पञ्चदशः पाठ — सुभाषितानि
विद्यां सदा पठामि, लेखं सदा लिखामि।
(उच्चारण: विद्यां सदा पठामि, लेखं सदा लिखामि)
मैं हमेशा पढ़ाई करता हूँ, और लिखता हूँ।
सर्वान् च प्राणिनोऽहं, स्नेहेन पालयाम्यहम्।
(सर्वान् च प्राणिनः अहं स्नेहेन पालयामि)
मैं सभी जीवों की स्नेह से रक्षा करता हूँ।
सत्यं वदामि नित्यं, धर्मं चरामि नित्यं।
(सत्यं वदामि नित्यं, धर्मं चरामि नित्यं)
मैं सदा सत्य बोलता हूँ और धर्म का पालन करता हूँ।
कस्यापि नैव पीडां, कर्याम्यहं करोमि।
(कस्यापि नैव पीडां कर्याम्यहं करोमि)
मैं किसी को कष्ट नहीं देता और न किसी को पीड़ा पहुँचाता हूँ।
जनकं नमामि नित्यं, विद्यागुरुं सदैव।
(जनकं नमामि नित्यं, विद्यागुरुं सदैव)
मैं सदा पिता और गुरु को प्रणाम करता हूँ।
अतिथिं नमामि गेहे, जननीं च सर्वदैव।
(अतिथिं नमामि गेहे, जननीं च सर्वदैव)
मैं अतिथि और माता का सदैव सम्मान करता हूँ।
शब्दावली (Vocabulary) — 15 शब्द
| शब्द | उच्चारण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| विद्या | विद्या | ज्ञान / शिक्षा |
| पठामि | पठामि | मैं पढ़ता हूँ |
| लेखं | लेखं | लेखन / लेख |
| लिखामि | लिखामि | मैं लिखता हूँ |
| सर्वान् | सर्वान् | सभी / सबको |
| प्राणिनः | प्राणिनः | जीव / प्राणी |
| पालयामि | पालयामि | संरक्षण करता हूँ |
| सत्यं | सत्यं | सत्य / सच |
| धर्मं | धर्मं | धर्म / सदाचार |
| चरामि | चरामि | चलता हूँ / आचरण करता हूँ |
| पीडां | पीडां | कष्ट / दुख |
| कर्यामि | कर्यामि | करता हूँ |
| जनकं | जनकं | पिता |
| विद्यागुरुः | विद्यागुरुः | शिक्षक |
| अतिथि | अतिथि | मेहमान / आगंतुक |
| जननी | जननी | माता |
Moral (English):
नैतिक (हिन्दी):
Always speak truth, respect parents, teachers and guests, follow righteousness, and show love to all living beings.
नैतिक (हिन्दी):
सदैव सत्य बोलना चाहिए, माता-पिता, गुरु और अतिथि का सम्मान करना चाहिए, धर्म का पालन करना चाहिए और सभी जीवों से प्रेम करना चाहिए।