Subhashitani – Class :5 -Lesson :14

सुभाषितानि श्लोकों का हिन्दी अनुवाद और भावार्थ

इसमें ५ श्लोक दिए गए हैं, जिनमें जीवन की सीख मिलती है:

  1. 1. आलस्य से विद्या नष्ट होती है, अविद्या से धन नहीं मिलता।
  2. 2. विद्या ही सबसे बड़ा धन है, जिसे न चोर ले सकता है, न राजा छीन सकता है।
  3. 3. हर जगह रत्न, मोती और सज्जन लोग नहीं मिलते।
  4. 4. कार्य केवल परिश्रम से पूरे होते हैं, इच्छा से नहीं।
  5. 5. फलयुक्त वृक्ष और गुणी व्यक्ति हमेशा झुकते हैं, पर मूर्ख और सूखी लकड़ी कभी नहीं झुकते।
अलस्य कुतो विद्या, अविद्यस्य कुतो धनम्। Alasyaṁ kuto vidyā, avidyasya kuto dhanam. आलसी व्यक्ति के पास विद्या नहीं होती और अविद्यावान को धन नहीं मिलता।
अधनस्य कुतो मित्रम्, अमित्रस्य कुतः सुखम्॥ १॥ Adhanasya kuto mitram, amitrasya kutaḥ sukham. धनहीन का मित्र नहीं होता और अमित्र के पास सुख नहीं होता।
न चौरहार्यं न च राजहार्यं न भ्रातृभाज्यं न च भारकारि। Na caurahāryaṁ na ca rājahāryaṁ na bhrātṛbhājyaṁ na ca bhārakāri. विद्या न तो चोर ले जा सकता है, न राजा छीन सकता है, न भाई बाँट सकते हैं और न यह भार होती है।
व्यये कृते वर्धत एव नित्यं विद्याधनं सर्वधनप्रधानम्॥ २॥ Vyaye kṛte vardhata eva nityaṁ vidyādhanaṁ sarvadhanapradhānam. विद्या खर्च करने पर भी बढ़ती है और सभी धनों में, विद्या का धन सबसे श्रेष्ठ है।
शैले शैले न माणिक्यं मौक्तिकं न गजे गजे। Śaile śaile na māṇikyaṁ mauktikaṁ na gaje gaje. हर पहाड़ पर माणिक्य नहीं होता, हर हाथी के पास मोती नहीं होता।
साधवः नहि सर्वत्र, चन्दनं न वने वने॥ ३॥ Sādhavaḥ naḥ sarvatra candanaṁ na vane vane. सज्जन लोग हर जगह नहीं मिलते, जैसे हर वन में चंदन नहीं होता।
उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः। Udyamena hi siddhyanti kāryāṇi na manorathaiḥ. काम परिश्रम के द्वारा ही पूरे होते हैं, मन की इच्छा मात्र से नही। इच्छा से नहीं।
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥ ४॥ Na hi suptasya siṁhasya praviśanti mukhe mṛgāḥ. जैसे सोए हुए सिंह के मुख में हिरण स्वयं प्रवेश नहीं करते।
नमन्ति फलिनो वृक्षाः नमन्ति गुणिनो जना:। Namanti phalino vṛkṣā namanti guṇino janāḥ. फल वाले वृक्ष झुक जाते हैं, गुणी व्यक्ति भी विनम्र होते हैं।
शुष्कवृक्षाश्च मूर्खाश्च न नमन्ति कदाचन॥ ५॥ Śuṣkakāṣṭhāśca mūrkhāśca na namanti kadācana. सूखी लकड़ी और मूर्ख लोग कभी नहीं झुकते।
शब्दउच्चारणहिन्दी अर्थ
अलस्यAlasyaआलस्य
विद्याVidyāज्ञान
धनDhanसम्पत्ति
मित्रMitraसखा
अमित्रAmitraशत्रु
सुखSukhaआनंद
चौरहार्यCaurahāryaचोर द्वारा चुराने योग्य
राजहार्यRājahāryaराजा द्वारा छीने जाने योग्य
मौक्तिकMauktikaमोती
माणिक्यMāṇikyaरत्न
साधुSādhuसज्जन
चन्दनCandanaचंदन
वनVanaजंगल
उद्यमUdyamaपरिश्रम
सिंहSiṁhaशेर
मृगMṛgaहिरण
फलिनPhalinफलयुक्त
गुणिनGuṇinगुणी
शुष्ककाष्ठŚuṣkakāṣṭhaसूखी लकड़ी
मूर्खMūrkhaअज्ञानी
मनोरथManorathaइच्छा
प्रवेशPraveśaअंदर जाना
कदाKadāकभी
प्रधानPradhānश्रेष्ठ
भ्रातृBhrātṛभाई

English: Knowledge and effort are the greatest wealth. True greatness lies in humility, and laziness never leads to success.

हिन्दी: विद्या और परिश्रम ही सच्चा धन है। सच्ची महानता विनम्रता में है, और आलस्य से कभी सफलता नहीं मिलती।

प्रश्न: अलस्यं किं नाशति?
Alasyaṁ kiṁ nāśati?
उत्तर: आलस्य से विद्या नष्ट होती है।
Ālasya se vidyā naṣṭ hotī hai.
प्रश्न: शैले शैले किं न भवति?
Śaile śaile kiṁ na bhavati?
उत्तर: हर शैल पर माणिक्य नहीं होता।
Har śail par māṇikya nahīṁ hotā.
प्रश्न: कस्मिन् मुखे मृगाः न प्रविशन्ति?
Kasmin mukhe mṛgāḥ na praviśanti?
उत्तर: सोते हुए सिंह के मुख में मृग प्रवेश नहीं करते।
Sote hue siṁh ke mukh meṁ mṛg praveś nahīṁ karte.
प्रश्न: कीदृशाः वृक्षाः नमन्ति?
Kīdṛśāḥ vṛkṣāḥ namanti?
उत्तर: फल वाले वृक्ष नम्र होते हैं।
Phal vāle vṛkṣ namra hote haiṁ.
अधनस्य कुतोमित्रम्
शैले शैलेन माणिक्यम्
न हि सुप्तस्य सिंहस्यप्रविशन्ति मुखे मृगाः
नमन्ति फलिनो वृक्षानमन्ति गुणिनो जनाः
अविद्यस्य कुतोधनम्
नमन्ति फलिनोवृक्षाः
साधवः नःसर्वत्र
विद्याधनंसर्वधनप्रधानम्

Activity (English): Write 5 lines in Hindi about the importance of knowledge and humility. Draw a picture showing a fruit tree bowing with fruits.

गतिविधि (हिन्दी): विद्या और विनम्रता के महत्व पर ५ पंक्तियाँ लिखिए। एक चित्र बनाइए जिसमें फल से लदा वृक्ष झुका हुआ हो।

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