षष्ठः पाठः — धरित्री रक्षत

धरती हमारी मातृरूपा है, जिसने हमें पर्वत, वन, जल, वायु जैसे बहुमूल्य प्राकृतिक उपहार दिए हैं, परंतु मनुष्य स्वार्थ के कारण इन संसाधनों का दुरुपयोग कर प्रकृति और पर्यावरण को प्रदूषित कर रहा है। बढ़ती जनसंख्या व शहरीकरण से वन कट रहे हैं, जिससे प्राणवायु की कमी और अनेक विपत्तियाँ उत्पन्न हो रही हैं। अतः वसुधा की रक्षा करना, वृक्षों को बचाना और पर्यावरण को स्वच्छ रखना हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य है, क्योंकि धरती सुरक्षित होगी तभी मानव जीवन सुखी और सुरक्षित रहेगा।

1. पाठ (संस्कृत पंक्तियाँ)

इयं धरित्री अस्माकं मातृरूपा। iyaṃ dharitri asmākaṃ mātrūrūpā. यह धरती हमारी माता के समान है।
धरातले नः भवन्ति — पर्वताः, वनानि अपि सन्ति, सूर्यः, चन्द्रमा, पवनः, जलं प्रकृतिप्रदत्तानि सन्ति। dharātale naḥ bhavanti — parvatāḥ, vanāni api santi, sūryaḥ, candramā, pavanaḥ, jalaṃ prakṛtipradattāni santi. धरती पर हमारे लिए पर्वत, वन, सूर्य, चन्द्रमा, हवा और जल — ये सभी प्रकृति द्वारा दिए गए हैं।
इमानी अस्मान् पोषयन्ति। imānī asmān poṣayanti. ये सभी हमें पोषित करते हैं।
मनुष्यः स्वार्थवशात् प्राकृतिकसाधनानाम् दुरुपयोगं करोति। manuṣyaḥ svārthavaśāt prakṛtikasādhanānām durupayogaṃ karoti. मनुष्य अपने स्वार्थ के कारण प्राकृतिक साधनों का दुरुपयोग करता है।
क्रमेण एतानि साधनानि विनश्यन्ति, दुश्छान्ति च भविष्यन्ति। krameṇa etāni sādhanāni vinaśyanti, duśchānti ca bhaviṣyanti. क्रमशः ये साधन नष्ट होते हैं और भविष्य में कठिन स्थिति उत्पन्न होगी।
अधुना विश्वस्य वर्धमाना जनसंख्या, शहरीकरणं, जनानां निवासाय वनानि छित्वा भवनानि निर्मीयन्ते। adhunā viśvasya vardhamānā janasankhyā, śaharīkaraṇaṃ, janānāṃ nivāsāya vanāni chittvā bhavānni nirrmīyante. अब विश्व में बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण के कारण लोगों के रहने के लिए वनों को काटकर भवन बनाए जा रहे हैं।
वृक्षाः प्राणवायुम् ददति। vṛkṣāḥ prāṇavāyum dadati. वृक्ष हमें शुद्ध प्राणवायु (ऑक्सीजन) देते हैं।
वृक्षाणां विनाशेन पर्यावरणं प्रदूषितं भवति। vṛkṣāṇāṃ vināśena paryāvaraṇaṃ pradūṣitaṃ bhavati. वृक्षों के विनाश से पर्यावरण प्रदूषित हो जाता है।
प्रकृतेः सौन्दर्यं विह्वलं भवति। prakṛteḥ saundaryaṃ vihvalaṃ bhavati. प्रकृति का सौन्दर्य नष्ट हो जाता है।
पर्यावरणस्य विकारणं विपत्तयः आयान्ति। paryāvaraṇasya vikāraṇaṃ vipattayaḥ āyānti. पर्यावरण के विकार के कारण आपदाएँ आती हैं।
अतः विपत्तीनां निवारणाय अस्माभिः रक्षणं कर्तव्यम्। ataḥ vipattīnāṃ nivāraṇāya asmābhiḥ rakṣaṇaṃ kartavyam. इसलिए विपत्तियों की रोकथाम के लिए हमारी ओर से संरक्षण करना चाहिए।
यदा वसुधा रक्षिता, तदा मानवजीवनमपि सुखिनं भवति। yadā vasudhā rakṣitā, tadā mānavajīvanam api sukhinaṃ bhavati. जब धरती की रक्षा होगी तब मानवजीवन भी सुखी रहेगा।
सत्यमेवोक्तम् — ‘माता भूमि: पुत्रोऽहं पृथिव्याः।’ satyamevoktam — ‘mātā bhūmiḥ putro’ham pṛthivyāḥ.’ सत्य कहा गया है — ‘मैं पृथ्वी का पुत्र/सन्तान हूँ।’

2. शब्दार्थ (स्पष्ट रूप में)

संस्कृत शब्दउच्चारणहिन्दी अर्थ
प्रदत्तानिpradattāniप्रदान की गई (दी गई चीजें)
तत्सर्वम्tat sarvamवे सब / समस्त
मातृरूपाmātrūrūpāमाता के समान
स्वार्थsvārthaअपने लाभ हेतु
क्रियमानम्kriyamānamकिया जा रहा
विनश्यन्तिvinaśyantiनष्ट हो जाते हैं
छित्वाchittvāकाटकर
अविचारितेनavicāritenaबिना विचार किए
गरियसीत्gariyasītबढ़ गया / बढ़ती हुई
पृथिव्या:pṛthivyāḥपृथ्वी की
समापत्तीनिsamāpattīniआपत्तियाँ / दुर्घटनाएँ
वसुधाvasudhāधरती
रक्षणम्rakṣaṇamरक्षा / सुरक्षा
प्रकृतिprakṛtiप्रकृति / स्वाभाविक परिवेश
वृक्षvṛkṣaवृक्ष / पेड़
प्रदूषितम्pradūṣitamप्रदूषित / दूषित
वर्धमानाvardhamānāबढ़ती हुई
शहरीकरणśaharīkaraṇaशहर बनाना / शहरीकरण
निवारणायnivāraṇāyaरोकने हेतु
विपत्तयःvipattayaḥविपत्तियाँ / आपदाएँ
प्रकृतिप्रदत्तानिprakṛtipradattāniप्रकृति द्वारा दिए गए
प्राणवायुःprāṇavāyuḥजीवनदायी हवा / ऑक्सीजन
पर्वताःparvatāḥपर्वत / पहाड़
वनानिvanāniवन / जंगल
निवासायnivāsāyaरहने के लिए / निवास हेतु

3. अभ्यास: प्रश्न — उत्तर

3.1 एकपदेन उत्तरत

यथा — का अस्माकं मातृरूपा? धरित्रीdharitrīधरती

(क) धरातले कानि सन्ति? पर्वताः (वनानि, पवनः, जलम् आदि)parvatāḥ (vanāni, pavanaḥ, jalam ādī)पर्वत, वन, हवा, जल आदि

(ख) कस्मात् सौन्दर्यं विह्वलं भवति? प्रकृतेः विकारणात्prakṛteḥ vikāraṇātप्रकृति के बिगड़ने के कारण

(ग) शुद्धप्राणवायुः कं ददति? वृक्षाःvṛkṣāḥवृक्ष

3.2 पूर्णवाक्येन उत्तरत

पृथिव्या: अपरं नाम किम्? पृथिव्या: अपरं नाम धरित्री।pṛthivyāḥ aparaṃ nāma dharitri.पृथ्वी का दूसरा नाम धरित्री है।

(क) प्राकृतिकसाधनानां दुरुपयोगं कः करोति? मनुष्यः प्राकृतिकसाधनानां दुरुपयोगं करोति।manuṣyaḥ prakṛtikasādhanānām durupayogaṃ karoti.मनुष्य प्राकृतिक साधनों का दुरुपयोग करता है।

(ख) पर्यावरणस्य महती हानि: कथं भवति? वृक्षविनाशेन पर्यावरणस्य महती हानि: भवति।vṛkṣavināśena paryāvaraṇasya mahatī hāniḥ bhavati.वृक्षों के विनाश से पर्यावरण को बड़ी हानि होती है।

(ग) का सर्वथा वन्दनीया सेवनीया च? धरित्री सर्वथा वन्दनीया सेवनीया च।dharitri sarvathā vandanīyā sevanīyā ca.धरती का सम्मान और सेवा दोनों ही करनी चाहिए।

(घ) विपत्तीनां निवारणाय कस्याः रक्षणम् आवश्यकम्? धरित्री–रक्षणम् आवश्यकम्।dharitri–rakṣaṇam āvaśyakaṃ.विपत्तियों को रोकने के लिए धरती की रक्षा आवश्यक है।

3.3 मञ्जूषात् विशेषण चुनकर वाक्य पूरयत — (उदाहरण)

अधुना विश्वस्य वर्धमाना जनसंख्या शोकनीयाः।adhunā viśvasya vardhamānā janasankhyā śokanīyāḥ.आज विश्व की बढ़ती हुई जनसंख्या चिंताजनक है।

अस्माभिः वसुधाया: रक्षणम् कर्तव्यम्।asmābhiḥ vasudhāyāḥ rakṣaṇam kartavyam.हमारी तरफ़ से धरती की रक्षा करनी चाहिए।

वृक्षाणां विनाशेन पर्यावरणं प्रदूषितम् भवति।vṛkṣāṇāṃ vināśena paryāvaraṇaṃ pradūṣitam bhavati.वृक्षों के विनाश से पर्यावरण प्रदूषित हो जाता है।

4. अन्य भाग

4.1 चित्र-वाक्य

उद्यानमध्ये बालकः क्रीडति।udyānamadhye bālakaḥ krīḍati.उद्यान के बीच में एक बच्चा खेल रहा है।
सः वृक्षान् पश्यति।saḥ vṛkṣān paśyati.वह पेड़ों को देखता है।
तस्य मित्राणि अपि आगच्छन्ति।tasya mitrāṇi api āgacchanti.उसके दोस्त भी आ जाते हैं।

4.2 अनुवाद

6. संस्कृत भाषायां अनुवादं कुरुत

1. इयं पृथ्वी अस्माकं मातृसमा अस्ति। iyaṃ pṛthvī asmākaṃ mātr̥samā asti. यह पृथ्वी हमारी माता के समान है।
2. अस्याः पृथिव्याः नाम वसुधा अपि भवति। asyāḥ pṛthivyāḥ nāma vasudhā api bhavati. इस पृथ्वी को वसुधा भी कहा जाता है।
3. वयं सूर्यात् ऊर्जा लभामः। vayaṃ sūryāt ūrjā labhāmaḥ. हम सूर्य से ऊर्जा प्राप्त करते/पाते हैं।
4. माता च मातृभूमिश्च स्वर्गात् अपि श्रेष्ठे स्तः। mātā ca mātr̥bhūmiśca svargāt api śreṣṭhe staḥ. माँ और मातृभूमि (धरती) स्वर्ग से भी श्रेष्ठ हैं।
5. वयं सूर्यात् ऊर्जा लभामः। vayaṃ sūryāt ūrjā labhāmaḥ. हम सूर्य से ऊर्जा प्राप्त करते/पाते हैं।

4.3 शिक्षण-सूचक

  • इण्टरनेट माध्यमेन पृथ्वी-दिवस (22 अप्रैल) पर चर्चा करायें।
  • वृक्षों का महत्त्व (प्राणवायु, फल, छाया) विद्यार्थियों से पूछें और नोट बनाएं।
  • कक्षा में ‘वसुधा रक्षत’ नारे पर पोस्टर बनवायें।

4.4 स्मरणीय वाक्य

स्वच्छं रक्ष।svacchaṃ rakṣa.स्वच्छता बनाए रखो।
स्वच्छं रक्ष जलं जलपात्रम्।svacchaṃ rakṣa jalaṃ jalapātram.जल और जल पात्र को स्वच्छ रखो।
स्वच्छं रक्ष समस्तं ग्रामम्।svacchaṃ rakṣa samastaṃ grāmam.पूरे गाँव/समाज की स्वच्छता बनाए रखो।
स्वच्छं रक्ष निवास-स्थानम्।svacchaṃ rakṣa nivāsa-sthānam.अपने निवास स्थान को स्वच्छ रखो।

5. फलों के संस्कृत नाम (संस्कृत ↔ हिन्दी)

संस्कृत नामहिन्दी नाम
आम्रम् (āmram)आम
जम्बूफलम् (jambūphalam)जामुन
स्फुटी (sphuṭī)तरबूज / खरबूजा प्रकार
दाडिमम् (dāḍimam)अनार
पनसम् (panasam)कटहल
कन्दः (kandaḥ)कन्द (प्रकार)
सीताफलम् (sītāphalam)शरीफा
शृङ्गाटकः (śṛṅgāṭakaḥ)सिंघाड़ा
बदरी (badarī)बेर
कदलीफलम् (kadalīphalam)केला
क्षुद्रद्राक्षा (kṣudradrākṣā)किशमिश
अम्लिका (amlikā)इमली
मण्डूकी (maṇḍūkī)मुंगफली / मूँगफली
आम्रातकम् (āmrātakam)अमरूद
बादामम् (bādāmam)बादाम
आमलकम् (āmalakam)आँवला
खर्जूरम् (kharjūram)खजूर
निम्बूक (nimbūka)निम्बू
शुक्तखर्जूरम् (śukta-kharjūram)छुहाड़ा
द्राक्षा (drākṣā)अंगूर / द्राक्ष
अक्षोटकर्म (akṣoṭakarma)अखरोट
ककटी (kakaṭī)ककड़ी
खर्वूजः (kharvūjaḥ)खरबूजा
बदर (badara)सेब
नारिकेलम् (nárikelam)नारियल
रुचिफलम् (ruciphalam)नाशपाती
नारङ्गम् (nārangam)नारंगी / संतरा

6. पाठ का Moral / संदेश

भूमेः रक्षणं अस्माकं परमकर्तव्यं, यतः वसुधा रक्षिता चेत् मानवजीवनम् अपि सुखिनं भवति।bhūmeḥ rakṣaṇam asmākaṃ paramakartavyaṃ, yataḥ vasudhā rakṣitā cet mānavajīvanam api sukhinaṃ bhavati.पृथ्वी की रक्षा हमारा परम कर्तव्य है; यदि धरती सुरक्षित होगी तो मानव जीवन भी सुखी रहेगा।
वसुधा रक्षिता — जीवनम् सुरक्षितम्।vasudhā rakṣitā — jīvanam surakṣitam.जब धरती की रक्षा होगी तब जीवन सुरक्षित रहेगा।

7. Vocabulary (कम से कम 25 शब्द)

संस्कृतउच्चारणहिन्दी अर्थ
धरित्रीdharitrīधरती
वसुधाvasudhāधरती
मातृरूपाmātrūrūpāमाता के समान
प्रकृतेःprakṛteḥप्रकृति की
प्रदत्तानिpradattāniप्रदान की गई चीजें
वनानिvanāniवन / जंगल
वृक्षvṛkṣaपेड़
प्राणवायुःprāṇavāyuḥप्राणवायु / ऑक्सीजन
प्रदूषितम्pradūṣitamप्रदूषित / गंदा
विनाशvināśaनाश / तबाही
रक्षणम्rakṣaṇamरक्षा / संरक्षण
विपत्तयःvipattayaḥविपत्तियाँ / आपदाएँ
जनसंख्याjanasankhyāजनसंख्या
शहरीकरणśaharīkaraṇaशहरीकरण
उद्यानudyānaउद्यान / बगीचा
क्रीडतिkrīḍatiखेलता / खेलती है
स्मरणीयम्smaraṇīyamयाद रखने योग्य
स्वच्छंsvacchaṃस्वच्छ
जलjalaपानी
निवासnivāsaरहने की जगह
प्रकृतिप्रदत्तprakṛtipradattaप्रकृति द्वारा दिया गया
सत्यमेवsatyamevaसत्य ही
माताmātāमाँ
पुत्रःputraḥबेटा / पुत्र
पर्वतparvataपहाड़ / पर्वत

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