Holikotsavah -Lesson:10 -Class :4

पाठ के बारे में

‘होलिकोत्सवः’ पाठ में होली के पर्व का सुंदर वर्णन किया गया है। इस पाठ में बताया गया है कि होली रंगों, खुशी और भाईचारे का त्योहार है। लोग इस अवसर पर एक-दूसरे को रंग लगाते हैं तथा प्रेम और सद्भाव का संदेश देते हैं। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। पाठ हमें मिल-जुलकर त्योहार मनाने और आपसी प्रेम बढ़ाने की प्रेरणा देता है।

Lesson 10 – Holikotsavah (Class 4)

भारतवर्षे बहवः उत्सवाः भवन्ति। (bhāratavarṣe bahavaḥ utsavāḥ bhavanti) भारतवर्ष में अनेक उत्सव होते हैं।
तेषु होलिकोत्सवः प्रमुखः। (teṣu holikotsavaḥ pramukhaḥ) उनमें होलिकोत्सव प्रमुख है।
होलिकोत्सवः फाल्गुनमासे पूर्णिमायां तिथौ भवति। (holikotsavaḥ phālgunamāse pūrṇimāyāṃ tithau bhavati) होलिकोत्सव फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को होता है।
अस्मिन् दिने सर्वे रंग-क्रिडां कुर्वन्ति। (asmin dine sarve raṅga-kriḍāṃ kurvanti) इस दिन सब रंगों से खेलते हैं।
ततः ते अबीर-गुलालादिकं परस्परं लिम्पन्ति। (tath te abīr-gulālādikaṃ parasparaṃ limpanti) वे लोग एक-दूसरे पर अबीर-गुलाल आदि लगाते हैं।
अस्मिन् दिने जनाः पूरिकां, गुज्झिकां, पर्पटं, मिष्टान्नं, पक्वान्नं च खादन्ति। (asmin dine janāḥ pūrikāṃ, gujjhikāṃ, parpaṭaṃ, miṣṭānnaṃ, pakvānnaṃ ca khādanti) इस दिन लोग पूरी, गुजिया, पापड़, मिठाइयाँ और पकवान खाते हैं।
जनाः नूतनवस्त्राणि परिधाय परस्परं मैत्रीपूर्णं व्यवहारं कुर्वन्ति। (janāḥ nūtanavastrāṇi paridhyāḥ parasparaṃ maitrīpūrṇaṃ vyavahāraṃ kurvanti) लोग नए वस्त्र पहनकर एक-दूसरे से मैत्रीपूर्ण व्यवहार करते हैं।
इदं पर्व राष्ट्रस्य एकतायाः सौहार्दस्य च प्रतीकम् अस्ति। (idaṃ parva rāṣṭrasya ekatāyāḥ sauhārdayasya ca pratikam asti) यह पर्व राष्ट्र की एकता और सौहार्द का प्रतीक है।
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