एकादशः पाठः — सूक्तयः

इस पाठ में संस्कृत की सूक्तियाँ दी गई हैं जो अच्छे आचरण, विद्या, सत्य और विनय के महत्व को समझाती हैं।
ये सूक्तियाँ हमें नैतिक शिक्षा देती हैं और जीवन को सही दिशा में ले जाने की प्रेरणा प्रदान करती हैं।

Lesson 11 – Suktayah (Class 4)

आचारः परमॊ धर्मः। Aacharah Paramo Dharmah अच्छा आचरण ही सबसे बड़ा धर्म है।
विद्या ददाति विनयम्। Vidya Dadati Vinayam विद्या विनम्रता प्रदान करती है।
विद्याधनं सर्वधनप्रधानम्। Vidyadhanam Sarvadhanapradhanam विद्या का धन सभी धन से श्रेष्ठ होता है।
सत्यमेव जयते। Satyameva Jayate सत्य की ही सदा विजय होती है।
विद्वन् सर्वत्र पूज्यते। Vidvan Sarvatra Pujyate ज्ञानी व्यक्ति का सर्वत्र सम्मान होता है।
लोभः पापस्य कारणम्। Lobhah Paapasya Karanam लोभ ही पाप का कारण है।
मातृदेवो भव। Matrudevo Bhava माता को देवता के समान मानो।
शीलं परं भूषणम्। Sheelam Param Bhushanam सदाचार सबसे बड़ा आभूषण है।
श्रद्धावान् लभते ज्ञानम्। Shraddhavan Labhate Gyanam श्रद्धावान व्यक्ति ज्ञान प्राप्त करता है।
सर्वे भवन्तु सुखिनः। Sarve Bhavantu Sukhinah सभी लोग सुखी हों।
माता भूमि: पुत्रोऽहं पृथिव्याः। Mata Bhumih Putroham Prithivyaah पृथ्वी मेरी माता है और मैं उसका पुत्र हूँ।
शब्दउच्चारणअर्थ
आचारःAacharahआचरण
परमःParamahश्रेष्ठ
धर्मःDharmahनीति
विद्याVidyaज्ञान
ददातिDadatiदेती है
विनयम्Vinayamविनम्रता
धनम्Dhanamधन
प्रधानम्Pradhanamमुख्य
सत्यम्Satyamसत्य
जयतेJayateजीतता है
विधानम्Vidhanamज्ञानी व्यक्ति
पूज्यतेPujyateसम्मानित होता है
लोभःLobhahलालच
पापस्यPaapasyaपाप का
कारणम्Karanamकारण
मातृMatruमाता
देवःDevahदेवता
भवBhavaहो जाओ
शीलम्Sheelamचरित्र
भूषणम्Bhushanamआभूषण
श्रद्धावान्Shraddhavanविश्वासी
ज्ञानम्Gyanamज्ञान
सुखिनःSukhinahखुश लोग
भूमिःBhumihपृथ्वी
पुत्रःPutrahपुत्र
Moral (सीख):

These Sanskrit sayings teach us the values of truth, respect, learning, good conduct, and gratitude.
सीख: यह सूक्तियाँ हमें सत्य, ज्ञान, आचरण, विनम्रता और माता-पिता के प्रति आदर की भावना सिखाती हैं।

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