इस पाठ में एक प्राध्यापक और नाविक के संवाद के माध्यम से यह बताया गया है कि केवल पुस्तकीय ज्ञान ही जीवन के लिए पर्याप्त नहीं होता। प्राध्यापक अपनी पढ़ाई पर गर्व करता है और नाविक की अशिक्षा को व्यर्थ मानता है, परन्तु संकट के समय वही नाविक अपने व्यावहारिक ज्ञान से प्राध्यापक की रक्षा करता है। जब नाव डूबने लगती है, तब तैरना न जानने के कारण प्राध्यापक असहाय हो जाता है। इस प्रकार पाठ यह शिक्षा देता है कि जीवन में व्यवहारिक ज्ञान, अनुभव और विवेक का विशेष महत्व है। मनुष्य को किसी को भी केवल शिक्षा के आधार पर छोटा नहीं समझना चाहिए, क्योंकि हर ज्ञान का अपना समय और महत्व होता है।
Path – Kim Tvaṁ Jānāsi Bhavataḥ
Line by Line Meaning
षष्ठः पाठः
Ṣaṣṭhaḥ pāṭhaḥ
छठा पाठ
किं त्वं जानासि भवतः (तुमुन्-प्रत्यय विधिलिङ्कारः)
Kiṁ tvaṁ jānāsi bhavataḥ (tumun-pratyaya vidhiliṅkāraḥ)
क्या तुम जानते हो, हे महोदय (तुमुन् प्रत्यय का प्रयोग)
विश्वविद्यालये कश्चित् प्राध्यापकः विद्वान् नाम्ना आसीत्।
Viśvavidyālaye kaścit prādhyāpakaḥ Vidvān nāmnā āsīt.
विश्वविद्यालय में विद्वान नाम का एक प्राध्यापक था।
नावा जलविहारं कर्तुं तस्य प्रथमोद्यमः आसीत्।
Nāvā jalavihāraṁ kartuṁ tasya prathamodyamaḥ āsīt.
नाव से जलविहार करना उसका पहला प्रयास था।
बालसुलभैः क्रीडनैः जलक्रीडायां विचित्रां नौकां अम्बराशौ अपसरन्तीम्,
Bālasulabhaiḥ krīḍanaiḥ jalakrīḍāyāṁ vicitrāṁ naukāṁ ambarāśau apasarantīm,
बालसुलभ खेलों के साथ जलक्रीड़ा में जल में आगे बढ़ती हुई विचित्र नाव को
अस्माद् अध्येने नौकायाः अवरोहणम् इत्यादि दृश्यं दृष्ट्वा सः नाविकम् एवम् अपृच्छत्—
Asmād adhyene naukāyāḥ avarohaṇam ityādi dṛśyaṁ dṛṣṭvā saḥ nāvikam evam apṛcchat—
इन सब दृश्यों को देखकर उसने नाविक से इस प्रकार पूछा—
प्राध्यापकः — भो नाविक! किं भवता कदापि गणितं पठितम् ?
Bho nāvika! kiṁ bhavatā kadāpi gaṇitaṁ paṭhitam?
प्राध्यापक बोले— हे नाविक! क्या तुमने कभी गणित पढ़ा है?
नाविकः — न पठितम्।
Nāvikaḥ — na paṭhitam.
नाविक बोला— नहीं पढ़ा है।
प्राध्यापकः — किं गणितं पठित्वा विद्यालयं न गतवान्।
Prādhyāpakaḥ — kiṁ gaṇitaṁ paṭhitvā vidyālayaṁ na gatavān?
प्राध्यापक बोले— क्या गणित पढ़कर तुम विद्यालय नहीं गए?
नाविकः — तुं भवतः जीवनस्य चतुर्थांशः व्यर्थतां गतः।
Nāvikaḥ — tuṁ bhavataḥ jīvanasya caturthāṁśaḥ vyarthatāṁ gataḥ.
नाविक बोला— तब आपके जीवन का चौथाई भाग व्यर्थ हो गया।
भवता रसायनशास्त्रं भौतिकशास्त्रं वा पठितं स्यात्।
Bhavatā rasāyanaśāstraṁ bhautikaśāstraṁ vā paṭhitaṁ syāt.
आपने रसायनशास्त्र या भौतिकशास्त्र भी पढ़ा होगा।
नाविकः — ईदृशे मे भाग्ये कुतः ?
Nāvikaḥ — īdṛśe me bhāgye kutaḥ?
नाविक बोला— ऐसा भाग्य मुझे कहाँ से मिलता?
यद्यपि भौतिक-शास्त्रं रसायनशास्त्रं वा पठेम।
Yadyapi bhautika-śāstraṁ rasāyanaśāstraṁ vā paṭhema.
यदि मैं भौतिकशास्त्र या रसायनशास्त्र पढ़ता।
प्राध्यापकः — नूनं तव अर्थशः जीवनस्य व्यर्थता नीतः।
Prādhyāpakaḥ — nūnaṁ tava arthaśaḥ jīvanasya vyarthatā nītaḥ.
प्राध्यापक बोले— निश्चय ही तुम्हारे जीवन का आधा भाग व्यर्थ हो गया।
वद वद तव आलसभावः तु पठिता स्यात् एव ?
Vada vada tava ālasabhāvaḥ tu paṭhitā syāt eva?
बताओ–बताओ, क्या तुमने आलस के कारण पढ़ाई नहीं की?
नाविकः — (लघुनिम् अनुभवन्) महाशय! नाहं मात्रां प्रियम् वा विद्यालये पठितः।
Nāvikaḥ — (laghunim anubhavan) mahāśaya! nāhaṁ mātrāṁ priyam vā vidyālaye paṭhitaḥ.
नाविक बोला (लज्जा अनुभव करते हुए)— महाशय! मैंने विद्यालय में कुछ भी नहीं पढ़ा।
कुतः पठेम ?
Kutaḥ paṭhema?
मैं कहाँ से पढ़ता?
प्राध्यापकः — तर्हि तव जीवनस्य त्रयो भागः अपार्थं जातः।
Prādhyāpakaḥ — tarhi tava jīvanasya trayo bhāgaḥ apārthaṁ jātaḥ.
प्राध्यापक बोले— तब तुम्हारे जीवन के तीन भाग व्यर्थ हो गए।
अनन्तरं तदे जलवर्तनं समायातम्।
Anantaraṁ tade jalavartanaṁ samāyātam.
इसके बाद जल में भँवर आ गया।
लहरीणां वेगेन तदा नौः अकम्पता पश्यतः एव तयोः नौका जलेन पूरिता जाता।
Laharīṇāṁ vegena tadā nauḥ akampatā paśyataḥ eva tayoḥ naukā jalena pūritā jātā.
लहरों के वेग से नाव डगमगाने लगी और देखते-देखते नाव पानी से भर गई।
नाविकः — महाशय! किं भवान् तर्दुं जानाति ?
Nāvikaḥ — mahāśaya! kiṁ bhavān tarduṁ jānāti?
नाविक बोला— महाशय! क्या आप तैरना जानते हैं?
प्राध्यापकः — अहो तर्दुं न जानामि।
Prādhyāpakaḥ — aho tarduṁ na jānāmi.
प्राध्यापक बोले— अरे! मैं तैरना नहीं जानता।
यदि तर्दुं न जानाति, तदा भवतः सर्वं जीवनं व्यर्थं जातम्।
Yadi tarduṁ na jānāti, tadā bhavataḥ sarvaṁ jīvanaṁ vyarthaṁ jātam.
यदि आप तैरना नहीं जानते, तो आपका पूरा जीवन व्यर्थ हो गया।
अहं तु बाहुभ्यां नदं तीव्रं पारं प्रयामि।
Ahaṁ tu bāhubhyāṁ nadaṁ tīvrāṁ pāraṁ prayāmi.
मैं तो अपनी दोनों भुजाओं के बल पर तेज़ बहती नदी को पार चला जाता हूँ।
किन्तु यदि भवान् अन्यथा न मन्यते, अहं भवन्तम् स्वपृष्ठमारोप्य पारगन्तुमिच्छामि।
Kintu yadi bhavān anyathā na manyate, ahaṁ bhavantam svapṛṣṭham āropya pāragantum icchāmi.
लेकिन यदि आप मना न करें, तो मैं आपको अपनी पीठ पर बैठाकर पार ले जाना चाहता हूँ ।
शब्दार्थ (Vocabulary)
| Sanskrit | Pronunciation | Hindi Meaning |
|---|---|---|
| प्राध्यापकः | Prādhyāpakaḥ | अध्यापक |
| नाविकः | Nāvikaḥ | नाव चलाने वाला |
| जलविहारः | Jalavihāraḥ | नौका-विहार |
| चतुर्थांशः | Caturthāṁśaḥ | चौथा भाग |
| व्यर्थः | Vyarthaḥ | निरर्थक |
| लहरी | Laharī | लहर |
| वेगः | Vegaḥ | गति |
| पूरिता | Pūritā | भर गई |
| तर्दुं | Tarduṁ | तैरना |
| भीतः | Bhītaḥ | डरा हुआ |
| जीवनम् | Jīvanam | जीवन |
| विद्या | Vidyā | ज्ञान |
| अनन्तरम् | Anantaram | बाद में |
| समायातम् | Samāyātam | आ गया |
| नदी | Nadī | नदी |
| पारयामि | Pārayāmi | पार करता हूँ |
| स्वपृष्ठ | Svapṛṣṭha | अपनी पीठ |
| सहायता | Sahāyatā | मदद |
| अनुभवन् | Anubhavan | अनुभव करते हुए |
| भयम् | Bhayam | डर |
| ज्ञानम् | Jñānam | ज्ञान |
| विद्यालयः | Vidyālayaḥ | विद्यालय |
| तैरति | Tairati | तैरता है |
| नौका | Naukā | नाव |
| व्यर्थताम् | Vyarthatām | व्यर्थता |
प्रश्न 1
उच्चारणं कृत्वा पुस्तिकायां च लिखत — आस्तः, जलवर्तनम्, चतुर्थांशः, व्यर्थताम्, तीव्रं, अरिसमाध्यमेन।
Uccāraṇaṁ kṛtvā pustikāyāṁ ca likhata
उच्चारण करके कॉपी में लिखिए।
उत्तर:
आस्तः, जलवर्तनम्, चतुर्थांशः, व्यर्थताम्, तीव्रं, अरिसमाध्यमेन।
āstaḥ, jalavartanam, caturthāṁśaḥ, vyarthatām, tīvram, arisa-mādhyamena
बैठा हुआ, भँवर, चौथा भाग, व्यर्थता, तेज़, पतवार के माध्यम से।
प्रश्न 2 (एकपदेन उत्तरत)
(क) कः विहरन् नावम् आस्तः ?
Kaḥ viharan nāvam āstaḥ?
कौन घूमते हुए नाव पर बैठा था?
उत्तर:
प्राध्यापकः।
Prādhyāpakaḥ
प्राध्यापक।
(ख) नौकायाः अवरोहणं केन माध्यमेन भवति ?
Naukāyāḥ avarohaṇaṁ kena mādhyamena bhavati?
नाव का संचालन किस माध्यम से होता है?
उत्तर:
अरिसमाध्यमेन।
Arisa-mādhyamena
पतवार के माध्यम से।
(ग) कः लघुनिम् अनुभवत् ?
Kaḥ laghunim anubhavata?
किसने लज्जा का अनुभव किया?
उत्तर:
नाविकः।
Nāvikaḥ
नाविक।
(घ) जलेन पूरिता का जाता ?
Jalena pūritā kā jātā?
पानी से कौन भर गई?
उत्तर:
नौका।
Naukā
नाव।
प्रश्न 3 (कः कथयति)
(क) भवता कदापि गणितं पठितम् ?
Bhavatā kadāpi gaṇitaṁ paṭhitam?
क्या आपने कभी गणित पढ़ा है?
उत्तर:
प्राध्यापकः।
Prādhyāpakaḥ
प्राध्यापक।
(ख) ईदृशे मे भाग्ये कुतः ?
Īdṛśe me bhāgye kutaḥ?
ऐसा भाग्य मुझे कहाँ से?
उत्तर:
नाविकः।
Nāvikaḥ
नाविक।
(ग) तव अर्थशः जीवनस्य व्यर्थता नीतः।
Tava arthaśaḥ jīvanasya vyarthatā nītaḥ
तुम्हारे जीवन का आधा भाग व्यर्थ गया।
उत्तर:
प्राध्यापकः।
Prādhyāpakaḥ
प्राध्यापक।
(घ) अहं तर्दुं न जानामि।
Ahaṁ tarduṁ na jānāmi
मैं तैरना नहीं जानता।
उत्तर:
प्राध्यापकः।
Prādhyāpakaḥ
प्राध्यापक।
(ङ) यदि तर्दुं न जानाति, तदा भवतः सर्वं जीवनं व्यर्थं जातम्।
Yadi tarduṁ na jānāti tadā bhavataḥ sarvaṁ jīvanaṁ vyarthaṁ jātam
यदि आप तैरना नहीं जानते तो आपका पूरा जीवन व्यर्थ हो गया।
उत्तर:
नाविकः।
Nāvikaḥ
नाविक।
प्रश्न 4 (तुमुन्-प्रत्यय)
चल् + तुमुन् = चलितुम्हस् + तुमुन् = हसितुम्
क्रीड् + तुमुन् = क्रीडितुम्
पठ् + तुमुन् = पठितुम् calitum, hasitum, krīḍitum, paṭhitum चलने, हँसने, खेलने, पढ़ने के लिए
प्रश्न 5 (क्त्वा प्रत्यय)
नी + त्वा = नीत्वागम् + त्वा = गत्वा
लिख् + त्वा = लिखित्वा nītvā, gatvā, likhitvā ले जाकर, जाकर, लिखकर
प्रश्न 6 (हिन्दी → संस्कृत)
(क) किं त्वया संस्कृतभाषा पठिता ?
Kiṁ tvayā saṁskṛtabhāṣā paṭhitā?
क्या तुमने संस्कृत भाषा पढ़ी है?
प्रश्न 7 (हिन्दी → संस्कृत)
(क) सः पठितुम् आगच्छति।
Saḥ paṭhitum āgacchati
वह पढ़ने के लिए आता है।
उत्तर:
(घ) आवां उभौ भ्रमितुम् नद्याः तीरे गच्छावः।
Āvāṁ ubhau bhramitum nadyāḥ tīre gacchāvaḥ
हम दोनों घूमने के लिए नदी के किनारे जाते हैं।
गच्छति शकते मा आहर्तेः।
Gacchati śakate mā āharteḥ
जो चल सकता है, उसे रोकना नहीं चाहिए।
चलतः शकतात् मा अवरोधः।
Calataḥ śakatāt mā avarodḥaḥ
चलते हुए रथ को मत रोको।
दुःखे पुरुषे सह मा गच्छेः।
Duḥkhe puruṣe saha mā gaccheḥ
दुःखी व्यक्ति के साथ बुरा मार्ग मत अपनाओ।