देवि सरस्वति! तव पदकमलम्।
अहं नमामि वयं नमामः॥
मातः! देहि सद्गुणज्ञानम्।
अहं नमामि वयं नमामः॥
देवि शारदे! तव सन्निकटे।
अहं पठामि वयं पठामः॥
सरस्वती – वन्दना
छात्र संस्करण — पाठ (चित्र से) — पंक्ति-वार कार्ड, शब्दावली और नैतिक शिक्षा
देवि सरस्वती! तव पदकमलम्।
देवी सरस्वती! तव पदकमलम् — (Devi Sarasvatī! tava padakamalam)
हे देवी सरस्वती! (आपके) पदकमल को। — स्तुति/नमस्कारार्थ।
अहं नमामि वयं नमामः॥
अहं नमामि वयम् नमामः — (Ahaṁ namāmi vayaṁ namāmaḥ)
मैं (आपको) नमस्कार करता/करती हूँ, हम (समूह) नमस्कार करते हैं।
मातः देहि सद्गुणज्ञानम्।
मातः देहि सद्-गुण-ज्ञानम् — (Mātaḥ dehi sadguṇajñānam)
हे माता (देवी), हमें सद्गुण और ज्ञान प्रदान करो।
अहं नमामि वयं नमामः॥
अहं नमामि वयं नमामः — (Ahaṁ namāmi vayaṁ namāmaḥ)
मैं तुम्हें नमस्कार करता/करती हूँ, हम सब नमस्कार करते हैं।
देवी शारदे! तव सन्निकटे।
देवी शारदे! तव सन्निकटे — (Devī Śārade! tava sannikaṭe)
हे शारदा (सरस्वती)! आप के निकट (हे देवी) — आह्वान/प्रार्थना।
अहं पठामि वयं पठामः॥
अहं पठामि वयं पठामः — (Ahaṁ paṭhāmi vayaṁ paṭhāmaḥ)
मैं पढ़ता/पढ़ती हूँ, हम पढ़ते/पढ़ती हैं।
नीचे प्रत्येक पंक्ति में संबंधित उच्चारण और हिन्दी अर्थ दिए गए हैं।