शिक्षण योजना
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दिनांक
26.07.2026
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कक्षा
4
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विषय
हिन्दी
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पाठ |
समय
40 मिनट
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पाठ परिचय
बच्चों का स्वभाव स्वाभाविक रूप से जिज्ञासु होता है। वे अपने आसपास की प्रत्येक नई वस्तु, जीव-जंतु और परिवेश के बारे में जानना चाहते हैं। प्रस्तुत कहानी एक ऐसे घोंघे की है जिसने अपना पूरा जीवन एक छोटे-से बगीचे में बिताया था। एक दिन उसके मन में बगीचे के बाहर की दुनिया देखने की इच्छा जागती है। साहस और जिज्ञासा के साथ वह बाहर निकलता है और विशाल संसार को देखकर आश्चर्य से भर जाता है। कहानी बच्चों को यह समझने का अवसर देती है कि सीमित अनुभव से बाहर निकलकर नई परिस्थितियों को जानना और समझना जीवन को समृद्ध बनाता है। साथ ही प्रकृति के विभिन्न जीवों, उनके व्यवहार तथा पर्यावरण के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करने की प्रेरणा भी देती है।
अधिगम प्रतिफल
इस पाठ के अध्ययन के पश्चात बच्चों में प्रकृति और उसके विविध जीवों के प्रति जिज्ञासा, संवेदनशीलता तथा सम्मान की भावना विकसित होगी। वे कहानी का आशय समझते हुए घटनाओं का क्रमबद्ध वर्णन कर सकेंगे, पात्रों के भावों को अपने शब्दों में व्यक्त करेंगे तथा कल्पना और वास्तविक अनुभव के बीच संबंध स्थापित कर पाएँगे। बच्चों की पढ़ने, सुनने, बोलने और लिखने की भाषायी दक्षता में वृद्धि होगी। वे साहस, आत्मविश्वास, नए अनुभवों को स्वीकार करने की सकारात्मक सोच तथा अपने आसपास के पर्यावरण का सूक्ष्म अवलोकन करने की आदत विकसित करेंगे। साथ ही अपने अनुभवों को रचनात्मक रूप से अभिव्यक्त करने और दूसरों के विचारों का सम्मानपूर्वक आदान-प्रदान करने का अभ्यास भी करेंगे।
शिक्षण-अधिगम सामग्री
- वीणा हिन्दी पाठ्यपुस्तक
- घोंघे, चींटी, गिलहरी एवं अन्य जीवों के चित्र
- फ्लैश कार्ड एवं शब्द-पट्ट
- श्यामपट्ट एवं रंगीन चॉक
- चार्ट पेपर एवं स्केच पेन
- कार्यपत्रक (Worksheet)
- प्रकृति से संबंधित लघु वीडियो (यदि उपलब्ध हो)
प्रथम दिवस
| क्रम | शिक्षण चरण | समय | आकलन का तरीका |
|---|---|---|---|
| 1 | बच्चों से अनौपचारिक बातचीत करते हुए घोंघे, बगीचे तथा प्रकृति से जुड़े अनुभव साझा करवाना। प्रश्न पूछना—क्या आपने कभी घोंघा देखा है? वह कहाँ रहता है? आपने कौन-कौन से छोटे जीव देखे हैं? | 5 मिनट | मौखिक उत्तर एवं सहभागिता |
| 2 | पाठ के चित्रों का अवलोकन कराना। शीर्षक के आधार पर कहानी का अनुमान लगवाना तथा बच्चों से अपने विचार व्यक्त करवाना। | 10 मिनट | चित्र अवलोकन एवं प्रश्नोत्तर |
| 3 | शिक्षक द्वारा आदर्श वाचन तथा बच्चों द्वारा अनुच्छेदवार सामूहिक वाचन कराना। कठिन शब्दों का अर्थ प्रसंगानुसार स्पष्ट करना एवं सही उच्चारण का अभ्यास कराना। | 20 मिनट | वाचन कौशल एवं उच्चारण |
| 4 | कहानी के प्रारम्भिक भाग पर चर्चा करते हुए घोंघे के जीवन, उसके बगीचे तथा उसकी जिज्ञासा पर बच्चों से विचार साझा करवाना। | 5 मिनट | मौखिक अभिव्यक्ति |
द्वितीय दिवस
| क्रम | शिक्षण चरण | समय | आकलन का तरीका |
|---|---|---|---|
| 1 | पिछले दिवस में पढ़े गए भाग का पुनरावलोकन कराते हुए बच्चों से घटनाओं का क्रम अपने शब्दों में बताने के लिए कहना। | 5 मिनट | मौखिक पुनरावृत्ति |
| 2 | शेष पाठ का आदर्श वाचन एवं सामूहिक वाचन कराना। घोंघे द्वारा देखी गई नई वस्तुओं, जीवों तथा परिवेश पर चर्चा करना। | 15 मिनट | वाचन एवं समझ |
| 3 | समूह गतिविधि—"यदि मैं घोंघा होता/होती..." विषय पर बच्चों से अपने विचार साझा करवाना तथा समूह में चर्चा कराना। | 15 मिनट | समूह सहभागिता एवं अभिव्यक्ति |
| 4 | कहानी के संदेश, पात्र के स्वभाव तथा वास्तविक जीवन से उसके संबंध पर विचार-विमर्श कराना। | 10 मिनट | विश्लेषण एवं प्रश्नोत्तर |
तृतीय दिवस
| क्रम | शिक्षण चरण | समय | आकलन का तरीका |
|---|---|---|---|
| 1 | बच्चों द्वारा पूरी कहानी का क्रमबद्ध पुनर्कथन तथा प्रमुख घटनाओं का मौखिक प्रस्तुतीकरण। | 10 मिनट | मौखिक प्रस्तुति |
| 2 | शब्द भंडार, वाक्य निर्माण एवं रचनात्मक भाषा गतिविधियों का अभ्यास कराना। | 15 मिनट | लेखन कार्य |
| 3 | कार्यपत्रक, अनुभव आधारित प्रश्न तथा लघु गतिविधियों के माध्यम से व्यक्तिगत अभ्यास कराना। | 10 मिनट | कार्यपत्रक मूल्यांकन |
| 4 | पूरे पाठ की पुनरावृत्ति, शंकाओं का समाधान तथा अधिगम का समग्र मूल्यांकन। | 5 मिनट | मौखिक एवं लिखित आकलन |
कक्षा गतिविधियाँ
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चित्र से कहानी
घोंघे का चित्र दिखाकर बच्चों से उसकी यात्रा की कल्पना करते हुए दो-तीन वाक्यों में कहानी कहलवाएँ। -
प्रकृति अवलोकन
विद्यालय परिसर में उपलब्ध छोटे पौधों, कीटों अथवा जीवों का शांतिपूर्वक अवलोकन कर उनके बारे में चर्चा कराएँ। -
भूमिका-अभिनय
कुछ बच्चे घोंघा, चींटी, गिलहरी, कुत्ता तथा पेड़ की भूमिका निभाकर कहानी का संक्षिप्त मंचन प्रस्तुत करें। -
कल्पना लेखन
"यदि मैं पहली बार किसी नई जगह पहुँचूँ तो मुझे क्या-क्या दिखाई देगा?" विषय पर पाँच वाक्य लिखवाएँ।
📝 आकलन
- घोंघा बगीचे से बाहर क्यों जाना चाहता था?
- बाहर निकलने पर उसे सबसे अधिक आश्चर्य किस बात पर हुआ?
- कहानी का कौन-सा प्रसंग आपको सबसे अधिक रोचक लगा और क्यों?
- यदि आप घोंघे के मित्र होते, तो उसे क्या सलाह देते?
- यह कहानी हमें नए अनुभवों और प्रकृति के बारे में क्या सीख देती है?
गृहकार्य
अपने घर, आँगन, खेत, बगीचे अथवा आसपास के किसी खुले स्थान का ध्यानपूर्वक अवलोकन कीजिए। वहाँ दिखाई देने वाले किसी छोटे जीव, पक्षी या कीट का चित्र बनाइए तथा उसके बारे में पाँच वाक्य लिखिए कि वह कहाँ रहता है, क्या करता है और उसे देखकर आपको कैसा अनुभव हुआ।
उपचारात्मक एवं समृद्धिकरण कार्य
उपचारात्मक कार्य :
जिन बच्चों को वाचन अथवा कहानी समझने में कठिनाई हो, उन्हें छोटे-छोटे
अनुच्छेदों का अभ्यास कराया जाए। चित्रों, संकेतों तथा सरल प्रश्नों
के माध्यम से घटनाओं का क्रम समझाया जाए और कठिन शब्दों का नियमित
अभ्यास कराया जाए।
समृद्धिकरण कार्य :
तेज़ गति से सीखने वाले बच्चों से
"घोंघे की डायरी" शीर्षक से एक दिन का काल्पनिक
विवरण लिखवाया जाए। साथ ही वे अपने आसपास पाए जाने वाले किसी अन्य
जीव के बारे में जानकारी एकत्र कर कक्षा में साझा करें।
आगामी कार्य योजना
अगले पाठ से पूर्व बच्चों को अपने आसपास दिखाई देने वाले विभिन्न जीव-जंतुओं, पौधों तथा प्राकृतिक परिवेश का ध्यानपूर्वक अवलोकन करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। उनके अनुभवों को कक्षा चर्चा से जोड़ते हुए भाषा कौशल, पर्यावरणीय जागरूकता तथा रचनात्मक लेखन का अभ्यास कराया जाएगा, जिससे आगामी पाठ को बच्चों के वास्तविक जीवन से सहज रूप से जोड़ा जा सके।
शिक्षक टिप्पणी
अधिकांश बच्चों ने कहानी में उत्साहपूर्वक सहभागिता की तथा अपने अनुभव आत्मविश्वास के साथ साझा किए। चित्र आधारित चर्चा, सामूहिक वाचन और भूमिका-अभिनय जैसी गतिविधियों से बच्चों की अभिव्यक्ति तथा समझ में उल्लेखनीय सुधार दिखाई दिया। जिन बच्चों को वाचन में कठिनाई थी, उन्हें अतिरिक्त अभ्यास की आवश्यकता है। आगामी कक्षाओं में अनुभवात्मक गतिविधियों तथा स्वतंत्र अभिव्यक्ति के अधिक अवसर प्रदान किए जाएँगे।
| शिक्षक के हस्ताक्षर | प्रधानाध्यापक के हस्ताक्षर |
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