Lesson : 13 – kakah -Class : 6

एक प्यासा कौआ दूर-दूर तक पानी खोजता रहा पर उसे कहीं जल नहीं मिला। अचानक उसे एक घड़ा दिखाई दिया, लेकिन उसमें पानी बहुत नीचे था। बुद्धि का प्रयोग करते हुए उसने छोटे-छोटे पत्थर घड़े में डालने शुरू किए, जिससे पानी ऊपर आ गया। तब कौए ने भरपेट पानी पिया और संतुष्ट हुआ। यह कथा सिखाती है कि बुद्धि, धैर्य और परिश्रम से असंभव लगने वाला कार्य भी सफल किया जा सकता है।

त्रयोदशः पाठः — काकः

पाठ – पंक्ति-दर-पंक्ति (Line by Line)

एकः काकः तृषापीडितः (ekaḥ kākaḥ tṛṣāpīḍitaḥ) एक कौआ भारी प्यास से व्याकुल था।
जलं नालभत दूरं दूरम्। (jalaṃ nālabhata dūraṃ dūram) उसे दूर-दूर तक पानी कहीं नहीं मिला।
वृक्षात् वृक्षं गतः वराकः (vṛkṣāt vṛkṣaṃ gataḥ varākaḥ) वह बेचारा एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर जाता रहा।
गामे ग्रामे नगरे नगरे॥१॥ (grāme grāme nagare nagare) गाँव-गाँव, नगर-नगर घूमता रहा।
एकं सहसा घटं दृष्टवान् (ekaṃ sahasā ghaṭaṃ dṛṣṭavān) अचानक उसने एक घड़ा देखा।
घटे जलं दृष्टं बहुदूरे। (ghaṭe jalaṃ dṛṣṭaṃ bahudūre) घड़े में पानी था, पर बहुत नीचे दिखाई दे रहा था।
खण्डं खण्डं पाषाणानां (khaṇḍaṃ khaṇḍaṃ pāṣāṇānām) उसने पत्थरों के छोटे-छोटे टुकड़े उठाए।
क्षिप्तवान् काकः जलमध्ये॥२॥ (kṣiptavān kākaḥ jalamadhye) कौए ने वे टुकड़े घड़े के पानी में डाल दिए।
घटकण्ठं सम्यक् नीरं (ghaṭakaṇṭhaṃ samyak nīraṃ) घड़े के मुँह तक पानी अच्छी तरह ऊपर आ गया।
पीत्वा सन्तुष्टः खलु काकः। (pītvā santuṣṭaḥ khalu kākaḥ) पानी पीकर वह कौआ सचमुच बहुत प्रसन्न हो गया।
बुद्धिपूर्वकं यत्नं कुर्वेते (buddhipūrvakaṃ yatnaṃ kurvete) जो लोग काम बुद्धि से और परिश्रम के साथ करते हैं,
वद न सफलतां लभते कः? कः? ॥३॥ (vada na safalatāṃ labhate kaḥ? kaḥ?) बताओ, सफलता किसे नहीं मिलती? (सभी को मिलती है।)

शब्दावली – Vocabulary (25+ शब्द)

संस्कृत Pronunciation हिन्दी अर्थ
काकःkākaḥकौआ
तृषापीडितःtṛṣāpīḍitaḥप्यास से पीड़ित / व्याकुल
जलंjalaṃपानी
नालभतnālabhataप्राप्त नहीं हुआ
दूरं दूरम्dūraṃ dūramबहुत दूर-दूर तक
वृक्षात्vṛkṣātपेड़ से
वृक्षंvṛkṣaṃपेड़ (को / पर)
वराकःvarākaḥबेचारा
ग्रामेgrāmeगाँव में
नगरेnagareनगर में
सहसाsahasāअचानक
घटःghaṭaḥघड़ा
दृष्टवान्dṛṣṭavānदेखा (जिसने)
बहुदूरेbahudūreबहुत नीचे / बहुत दूर
खण्डम्khaṇḍamटुकड़ा
पाषाणानाम्pāṣāṇānāmपत्थरों के
क्षिप्तवान्kṣiptavānडाल दिया
जलमध्येjalamadhyeपानी के बीच / घड़े के अंदर
घटकण्ठम्ghaṭakaṇṭhamघड़े का मुँह / गर्दन
नीरम्nīramजल, पानी
पीत्वाpītvāपीकर
सन्तुष्टःsantuṣṭaḥसन्तुष्ट, खुश
बुद्धिपूर्वकंbuddhipūrvakaṃबुद्धि से, समझदारी से
यत्नम्yatnamप्रयास, परिश्रम
सफलताम्safalatāmसफलता को
लभतेlabhateपाता है / प्राप्त करता है

अभ्यास – Exercises with Answers

1. उच्चारणं कृत्वा पुस्तिकायां च लिखत — (शब्द सूची)

तृषापीडितः (tṛṣāpīḍitaḥ) प्यास से पीड़ित
वृक्षात् (vṛkṣāt) पेड़ से
पाषाणानाम् (pāṣāṇānām) पत्थरों के
दृष्टवान् (dṛṣṭavān) देखा (जिसने)
क्षिप्तवान् (kṣiptavān) डाल दिया
सन्तुष्टः (santuṣṭaḥ) प्रसन्न
सम्यक्पातम् (samyak-pātam) अच्छी तरह गिरना / पड़ना
बुद्धिपूर्वकम् (buddhipūrvakam) सोच-समझकर
नालभत (nālabhata) नहीं मिला

2. एकपदेन उत्तरत — (One-word Answers)

(क) तृषापीडितः कः आसीत्? काकः (kākaḥ) एक कौआ था।
(ख) सः दूरं दूरं किं न अलभत? जलं (jalaṃ) उसे पानी नहीं मिला।
(ग) वृक्षात् वृक्षं कः गतवान्? काकः (kākaḥ) कौआ पेड़-पेड़ पर गया।
(घ) घटे बहुदूरे किं दृष्टम्? जलं (jalaṃ) घड़े में नीचे पानी दिखा।
(ङ) काकः पाषाणखण्डान् कुत्र अशिपत्? जलमध्ये (jalamadhye) कौए ने पत्थर पानी के भीतर डाले।

3. मञ्जूषातः पदानि चित्वा वाक्यानि पूरयत — (Fill the Blanks)

(क) जलं दूरे-दूरे …………………… । जलं दूरं दूरं नालभत। (jalaṃ dūraṃ dūraṃ nālabhata) दूर-दूर तक पानी नहीं मिला।
(ख) एकः सहसा …………………… दृष्टवान्। एकः सहसा घटं दृष्टवान्। (ekaḥ sahasā ghaṭaṃ dṛṣṭavān) अचानक उसने एक घड़ा देखा।
(ग) घटे जलं बहुदूरे …………………… । घटे जलं बहुदूरे दृष्टम्। (ghaṭe jalaṃ bahudūre dṛṣṭam) घड़े में बहुत नीचे पानी दिखा।
(घ) सः काकः जलमध्ये पाषाणखण्डम् …………………… । सः काकः जलमध्ये पाषाणखण्डम् अशिपत्। (saḥ kākaḥ jalamadhye pāṣāṇa-khaṇḍam aśipat) उस कौए ने पानी में पत्थर के टुकड़े डाले।
(ङ) काकः …………………… सन्तुष्टः जातः। काकः जलं पीत्वा सन्तुष्टः जातः। (kākaḥ jalaṃ pītvā santuṣṭaḥ jātaḥ) कौआ पानी पीकर संतुष्ट हो गया।

4. संस्कृतभाषायां अनुवादं कुरुत — (Hindi → Sanskrit)

(क) एक कौआ प्यास से व्याकुल था। एकः काकः तृषापीडितः आसीत्। (ekaḥ kākaḥ tṛṣāpīḍitaḥ āsīt) एक कौआ बहुत प्यासा था।
(ख) वह जल के लिए वृक्ष से वृक्ष पर गया। सः जलार्थं वृक्षात् वृक्षं गतः। (saḥ jalārthaṃ vṛkṣāt vṛkṣaṃ gataḥ) वह पानी की तलाश में एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर गया।

5. चित्राणि दृष्ट्वा वाक्यानि रचयत — (Picture Sentences)

(क) दो कौए द्वौ काकौ स्तः। (dvau kākau staḥ) दो कौए हैं।
(ख) तीन चटकें त्रयः चटकाः सन्ति। (trayaḥ caṭakāḥ santi) तीन चिड़ियाँ हैं।
(ग) तीन तोते त्रयः शकुन्तकाः सन्ति। (trayaḥ śakuntakāḥ santi) तीन तोते हैं।
(घ) चार कुक्कुट चत्वारः कुक्कुटाः सन्ति। (catvāraḥ kukkuṭāḥ santi) चार मुर्गे हैं।

6. उचितम् उत्तरपदं रेखाङ्कितं कुरुत — (Choose the Correct Option)

(क) दूरै दूरै किं नालभत? जलं (jalaṃ) पानी नहीं मिला।
(ख) वृक्षाद् वृक्षं कः गतः? काकः (kākaḥ) कौआ एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर गया।
(ग) काकः सहसा किं दृष्टवान्? घटम् (ghaṭam) उसने एक घड़ा देखा।
(घ) काकः घटे किं क्षिप्तवान्? पाषाणखण्डम् (pāṣāṇa-khaṇḍam) कौए ने पत्थर के टुकड़े घड़े में डाले।

7. सप्तमीविभक्तिक-पदानि — (Words in Locative Case)

ग्रामे (grāme) गाँव में
नगरे (nagare) शहर में
वृक्षे (vṛkṣe) पेड़ पर
घटे (ghaṭe) घड़े में
जलमध्ये (jalamadhye) पानी के भीतर

सारांश / Moral

काकः बुद्धिपूर्वकं यत्नं कृत्वा पिपासां निवर्तितवान्। (kākaḥ buddhipūrvakaṃ yatnaṃ kṛtvā pipāsāṃ nivartitavān) कौए ने बुद्धि और परिश्रम से काम लेकर अपनी प्यास बुझाई। यः जनः धैर्येण कार्यं करोति सः नूनं सफलतां लभते। (yaḥ janaḥ dhairyeṇa kāryaṃ karoti saḥ nūnaṃ safalatāṃ labhate) जो व्यक्ति धैर्य और समझदारी से काम करता है, वह अवश्य सफल होता है। अतः अस्माभिः अपि बुद्धिपूर्वकं चिन्त्य यत्नः कर्तव्यः। (ataḥ asmābhiḥ api buddhipūrvakaṃ cintya yatnaḥ kartavyaḥ) इसलिए हमें भी हर काम सोच-समझकर और मेहनत से करना चाहिए।

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