Path – Sanskritam
पञ्चदशः पाठः
भारतीयैकता-साधकम् संस्कृतम्
भारतीयत्व-सम्पादकम् संस्कृतम्
ज्ञान-पुञ्ज-प्रभादर्शकं संस्कृतम्
सर्वदानन्द-सन्दोहदं संस्कृतम्॥1॥ Bhāratīyaikatā-sādhakam saṁskṛtam | Bhāratīyatva-sampādakam saṁskṛtam | Jñāna-puñja-prabhādarśakam saṁskṛtam | Sarvadānanda-sandohadam saṁskṛtam || संस्कृत भारतीय एकता को सुदृढ़ करने वाली है।
संस्कृत भारतीयता की भावना को विकसित करने वाली है।
संस्कृत ज्ञान-समूह के प्रकाश को दिखाने वाली है।
संस्कृत समस्त आनन्दों का समूह देने वाली है।
भारतीयत्व-सम्पादकम् संस्कृतम्
ज्ञान-पुञ्ज-प्रभादर्शकं संस्कृतम्
सर्वदानन्द-सन्दोहदं संस्कृतम्॥1॥ Bhāratīyaikatā-sādhakam saṁskṛtam | Bhāratīyatva-sampādakam saṁskṛtam | Jñāna-puñja-prabhādarśakam saṁskṛtam | Sarvadānanda-sandohadam saṁskṛtam || संस्कृत भारतीय एकता को सुदृढ़ करने वाली है।
संस्कृत भारतीयता की भावना को विकसित करने वाली है।
संस्कृत ज्ञान-समूह के प्रकाश को दिखाने वाली है।
संस्कृत समस्त आनन्दों का समूह देने वाली है।
भावार्थ:
संस्कृत भाषा भारतीय एकता और भारतीयता को सशक्त करती है। यह ज्ञान का प्रकाश फैलाती है और मानव जीवन को आनन्द से भर देती है।
संस्कृत भाषा भारतीय एकता और भारतीयता को सशक्त करती है। यह ज्ञान का प्रकाश फैलाती है और मानव जीवन को आनन्द से भर देती है।
विश्वबन्धुत्व-विस्तारकं संस्कृतम्
सर्वभूतैकता-कारकं संस्कृतम्
सर्वतः शान्तिस्थापकं संस्कृतम्
पञ्चशील-प्रतिष्ठापकं संस्कृतम्॥2॥ Viśvabandhutva-vistārakam saṁskṛtam | Sarvabhūtaikatā-kārakam saṁskṛtam | Sarvataḥ śānti-sthāpakam saṁskṛtam | Pañcaśīla-pratiṣṭhāpakam saṁskṛtam || संस्कृत विश्व-भाईचारे का विस्तार करने वाली है।
संस्कृत सभी प्राणियों में एकता की भावना उत्पन्न करती है।
संस्कृत चारों ओर शान्ति की स्थापना करने वाली है।
संस्कृत पंचशील सिद्धान्तों की प्रतिष्ठा करने वाली है।
सर्वभूतैकता-कारकं संस्कृतम्
सर्वतः शान्तिस्थापकं संस्कृतम्
पञ्चशील-प्रतिष्ठापकं संस्कृतम्॥2॥ Viśvabandhutva-vistārakam saṁskṛtam | Sarvabhūtaikatā-kārakam saṁskṛtam | Sarvataḥ śānti-sthāpakam saṁskṛtam | Pañcaśīla-pratiṣṭhāpakam saṁskṛtam || संस्कृत विश्व-भाईचारे का विस्तार करने वाली है।
संस्कृत सभी प्राणियों में एकता की भावना उत्पन्न करती है।
संस्कृत चारों ओर शान्ति की स्थापना करने वाली है।
संस्कृत पंचशील सिद्धान्तों की प्रतिष्ठा करने वाली है।
भावार्थ:
संस्कृत भाषा सम्पूर्ण विश्व को भाईचारे के सूत्र में बाँधती है और शान्ति व अहिंसा जैसे मूल्यों की स्थापना करती है।
संस्कृत भाषा सम्पूर्ण विश्व को भाईचारे के सूत्र में बाँधती है और शान्ति व अहिंसा जैसे मूल्यों की स्थापना करती है।
त्याग-सन्तोष-सेवा-व्रतं संस्कृतम्
विश्वकल्याण-निष्ठायुतं संस्कृतम्
ज्ञान-विज्ञान-सम्मेलनं संस्कृतम्
भुक्ति-मुक्ति-द्वयप्रदं संस्कृतम्॥3॥ Tyāga-santoṣa-sevā-vratam saṁskṛtam | Viśvakalyāṇa-niṣṭhāyutam saṁskṛtam | Jñāna-vijñāna-sammelanam saṁskṛtam | Bhukti-mukti-dvaya-pradam saṁskṛtam || संस्कृत त्याग, सन्तोष और सेवा का व्रत सिखाने वाली है।
संस्कृत विश्व-कल्याण की भावना से युक्त है।
संस्कृत ज्ञान और विज्ञान का समन्वय करने वाली है।
संस्कृत भोग और मोक्ष दोनों प्रदान करने वाली है।
विश्वकल्याण-निष्ठायुतं संस्कृतम्
ज्ञान-विज्ञान-सम्मेलनं संस्कृतम्
भुक्ति-मुक्ति-द्वयप्रदं संस्कृतम्॥3॥ Tyāga-santoṣa-sevā-vratam saṁskṛtam | Viśvakalyāṇa-niṣṭhāyutam saṁskṛtam | Jñāna-vijñāna-sammelanam saṁskṛtam | Bhukti-mukti-dvaya-pradam saṁskṛtam || संस्कृत त्याग, सन्तोष और सेवा का व्रत सिखाने वाली है।
संस्कृत विश्व-कल्याण की भावना से युक्त है।
संस्कृत ज्ञान और विज्ञान का समन्वय करने वाली है।
संस्कृत भोग और मोक्ष दोनों प्रदान करने वाली है।
भावार्थ:
संस्कृत जीवन को संतुलित बनाती है—यह भौतिक सुख और आध्यात्मिक मुक्ति दोनों का मार्ग दिखाती है।
संस्कृत जीवन को संतुलित बनाती है—यह भौतिक सुख और आध्यात्मिक मुक्ति दोनों का मार्ग दिखाती है।
नगरे-नगरे ग्रामे-ग्रामे विलसतु संस्कृत-वाणी।
सदने-सदने जन-जनवदने जयतु चिरं कल्याणी॥4॥ Nagare-nagare grāme-grāme vilasatu saṁskṛta-vāṇī | Sadane-sadane jana-janavadane jayatu ciraṁ kalyāṇī || नगर-नगर और गाँव-गाँव में संस्कृत वाणी शोभायमान हो।
घर-घर और जन-जन के मुख में यह कल्याणकारी भाषा सदा विजय प्राप्त करे।
सदने-सदने जन-जनवदने जयतु चिरं कल्याणी॥4॥ Nagare-nagare grāme-grāme vilasatu saṁskṛta-vāṇī | Sadane-sadane jana-janavadane jayatu ciraṁ kalyāṇī || नगर-नगर और गाँव-गाँव में संस्कृत वाणी शोभायमान हो।
घर-घर और जन-जन के मुख में यह कल्याणकारी भाषा सदा विजय प्राप्त करे।
भावार्थ:
कवि कामना करता है कि संस्कृत भाषा सर्वत्र फैले और सभी लोगों के जीवन में कल्याण लाए।
कवि कामना करता है कि संस्कृत भाषा सर्वत्र फैले और सभी लोगों के जीवन में कल्याण लाए।
शब्दार्थ
| Sanskrit | Pronunciation | Hindi Meaning |
|---|---|---|
| साधकम् | sādhakam | सिद्ध करने वाला |
| सम्पादकम् | sampādakam | विकसित करने वाला |
| प्रभादर्शकम् | prabhādarśakam | प्रकाश दिखाने वाला |
| सन्दोहदम् | sandohadam | समूह देने वाला |
| विस्तारकम् | vistārakam | फैलाने वाला |
| कारकम् | kārakam | करने वाला |
| शान्तिस्थापकं | śāntisthāpakam | शान्ति स्थापित करने वाला |
| प्रतिष्ठापकं | pratiṣṭhāpakam | स्थापना करने वाला |
| व्रतम् | vratam | नियम |
| निष्ठायुतम् | niṣṭhāyutam | निष्ठा से युक्त |
| सम्मेलनम् | sammelanam | मेल |
| द्वयप्रदम् | dvayapradam | दोनों देने वाला |
| विलसतु | vilasatu | शोभायमान हो |
| जयतु | jayatu | विजयी हो |
| चिरम् | ciram | सदैव |
पाठसार / Moral
यह पाठ संस्कृत भाषा की महत्ता को स्पष्ट करता है। संस्कृत भारतीय संस्कृति, एकता और विश्व-बंधुत्व की वाहक है। यह ज्ञान-विज्ञान, शान्ति और नैतिक मूल्यों का संगम कराती है। संस्कृत मानव जीवन को भोग और मोक्ष दोनों का मार्ग दिखाती है।अभ्यासः (प्रश्नोत्तर)
प्रश्न 1
उच्चारणं कृत्वा पुस्तिकायां च लिखत— भारतीयैकता, भारतीयत्वम्, सन्दोहदम्, विश्वबन्धुत्वम्, सर्वभूतैकता, प्रतिष्ठापकम्।
Uccāraṇaṁ kṛtvā pustikāyāṁ ca likhata — Bhāratīyaikatā, Bhāratīyatvam, Sandohadam, Viśvabandhutvam, Sarvabhūtaikatā, Pratiṣṭhāpakam.
उच्चारण करके कॉपी में लिखिए — भारतीय एकता, भारतीयत्व, सन्दोहद, विश्वबन्धुत्व, सर्वभूत एकता, प्रतिष्ठापक।
उत्तर:
एते सर्वे शब्दाः शुद्धोच्चारणेन लिखनीयाः।
Ete sarve śabdāḥ śuddhoccāraṇena likhanīyāḥ.
इन सभी शब्दों को शुद्ध उच्चारण के साथ लिखना चाहिए।
प्रश्न 2
(क) संस्कृतं कस्य साधकम् अस्ति ? (ख) संस्कृतं कस्य विस्तारकम् अस्ति ?
(ग) संस्कृतं कया: सम्मेलनम् अस्ति ?
(घ) भुक्तिमुक्तिद्वयदं किम् अस्ति ?
(ङ) कल्याणी का अस्ति ? (ka) Saṁskṛtaṁ kasya sādhakam asti?
(kha) Saṁskṛtaṁ kasya vistārakam asti?
(ga) Saṁskṛtaṁ kayāḥ sammelanam asti?
(gha) Bhuktimukti-dvayadaṁ kim asti?
(ṅa) Kalyāṇī kā asti? (क) संस्कृत किसका साधन है?
(ख) संस्कृत किसका विस्तार करने वाली है?
(ग) संस्कृत किसका सम्मेलन है?
(घ) भोग और मोक्ष दोनों देने वाला क्या है?
(ङ) कल्याणी कौन है?
(क) उत्तर:
संस्कृतं भारतीयैकतायाः साधकम् अस्ति।
Saṁskṛtaṁ bhāratīyaikatāyāḥ sādhakam asti.
संस्कृत भारतीय एकता का साधन है।
(ख) उत्तर:
संस्कृतं विश्वबन्धुत्वस्य विस्तारकम् अस्ति।
Saṁskṛtaṁ viśvabandhutvasya vistārakam asti.
संस्कृत विश्वबन्धुत्व का विस्तार करने वाली है।
(ग) उत्तर:
संस्कृतं ज्ञान-विज्ञानयोः सम्मेलनम् अस्ति।
Saṁskṛtaṁ jñāna-vijñānayoḥ sammelanam asti.
संस्कृत ज्ञान और विज्ञान का सम्मेलन है।
(घ) उत्तर:
भुक्ति-मुक्ति-द्वयप्रदं संस्कृतम् अस्ति।
Bhukti-mukti-dvaya-pradaṁ saṁskṛtam asti.
भोग और मोक्ष दोनों देने वाली संस्कृत है।
(ङ) उत्तर:
संस्कृतवाणी कल्याणी अस्ति।
Saṁskṛtavāṇī kalyāṇī asti.
संस्कृत वाणी कल्याण करने वाली है।
प्रश्न 3
(क) पञ्चशीलप्रतिष्ठापकं संस्कृतम्। (ख) नगरे-नगरे, ग्रामे-ग्रामे विलसतु संस्कृत-वाणी।
(ग) विश्वबन्धुत्व-विस्तारकं संस्कृतम्। (ka) Pañcaśīla-pratiṣṭhāpakaṁ saṁskṛtam.
(kha) Nagare-nagare grāme-grāme vilasatu saṁskṛta-vāṇī.
(ga) Viśvabandhutva-vistārakaṁ saṁskṛtam. (क) संस्कृत पंचशील की स्थापना करने वाली है।
(ख) नगर-नगर, गाँव-गाँव संस्कृत वाणी शोभायमान हो।
(ग) संस्कृत विश्वबन्धुत्व का विस्तार करने वाली है।
उत्तर:
एतेषां वाक्यानां हिन्दीभाषायाम् अनुवादः कृतः।
Eteṣāṁ vākyānāṁ hindībhāṣāyām anuvādaḥ kṛtaḥ.
इन वाक्यों का हिंदी में अनुवाद किया गया है।
प्रश्न 4
पाठे आगतानि विशेष्य-विशेषणपदानि लिखत।
Pāṭhe āgatāni viśeṣya-viśeṣaṇa-padāni likhata.
पाठ में आए विशेष्य–विशेषण शब्द लिखिए।
उत्तर:
भारतीयैकता-साधकम् संस्कृतम्।
विश्वबन्धुत्व-विस्तारकम् संस्कृतम्।
पञ्चशील-प्रतिष्ठापकं संस्कृतम्। — ये सभी विशेष्य–विशेषण के उदाहरण हैं।
विश्वबन्धुत्व-विस्तारकम् संस्कृतम्।
पञ्चशील-प्रतिष्ठापकं संस्कृतम्। — ये सभी विशेष्य–विशेषण के उदाहरण हैं।
प्रश्न 5
(क) ………… पुष्पम् (सुन्दरं; सुन्दरम्) (ख) ………… चित्रम् (मनोहरम्; मनोहरि)
(ग) ………… कमले (सुन्दरे; सुन्दरः)
(घ) ………… वस्त्राणि (स्वच्छः; स्वच्छानि) (ka) … puṣpam
(kha) … citram
(ga) … kamale
(gha) … vastrāṇi उपयुक्त विशेषण चुनकर रिक्त स्थान भरिए।
उत्तर:
सुन्दरं पुष्पम्।
मनोहरं चित्रम्।
सुन्दरे कमले।
स्वच्छानि वस्त्राणि। — लिंग, वचन और विभक्ति के अनुसार उत्तर लिखे गए हैं।
मनोहरं चित्रम्।
सुन्दरे कमले।
स्वच्छानि वस्त्राणि। — लिंग, वचन और विभक्ति के अनुसार उत्तर लिखे गए हैं।
प्रश्न 6
(क) संस्कृत विश्वबन्धुत्वं फैलाने वाली है। (ख) संस्कृत चारों ओर शान्ति की स्थापना करने वाली है।
(ग) संस्कृत ज्ञान-विज्ञान का मेल कराने वाली है। (ka) Saṁskṛtaṁ viśvabandhutvaṁ vistārayati.
(kha) Saṁskṛtaṁ sarvataḥ śāntiṁ sthāpayati.
(ga) Saṁskṛtaṁ jñāna-vijñānayoḥ sammelanaṁ karoti. इन वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद कीजिए।
उत्तर:
संस्कृतं विश्वबन्धुत्वं विस्तारयति।
संस्कृतं सर्वतः शान्तिं स्थापयति।
संस्कृतं ज्ञान-विज्ञानयोः सम्मेलनं करोति। — हिंदी वाक्यों का संस्कृत अनुवाद।
संस्कृतं सर्वतः शान्तिं स्थापयति।
संस्कृतं ज्ञान-विज्ञानयोः सम्मेलनं करोति। — हिंदी वाक्यों का संस्कृत अनुवाद।
प्रश्न 7
मञ्जूषातः पदानि चित्वा वाक्यानि पूरयत— संदोहदम्, विलसतु, संस्कृतम्, जयतु। Mañjūṣātaḥ padāni citvā vākyāni pūrayata. मञ्जूषा से शब्द चुनकर वाक्य पूरे कीजिए।
उत्तर:
ज्ञानपुञ्ज-प्रभादर्शकम् संस्कृतम्।
नगरे-नगरे ग्रामे-ग्रामे विलसतु संस्कृतवाणी।
सदने-सदने जन-जनवदने जयतु चिरं कल्याणी।
सर्वदानन्द सन्दोहदं संस्कृतम्। — मञ्जूषा के सभी शब्दों का सही प्रयोग किया गया है।
नगरे-नगरे ग्रामे-ग्रामे विलसतु संस्कृतवाणी।
सदने-सदने जन-जनवदने जयतु चिरं कल्याणी।
सर्वदानन्द सन्दोहदं संस्कृतम्। — मञ्जूषा के सभी शब्दों का सही प्रयोग किया गया है।