शिक्षण योजना
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दिनांक
26.07.2026
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कक्षा
4
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विषय
हिन्दी
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पाठ |
समय
40 मिनट
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पाठ परिचय
प्रस्तुत नाटक “शतरंज में मात” प्रसिद्ध विद्वान एवं चतुर दरबारी तेनालीराम पर आधारित है। इस नाटक में राजा कृष्णदेव राय, तेनालीराम तथा दरबारियों के बीच होने वाली रोचक घटनाओं के माध्यम से यह बताया गया है कि बुद्धिमानी, धैर्य, सूझ-बूझ और समयानुकूल निर्णय लेने की क्षमता किसी भी कठिन परिस्थिति को सरल बना सकती है। संवाद प्रधान शैली होने के कारण यह नाटक विद्यार्थियों में अभिनय, वाचन, अभिव्यक्ति तथा आत्मविश्वास का विकास करता है और उन्हें यह प्रेरणा देता है कि किसी भी समस्या का समाधान क्रोध से नहीं बल्कि विवेक से करना चाहिए।
अधिगम प्रतिफल
इस नाटक के अध्ययन के उपरांत विद्यार्थी पात्रों की पहचान कर सकेंगे, संवादों का शुद्ध एवं भावपूर्ण वाचन करेंगे, घटनाओं का क्रम समझते हुए उनका वर्णन अपने शब्दों में कर सकेंगे तथा तेनालीराम की बुद्धिमानी, विनम्रता और व्यवहार-कुशलता का विश्लेषण कर सकेंगे। विद्यार्थियों में तार्किक चिंतन, समस्या-समाधान क्षमता, सहयोग, आत्मविश्वास, अभिनय कौशल तथा प्रभावी मौखिक अभिव्यक्ति का विकास होगा और वे नाटक से प्राप्त नैतिक संदेश को अपने दैनिक जीवन से जोड़ सकेंगे।
प्रकरण
तेनालीराम की बुद्धिमानी, शतरंज का प्रसंग तथा सूझ-बूझ से समस्या का समाधान।
शिक्षण-अधिगम सामग्री
- वीणा हिन्दी पाठ्यपुस्तक
- तेनालीराम एवं राजा कृष्णदेव राय के चित्र
- शतरंज का वास्तविक बोर्ड अथवा चित्र
- पात्रों के नाम वाले फ्लैश कार्ड
- श्यामपट्ट एवं रंगीन चॉक
- संवाद-पट्ट एवं भूमिका कार्ड
- यदि उपलब्ध हो तो तेनालीराम पर आधारित लघु वीडियो
प्रथम दिवस
| क्रम | शिक्षण चरण | समय | आकलन का तरीका |
|---|---|---|---|
| 1 |
प्रकरण : नाटक का परिचय एवं प्रथम दृश्य (तेनालीराम के आने की प्रतीक्षा से लेकर शतरंज खेलने की चुनौती स्वीकार करने तक)
शिक्षण के आरम्भ में : शिक्षक विद्यार्थियों से वार्तालाप करेंगे—क्या आपने कभी शतरंज खेला है? शतरंज में कौन-कौन से मोहरे होते हैं? तेनालीराम कौन थे? क्या बुद्धि से किसी कठिन समस्या का समाधान किया जा सकता है? इसके बाद पुस्तक के चित्रों का अवलोकन कराते हुए राजा कृष्णदेव राय, तेनालीराम तथा दरबारियों का परिचय देंगे और नाटक की पृष्ठभूमि समझाएँगे। |
5 मिनट | अवलोकन एवं प्रश्नोत्तर |
| 2 |
शिक्षण के दौरान : शिक्षक प्रथम दृश्य का आदर्श, शुद्ध एवं भावपूर्ण वाचन करेंगे। इसके बाद विद्यार्थी क्रमवार संवाद पढ़ेंगे। दरबारियों द्वारा तेनालीराम की चर्चा, राजा का आगमन, तेनालीराम को शतरंज खेलने के लिए बुलाना तथा तेनालीराम द्वारा खेल से बचने का प्रयास—इन घटनाओं को सरल भाषा में समझाया जाएगा। कठिन शब्दों, संवादों तथा पात्रों के हाव-भाव का अर्थ भी स्पष्ट किया जाएगा ताकि प्रत्येक विद्यार्थी नाटक की घटनाओं को आसानी से समझ सके। |
20 मिनट | वाचन, उच्चारण एवं सहभागिता |
| 3 |
गतिविधि : विद्यार्थियों को राजा, तेनालीराम, सेवक तथा दरबारियों की भूमिकाएँ देकर प्रथम दृश्य का संवाद वाचन एवं लघु अभिनय कराया जाएगा। अभिनय करते समय उचित स्वर, हाव-भाव एवं भावाभिव्यक्ति पर विशेष ध्यान दिलाया जाएगा। |
10 मिनट | भूमिका निर्वहन एवं अवलोकन |
| 4 |
शिक्षण के बाद : शिक्षक विद्यार्थियों से प्रश्न पूछेंगे—दरबारी तेनालीराम के बारे में क्या सोचते थे? राजा ने शतरंज खेलने का प्रस्ताव क्यों रखा? तेनालीराम शतरंज खेलने से क्यों बचना चाहते थे? विद्यार्थियों के उत्तरों के आधार पर पूरे प्रकरण का पुनरावलोकन किया जाएगा तथा अगले दिवस के लिए उत्सुकता उत्पन्न की जाएगी। |
5 मिनट | मौखिक आकलन एवं प्रश्नोत्तर |
गृहकार्य
प्रथम दृश्य को घर पर पुनः पढ़िए। नाटक के प्रमुख पात्रों—राजा कृष्णदेव राय, तेनालीराम, सेवक तथा दरबारियों—के नाम लिखिए तथा प्रत्येक पात्र के बारे में एक-एक वाक्य लिखकर आइए।
द्वितीय दिवस
| क्रम | शिक्षण चरण | समय | आकलन का तरीका |
|---|---|---|---|
| 1 |
प्रकरण : शतरंज का खेल प्रारम्भ होना तथा तेनालीराम की पहली बाज़ी हारना।
शिक्षण के आरम्भ में : शिक्षक प्रथम दिवस की घटनाओं का पुनरावलोकन कराएँगे। विद्यार्थियों से पूछेंगे—राजा ने तेनालीराम को किस खेल के लिए बुलाया था? तेनालीराम खेल खेलने में क्यों झिझक रहे थे? इसके बाद विद्यार्थियों को बताएँगे कि आज वे जानेंगे कि खेल शुरू होने पर क्या हुआ। |
5 मिनट | पुनरावृत्ति एवं प्रश्नोत्तर |
| 2 |
शिक्षण के दौरान : शिक्षक दूसरे दृश्य का आदर्श एवं भावपूर्ण वाचन करेंगे। इसके बाद विद्यार्थी पात्रों के अनुसार संवाद पढ़ेंगे। शतरंज का खेल प्रारम्भ होना, तेनालीराम का जानबूझकर गलत चालें चलना, पहली बाज़ी हार जाना तथा राजा द्वारा दूसरी बाज़ी खेलने का आदेश देना—इन घटनाओं को क्रमवार समझाया जाएगा। शतरंज के मोहरों का संक्षिप्त परिचय भी दिया जाएगा ताकि जिन बच्चों ने कभी शतरंज न खेला हो वे भी घटनाओं को आसानी से समझ सकें। |
20 मिनट | वाचन, संवाद-अभिनय एवं प्रश्नोत्तर |
| 3 |
गतिविधि : विद्यार्थियों को समूहों में बाँटकर शतरंज के मोहरों के चित्र दिए जाएँगे। प्रत्येक समूह राजा, रानी, हाथी, घोड़ा, ऊँट और प्यादे की पहचान करेगा। इसके बाद दूसरे दृश्य के प्रमुख संवादों का भूमिका-अभिनय कराया जाएगा। |
10 मिनट | समूह कार्य, भूमिका निर्वहन एवं अवलोकन |
| 4 |
शिक्षण के बाद : विद्यार्थियों से प्रश्न पूछे जाएँगे—तेनालीराम पहली बाज़ी क्यों हार गए? राजा को क्रोध क्यों आया? क्या तेनालीराम सचमुच शतरंज नहीं जानते थे? विद्यार्थियों के उत्तरों के आधार पर पूरे प्रकरण का पुनरावलोकन कराया जाएगा तथा अगले दृश्य के प्रति जिज्ञासा उत्पन्न की जाएगी। |
5 मिनट | मौखिक आकलन एवं प्रश्नोत्तर |
गृहकार्य
दूसरे दृश्य का पुनः वाचन कीजिए। शतरंज के छह प्रमुख मोहरों के नाम लिखिए तथा नाटक में राजा और तेनालीराम के बीच हुए किसी दो संवाद अपनी अभ्यास-पुस्तिका में लिखकर आइए।
तृतीय दिवस
| क्रम | शिक्षण चरण | समय | आकलन का तरीका |
|---|---|---|---|
| 1 |
प्रकरण : दूसरी बाज़ी, तेनालीराम की युक्ति तथा नकली संन्यासी का प्रवेश।
शिक्षण के आरम्भ में : शिक्षक पिछले दिवस की घटनाओं का पुनरावलोकन कराएँगे। विद्यार्थियों से पूछेंगे—पहली बाज़ी में क्या हुआ था? राजा तेनालीराम से क्यों नाराज़ हुए? यदि आप तेनालीराम की जगह होते तो क्या करते? इसके बाद आज के प्रकरण का संक्षिप्त परिचय देंगे। |
5 मिनट | पुनरावृत्ति एवं प्रश्नोत्तर |
| 2 |
शिक्षण के दौरान : शिक्षक तीसरे दृश्य का आदर्श वाचन करेंगे। विद्यार्थी पात्रों के अनुसार संवाद पढ़ेंगे। दूसरी बाज़ी का आरम्भ, तेनालीराम का संकट, नकली संन्यासी का आगमन तथा उसकी बातों से दरबार का वातावरण बदलने तक की घटनाओं को क्रमवार समझाया जाएगा। प्रत्येक संवाद का भाव स्पष्ट करते हुए बच्चों को बताया जाएगा कि तेनालीराम हर परिस्थिति में धैर्य और बुद्धिमानी से काम लेते थे। |
20 मिनट | वाचन, भावग्रहण एवं संवाद प्रस्तुति |
| 3 |
गतिविधि : विद्यार्थियों को समूहों में बाँटकर तेनालीराम, राजा, संन्यासी और दरबारियों के संवादों का अभिनय कराया जाएगा। अभिनय के बाद प्रत्येक समूह बताएगा कि किस पात्र का व्यवहार उन्हें सबसे अधिक प्रभावशाली लगा और क्यों। |
10 मिनट | भूमिका-अभिनय, समूह सहभागिता एवं अवलोकन |
| 4 |
शिक्षण के बाद : शिक्षक विद्यार्थियों से चर्चा करेंगे—संन्यासी कौन था? उसके आने से क्या परिवर्तन हुआ? तेनालीराम ने परिस्थिति को अपने पक्ष में कैसे मोड़ा? विद्यार्थियों के उत्तरों के आधार पर पूरे प्रकरण का पुनरावलोकन कराया जाएगा। |
5 मिनट | मौखिक आकलन एवं प्रश्नोत्तर |
गृहकार्य
आज पढ़े गए दृश्य का पुनः वाचन कीजिए। लिखिए कि तेनालीराम की सबसे बड़ी विशेषता क्या थी तथा संकट की स्थिति में उन्होंने किस प्रकार धैर्य और बुद्धिमानी का परिचय दिया।
चतुर्थ दिवस
| क्रम | शिक्षण चरण | समय | आकलन का तरीका |
|---|---|---|---|
| 1 |
प्रकरण : तेनालीराम की बुद्धिमानी से राजा की भ्रांति दूर होना तथा नाटक का संदेश।
शिक्षण के आरम्भ में : शिक्षक पिछले दिवस की घटनाओं का पुनरावलोकन कराएँगे। विद्यार्थियों से पूछेंगे—नकली संन्यासी कौन था? तेनालीराम ने अपनी बुद्धिमानी का परिचय किस प्रकार दिया? इसके बाद विद्यार्थियों को बताएँगे कि आज नाटक का अंतिम भाग पढ़ा जाएगा और यह जाना जाएगा कि राजा ने अंत में क्या निर्णय लिया। |
5 मिनट | मौखिक पुनरावृत्ति एवं प्रश्नोत्तर |
| 2 |
शिक्षण के दौरान : शिक्षक नाटक के अंतिम दृश्य का आदर्श एवं भावपूर्ण वाचन करेंगे। विद्यार्थी पात्रों के अनुसार संवाद पढ़ेंगे। तेनालीराम द्वारा अपनी बुद्धिमानी से स्थिति स्पष्ट करना, राजा का प्रसन्न होना, दरबारियों की प्रतिक्रिया तथा नाटक के समापन तक की घटनाओं को क्रमवार समझाया जाएगा। प्रत्येक संवाद के पीछे छिपे हास्य, व्यंग्य तथा सीख पर भी चर्चा की जाएगी। |
20 मिनट | वाचन, भावार्थ एवं संवाद प्रस्तुति |
| 3 |
गतिविधि : विद्यार्थियों से पूरे नाटक का लघु मंचन कराया जाएगा। प्रत्येक समूह राजा, तेनालीराम, दरबारी, सेवक तथा संन्यासी की भूमिका निभाएगा। अभिनय के बाद विद्यार्थी बताएँगे कि नाटक का सबसे रोचक संवाद कौन-सा लगा और क्यों। |
10 मिनट | भूमिका-अभिनय, समूह सहभागिता एवं प्रस्तुतीकरण |
| 4 |
शिक्षण के बाद : शिक्षक विद्यार्थियों से नाटक का मुख्य संदेश अपने शब्दों में कहलवाएँगे। चर्चा करेंगे कि बुद्धिमानी, धैर्य, विनम्रता तथा उचित समय पर उचित निर्णय लेना जीवन में क्यों आवश्यक है। विद्यार्थियों की शंकाओं का समाधान करते हुए सम्पूर्ण नाटक का पुनरावलोकन कराया जाएगा। |
5 मिनट | समग्र मौखिक आकलन |
गृहकार्य
"यदि मैं तेनालीराम होता/होती..." विषय पर 8–10 वाक्य लिखिए। साथ ही नाटक से मिली दो शिक्षाएँ भी लिखिए।
कक्षा गतिविधियाँ
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नाटक मंचन
विद्यार्थियों को समूहों में बाँटकर पूरे नाटक का मंचन कराएँ तथा संवादों को उचित हाव-भाव के साथ प्रस्तुत करवाएँ। -
संवाद पूरा कीजिए
शिक्षक नाटक का एक संवाद प्रारम्भ करें, विद्यार्थी आगे का संवाद बोलें। -
पात्र पहचानिए
किसी पात्र का गुण बताकर विद्यार्थियों से उसका नाम पहचानने के लिए कहें। -
मेरी बुद्धिमानी
विद्यार्थी अपने जीवन की ऐसी घटना सुनाएँ जिसमें उन्होंने सूझबूझ से किसी समस्या का समाधान किया हो।
आकलन
- राजा कृष्णदेव राय तेनालीराम से क्यों नाराज़ हुए थे?
- तेनालीराम शतरंज खेलने से क्यों बचना चाहते थे?
- नकली संन्यासी के आने से क्या परिवर्तन हुआ?
- तेनालीराम ने अपनी बुद्धिमानी का परिचय किस प्रकार दिया?
- इस नाटक से आपको क्या शिक्षा मिलती है?
उपचारात्मक एवं समृद्धिकरण कार्य
उपचारात्मक कार्य :
जिन विद्यार्थियों को नाटक के संवाद पढ़ने, पात्रों की पहचान करने अथवा घटनाओं का क्रम समझने में कठिनाई हो, उन्हें चित्रों, भूमिका-अभिनय तथा शिक्षक के आदर्श वाचन के माध्यम से पुनः अभ्यास कराया जाएगा। आवश्यकतानुसार छोटे-छोटे समूह बनाकर प्रत्येक पात्र के संवादों का बार-बार अभ्यास कराया जाएगा तथा व्यक्तिगत मार्गदर्शन दिया जाएगा।
समृद्धिकरण कार्य :
तेज़ गति से सीखने वाले विद्यार्थियों से नाटक का कोई नया दृश्य तैयार करने, तेनालीराम की किसी अन्य प्रसिद्ध घटना की जानकारी एकत्र करने अथवा "बुद्धिमानी से समस्या का समाधान" विषय पर लघु संवाद लिखने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इच्छुक विद्यार्थी पूरी कक्षा के सामने उसका अभिनय भी प्रस्तुत करेंगे।
आगामी कार्य योजना
विद्यार्थियों से पाठ्यपुस्तक में दिए गए प्रश्नों के उत्तर तथा कार्यपुस्तिका में दिए गए अभ्यास कार्य पूर्ण कराए जाएँगे। साथ ही, अगले पाठ की भूमिका के अनुसार विद्यार्थियों को उससे संबंधित आवश्यक जानकारी, चित्र, अनुभव अथवा अवलोकन एकत्र करने के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिससे वे अगले पाठ को रुचिपूर्वक पढ़ सकें तथा उसकी विषयवस्तु को अपने अनुभवों से जोड़कर सहजता से समझ सकें।
शिक्षक टिप्पणी
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| शिक्षक के हस्ताक्षर | प्रधानाध्यापक के हस्ताक्षर |
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