यह पाठ वीरता, साहस और आत्मबल का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। वैदिक युग में ‘खेल’ नामक राजा था, जिसकी पत्नी विपुला एक अत्यन्त साहसी और युद्ध-निपुण वीरांगना थी। एक युद्ध में शत्रुओं द्वारा घेर लिए जाने पर उसके दोनों पैर कट गए, परन्तु वह निराश नहीं हुई। उसके अदम्य साहस को देखकर राजा और प्रजा उत्साहित हुए। अभियन्ताओं ने उसके लिए लोहे के पैर बनाए, जिनके सहारे उसने पुनः युद्ध किया और शत्रुओं को पराजित कर उनका धन जीत लिया। इस प्रकार यह पाठ सिखाता है कि कार्य की सफलता साधनों पर नहीं, बल्कि मनुष्य के साहस, दृढ़ संकल्प और पराक्रम पर निर्भर करती है — “क्रियासिद्धिः सत्त्वे भवति नोपकरणे।”
Path – Veerangana Vipula
चतुर्दशः पाठः
वैदिकयुगे कश्चित् ‘खेलः’ इति नाम्ना प्रसिद्धः राजा आसीत्।
Vaidikayuge kaścit ‘Khelaḥ’ iti nāmnā prasiddhaḥ rājā āsīt.
वैदिक युग में ‘खेल’ नाम से प्रसिद्ध एक राजा था।
सः क्रीडायाम् अतीव कुशलः आसीत्।
Saḥ krīḍāyām atīva kuśalaḥ āsīt.
वह खेल-कूद में अत्यन्त निपुण था।
अतएव तस्य नाम ‘खेलः’ इति अभवत्।
Ataeva tasya nāma ‘Khelaḥ’ iti abhavat.
इसी कारण उसका नाम ‘खेल’ पड़ा।
तस्य पत्नी अतीव युद्धनिपुणा वीराङ्गना आसीत्, यस्य नाम ‘विपुला’ इति आसीत्।
Tasya patnī atīva yuddhanipuṇā vīrāṅganā āsīt, yasyā nāma ‘Vipulā’ iti āsīt.
उसकी पत्नी ‘विपुला’ नाम की अत्यन्त युद्ध-कुशल वीरांगना थी।
एकस्मिन् युद्धे सा युद्धं कुर्वती शत्रुभिः परिष्कृता अभवत्।
Ekasmīn yuddhe sā yuddhaṁ kurvatī śatrubhiḥ pariṣkṛtā abhavat.
एक युद्ध में लड़ते हुए वह शत्रुओं द्वारा घेर ली गई।
तस्या द्वौ अपि पादौ छिन्नौ, सा विकलाङ्गी अभवत्।
Tasyā dvau api pādau chinnau, sā vikalāṅgī abhavat.
उसके दोनों पैर कट गए और वह विकलांग हो गई।
परन्तु वीराङ्गना विपुला हतोत्साहा न अभवत्।
Parantu vīrāṅganā Vipulā hatotsāhā na abhavat.
लेकिन वीरांगना विपुला निरुत्साहित नहीं हुई।
तस्याः साहसं दृष्ट्वा खेलराजस्य नागरिकाः उत्साहिताः आस्ताम्।
Tasyāḥ sāhasaṁ dṛṣṭvā Khelarājasya nāgarikāḥ utsāhitāḥ āstām.
उसका साहस देखकर राजा खेल के नागरिक उत्साहित हो गए।
ततः एव राजा अभियन्तारान् आहूतवान्।
Tataḥ eva rājā abhiyantārān āhūtavān.
तब राजा ने अभियन्ताओं को बुलवाया।
ते च विपुलायै लौहनिर्मितौ पादौ अङ्गकल्पयन्।
Te ca Vipulāyai lauhanirmitau pādau aṅgakalpayan.
उन्होंने विपुला के लिए लोहे के पैर बना दिए।
सा पुनः युद्धं कृत्वा शत्रुभिः निहितं धनं जितवती।
Sā punaḥ yuddhaṁ kṛtvā śatrubhiḥ nihitaṁ dhanaṁ jitavatī.
उसने फिर युद्ध किया और शत्रुओं का धन जीत लिया।
अत एवोक्तम् — “क्रियासिद्धिः सत्त्वे भवति नोपकरणे” इति।
Ata evoktam — “Kriyāsiddhiḥ sattve bhavati nopakaraṇe”.
इसलिए कहा गया है कि सफलता पराक्रम से होती है, साधनों से नहीं।
अभ्यास
प्रश्न 1
उच्चारणं कृत्वा पुस्तिकायां च लिखत।
Uccāraṇaṁ kṛtvā pustikāyāṁ ca likhata.
उच्चारण करके कॉपी में लिखिए।
उत्तर:
कश्चित्, वीराङ्गना, विपुला, लौहनिर्मिती, अङ्गकल्पयताम्, लौहपादसाहाय्येन, परिष्कृता।
Kaścit, Vīrāṅganā, Vipulā, Lauhanirmitī, Aṅgakalpayatām, Lauhapādasahāyyena, Pariṣkṛtā.
ये सभी शब्द शुद्ध उच्चारण के साथ लिखे गए हैं।
प्रश्न 2 (क)
विपुला का आसीत् ?
Vipulā kā āsīt?
विपुला कौन थी?
उत्तर:
विपुला वीराङ्गना आसीत्।
Vipulā vīrāṅganā āsīt.
विपुला एक वीर स्त्री थी।
प्रश्न 2 (ख)
सा कस्य पत्नी आसीत् ?
Sā kasya patnī āsīt?
वह किसकी पत्नी थी?
उत्तर:
सा खेलराजस्य पत्नी आसीत्।
Sā Khelarājasya patnī āsīt.
वह राजा खेल की पत्नी थी।
प्रश्न 2 (ग)
युद्धे तस्या: किम् अभवत् ?
Yuddhe tasyāḥ kim abhavat?
युद्ध में उसके साथ क्या हुआ?
उत्तर:
युद्धे तस्या: द्वौ अपि पादौ छिन्नौ अभवताम्।
Yuddhe tasyāḥ dvau api pādau chinnau abhavatām.
युद्ध में उसके दोनों पैर कट गए।
प्रश्न 2 (घ)
विपुला हतोत्साहा अभवत् वा न ?
Vipulā hatotsāhā abhavat vā na?
क्या विपुला निरुत्साहित हो गई थी?
उत्तर:
न, विपुला हतोत्साहा न अभवत्।
Na, Vipulā hatotsāhā na abhavat.
नहीं, विपुला निरुत्साहित नहीं हुई।
प्रश्न 2 (ङ)
उत्साहितुं विपुला किम् अकरोत् ?
Utsāhitum Vipulā kim akarot?
लोगों को उत्साहित करने के लिए विपुला ने क्या किया?
उत्तर:
विपुला साहसं दर्शयित्वा पुनः युद्धं कृत्वा शत्रून् जितवती।
Vipulā sāhasaṁ darśayitvā punaḥ yuddhaṁ kṛtvā śatrūn jitavatī.
विपुला ने साहस दिखाकर फिर युद्ध किया और शत्रुओं को जीत लिया।
प्रश्न 3
सन्धि-विच्छेदं कुरुत।
Sandhi-vicchedaṁ kuruta.
संधि-विच्छेद कीजिए।
उत्तर:
वीराङ्गना = वीर + अङ्गना
विकलाङ्गी = विकल + अङ्गी
नोपकरणे = न + उपकरणे
—
इन शब्दों को संधि से अलग किया गया है।
प्रश्न 4
पाठ्याधारे वाक्यानि पूरयत।
Pāṭhyādhāre vākyāni pūrayata.
पाठ के आधार पर वाक्य पूरे कीजिए।
उत्तर:
(क) वैदिकयुगे कश्चित् खेलः राजा आसीत्।
(ख) तस्य पत्नी विपुला वीराङ्गना आसीत्।
(ग) सा युद्धे शत्रुभिः परिष्कृता जाता।
(घ) विपुला हतोत्साहा न जाता।
—
सभी वाक्य पाठ के अनुसार पूरे किए गए हैं।
प्रश्न 5
निम्नलिखितपदेषु विभक्ति-वचनं लिखत।
Nimnalikhitapadeṣu vibhakti-vacanaṁ likhata.
निम्न शब्दों की विभक्ति और वचन लिखिए।
उत्तर:
क्रीडायाम् — सप्तमी — एकवचनम्
तस्याः — षष्ठी — एकवचनम्
शत्रुभिः — तृतीया — बहुवचनम्
पादौ — प्रथमा — द्विवचनम्
—
शब्दों की विभक्ति और वचन बताए गए हैं।
प्रश्न 6
संस्कृतभाषायाम् अनुवादं कुरुत।
Saṁskṛtabhāṣāyām anuvādaṁ kuruta.
संस्कृत भाषा में अनुवाद कीजिए।
उत्तर:
विपुला एकस्मिन् युद्धे शत्रुभिः परिष्कृता अभवत्।
अभियन्तारः लौहपादौ अङ्गकल्पयन्।
सा पुनः युद्धं कृत्वा शत्रून् जितवती।
—
हिंदी वाक्यों का शुद्ध संस्कृत अनुवाद किया गया है।
पाठसार / Moral
यह पाठ वीरता, साहस और आत्मबल का संदेश देता है। विपुला का जीवन सिखाता है कि शारीरिक बाधाएँ भी दृढ़ निश्चय को नहीं रोक सकतीं। सच्ची सफलता साधनों से नहीं, पराक्रम और संकल्प से मिलती है।वस्त्राणां नामानि
| Sanskrit | Pronunciation | Hindi Meaning |
|---|---|---|
| वस्त्रम् | vastram | कपड़ा |
| धौतवस्त्रम् | dhautavastram | धोती |
| शाटिका | śāṭikā | साड़ी |
| कञ्चुकः | kañcukaḥ | कमीज |
| अर्धकञ्चुकः | ardhakañcukaḥ | हाफ कमीज |
| कुरतकः | kuratakaḥ | कुर्ता |
| प्रावरणम् | prāvaraṇam | चादर / ओढ़नी |
| उत्तरीयम् | uttarīyam | ऊपरी वस्त्र |
| अङ्गप्रोञ्छणी | aṅgaproñchanī | अँगोछा / तौलिया |
| कर्पटः | karpaṭaḥ | रूमाल |
| उष्णीषः | uṣṇīṣaḥ | पगड़ी |
| टोपिका | ṭopikā | टोपी |
| आस्तरणम् | āstaraṇam | बिछौना |
| उपधानम् | upadhānam | तकिया |
| तूलिका | tūlikā | गद्दा |
| तोषकः | toṣakaḥ | गद्दा (अन्य शब्द) |
| तूलपटी | tūlapaṭī | रजाई |
| मर्दिका | mardikā | गद्दी |
| अधोवस्त्रम् | adhovastram | निचला वस्त्र |
| अन्तर्वासः | antarvāsaḥ | अंतर्वस्त्र |
| निवसनम् | nivasanam | पोशाक |
| पटः | paṭaḥ | वस्त्र |
| कौपीनम् | kaupīnam | लंगोटी |
| दुकूलम् | dūkūlam | रेशमी वस्त्र |
| वासः | vāsaḥ | परिधान |