📖 पाठ परिचय
यह ओणम के रंग (Onam Ke Rang) पाठ भारत के प्रसिद्ध फसल उत्सव ओणम का सुंदर परिचय कराता है। इस पाठ के माध्यम से विद्यार्थी केरल राज्य की संस्कृति, परंपराओं, प्राकृतिक सौंदर्य तथा वहाँ के लोगों के जीवन-व्यवहार के बारे में रोचक जानकारी प्राप्त करते हैं।
पाठ में महाबली से जुड़ी लोककथा, फूलों की रंगोली (पूकलम), लोकगीत, नौका दौड़, पारंपरिक नृत्य, स्वादिष्ट व्यंजन तथा ओणम के अवसर पर मनाए जाने वाले विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सरल और आकर्षक वर्णन किया गया है। यह पाठ विद्यार्थियों में राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक विविधता, प्रेम, सहयोग और भाईचारे की भावना विकसित करता है।
इस Lesson में पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ, शब्दार्थ (Word Meaning), प्रश्नोत्तर (Question Answers), कार्यपुस्तिका सॉल्यूशन शामिल हैं, जो विद्यार्थियों को पाठ को सरल, रोचक और प्रभावी ढंग से समझने में सहायता करते हैं।

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📖 सार
🌟 सीख
- भारत विविध संस्कृतियों और त्योहारों वाला देश है, इसलिए सभी त्योहारों का सम्मान करना चाहिए।
- त्योहार प्रेम, भाईचारे, सहयोग और सामाजिक एकता का संदेश देते हैं।
- प्रकृति, पर्यावरण और खेती का हमारे जीवन में विशेष महत्व है, इसलिए हमें उनका संरक्षण करना चाहिए।
- राजा महाबली की तरह हमें सभी लोगों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए।
- भारतीय लोककला, लोकनृत्य और सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान करना चाहिए।
- त्योहार केवल उत्सव नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का माध्यम हैं।
- हमें अपने परिवार और समाज के साथ मिल-जुलकर त्योहार मनाने चाहिए।
📚 शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| ओणम | केरल का प्रमुख फसल एवं सांस्कृतिक त्योहार |
| पूक्कलम | फूलों से बनाई जाने वाली रंगोली |
| आसमुदला | केरल का प्रसिद्ध स्थान जहाँ नाव-दौड़ होती है |
| प्राकृतिक | प्रकृति से संबंधित |
| सौंदर्य | सुंदरता |
| लहरें | समुद्र या नदी के जल का उठना-गिरना |
| बयार | मंद हवा |
| द्रोण-पुष्प | एक औषधीय पौधा जिसके सफेद फूल होते हैं |
| महाबली | केरल के प्रसिद्ध पौराणिक राजा |
| वामन | भगवान विष्णु का पाँचवाँ अवतार |
| त्रिविक्रम | भगवान विष्णु का विराट रूप |
| पाताल | धरती के नीचे का लोक |
| लोकगीत | लोकभाषा में गाया जाने वाला गीत |
| कथकली | केरल का प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्य |
| मोहिनीयाट्टम | केरल का शास्त्रीय नृत्य |
| तिरुवातिरा | केरल का पारंपरिक महिला नृत्य |
| नौका-दौड़ | नावों की प्रतियोगिता |
| दीपदान | दीप अर्पित करना |
| समानता | सबके साथ बराबरी का व्यवहार |
| परंपरा | पीढ़ियों से चली आ रही रीति |
| लोककला | जनसामान्य की पारंपरिक कला |
| फसल | खेतों में तैयार हुई कृषि उपज |
| उत्सव | खुशी का पर्व |
| प्रसन्नता | खुशी, आनंद |
| सांस्कृतिक | संस्कृति से संबंधित |
📋 प्रश्नोत्तर
| स्तम्भ ‘क’ | स्तम्भ ‘ख’ |
|---|---|
| पूक्कलम | फूल-पत्तियों तथा तरह-तरह के सूखे रंगों से भूमि पर बनाई गई रंगोली। इसे अल्पना आदि नामों से भी जाना जाता है। |
| द्रोण-पुष्प | इसे गोपा, गामा जैसे नामों से भी जाना जाता है। यह औषधीय पुष्प वर्षा ऋतु में फलता-फूलता है। इसके पौधे की गाँठों पर सफेद फूलों के गुच्छे होते हैं। |
| तलप्पन्तुकली | इस खेल में नारियल के पत्तों से बनी गेंद जिसे स्थानीय भाषा में ‘पंतु’ कहा जाता है, एक दल के खिलाड़ियों द्वारा अपने सिर के ऊपर से फेंकी जाती है और दूसरे दल के खिलाड़ी उसे लपककर पकड़ते हैं। |
| किलितट्टुकली | इस खेल में भूमि पर आयताकार आकृति बनाई जाती है जिसे लंबाई में पंक्ति खींचकर पाँच भागों में विभाजित किया जाता है। सभी खिलाड़ियों में से एक खिलाड़ी को ‘किल्ली’ की भूमिका दी जाती है। |
| कैकोट्टिकली | यह तिरुवातिराकली नृत्य रूप का दूसरा नाम है। इस नृत्य में हाथ द्वारा ताली बजाकर ताल देने का विशेष महत्व है। यह नृत्य मुख्यतः महिलाओं द्वारा किया जाता है। |
| त्रिविक्रम | तीनों लोकों को जीतने वाले (विष्णु भगवान)। |
ओणम के अवसर पर पारंपरिक ओणसद्या तैयार की जाती है। इसमें चावल, सांभर, अवियल, ओलन, थोरन, कूटू करी, पापड़, अचार, केले के चिप्स, पायसम आदि अनेक स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जाते हैं।
पायसम : पायसम ओणम का प्रसिद्ध मीठा व्यंजन है। इसे चावल, दूध, गुड़ तथा मेवों से बनाया जाता है। भोजन के अंत में इसे परोसा जाता है।
हमारे राज्य में दीपावली, होली, रक्षाबंधन, दशहरा, मकर संक्रान्ति आदि त्योहार विशेष रूप से मनाए जाते हैं। इन त्योहारों की तरह ओणम भी मिल-जुलकर मनाया जाने वाला पर्व है। सभी लोग घरों की सफाई करते हैं, नए वस्त्र पहनते हैं, स्वादिष्ट भोजन बनाते हैं तथा परिवार और मित्रों के साथ खुशियाँ मनाते हैं।
महाबली के शासन में सभी लोग समान थे। वहाँ दुख-दरिद्रता, छल-कपट, चोरी, झूठ तथा अन्याय नहीं था। नाप-तौल में कोई कमी नहीं थी और चारों ओर प्रेम, सुख तथा प्रसन्नता का वातावरण था।
महाबली ने भगवान वामन से यह वरदान माँगा था कि वे प्रत्येक वर्ष अपनी प्रजा से मिलने पृथ्वी पर आ सकें। इससे स्पष्ट होता है कि वे अपनी प्रजा से अत्यधिक प्रेम करते थे।
वर्षा के बाद ठंडी-ठंडी हवाएँ चलना, समुद्र की लहरों का चमकना, रंग-बिरंगी तितलियों का फूलों पर मँडराना, पक्षियों का कलरव तथा खेतों में लहलहाती नई फसलें यह बताती हैं कि प्रकृति भी ओणम के स्वागत की तैयारी कर रही है।
परिवार के बड़े अपने बचपन के खेल, विद्यालय के दिन, त्योहारों का उत्साह, परिवार के साथ बिताए गए सुखद पल, विवाह समारोह, मित्रों के साथ बिताया समय तथा जीवन की सफल उपलब्धियों को याद करके प्रसन्न होते हैं।
मेरे घर के सदस्य मेरे अच्छे व्यवहार, पढ़ाई, अनुशासन तथा बड़ों का सम्मान करने से प्रसन्न होते हैं। वे मेरी आवश्यकताओं का ध्यान रखते हैं, मुझे स्नेह देते हैं तथा पढ़ाई में सहायता करते हैं। मैं उनका धन्यवाद करता/करती हूँ, उनकी बात मानता/मानती हूँ तथा उनका सम्मान करके अपना आभार व्यक्त करता/करती हूँ।
- भरतनाट्यम — तमिलनाडु
- कथक — उत्तर प्रदेश
- कथकली — केरल
- मोहिनीयाट्टम — केरल
- कुचिपुड़ी — आंध्र प्रदेश
- ओडिसी — ओडिशा
- भांगड़ा — पंजाब
- गरबा — गुजरात
- बिहू — असम
- लावणी — महाराष्ट्र
- कालबेलिया — राजस्थान
- छऊ — झारखंड, ओडिशा एवं पश्चिम बंगाल
“खेतों में सुनहरी फसलें लहलहा उठती हैं।”
इस पंक्ति से स्पष्ट होता है कि ओणम नई फसल और खेतों की उपज से जुड़ा हुआ त्योहार है।
- ओणम (केरल)
- पोंगल (तमिलनाडु)
- लोहड़ी (पंजाब)
- बैसाखी (पंजाब)
- बिहू (असम)
- नुआखाई (ओडिशा)
- छठ (बिहार एवं उत्तर प्रदेश)
- फुलदेई (उत्तराखण्ड)
| त्योहार | राज्य |
|---|---|
| ओणम | केरल |
| लोहड़ी | पंजाब |
| पोंगल | तमिलनाडु |
| साजिबू | मणिपुर |
| बिहू | असम |
| छठ | बिहार एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश |
| फुलदेई | उत्तराखण्ड |
नोट : विद्यार्थी इन राज्यों को भारत के मानचित्र में दिए गए रंगों से दर्शाएँ।
- सभी लोग समान थे।
- दुख-दरिद्रता नहीं थी।
- चोरी और झूठ का नाम नहीं था।
- नाप-तौल में कोई कमी नहीं थी।
- छल-कपट नहीं था।
- चारों ओर प्रेम और प्रसन्नता का वातावरण था।
एक ही विशेषता बताने वाले शब्द का दो बार प्रयोग करने से उसका प्रभाव अधिक स्पष्ट और आकर्षक हो जाता है। इससे भाव की तीव्रता तथा सौंदर्य बढ़ जाता है।
उदाहरण —
- मीठी-मीठी बातें सबको अच्छी लगती हैं।
- ठंडी-ठंडी हवा चल रही है।
- हरे-हरे पेड़ बहुत सुंदर लगते हैं।
- छोटे-छोटे बच्चे खेल रहे हैं।
- लंबे-लंबे पेड़ सड़क के किनारे खड़े हैं।
- चमकना — रात में आकाश में तारे चमकते हैं।
- मँडराना — फूलों के ऊपर तितलियाँ मँडराती हैं।
- थमना — कुछ समय बाद तेज वर्षा थम गई।
| विशेषण | वाक्य |
|---|---|
| सफेद | बच्चे सफेद द्रोण-पुष्पों से सजावट कर रहे थे। |
| ठंडी | ठंडी हवा मन को प्रसन्न कर देती है। |
| सुनहरी | सुनहरी फसलें खेतों में लहलहा रही थीं। |
| रंग-बिरंगी | रंग-बिरंगी तितलियाँ बगीचे में उड़ रही हैं। |
- सरस
- नयन
- कनक
- जलज
- नमन
- लाल
- मलयालम
इस पाठ से स्पष्ट होता है कि ओणम का पर्व सभी लोग मिल-जुलकर मनाते हैं। बच्चे, बड़े, परिवार तथा समाज के सभी लोग मिलकर घर सजाते हैं, पूक्कलम बनाते हैं, नृत्य-गीत करते हैं और सामूहिक भोज का आनंद लेते हैं।
(क) सभी सहपाठी मिलकर योजना बनाइए कि ‘वन महोत्सव’ के आयोजन हेतु क्या-क्या किया जाएगा।
संकेतात्मक उत्तर —- विद्यालय परिसर की साफ-सफाई करना।
- पौधों एवं पौधरोपण सामग्री की व्यवस्था करना।
- मुख्य अतिथियों का स्वागत करना।
- पौधारोपण करना एवं उनकी देखभाल का संकल्प लेना।
- पर्यावरण संरक्षण पर भाषण, कविता एवं नाटक प्रस्तुत करना।
(ख) वन महोत्सव में अभिभावकों को आमंत्रित करने के लिए आमंत्रण-पत्र तैयार कीजिए।
संकेतात्मक उत्तर —आमंत्रण-पत्र
आदरणीय अभिभावक महोदय / महोदया,
आपको यह बताते हुए अत्यन्त प्रसन्नता हो रही है कि हमारे विद्यालय में वन महोत्सव का आयोजन दिनांक ________ को प्रातः ________ बजे किया जा रहा है।
आपसे विनम्र अनुरोध है कि इस अवसर पर पधारकर विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करें तथा पौधारोपण कार्यक्रम में सहभागी बनें।
धन्यवाद।
प्रधानाचार्य
________________ विद्यालय
विद्यार्थी अपनी कल्पना के अनुसार फूलों एवं रंग-बिरंगी पंखुड़ियों की सहायता से सुंदर पूक्कलम (रंगोली) बनाएँ।
मैं विद्यालय के उत्सवों में सजावट करने, कार्यक्रमों में भाग लेने, पौधारोपण करने, स्वच्छता बनाए रखने, अतिथियों के स्वागत में सहयोग देने तथा अनुशासन बनाए रखने में अपना योगदान देता/देती हूँ।
| शास्त्रीय नृत्य | कथकली एवं मोहिनीयाट्टम |
|---|---|
| भाषा | मलयालम |
| परिधान / वेशभूषा | मुंडु एवं कसावु साड़ी |
| मुख्य फसल | धान, नारियल, रबर, मसाले |
| राजधानी | तिरुवनंतपुरम् |
| त्योहार | ओणम |
| सीमांत प्रदेश | कर्नाटक एवं तमिलनाडु |
- सुधा चंद्रन
- अरुणिमा सिन्हा
- हेलेन केलर
- स्टीफन हॉकिंग
- निक वुजिसिक
📖 कार्यपुस्तिका
सब जन एक समान।
दुख-दरिद्रता का नाम नहीं,
डाका नहीं, धोखा नहीं,
झूठे वचन कोई नहीं,
जाली तराजू नहीं, माप में कमी नहीं,
छल-कपट का प्रपंच नहीं,
हर कहीं प्रेम-प्रसन्नता छा रही।
विद्यार्थी स्वयं अपने समूह के साथ लोकगीत का अभ्यास करें।
केरल के लोग ओणम के अवसर पर नए कपड़े पहनते हैं। वे महाबली की पूजा करते हैं, फूलों की रंगोली (पूक्कलम) बनाते हैं, चावल के आटे से सुंदर चित्र बनाते हैं, स्वादिष्ट भोजन (प्रीतिभोज) करते हैं, खेल-कूद एवं नृत्य का आयोजन करते हैं तथा नौका-विहार का आनंद लेते हैं।
मैं अपने परिवार के साथ दीपावली, होली तथा अन्य त्योहारों पर आने वाले रिश्तेदारों के स्वागत के लिए तैयार होता/होती हूँ। इसके अतिरिक्त दादा-दादी, नाना-नानी, अतिथि तथा परिवार के अन्य सदस्यों के आगमन पर भी घर की साफ-सफाई, सजावट और उनके स्वागत की तैयारी करता/करती हूँ।
- त्योहार का नाम : दीपावली
- कब मनाते हैं : कार्तिक मास की अमावस्या को।
- कैसे मनाते हैं : घर की सफाई करके दीप जलाते हैं, लक्ष्मी-गणेश की पूजा करते हैं, मिठाइयाँ बाँटते हैं तथा परिवार के साथ खुशियाँ मनाते हैं।
- क्यों मनाते हैं : भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी में तथा सुख-समृद्धि की कामना के लिए।
- कौन-कौन क्या करता है : परिवार के सभी सदस्य मिलकर सफाई, सजावट, पूजा, दीप जलाना तथा मिठाइयाँ बाँटने का कार्य करते हैं।
- बच्चे
- टोकरी
- हाथ
- बाग-बगीचे
- फूल
- आँगन
- गोबर
- केरल
- ओणम
- त्योहार
क्रिया शब्द :
- नहा-धोकर
- निकल पड़े
- लीपा
- बनाई
- शुरू होता है
विशेषण शब्द :
- लाल
- पीले
- सफेद
- अपने-अपने
- सुबह-सुबह : मैं सुबह-सुबह टहलने जाता हूँ।
- ठंडी-ठंडी : ठंडी-ठंडी हवा सभी को अच्छी लगती है।
- हल्की-हल्की : हल्की-हल्की वर्षा होने लगी।
- नन्हें-नन्हें : नन्हें-नन्हें बच्चे खेल रहे हैं।
नदी में चलती हुई एक नाव का चित्र बनाइए जिसमें कुछ यात्री बैठे हों तथा एक नाविक चप्पू से नाव चला रहा हो।
नौकायन के साथ में, महाबली गुणगान।।
रंगोली फूलों सजी, भाँति-भाँति के वेश।।
भरे नारियल घूमते, मना रहे त्योहार।।

