Lesson : 4 – Vardhamana Mahavira – Class : 8
Path – Vardhamana Mahavira Line by Line Meaning चतुर्थः पाठः — वर्धमानः महावीरः Chaturthah paathah — Vardhamaanah Mahaaveerah चौथा पाठ […]
Path – Vardhamana Mahavira Line by Line Meaning चतुर्थः पाठः — वर्धमानः महावीरः Chaturthah paathah — Vardhamaanah Mahaaveerah चौथा पाठ […]
यह पाठ “अस्माकं पर्वाणि” भारत के प्रमुख पर्वों का परिचय कराता है। इसमें दीपावली, गुरु नानक जयंती, क्रिसमस और ईद-उल-फितर
यह पाठ “मातृदेवो भव” माता के प्रति कर्तव्य और सम्मान का संदेश देता है। इसमें सतीश नामक बालक खेल को
यह पाठ आश्रम-जीवन का सजीव और सुंदर चित्र प्रस्तुत करता है। इसमें सीतापुर जनपद के नैमिषारण्य स्थित प्राचीन आश्रम का
इस वैदिक वन्दना में तेज, ओज, बल और वीर्य की प्रार्थना की गई है—ये सभी गुण सूर्य के प्रमुख प्रतीक
इस पाठ में प्राचीन एवं आधुनिक काल में समाज निर्माण में स्त्रियों की भूमिका को स्पष्ट किया गया है। वैदिक
यह पाठ विश्वबन्धुत्व की भावना का महत्त्व स्पष्ट करता है। लेखक बताता है कि सम्पूर्ण मानवता एक परिवार है। भाईचारे
Path – Sanskritam पञ्चदशः पाठः भारतीयैकता-साधकम् संस्कृतम् भारतीयत्व-सम्पादकम् संस्कृतम् ज्ञान-पुञ्ज-प्रभादर्शकं संस्कृतम् सर्वदानन्द-सन्दोहदं संस्कृतम्॥1॥ Bhāratīyaikatā-sādhakam saṁskṛtam | Bhāratīyatva-sampādakam saṁskṛtam | Jñāna-puñja-prabhādarśakam
यह पाठ वीरता, साहस और आत्मबल का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। वैदिक युग में ‘खेल’ नामक राजा था, जिसकी
Path – Yaksha Yudhishthira Samvada त्रयोदशः पाठः : यक्ष–युधिष्ठिर–संवादः यक्ष उवाच Yakṣa uvāca यक्ष ने कहा। भावार्थ: यक्ष प्रश्नों के