पाठ 5 – वयं स्वाधीनाः
यह कविता स्वतंत्र भारत के मूल्यों को प्रकट करती है। स्वतंत्रता, समान अधिकार, शिक्षा, सहयोग और शांति के माध्यम से […]
यह कविता स्वतंत्र भारत के मूल्यों को प्रकट करती है। स्वतंत्रता, समान अधिकार, शिक्षा, सहयोग और शांति के माध्यम से […]
अयं पाठः दया, करुणा, मानवता च उपदेशयति। मनुष्यैः दीनानां रक्षणं कर्तव्यम्। मूढता देशात् दूरा करणीया। धर्मग्रन्थानां उपदेशः जीवनं मार्गदर्शयति। बालकाः
इस पाठ में हमारे देश के महान व्यक्तियों और ऐतिहासिक स्थलों का परिचय दिया गया है। इसमें डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल
इस पाठ “पुनरवलोकनम्” में सरल-सरल संस्कृत वाक्यों के माध्यम से मुनि, गुरु, माता, पिता, धेनु, नदी आदि के कार्य बताए
यह पाठ प्रयाण-गीतम् राष्ट्रप्रेम, वीरता और कर्तव्यनिष्ठा पर आधारित प्रेरणादायक कविता है। इसमें किशोर सैनिकों के उत्साह, आत्मविश्वास और स्वतंत्रता
अङ्गुलिमाल एक भयंकर डाकू था जो लोगों को मारकर उनकी अँगुलियों की माला बनाता था। उसके अत्याचारों से समस्त प्रजा
रक्षाबन्धन का पर्व श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के हाथ में रक्षा-सूत्र
एक प्यासा कौआ दूर-दूर तक पानी खोजता रहा पर उसे कहीं जल नहीं मिला। अचानक उसे एक घड़ा दिखाई दिया,
चन्द्रशेखर आजाद भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के साहसी और अदम्य योद्धा थे। जालियाँवाला बाग कांड की क्रूरता ने उनके मन में