Propkaraha LESSON:8 CLASS : 4

परोपकार: पाठ – Sanskrit Lesson with Meaning, Pronunciation and Exercises

यह पाठ “परोपकारः” हमें सिखाता है कि नदियाँ, वृक्ष, पशु और मानव का जीवन दूसरों की भलाई के लिए है। परोपकार ही जीवन का सबसे बड़ा धर्म और कर्तव्य है।

इयं नदी अस्ति । इयं जलेन पूरिता अस्ति । (iṃ nadī asti. iṃ jalen pūritā asti.) यह नदी है। यह पानी से भरी हुई है।
नदी स्वजल़ं न पिबति अपितु सर्वेभ्यः जीवेभ्यः यच्छति । (nadī svajal na pibati api tu sarvebhyaḥ jīveṣyaḥ yacchati.) नदी अपने पानी को नहीं पीती, परन्तु सब जीवों के लिए देती है।
अस्या: जलं पानाय, स्नानाय, सेचनाय च भवति । (asyah jalaṃ pānāya, snānāya, secanāya ca bhavati.) इसका जल पीने के लिए, स्नान करने के लिए और सिंचाई के लिए होता है।
अयं सैनिकः अस्ति । अयं देशं रक्षति । (ayaṃ sainikḥ asti. ayaṃ deśaṃ rakṣati.) यह सैनिक है। यह देश की रक्षा करता है।
देशस्य रक्षा एव तस्य कर्तव्यम् अस्ति । तस्य जीवनं देशरक्षायै एव भवति । (deśasya rakṣā eva tasya kartavyaṃ asti. tasya jīvanaṃ deśarakṣāyai eva bhavati.) देश की रक्षा ही उसका कर्तव्य है। उसका जीवन देश की रक्षा के लिये ही है।
अयं वृक्षः अस्ति । अयं फले: पूर्णः अस्ति । (ayaṃ vṛkṣaḥ asti. ayaṃ phaleḥ pūrṇaḥ asti.) यह पेड़ है। इसके फल पूरे भरे हुए हैं।
अयं स्वफलैः अन्यान् जीवान् पालनयति । अस्य छायायां जनाः विश्रामं कुर्वन्ति । (ayaṃ svaphalaiḥ anyān jīvān pālayati. asya chāyāyāṃ janāḥ viśrāmaṃ kurvanti.) यह अपने फलों से दूसरे जीवों का पालन करता है। इसकी छाया में लोग विश्राम करते हैं।
किं बहुना अस्य जीवनं परोपकाराय एव भवति । (kiṃ bahunā asya jīvanaṃ paropakārāya eva bhavati.) कितनी बड़ी मात्रा में इसका जीवन परोपकार के लिए ही है।
परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः । परोपकाराय बहन्ति नद्या: । (paropakārāya phalanti vṛkṣāḥ. paropakārāya bahanti nadyaḥ.) पेड़ परोपकार हेतु फल देते हैं। नदियाँ परोपकार के लिए बहती हैं।
परोपकाराय दुहन्ति गावः । परोपकारार्थमिदं शरीरम् ॥ (paropakārāya dadhati gāvaḥ. paropakārārthaṃ idaṃ śarīram.) गायें अपना दूध परोपकार के लिए देती हैं। इसी प्रकार यह शरीर भी परोपकार के लिए है।

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