Vedic Vandana (SUN) – Class : 8

इस वैदिक वन्दना में तेज, ओज, बल और वीर्य की प्रार्थना की गई है—ये सभी गुण सूर्य के प्रमुख प्रतीक हैं। आगे “मित्र, वरुण, अर्यमा” जैसे देवताओं का उल्लेख है, जो आदित्य (सूर्य-परिवार) के ही नाम हैं। “विष्णुरुरुक्रमः” भी वैदिक परंपरा में सूर्य के विराट स्वरूप से जुड़ा माना जाता है। इसलिए यह वन्दना सूर्य को केंद्र में रखकर की गई प्रार्थना है।

परंतु अंत में इन्द्र, बृहस्पति आदि देवताओं और “ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः” के माध्यम से यह वन्दना समस्त ब्रह्मांडीय शक्तियों और सार्वभौमिक शांति की कामना बन जाती है।

Path – Vedic Vandana

वैदिक-वन्दना
तेजोजसि तेजो मयि धेहि Tejo-jasi tejo mayi dhehi हे तेजस्वरूप! मुझमें तेज स्थापित करो।
वीर्यमसि वीर्य मयि धेहि। Veeryamasi veerya mayi dhehi तुम शक्ति हो, मुझमें शक्ति प्रदान करो।
बलमसि बलं मयि धेहि। Balamasi balaṁ mayi dhehi तुम बल हो, मुझमें बल दो।
ओजोसि ओजो मयि धेहि। Ojosि ojo mayi dhehi तुम ओज हो, मुझमें ओज प्रदान करो।
पथेमं शरदः शतम्। जीवेम शरदः शतम्। Pathem sharadaḥ shatam, jeevem sharadaḥ shatam हम सौ वर्षों तक देखें और सौ वर्षों तक जीवित रहें।
शृणुयाम शरदः शतम्। प्रब्रवाम शरदः शतम्। Shṛṇuyām sharadaḥ shatam, prabravām sharadaḥ shatam हम सौ वर्षों तक सुनें और सौ वर्षों तक बोलें।
अदीना स्याम शरदः शतम्। भूयश्च शरदः शतात्। Adeena syām sharadaḥ shatam, bhūyaśca sharadaḥ shatāt हम सौ वर्षों तक समर्थ रहें और उससे भी अधिक जीएँ।
ॐ शं नो मित्रः शं वरुणः। Om sham no mitraḥ sham varuṇaḥ मित्र और वरुण देव हमारे लिए कल्याणकारी हों।
शं नो भवत्वर्यमा। शं न इन्द्रो बृहस्पतिः। Sham no bhavatvaryamā, sham na indro bṛhaspatiḥ अर्यमा, इन्द्र और बृहस्पति हमारे लिए मंगलकारी हों।
शं नो विष्णुरुरुक्रमः। Sham no viṣṇur urukramaḥ विशाल पग वाले विष्णु हमारे लिए शुभ हों।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥ Om shāntiḥ shāntiḥ shāntiḥ तीनों तापों की शांति हो।
शब्दार्थ
SanskritPronunciationHindi Meaning
तेजोजसिTejojasiतेज स्वरूप
मयिMayiमुझमें
धेहिDhehiप्रदान करो
वीर्यम्Veeryamशक्ति
बलम्Balamबल
ओजःOjaḥओज
शतम्Shatamसौ
पश्येमPashyemaदेखें
जीवेमJeevemaजीवित रहें
शृणुयामShṛṇuyāmसुनें
प्रब्रवामPrabravāmबोलें
अदीनाAdeenaसमर्थ
भूयःBhūyaḥअधिक
मित्रःMitraḥमित्र देव
वरुणःVaruṇaḥवरुण देव
इन्द्रःIndraḥइन्द्र देव
विष्णुःViṣṇuḥविष्णु देव
उरुक्रमःUrukramaḥविशाल पग वाले
शान्तिःShāntiḥशांति
अनुगृहीताAnugṛhītāकृतज्ञ
विलम्बःVilambaḥदेरी
अध्यापिकाAdhyāpikāशिक्षिका
पुरस्कारःPuraskāraḥइनाम
अल्पाहारःAlpāhāraḥनाश्ता
मध्याह्नभोजनम्Madhyāhna bhojanamदोपहर का भोजन
वदतु संस्कृतम् – संवाद
प्रभा: निर्मले! कथं धावसि घु? Prabhā: Nirmale! kathaṁ dhāvasi ghu? प्रभा: निर्मला! तुम कैसे दौड़ रही हो?
निर्मला: विद्यालयं गच्छामि भगिनि! Nirmalā: vidyālayaṁ gacchāmi bhagini निर्मला: मैं विद्यालय जा रही हूँ बहन!
प्रभा : ज्ञातमस्तु तथापि सावधानं गच्छ। पतिष्यसि खलु। Prabhā: jñātamastu tathāpi sāvadhānaṁ gaccha प्रभा: ठीक है, फिर भी सावधानी से जाओ। गिर जाओगी।
निर्मला : बाढमस्तु अनुगृहीता अस्मि। Nirmalā: bāḍhamastu anugṛhītā asmi निर्मला: ठीक है, मैं आभारी हूँ।

पाठसार / Moral

यह पाठ हमें शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक शक्ति की प्रार्थना करना सिखाता है। साथ ही जीवन में अनुशासन, समयपालन और अध्ययन के प्रति लगन का संदेश देता है। सावधानी और परिश्रम से ही सफलता प्राप्त होती है। संस्कृत संवाद से भाषा-कौशल और संस्कारों का विकास होता है।

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