Lesson : 7 – Prahelikā – Class : 7

‘प्रहेलिका’ पाठ में रोचक पहेलियों के माध्यम से बुद्धि, तर्क और भाषा–कौशल का विकास किया गया है। इन प्रहेलिकाओं में दन्तहीन, निर्जीव, पादविहीन जैसे शब्दों के सहारे दैनिक जीवन की वस्तुओं और प्राकृतिक तत्वों के गुणों का संकेत दिया गया है, जिससे विद्यार्थी सोचने और अर्थ निकालने के लिए प्रेरित होते हैं। यह पाठ शब्द–ज्ञान बढ़ाने के साथ-साथ प्रश्न–निर्माण, एकपदेन उत्तर, सन्धि-विच्छेद तथा वाक्य-रचना जैसे व्याकरणिक अभ्यासों को भी सशक्त बनाता है। कुल मिलाकर यह पाठ मनोरंजन के साथ सीखने की भावना को प्रोत्साहित करता है और विद्यार्थियों में जिज्ञासा, कल्पनाशक्ति तथा तर्कबुद्धि का विकास करता है।

Path – Prahelikā

Line by Line – पाठ का अर्थ
दन्तहीनः शिलाभक्षी निर्जीवो बहुभाषकः। danta-hīnaḥ śilā-bhakṣī nirjīvo bahu-bhāṣakaḥ वह बिना दाँत का है, पत्थर खाने वाला है, निर्जीव है और बहुत कुछ बोलता है।
गुणसूत्रे समुद्धृतः परपादेन गच्छति॥ guṇa-sūtre samuddhṛtaḥ para-pādena gacchati डोरी में बँधा हुआ वह दूसरे के पैरों से चलता है।
शोभितोऽस्मि शिखण्डेन दीर्घः पृष्ठलङ्घकः। śobhito’smi śikhaṇḍena dīrghaḥ pṛṣṭha-laṅghakaḥ मैं पंखों से सुसज्जित हूँ, लम्बा हूँ और पीठ पर कूदने वाला हूँ।
रात्रौ विहगाश्मिं नृत्यं पश्यन्ति मे जनाः॥ rātrau vihagāśmiṁ nṛtyaṁ paśyanti me janāḥ रात में लोग पक्षी और पत्थर के समान मेरा नृत्य देखते हैं।
पण्डितो नास्मि किञ्चिद् तथापि साक्षरोऽस्म्यहम्। paṇḍito nāsmi kiñcit tathāpi sākṣaro’smyaham मैं विद्वान नहीं हूँ, फिर भी साक्षर हूँ।
पादविहीनं गच्छामि कथयामि विना मुखम्॥ pāda-vihīnaṁ gacchāmi kathayāmi vinā mukham मैं बिना पैरों के चलता हूँ और बिना मुख के बोलता हूँ।
कदाचित् प्रस्तरखण्डोऽस्मि कदाचित् तरलं पुनः। kadācit prastara-khaṇḍo’smi kadācit taralaṁ punaḥ कभी मैं पत्थर का टुकड़ा होता हूँ और कभी फिर से तरल।
कदाचिद् धूम्रसूक्ष्मं मां पश्यन्ति सदा जनाः॥ kadācid dhūmra-sūkṣmaṁ māṁ paśyanti sadā janāḥ कभी लोग मुझे धुएँ जैसा सूक्ष्म रूप में देखते हैं।
रेफादौ मकारोऽस्ति वाल्मीकि: यस्य गायकः। rephādau makāro’sti vālmīkiḥ yasya gāyakaḥ जिसके आरम्भ में ‘र’ और अंत में ‘म’ है, जिसका गायक वाल्मीकि हैं।
सर्वश्रेष्ठं यस्य राज्यं वन्दे कोटिर् जनप्रियः॥ sarvaśreṣṭhaṁ yasya rājyaṁ vande koṭir janapriyaḥ जिसका राज्य सर्वश्रेष्ठ है, जिसे करोड़ों लोग प्रिय मानते हैं।
शब्दार्थ (25+)
SanskritPronunciationHindi Meaning
दन्तहीनःdantahīnaḥबिना दाँत का
शिलाभक्षीśilābhakṣīपत्थर खाने वाला
निर्जीवःnirjīvaḥबेजान
बहुभाषकःbahubhāṣakaḥअधिक बोलने वाला
गुणसूत्रेguṇasūtreडोरी में
परपादेनparapādenaदूसरे के पैर से
शिखण्डेनśikhaṇḍenaपंख से
पादविहीनम्pādavihīnamपैरों के बिना
प्रस्तरखण्डःprastarakhaṇḍaḥपत्थर का टुकड़ा
तरलम्taralamतरल
धूम्रसूक्ष्मम्dhūmrasūkṣmamधुएँ जैसा सूक्ष्म
रेफादौrephādauआरम्भ में ‘र’
उपानत्upānatजूता
अभ्यास – प्रश्नोत्तर (1–8)

1. उच्चारणं कृत्वा पुस्तिकायां च लिखत

दन्तहीनः, शिलाभक्षी, निर्जीवः, बहुभाषकः … इन शब्दों का शुद्ध उच्चारण कर लिखना है।

2. एकपदेन उत्तरत

प्रश्न
दन्तहीनः शिलाभक्षी कः अस्ति? dantahīnaḥ śilābhakṣī kaḥ asti बिना दाँत का पत्थर खाने वाला कौन है?
उत्तर: उपानत् upānat जूता
प्रश्न
पादे विना कः गच्छति? pāde vinā kaḥ gacchati पैरों के बिना कौन चलता है?
उत्तर: पत्रम् patram पत्र
प्रश्न
राष्ट्रे विहगः कः अस्ति? rāṣṭre vihagaḥ kaḥ asti राष्ट्र का पक्षी कौन है?
उत्तर: मयूरः mayūraḥ मोर
प्रश्न
कस्य राज्यं सर्वश्रेष्ठम्? kasya rājyaṁ sarvaśreṣṭham किसका राज्य श्रेष्ठ है?
उत्तर: रामस्य rāmasya राम का
प्रश्न
पाठे जलस्य कति रूपाणि वर्णितानि? pāṭhe jalasya kati rūpāṇi varṇitāni जल के कितने रूप बताए गए हैं?
उत्तर: त्रीणि trīṇi तीन

3. मञ्जूषातः पदानि चित्वा वाक्यानि पूरयत

(क) असत्यवचनं कथयामि।
(ख) जलं विना जीवनं न सम्भवति।
अभ्यास – प्रश्न 4 से 8

4. पाठे प्रयुक्तानि लट्-लकारस्य क्रियापदानि लिखत

प्रश्न
पाठे प्रयुक्तानि लट्-लकारस्य क्रियापदानि लिखत। pāṭhe prayuktāni laṭ-lakārasya kriyāpadāni likhata पाठ में आए हुए वर्तमान काल (लट्-लकार) के क्रियापद लिखिए।
उत्तर: गच्छति, अस्ति, पश्यन्ति, कथयामि, नृत्यन्ति gacchati, asti, paśyanti, kathayāmi, nṛtyanti चलता है, है, देखते हैं, कहता हूँ, नृत्य करते हैं

5. सन्धि-विच्छेदं कुरुत

प्रश्न
समुद्धृतः samuddhṛtaḥ संधि-विच्छेद कीजिए।
उत्तर: सम् + उद्धृतः sam + uddhṛtaḥ पूरी तरह + उठाया गया
प्रश्न
शोभितोऽस्मि śobhito’smi संधि-विच्छेद कीजिए।
उत्तर: शोभितः + अस्मि śobhitaḥ + asmi सुसज्जित + हूँ
प्रश्न
मकारोऽस्ति makāro’sti संधि-विच्छेद कीजिए।
उत्तर: मकारः + अस्ति makāraḥ + asti म अक्षर + है
प्रश्न
कदाचित् kadācit संधि-विच्छेद कीजिए।
उत्तर: कदा + चित् kadā + cit कभी + भी

6. उपयुक्तशब्दैः वाक्यं पूरयत

प्रश्न
मयूरः __________ । (नृत्यति / नृत्यन्ति) mayūraḥ ________ मोर ________।
उत्तर: मयूरः नृत्यति। mayūraḥ nṛtyati मोर नृत्य करता है।
प्रश्न
जनाः __________ पिबन्ति। (जलम् / जलेन) janāḥ ______ pibanti लोग ______ पीते हैं।
उत्तर: जनाः जलम् पिबन्ति। janāḥ jalam pibanti लोग पानी पीते हैं।
प्रश्न
जनाः चित्राणि __________ । (पश्यन्ति / पश्यति) janāḥ citrāṇi ________ लोग चित्र ________।
उत्तर: जनाः चित्राणि पश्यन्ति। janāḥ citrāṇi paśyanti लोग चित्र देखते हैं।

7. रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत

प्रश्न
उपानत् पादेन गच्छति। upānat pādena gacchati जूता पैर से चलता है।
उत्तर: उपानत् केन गच्छति? upānat kena gacchati? जूता किससे चलता है?
प्रश्न
पत्रं पादेन विना गच्छति। patraṁ pādena vinā gacchati पत्र पैर के बिना चलता है।
उत्तर: पत्रं केन विना गच्छति? patraṁ kena vinā gacchati? पत्र किसके बिना चलता है?
प्रश्न
हिमः जलस्य एव रूपम् अस्ति। himaḥ jalasya eva rūpam asti बर्फ जल का ही रूप है।
उत्तर: हिमः कस्य एव रूपम् अस्ति? himaḥ kasya eva rūpam asti? बर्फ किसका रूप है?

8. चित्रं दृष्ट्वा मञ्जूषातः पदानि चित्वा वाक्यानि रचयत

प्रश्न
पश्यन्ति, जनाः, बालकाः, देविका, केशवः, खेलन्ति, खगाः, पश्यति, पुष्पाणि, चित्रपटः, सूर्यः, उद्याने, कूजन्ति, उद्यति, सन्ति paśyanti, janāḥ, bālakāḥ, devikā, keśavaḥ, khelanti, khagāḥ, paśyati, puṣpāṇi, citrapaṭaḥ, sūryaḥ, udyāne, kūjanti, udyati, santi चित्र देखकर मञ्जूषा में दिए गए सभी शब्दों का प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए।
उत्तर:

उद्याने बालकाः खेलन्ति। udyāne bālakāḥ khelanti उद्यान में बच्चे खेलते हैं।

उद्याने पुष्पाणि सन्ति। udyāne puṣpāṇi santi उद्यान में फूल हैं।

खगाः उद्याने कूजन्ति। khagāḥ udyāne kūjanti उद्यान में पक्षी चहचहाते हैं।

जनाः चित्रपटं पश्यन्ति। janāḥ citrapaṭaṁ paśyanti लोग चित्रपट देखते हैं।

देविका केशवं पश्यति। devikā keśavaṁ paśyati देविका केशव को देखती है।

सूर्यः उद्यति। sūryaḥ udyati सूर्य उदय होता है।

पाठसार / Moral

यह पाठ प्रहेलिकाओं के माध्यम से सोचने, समझने और तर्क करने की क्षमता विकसित करता है। सरल शब्दों में गूढ़ अर्थ समझने से बुद्धि तीव्र होती है और भाषा का ज्ञान बढ़ता है।

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