मा कुरु दर्पम्, मा कुरु गर्वम्।
mā kuru darpam, mā kuru garvam. घमण्ड मत करो, अभिमान मत करो।मा भव मानी, मानय सर्वम्।
mā bhava mānī, mānaya sarvam. घमण्डी मत बनो, सभी का सम्मान करो।मा भज दैन्यम्, मा भज शोकम्।
mā bhaja dainyam, mā bhaja śokam. न कमजोरी अपनाओ, न शोक में पड़ो।मुदितमनाः भव, मोदय लोकम्॥१॥
muditamanāḥ bhava, modaya lokam. (1) प्रसन्न मन वाला बनो और संसार को भी प्रसन्न करो।मा वद मिथ्या, मा वद व्यर्थम्।
mā vada mithyā, mā vada vyartham. झूठ मत बोलो, व्यर्थ बातें मत करो।न चल कुमार्गं, न कुर्वनर्थम्।
na cala kumārgaṁ, na kurvanartham. बुरे मार्ग पर मत चलो, अनर्थ (बुरे कार्य) मत करो।पाहि विपत्तिम्, पालय दीनम्।
pāhi vipattim, pālaya dīnam. संकट से बचो और दुखी/निर्बल लोगों की सहायता करो।लालय जननी-जनक-विहीनम्॥२॥
lālaya jananī-janaka-vihīnam. (2) माता-पिता से रहित (अनाथ) बच्चे की रक्षा/पालना करो।तन्मयं पाठन् तन्मयं पाठ्य।
tanmayaṁ pāṭhan tanmayaṁ pāṭhya. जिस विषय का अध्ययन करते हो, उसी में मन लगाओ।शिक्षय नीति ढोंषं वारय।
śikṣaya nīti dhonṣaṁ vāray. नीति/नैतिकता सीखो और बुरे आचरण को दूर करो।कुरुष्व कृत्यम्, कृत्यम् उदारम्।
kuruṣva kṛtyam, kṛtyam udāram. अपने कर्तव्यों का पालन करो, उदार और नेक काम करो।अपनय दूरे चित्तविकारम्॥३॥
apanaya dūre cittavikāram. (3) मन के विकारों (बुरे विचारों) को दूर करो।मा पिब किञ्चिद् वस्तु निषिद्धम्।
mā piba kiñcid vastu niṣiddham. कोई भी निषिद्ध (मना किया) पदार्थ मत पीओ/मत लो।मा भज दुष्टसंगम् प्रविलिह्ब्धम्।
mā bhaja duṣṭasaṅgam pravilihbdham. दुष्ट संगति मत करो, बुरी आदतों में मत पड़ो।मा नय पलायि व्यर्थं समयम्।
mā naya palāyi vyarthaṁ samayam. अपना कीमती समय व्यर्थ मत गंवाओ।कुरु जगदीश्वर-चिन्तन-भयम्॥४॥
kuru jagadīśvara-cintana-bhayaṁ. (4) ईश्वर का चिंतन करो, भय/आशंका दूर करो।शब्दार्थः
| # | संस्कृत पद | Pronunciation | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|---|
| 1 | मा | mā | मत, नहीं |
| 2 | कुरु | kuru | करो |
| 3 | दर्पम् | darpam | घमण्ड |
| 4 | गर्वम् | garvam | अभिमान |
| 5 | मानी | mānī | घमण्ड करने वाला |
| 6 | मानय | mānaya | सम्मान दो |
| 7 | भज | bhaja | रखो / अपनाओ |
| 8 | दैन्यम् | dainyam | दीनता |
| 9 | मुदितमनाः | muditamanāḥ | प्रसन्न मन |
| 10 | मोदय | modaya | प्रसन्न करो |
| 11 | वद | vada | बोलो |
| 12 | मिथ्या | mithyā | झूठ |
| 13 | व्यर्थम् | vyartham | बेकार |
| 14 | कुमार्गम् | kumārgaṁ | बुरा मार्ग |
| 15 | अनर्थम् | anartham | बुरा कार्य |
| 16 | पाहि | pāhi | बचाओ |
| 17 | विपत्तिम् | vipattim | संकट, दुःख |
| 18 | पालय | pālaya | संरक्षण करो |
| 19 | दीनम् | dīnam | दुखी/निर्बल व्यक्ति |
| 20 | लालय | lālaya | पालना, सहारा देना |
| 21 | तन्मयम् | tanmayam | उसमें मग्न |
| 22 | पाठन् | pāṭhan | पढ़ना |
| 23 | नैति | naiti | नीति |
| 24 | ढोंषम् | dhonṣam | दोष/बुरा आचरण |
| 25 | कृत्यम् | kṛtyam | कार्य |
| 26 | उदारम् | udāram | उदार |
| 27 | चित्तविकारम् | cittavikāram | मन के दोष |
| 28 | निषिद्धम् | niṣiddham | निषिद्ध, मना किया हुआ |
| 29 | दुष्टसंगम् | duṣṭasaṅgam | बुरी संगति |
| 30 | जगदीश्वर | jagadīśvara | ईश्वर (विश्व-ईश्वर) |
अभ्यास — (Solved with teacher explanation)
(क) कं पालय?
kaṁ pālaya? — (किं पालय?)
किसे पालना करो?
Teacher: प्रश्न ‘कं’ (कम्बन) = कर्म-विभक्ति माँग रहा है; सन्दर्भ में ‘दीनम्’ उपयुक्त है।
उत्तर (संस्कृत): दीनम् पालय।
dīnam pālaya.
दीन/दुखियों की रक्षा करो।
dīnam pālaya.
दीन/दुखियों की रक्षा करो।
(ख) किं शिक्षय?
kiṁ śikṣaya? — (क्या सिखाओ?)
क्या सिखाना चाहिए?
Teacher: ‘किं’ प्रश्न में वस्तु बताने के लिए है; उत्तर ‘नीतिम्’ (नीति/नैतिकता) है।
उत्तर (संस्कृत): नीतिम् शिक्षय।
nītim śikṣaya.
नीति/नैतिकता सिखाओ।
nītim śikṣaya.
नीति/नैतिकता सिखाओ।
(ग) किं अपनय?
kiṁ apanaya? — (क्या अपनाओ?)
किसे अपनाना चाहिए?
Teacher: ‘अपनय’ मन के विकारों से संबंधित है; पाठ के अनुसार ‘चित्तविकारम्’ दूर करो।
उत्तर (संस्कृत): चित्तविकारम् दूरे अपनय।
cittavikāram dūre apanaya.
मन के दोषों को दूर करो।
cittavikāram dūre apanaya.
मन के दोषों को दूर करो।
(घ) किं मा पिब?
kiṁ mā piba? — (क्या पीना/न लेना?)
क्या पदार्थ न पीओ?
Teacher: ‘मा पिब’ का अर्थ ‘न पियो’ है; उत्तर ‘निषिद्धम्’ (निषिद्ध वस्तु) है।
उत्तर (संस्कृत): निषिद्धं वस्तु मा पिब।
niṣiddhaṁ vastu mā piba.
निषिद्ध वस्तु मत पियों।
niṣiddhaṁ vastu mā piba.
निषिद्ध वस्तु मत पियों।
(ङ) कुम् मार्गम् न चल?
kum̐ mārgaṁ na cala? — (किस मार्ग पर न जाओ?)
किस मार्ग का परित्याग करना चाहिए?
Teacher: ‘कुमार्गम्’ = बुरा मार्ग; स्कूल-नियम के अनुसार इसे त्याज्य घोषित करें।
उत्तर (संस्कृत): कुमार्गं न चल।
kumārgaṁ na cala.
बुरे मार्ग पर मत चलो।
kumārgaṁ na cala.
बुरे मार्ग पर मत चलो।
Vibhakti notes (teacher):
1. ‘सह’ (साथ) के साथ तृतीया (करण) प्रयोग होता है — उदाहरण: सहृदयैः सह मिलन्तु।
sahṛdayaiḥ saha milantu.
दिल से जुड़े लोगों के साथ मिलें।
2. ‘देने’ के अर्थ में चतुर्थी (सम्प्रदान) का प्रयोग होता है — उदाहरण: गुरवे पुस्तकां ददाति।
gurave pustakāṁ dadāti.
गुरु को पुस्तक देता है।
3. अलग/स्थिर स्थान बताने के लिये पञ्चमी (अपादान/अधिकरण) प्रयुक्त होता है — उदाहरण: फलानि वृक्षाद् पतन्ति।
phalāni vṛkṣād patanti.
फल पेड़ से गिरते हैं।
स्मरणीय श्लोक / संक्षेप
आज्ञां मानय ज्येष्ठ-जनानाम्।
ājñāṁ mānaya jyeṣṭha-janānām. आज्ञा का सम्मान करो — वरिष्ठ लोगों का मान करो।न कुरु विलम्बम्।
na kuru vilambam. विलंब मत करो।