पाठ के बारे में
‘शरीरस्य अङ्गानि’ पाठ में हमारे शरीर के विभिन्न अंगों के संस्कृत नाम बताए गए हैं। इस पाठ के माध्यम से विद्यार्थी शरीर के अंगों की पहचान संस्कृत भाषा में करना सीखते हैं। पाठ में सरल शब्दों और चित्रों के द्वारा संस्कृत शब्दावली का ज्ञान कराया गया है। यह पाठ विद्यार्थियों की संस्कृत भाषा के प्रति रुचि बढ़ाने में सहायक है। साथ ही यह हमें अपने शरीर के अंगों की उपयोगिता और महत्व को समझने की प्रेरणा देता है।
Lesson 9 – Sharirasya Angani (Class 4)
नवमः पाठः — शरीरस्य अङ्गानि
New Words — Vocabulary Table (25+)
| संस्कृत | उच्चारण (हिन्दी) | हिन्दी अर्थ |
|---|
✍️
१. मौखिकम् अभ्यासं कुरूत — अभ्यासपुस्तिकायां लिखत ।
mau-khi-kam abhyāsaṃ kurūt — abhyās-pustikāyām likhat
हिन्दी अर्थ: मौखिक अभ्यास करो — अभ्यास-पुस्तिका में लिखो।
दिए शब्द (transcribed) —
स्कन्धः (स्-कन्-धः) — कन्धा
वक्षः (व-क्षः) — छाती
अङ्गुल्यः (अं-गु-ल्यः) — उँगलियाँ
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२. यथायोग्यम् योजयत् — (चित्रानुसार मिलाइए)
yathā-yogyam yojayat
हिन्दी अर्थ: उपयुक्त मिलान करें।
उत्तर (match):
- हस्तः — हाथ
- दन्ताः — दाँत
- नासिका — नाक
- चरणः — पैर / पाद
- कर्णः — कान
- नेत्रम् — आँख
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३. उचितक्रियापदेन् सह योजयत् — (शरीर-अंग व क्रिया)
uchit-kriyāpaden saha yojayat
हिन्दी अर्थ: सही क्रिया पद के साथ जोड़िए।
मेरे सुझाए उत्तर:
- नासिका — जिघ्रति — सूंघती है / गन्ध ग्रहण करती है
- कर्णः — शृणोति — सुनता है
- मुखम् — वदति — बोलता/बोलती है
- नेत्रम् — पश्यति — देखता/देखती है
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४. चित्र रच्यत — (चित्र के नीचे शब्द लिखिए)
chitra rachyat
हिन्दी अर्थ: चित्र बनाइए / लेबल लिखिए।
Suggested box labels (left → right):
दन्ताः, कर्णः, नेत्रम्, नासिका, हस्तः
Moral (English)
Take care of your body — every part has a purpose and must be respected.
नैतिक शिक्षा (हिन्दी)
अपने शरीर का ध्यान रखें — प्रत्येक अंग का अपना कार्य है, इसे सम्मान व देखभाल दें।

