Vandana- Class 7

यह पाठ हमें सिखाता है कि सच्ची पूजा वही है, जो हमें विद्वान, नम्र और सदाचारी बनाती है।

पाठ : वंदना (सरस्वती स्तुति)

जय जय हे भगवति सुरभारति! jaya jaya he bhagavati sura-bhārati हे देवी सरस्वती! हे देवताओं की वाणी रूपी भगवती! तुम्हारा बार-बार जय हो।
तव चरणौ प्रणमामः। tava caraṇau praṇamāmaḥ हम तुम्हारे चरणों को प्रणाम करते हैं।
नादरूपत्वमसि! जय वागीश्वरि। nāda-rūpatvam asi, jaya vāg-īśvari तुम नादब्रह्म स्वरूपा हो, हे वाणी की अधीश्वरि! तुम्हारी जय हो।
शरणं ते गच्छामः॥ १ ॥ śaraṇaṃ te gacchāmaḥ 1 हम तुम्हारी शरण में आते हैं।
त्वमसि शरण्या त्रिभुवनधन्या tvam asi śaraṇyā tri-bhuvana-dhanyā तुम सबकी शरण देने वाली और तीनों लोकों को धन्य बनाने वाली हो।
सुरसुमनोरम्यचरणा। sura-sumano-rāmya-caraṇā तुम्हारे चरण देवताओं के मन को भी अत्यन्त रमणीय लगते हैं।
नवरसमधुरा कवितामुखरा nava-rasa-madhurā kavitā-mukharā तुम नव-रसों से मधुर और सुन्दर कविता के रूप में मुखरित होने वाली हो।
स्मितकरविविकारशरणा॥ २ ॥ smita-kara-vivikāra-śaraṇā 2 तुम्हारी मुसकराती कर-कमलों की शरण लेने से सब विकार दूर हो जाते हैं।
जय जय………… jaya jaya … हे देवी! तुम्हारी पुनः-पुनः जय हो।
आसीना भव मानसहंसे āsīnā bhava mānasa-haṃse हे देवी! मेरे मन रूपी हंस पर विराजमान हो जाओ।
कुन्ददुतिनहशिथवलें। kunda-duhina-ha-śithavalē तुम कुन्द-फूल, चाँदनी और ओस की बूँदों जैसी उज्ज्वल शोभा वाली हो।
हर जडता कुरु बुद्धिविकासं hara jaḍatā kuru buddhi-vikāsaṃ हमारी जड़ता को दूर कर, हमारी बुद्धि का विकास करो।
सितपङ्कजरूचिविमले॥ ३ ॥ sita-paṅkaja-rūci-vimale 3 हे श्वेत कमल जैसी कान्ति से युक्त, निष्कलुष रूपवाली देवी!
ललितकलामपि ज्ञानविभामपि lalita-kalām api jñāna-vibhām api तुम कोमल कलाओं की अधिष्ठात्री और ज्ञान की ज्योति वाली हो।
वीणापुस्तकधारिणि। vīṇā-pustaka-dhāriṇi तुम हाथों में वीणा और पुस्तक धारण करने वाली सरस्वती हो।
मतिरस्तां नो तव पदकमले matir astāṃ no tava pada-kamale हमारी बुद्धि सदा तुम्हारे चरण-कमलों में लगी रहे।
अघकुञ्जरविघातिनि॥ ४ ॥ agha-kuñjara-vighātini 4 हे पाप रूपी बड़े हाथी का नाश करने वाली देवी!
जय जय………… jaya jaya … हे भगवति! तुम्हारी पुनः-पुनः जय हो।
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता, yā kundendu-tuṣāra-hāra-dhavalā yā śubhra-vastrāvṛtā जो कुन्द-फूल, चन्द्रमा और हिम के हार के समान श्वेत है तथा शुभ्र वस्त्रों से आच्छादित है,
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। yā vīṇā-vara-daṇḍa-maṇḍita-karā yā śveta-padma-āsanā जो हाथ में वीणा और वर-मुद्रा से सुशोभित है तथा श्वेत कमल पर विराजती है,
या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता, yā brahmācyuta-śaṅkara-prabhṛtibhir devaiḥ sadā vanditā जिसकी ब्रह्मा, विष्णु, शंकर आदि देवता सदा स्तुति करते हैं,
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥ sā māṃ pātu sarasvatī bhagavatī niḥśeṣa-jāḍyāpahā वही भगवती सरस्वती मेरी रक्षा करें, जो सम्पूर्ण जड़ता को नष्ट कर देती हैं।
शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमामाद्यां जगद्व्यापिनीम् śuklāṃ brahma-vicāra-sāra-paramām ādyāṃ jagad-vyāpinīm श्वेतवर्णा, ब्रह्मविचार के साररूप परम, आदि शक्ति तथा जगत में व्याप्त सरस्वती को,
वीणापुस्तकधारिणीमभयदां जाड्यापविकारापहाम्। vīṇā-pustaka-dhāriṇīm abhaya-dāṃ jāḍyāpa-vikārāpahām जो वीणा और पुस्तक धारण करने वाली, अभय देने वाली तथा जड़ता और दोषों को दूर करने वाली हैं,
हस्ते स्फटिकमालिकां च दधतीं पद्मासने संस्थितां haste sphaṭika-mālikāṃ ca dadhatīṃ padmāsane saṃsthitām जो हाथ में स्फटिक की माला धारण किए, कमलासन पर विराजमान हैं,
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥ vande tāṃ parameśvarīṃ bhagavatīṃ buddhi-pradāṃ śāradām ऐसी परमेश्वरी, भगवती, बुद्धि प्रदान करने वाली माँ शारदा को मैं प्रणाम करता हूँ।

शब्दावली (Vocabulary)

संस्कृत शब्द उच्चारण (Pronunciation) हिन्दी अर्थ
सुरभारति sura-bhārati देवताओं की वाणी, सरस्वती
भगवति bhagavati दिव्य शक्तियुक्त देवी
नादरूपत्वमसि nāda-rūpatvam asi तुम नादब्रह्म स्वरूपा हो
वागीश्वरि vāg-īśvari वाणी की अधीश्वरि देवी
शरणं śaraṇam आश्रय, रक्षा पाने के लिए जाना
त्रिभुवनधन्या tri-bhuvana-dhanyā तीनों लोकों को धन्य करने वाली
सुरसुमन sura-sumana देवताओं के सुगंधित फूल / मन
नवरसमधुरा nava-rasa-madhurā नव-रसों से मधुर
कवितामुखरा kavitā-mukharā कविता के रूप में मुखर होने वाली
स्मितकर smita-kara मुस्कुराते कर-कमल
आसीना āsīnā बैठी हुई, विराजमान
मानसहंस mānasa-haṃsa मन रूपी हंस
कुन्द kunda सफेद कुन्द-फूल
दुहिनम् duhinam दूध / चाँदनी जैसा उजाला
सितपङ्कज sita-paṅkaja श्वेत कमल
जडता jaḍatā मूर्खता, आलस्य
बुद्धिविकास buddhi-vikāsa बुद्धि की वृद्धि
ललितकला lalita-kalā कोमल / सुन्दर कलाएँ
ज्ञानविभा jñāna-vibhā ज्ञान की आभा, प्रकाश
वीणापुस्तकधारिणि vīṇā-pustaka-dhāriṇi वीणा और पुस्तक धारण करने वाली
कुण्ठाविघातिनि kuṇṭhā-vighātini कुण्ठा (हीन भावना) को नष्ट करने वाली
पदकमल pada-kamala चरण-कमल
निःशेषजाड्यापहा niḥśeṣa-jāḍyāpahā समस्त जड़ता को दूर करने वाली
जगद्व्यापिनी jagad-vyāpinī सारे जगत में व्याप्त रहने वाली
अभयदा abhayadā निर्भयता प्रदान करने वाली
स्फटिकमालिका sphaṭika-mālikā स्फटिक की माला
बुद्धिप्रदा buddhi-pradā बुद्धि देने वाली
शारदा śāradā सरस्वती का एक नाम

सार / नैतिक संदेश

विद्यादायिनी सरस्वती की स्तुति करके हम जड़ता दूर कर ज्ञान और विवेक की प्रार्थना करते हैं। vidyā-dāyinī sarasvatī kī stuti karke ham jaḍatā dūr kar jñāna aura viveka kī prārthanā karte hain यह पाठ हमें सिखाता है कि सच्ची पूजा वही है, जो हमें विद्वान, नम्र और सदाचारी बनाती है।
बुद्धि और विद्या ईश्वर की देन हैं, इसलिए हमें अहंकार छोड़कर विनम्रता के साथ ज्ञान का उपयोग करना चाहिए। buddhi aur vidyā īśvar kī den hain, islie hamēṃ ahaṅkār choḍkar vinamratā ke sāth jñāna kā upayog karnā cāhiye देवी सरस्वती की आराधना हमें परिश्रम, पवित्रता और शुभ विचारों की ओर प्रेरित करती है।

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