यह पाठ “मातृदेवो भव” माता के प्रति कर्तव्य और सम्मान का संदेश देता है। इसमें सतीश नामक बालक खेल को महत्व देकर अपनी बीमार माँ की बात नहीं मानता, जबकि उसका मित्र मुकुल उसे सही मार्ग दिखाता है। मुकुल उपनिषद् के वचन “मातृदेवो भव” का स्मरण कराकर माता की सेवा का महत्व समझाता है। सतीश अपनी भूल समझकर वैद्य को लाता है, जिससे उसकी माता प्रसन्न होती है। यह पाठ सिखाता है कि माता-पिता की सेवा, आज्ञापालन और संवेदनशीलता ही सच्चे संस्कार हैं।
Path – Matru Devo Bhava
द्वितीयः पाठः : मातृदेवो भव
मुकुलः एकः बालकः अस्ति।
Mukulaḥ ekaḥ bālakaḥ asti.
मुकुल नाम का एक बालक है।
तस्य एकं मित्रम् अस्ति। तस्य नाम सतीशः अस्ति।
Tasya ekaṁ mitram asti. Tasya nāma Satīśaḥ asti.
उसका एक मित्र है। उसका नाम सतीश है।
एकदा सतीशस्य जननी ज्वरेण पीडिता अभवत्।
Ekadā Satīśasya jananī jvareṇa pīḍitā abhavat.
एक बार सतीश की माता बुखार से पीड़ित हो गई।
सा अवदत्— “भो सतीश! गच्छ, वैद्यं आनय।”
Sā avadat— bho Satīśa! gaccha, vaidyaṁ ānaya.
उन्होंने कहा— “हे सतीश! जाओ, वैद्य को लाओ।”
सतीशः अवदत्— “अहम् अद्य क्रीडनस्य कालः।”
Satīśaḥ avadat— aham adya krīḍanasya kālaḥ.
सतीश ने कहा— “आज मेरा खेलने का समय है।”
“मम मित्राणि आगच्छन्ति। अहं क्रीडनार्थं गच्छामि।”
Mama mitrāṇi āgacchanti. Ahaṁ krīḍanārthaṁ gacchāmi.
मेरे मित्र आ रहे हैं। मैं खेलने जा रहा हूँ।
इति उक्त्वा सः बहिः अगच्छत्।
Iti uktvā saḥ bahiḥ agacchat.
ऐसा कहकर वह बाहर चला गया।
तस्मिन् एव काले सतीशस्य मित्रम् मुकुलः तत्र प्राप्तः।
Tasmin eva kāle Satīśasya mitram Mukulaḥ tatra prāptaḥ.
उसी समय सतीश का मित्र मुकुल वहाँ पहुँचा।
सः सतीशस्य जननीं ज्वरेण पीडिताम् अपश्यत्।
Saḥ Satīśasya jananīṁ jvareṇa pīḍitām apaśyat.
उसने सतीश की माँ को बुखार से पीड़ित देखा।
सः ताम् अपृच्छत्— “कुत्र सतीशः गतः?”
Saḥ tām apṛcchat— kutra Satīśaḥ gataḥ?
उसने उनसे पूछा— “सतीश कहाँ गया है?”
सा अवदत्— “मित्रैः सह क्रीडार्थं गतः।”
Sā avadat— mitraiḥ saha krīḍārthaṁ gataḥ.
उन्होंने कहा— “मित्रों के साथ खेलने गया है।”
मुकुलः दुःखितः अभवत्।
Mukulaḥ duḥkhitaḥ abhavat.
मुकुल दुखी हो गया।
सः सतीशं क्रीडाक्षेत्रात् गृहम् आनयत्।
Saḥ Satīśaṁ krīḍākṣetrāt gṛham ānayat.
वह सतीश को खेल के मैदान से घर ले आया।
“मातृदेवो भव” इति तैत्तिरीयोपनिषद् उपदिशति।
“Mātṛdevo bhava” iti Taittirīyopaniṣad upadiśati.
तैत्तिरीय उपनिषद् उपदेश देता है— माता को देवता मानो।
चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम्॥
Catvāri tasya vardhante āyurvidyā yaśo balam.
उसकी आयु, विद्या, यश और बल— ये चारों बढ़ते हैं।
सतीशः वैद्यं आनयत्। तस्य जननी प्रमुदिता अभवत्।
Satīśaḥ vaidyaṁ ānayat. Tasya jananī pramuditā abhavat.
सतीश वैद्य को लाया। उसकी माता प्रसन्न हो गई।
शब्दार्थ
| Sanskrit | Pronunciation | Hindi Meaning |
|---|---|---|
| ज्वरेण | Jvareṇa | बुखार से |
| वैद्यः | Vaidyaḥ | डॉक्टर |
| क्रीडनार्थम् | Krīḍanārtham | खेलने के लिए |
| क्रीडाक्षेत्रम् | Krīḍākṣetram | खेल का मैदान |
| उपदिशति | Upadiśati | उपदेश देता है |
| दुःखितः | Duḥkhitaḥ | दुखी |
| प्रमुदिता | Pramuditā | प्रसन्न |
| जननी | Jananī | माता |
| मित्रम् | Mitram | मित्र |
| चत्वारि | Catvāri | चार |
प्रश्न 1
उच्चारणं कृत्वा पुस्तिकायां च लिखत — क्रीडनार्थं, वृद्धोपसेविनः, क्रीडितुम्, अपृच्छत्, दुःखितोऽभवत्, अभिवादनशीलस्य।
Ucchāraṇaṁ kṛtvā pustikāyāṁ ca likhata — krīḍanārthaṁ, vṛddhopasevinaḥ, krīḍitum, apṛcchat, duḥkhito’bhavat, abhivādanaśīlasya.
उच्चारण करके पुस्तिका में लिखिए — खेलने के लिए, बड़ों की सेवा करने वाले, खेलने के लिए, पूछा, दुखी हुआ, अभिवादन करने वाला।
उत्तर:
क्रीडनार्थं, वृद्धोपसेविनः, क्रीडितुम्, अपृच्छत्, दुःखितोऽभवत्, अभिवादनशीलस्य।
Krīḍanārthaṁ, vṛddhopasevinaḥ, krīḍitum, apṛcchat, duḥkhito’bhavat, abhivādanaśīlasya.
सभी शब्द शुद्ध रूप में लिखे गए।
प्रश्न 2 (एकपदेन उत्तरत)
(क) सतीशस्य जननी केन पीडिता आसीत्?
(Ka) Satīśasya jananī kena pīḍitā āsīt?
(क) सतीश की माता किससे पीड़ित थी?
उत्तर:
ज्वरेण।
Jvareṇa.
बुखार से।
(ख) मुकुलः कस्य मित्रम् अस्ति?
(Kha) Mukulaḥ kasya mitram asti?
(ख) मुकुल किसका मित्र है?
उत्तर:
सतीशस्य।
Satīśasya.
सतीश का।
(ग) कः दुःखितोऽभवत्?
(Ga) Kaḥ duḥkhito’bhavat?
(ग) कौन दुखी हुआ?
उत्तर:
मुकुलः।
Mukulaḥ.
मुकुल।
(घ) कः वैद्यं आनयत्?
(Gha) Kaḥ vaidyaṁ ānayat?
(घ) वैद्य को कौन लाया?
उत्तर:
सतीशः।
Satīśaḥ.
सतीश।
प्रश्न 3 (कः/का उक्तवान्)
(क) भोः सतीश! गच्छ वैद्यं आनय।
(Ka) Bhoḥ Satīśa! gaccha vaidyaṁ ānaya.
(क) हे सतीश! जाओ, वैद्य को लाओ।
उत्तर:
माता उक्तवती।
Mātā uktavatī.
माता ने कहा।
(ख) अहं क्रीडनार्थं गच्छामि।
(Kha) Ahaṁ krīḍanārthaṁ gacchāmi.
(ख) मैं खेलने जा रहा हूँ।
उत्तर:
सतीशः उक्तवान्।
Satīśaḥ uktavān.
सतीश ने कहा।
(ग) मित्रैः सह क्रीडितुं गतः।
(Ga) Mitraiḥ saha krīḍituṁ gataḥ.
(ग) मित्रों के साथ खेलने गया।
उत्तर:
सतीशः उक्तवान्।
Satīśaḥ uktavān.
सतीश ने कहा।
(घ) हे मित्र! एषा तव जननी ज्वरेण पीडिता अस्ति।
(Gha) He mitra! eṣā tava jananī jvareṇa pīḍitā asti.
(घ) हे मित्र! तुम्हारी माता बुखार से पीड़ित है।
उत्तर:
मुकुलः उक्तवान्।
Mukulaḥ uktavān.
मुकुल ने कहा।
प्रश्न 4 (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
(क) मुकुलः सतीशस्य मातरं किम् अपृच्छत्?
(Ka) Mukulaḥ Satīśasya mātaraṁ kim apṛcchat?
(क) मुकुल ने सतीश की माता से क्या पूछा?
उत्तर:
मुकुलः अपृच्छत् — कुत्र सतीशः गतः?
Mukulaḥ apṛcchat — kutra Satīśaḥ gataḥ?
मुकुल ने पूछा — सतीश कहाँ गया है?
(ख) सतीशः किम् उक्त्वा बहिः अगच्छत्?
(Kha) Satīśaḥ kim uktvā bahiḥ agacchat?
(ख) सतीश क्या कहकर बाहर गया?
उत्तर:
अहं क्रीडनार्थं गच्छामि इति उक्त्वा अगच्छत्।
Ahaṁ krīḍanārthaṁ gacchāmi iti uktvā agacchat.
मैं खेलने जा रहा हूँ, ऐसा कहकर गया।
(ग) उपनिषद् किम् उपदिशति?
(Ga) Upaniṣad kim upadiśati?
(ग) उपनिषद् क्या उपदेश देता है?
उत्तर:
उपनिषद् “मातृदेवो भव” इति उपदिशति।
Upaniṣad “Mātṛdevo bhava” iti upadiśati.
उपनिषद् माता को देवता मानने का उपदेश देता है।
(घ) सः सतीशं कुतः आनयत्?
(Gha) Saḥ Satīśaṁ kutaḥ ānayat?
(घ) वह सतीश को कहाँ से लाया?
उत्तर:
सः सतीशं क्रीडाक्षेत्रात् आनयत्।
Saḥ Satīśaṁ krīḍākṣetrāt ānayat.
वह सतीश को खेल के मैदान से लाया।
प्रश्न 5
(क) सतीशस्य जननी कदा प्रमुदिता अभवत्?
(Ka) Satīśasya jananī kadā pramuditā abhavat?
(क) सतीश की माता कब प्रसन्न हुई?
उत्तर:
यदा वैद्यः आनितः तदा प्रमुदिता अभवत्।
Yadā vaidyaḥ ānitaḥ tadā pramuditā abhavat.
जब वैद्य लाया गया तब वह प्रसन्न हुई।
(ख) आयुर्विद्या यशो बलं कस्य वर्धन्ते?
(Kha) Āyurvidyā yaśo balaṁ kasya vardhante?
(ख) आयु, विद्या, यश और बल किसके बढ़ते हैं?
उत्तर:
अभिवादनशीलस्य वृद्धोपसेविनः।
Abhivādanaśīlasya vṛddhopasevinaḥ.
जो अभिवादनशील और बड़ों की सेवा करता है।
(ग) किं श्रुत्वा सतीशः वैद्यं आनयत्?
(Ga) Kiṁ śrutvā Satīśaḥ vaidyaṁ ānayat?
(ग) क्या सुनकर सतीश वैद्य को लाया?
उत्तर:
सत्वरं गच्छ इति श्रुत्वा।
Satvaraṁ gaccha iti śrutvā.
शीघ्र जाओ, यह सुनकर।
(घ) सतीशः कुत्र अगच्छत्?
(Gha) Satīśaḥ kutra agacchat?
(घ) सतीश कहाँ गया?
उत्तर:
क्रीडाक्षेत्रे अगच्छत्।
Krīḍākṣetre agacchat.
खेल के मैदान में गया।
प्रश्न 6 (वाक्यरचना)
मित्राणि
Mitrāṇi
मित्र
उत्तर:
मित्राणि विद्यालयं आगच्छन्ति।
Mitrāṇi vidyālayaṁ āgacchanti.
मित्र विद्यालय आते हैं।
ताम्
Tām
उसको
उत्तर:
मुकुलः ताम् अपश्यत्।
Mukulaḥ tām apaśyat.
मुकुल ने उसे देखा।
क्रीडाक्षेत्रात्
Krīḍākṣetrāt
खेल के मैदान से
उत्तर:
सः बालकं क्रीडाक्षेत्रात् आनयत्।
Saḥ bālakaṁ krīḍākṣetrāt ānayat.
वह बालक को खेल के मैदान से लाया।
प्रश्न 7 (विचिन्त्य लिखत)
यदि भवतः सहपाठिनः स्यात् तदा भवान् किं करिष्यति?
Yadi bhavataḥ sahapāṭhinaḥ syāt tadā bhavān kiṁ kariṣyati?
यदि आपका सहपाठी बीमार हो तो आप क्या करेंगे?
उत्तर:
अहं तस्य सहाय्यं करिष्यामि तथा अध्यापकं सूचयिष्यामि।
Ahaṁ tasya sahāyyaṁ kariṣyāmi tathā adhyāpakaṁ sūcayiṣyāmi.
मैं उसकी सहायता करूँगा और अध्यापक को बताऊँगा।
| Sanskrit | Pronunciation | Hindi Meaning |
|---|---|---|
| पितामहः | Pitāmahaḥ | दादा |
| पितामही | Pitāmahī | दादी |
| पितृव्यः | Pitṛvyaḥ | चाचा |
| पितृव्या | Pitṛvyā | चाची |
| भगिनी | Bhaginī | बहन |
| अग्रजः | Agrajaḥ | बड़ा भाई |
| अनुजः | Anujaḥ | छोटा भाई |
| अग्रजा | Agrajā | बड़ी बहन |
| अनुजा | Anujā | छोटी बहन |
| सहोदरः | Sahodaraḥ | सगा भाई |
| सहोदरा | Sahodarā | सगी बहन |
| जनकः | Janakaḥ | पिता |
| जननी | Jananī | माता |
| मातुलः | Mātulaḥ | मामा |
| भ्रातुजः | Bhrātujaḥ | भतीजा |
| भ्रातुजा | Bhrātujā | भतीजी |
| ननन्दा | Nanandā | ननद |
| पितृव्यसा | Pitṛvyasā | बुआ |
| पुत्रः | Putraḥ | बेटा |
| तनयः | Tanayaḥ | पुत्र |
| मातामहः | Mātāmahaḥ | नाना |