥ — śubham
यश — शुभ
भाषा — अनेकाः
Bhāṣā — anekāḥ
भाषाएँ — अनेक
प्रदेशाः — अनेकाः
Pradeśāḥ — anekāḥ
प्रदेश — अनेक
प्रश्न 7
अनियः (अनीय) प्रत्यय योजयित्वा पदानि लिखत—
Anīyaḥ pratyaya yojayitvā padāni likhata
अनीय प्रत्यय जोड़कर शब्द लिखिए।
उत्तर:
पूज् + अनीय = पूजनीयम्
Pūj + anīya = pūjanīyam
पूजने योग्य
पठ् + अनीय = पठनीयम्
Paṭh + anīya = paṭhanīyam
पढ़ने योग्य
वन्द् + अनीय = वन्दनीयम्
Vand + anīya = vandanīyam
वंदन करने योग्य
कथ् + अनीय = कथनीयम्
Kath + anīya = kathanīyam
कहने योग्य
Pūj + anīya = pūjanīyam
पूजने योग्य
पठ् + अनीय = पठनीयम्
Paṭh + anīya = paṭhanīyam
पढ़ने योग्य
वन्द् + अनीय = वन्दनीयम्
Vand + anīya = vandanīyam
वंदन करने योग्य
कथ् + अनीय = कथनीयम्
Kath + anīya = kathanīyam
कहने योग्य
प्रश्न 8
पूज् + अनीय = ?
Pūj + anīya
पूज् धातु में अनीय प्रत्यय जोड़िए।
उत्तर:
पूजनीयम्
Pūjanīyam
पूजने योग्य