पाठ 12 – शतरंज में मात (Shatranj Mein Maat)

📚 Class 4 📝 Hindi 📖 NCERT

📖 पाठ परिचय

यह शतरंज में मात (Shatranj Mein Maat) एक रोचक, हास्यपूर्ण और शिक्षाप्रद नाटक है। इसमें विजयनगर के बुद्धिमान मंत्री तेनालीराम अपनी चतुराई, सूझ-बूझ और हाजिरजवाबी से राजा कृष्णदेव राय के क्रोध से स्वयं को बचाते हैं। नाटक में शतरंज के खेल के माध्यम से बुद्धि, धैर्य और समझदारी का सुंदर चित्रण किया गया है।

यह पाठ विद्यार्थियों को सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में घबराने के बजाय शांत मन से सोचकर निर्णय लेना चाहिए। साथ ही यह भी प्रेरणा देता है कि बुद्धिमानी, विनम्रता और समयानुकूल उत्तर किसी भी बड़ी समस्या का समाधान बन सकते हैं।

इस Lesson में पाठ का सार, पात्र परिचय, शब्दार्थ (Word Meaning), प्रश्नोत्तर (Question Answers), Workbook Solutions शामिल हैं, जो विद्यार्थियों को पाठ को सरल, रोचक और प्रभावी ढंग से समझने में सहायता करते हैं।

📚 पाठ को विस्तार से पढ़ें

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📖 भाव एवं सार

शतरंज में मात एक मनोरंजक, हास्यपूर्ण और शिक्षाप्रद नाटक है। इसमें विजयनगर के प्रसिद्ध राजा कृष्णदेव राय और उनके बुद्धिमान दरबारी तेनालीराम की चतुराई, सूझ-बूझ और हाजिरजवाबी का सुंदर चित्रण किया गया है। दरबार के कुछ लोग राजा को यह विश्वास दिला देते हैं कि तेनालीराम शतरंज के बहुत बड़े खिलाड़ी हैं। राजा उनके साथ शतरंज खेलने का निश्चय करते हैं, जबकि तेनालीराम बार-बार बताते हैं कि उन्हें शतरंज खेलना नहीं आता।
राजा के आदेश पर तेनालीराम शतरंज खेलने बैठते हैं। खेल के दौरान उनकी अनोखी चालों को देखकर राजा को लगता है कि वे उनका उपहास कर रहे हैं। इससे राजा अत्यंत क्रोधित हो जाते हैं और उन्हें दंड देने का आदेश दे देते हैं। दरबार के अन्य लोग भी यह देखकर आश्चर्यचकित हो जाते हैं।
तेनालीराम अपनी बुद्धिमत्ता और हाजिरजवाबी से ऐसी युक्ति अपनाते हैं कि राजा का क्रोध तुरंत शांत हो जाता है। वे राजा को अपनी भूल का एहसास करा देते हैं। उनकी सूझ-बूझ और समझदारी से पूरा वातावरण बदल जाता है और सभी उनकी प्रशंसा करने लगते हैं।
अंत में राजा अपना निर्णय वापस ले लेते हैं, तेनालीराम को सम्मान और पुरस्कार देते हैं तथा उनकी बुद्धिमत्ता की सराहना करते हैं। यह नाटक हमें सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य, विवेक और चतुराई से काम लेने पर बड़ी से बड़ी समस्या का भी समाधान किया जा सकता है।

🌟 सीख

  • बुद्धिमानी और सूझ-बूझ से बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान किया जा सकता है।
  • बिना पूरी सच्चाई जाने किसी के बारे में निर्णय नहीं लेना चाहिए।
  • क्रोध में लिया गया निर्णय अक्सर गलत सिद्ध होता है।
  • कठिन परिस्थितियों में धैर्य और विवेक बनाए रखना चाहिए।
  • हाजिरजवाबी और आत्मविश्वास सफलता की कुंजी हैं।
  • विनम्रता और बुद्धिमत्ता व्यक्ति को सम्मान दिलाती है।

📚 शब्दार्थ

शब्द अर्थ
शतरंज बुद्धि से खेला जाने वाला खेल
मात हार, पराजय
दरबार राजा की सभा
दरबारी राजा की सभा का सदस्य
सम्राट राजाओं का राजा
महाराज राजा
मंत्री राजकार्य में सहायता करने वाला व्यक्ति
तेनालीराम बुद्धिमान और चतुर दरबारी
चतुराई बुद्धिमानी
हाजिरजवाबी समय पर उचित उत्तर देने की क्षमता
युक्ति उपाय, तरकीब
आदेश हुक्म
दंड सज़ा
क्रोध गुस्सा
सम्मान आदर
पुरस्कार इनाम
अशर्फी सोने का सिक्का
सिर मुंडाना बाल कटवाना
विनम्रता नम्र स्वभाव
विवेक सही-गलत की पहचान करने की क्षमता
धैर्य सहनशीलता
प्रशंसा सराहना
समस्या कठिन परिस्थिति
निर्णय फैसला
बुद्धिमत्ता अधिक समझ और ज्ञान होने का गुण

📋 प्रश्नोत्तर

💬 बातचीत के लिए
नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
1. आपको यह नाटक कैसा लगा और क्यों?

यह नाटक मुझे बहुत रोचक और शिक्षाप्रद लगा क्योंकि इसमें तेनालीराम की बुद्धिमानी, चतुराई और सूझ-बूझ का सुंदर चित्रण किया गया है। यह नाटक हमें कठिन परिस्थितियों में धैर्य और बुद्धि से काम लेने की प्रेरणा देता है।
2. आपने तेनालीराम के किस्सों की तरह और किसके बुद्धिमानी के किस्से सुने हैं? उनमें से कोई एक सुनाइए।

मैंने बीरबल की बुद्धिमानी के अनेक किस्से सुने हैं। एक बार बादशाह अकबर ने बीरबल से सबसे बड़ा हथियार पूछा। बीरबल ने उत्तर दिया कि “बुद्धि सबसे बड़ा हथियार है”। अपनी चतुराई से उन्होंने बादशाह की कठिन समस्या का समाधान कर दिया।
3. तेनालीराम की तरह क्या आपने भी कभी किसी कठिन परिस्थिति को संभाला है? यदि संभाला है तो कैसे?

हाँ। एक बार विद्यालय में मेरी कॉपी खो गई थी। मैंने घबराने के बजाय शांत होकर पूरी कक्षा में खोज की और अपने मित्रों से पूछा। कुछ ही देर में कॉपी मिल गई। इससे मैंने सीखा कि कठिन समय में घबराने के बजाय समझदारी से काम लेना चाहिए।
4. यदि तेनालीराम शतरंज का खेल जानते तो नाटक का अंत क्या होता?

यदि तेनालीराम शतरंज का खेल जानते होते, तो वे राजा के साथ अच्छा खेलते और उन्हें हार का सामना नहीं करना पड़ता। संभवतः उन्हें अपनी चतुराई से खेल में भी विजय मिलती तथा नाटक का अंत अलग ढंग से होता।
✍️ सोचिए और लिखिए
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर पाठ के आधार पर दीजिए।
(क) सभी दरबारी तेनालीराम से ईर्ष्या क्यों करते थे?

तेनालीराम अपनी बुद्धिमानी, चतुराई और हाजिरजवाबी के कारण राजा के प्रिय थे। उन्हें राजा से विशेष सम्मान मिलता था। इसी कारण अन्य दरबारी उनसे ईर्ष्या करते थे।
(ख) दरबारियों ने राजा से तेनालीराम के बारे में क्या कहा?

दरबारियों ने राजा से कहा कि तेनालीराम शतरंज के बहुत बड़े खिलाड़ी हैं और उन्होंने बड़े-बड़े खिलाड़ियों को भी मात दी है। इसी झूठी बात के कारण राजा ने तेनालीराम को शतरंज खेलने के लिए बुलाया।
(ग) शतरंज खेलते समय राजा को तेनालीराम पर क्रोध क्यों आ रहा था?

तेनालीराम शतरंज खेलना नहीं जानते थे। वे बार-बार गलत चाल चल रहे थे, जिससे राजा को लगा कि वे जानबूझकर खेल का मज़ाक बना रहे हैं। इसी कारण राजा को उन पर क्रोध आने लगा।
(घ) तेनालीराम ने मुंडन से बचने के लिए क्या चाल चली?

तेनालीराम ने पहले कहा कि उनके बाल पाँच हजार अशर्फियों के बदले गिरवी रखे गए हैं। बाद में उन्होंने राजा को समझाया कि माता-पिता के समान राजा के रहते उनका मुंडन होना अशुभ माना जाएगा। उनकी इस बुद्धिमानी से राजा ने दंड वापस ले लिया।
(ङ) घर में खेले जाने वाले खेलों में आपको सबसे अच्छा खेल कौन-सा लगता है? वह खेल कैसे खेला जाता है?

मुझे शतरंज सबसे अच्छा खेल लगता है। यह दो खिलाड़ियों के बीच खेला जाता है। इसमें राजा, वज़ीर, हाथी, ऊँट, घोड़े और प्यादों की सहायता से चालें चलकर प्रतिद्वंद्वी के राजा को मात देने का प्रयास किया जाता है।
2. किसने, किससे कहा?
(क) “शतरंज? क्या तेनालीराम शतरंज के शौकीन हैं?”

किसने — राजा
किससे — दरबारियों से
(ख) “और यह है मेरा दाँव।”

किसने — तेनालीराम
किससे — राजा से
(ग) “अरे, इतने महान आदमी का मुंडन!”

किसने — नाई
किससे — राजा से
(घ) “हाँ महाराज, बड़े-बड़ों को मात दी है तेनाली ने।”

किसने — पहला दरबारी
किससे — राजा से
(ङ) “उठो, उठो! तुम्हें कोई दंड नहीं मिल रहा है।”

किसने — राजा
किससे — नाई से
✍️ भाषा की बात
1. दिए गए शब्दों का मिलान उनके समान अर्थ वाले शब्दों से कीजिए।

शब्द समान अर्थ वाला शब्द
प्रशंसा बड़ाई
युक्ति उपाय
मात हार
घाघ चालाक
माहिर कुशल
न्योता आमंत्रण
2. मटके में से उपयुक्त विशेषण चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।

कुशल खिलाड़ी


गूढ़ चाल


चतुर चाल


महान तेनाली


बड़ा आदमी


पाँच हजार अशर्फियाँ

3. निम्नलिखित मनोभावों को संवाद के रूप में लिखिए।

प्रसन्न — “आज मुझे प्रतियोगिता में प्रथम स्थान मिला है। मैं बहुत खुश हूँ।”


चकित — “अरे! यह कैसे हो गया? मुझे तो बिल्कुल विश्वास नहीं हो रहा।”


शांत — “घबराइए नहीं, पहले पूरी बात समझिए, फिर निर्णय लीजिए।”


दुखी — “मुझे अपनी गलती का बहुत पछतावा है। अब मैं ऐसा कभी नहीं करूँगा।”

4. नीचे दी गई सूचना के आधार पर नए शब्दों का निर्माण कीजिए।

(क) किसी को आने के लिए कहना — आमंत्रण


(ख) जाना का विपरीत अर्थ वाला शब्द — आना


(ग) किसी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना — आभार


(घ) किसी व्यक्ति या वस्तु का आना या पहुँचना — आगमन


(ङ) जो बहुत जरूरी हो — आवश्यक

🚦 पाठ से आगे
1. शतरंज के प्रत्येक मोहरे की चाल अलग-अलग होती है। शतरंज के मोहरों की चाल पता कीजिए और लिखिए।

मोहरा चाल
घोड़े की चाल अंग्रेज़ी के L आकार में चलता है (दो घर सीधा और एक घर तिरछा)।
हाथी की चाल सीधी दिशा में आगे, पीछे, दाएँ या बाएँ जितने घर चाहे चल सकता है।
मंत्री (वज़ीर) की चाल सीधी तथा तिरछी सभी दिशाओं में जितने घर चाहे चल सकता है।
राजा की चाल किसी भी दिशा में केवल एक घर चलता है।
ऊँट की चाल केवल तिरछी दिशा में जितने घर चाहे चल सकता है।
प्यादे (सिपाही) की चाल सामान्यतः एक घर आगे चलता है। पहली चाल में दो घर चल सकता है तथा तिरछे एक घर पर मारता है।
2. चित्र के साथ खेल के नाम का मिलान कीजिए। साथ ही यह भी लिखिए कि आप की स्थानीय भाषा में इस खेल को क्या कहते हैं।

खेल का नाम आपकी स्थानीय भाषा में नाम
लट्टू लट्टू
साँप-सीढ़ी साँप-सीढ़ी
राजा-मंत्री-चोर-सिपाही राजा-मंत्री-चोर-सिपाही
गुट्टे गिट्टियाँ / गुट्टे
अष्टा-चंगन पचीसी / चौपड़ (स्थानीय नाम क्षेत्रानुसार भिन्न हो सकता है)
📚 पुस्तकालय या अन्य स्रोत से
(क) तेनालीराम के किस्सों की पुस्तक अपने पुस्तकालय या किसी अन्य स्रोत से लेकर पढ़िए।

विद्यार्थी पुस्तकालय, इंटरनेट अथवा अन्य स्रोत से तेनालीराम की कहानियाँ पढ़ें और उनकी बुद्धिमानी से मिलने वाली सीख को अपनी कक्षा में साझा करें।
(ख) ‘तेनालीराम के किस्से’ नाम से मित्र-मंडली की एक बैठक आयोजित कर तेनालीराम की बुद्धिमत्ता के किस्से सुनाइए।

विद्यार्थी मित्रों के साथ बैठक आयोजित करके तेनालीराम के रोचक और प्रेरणादायक किस्से सुनाएँ तथा उनसे मिलने वाली सीख पर चर्चा करें।
♟️ शतरंज की भूल-भुलैया
केवल नाम वाले शब्दों (संज्ञा) को एक-दूसरे से मिलाते हुए मंत्री को राजा तक पहुँचाइए। ध्यान रहे कि आपको संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण तथा क्रिया को आपस में नहीं मिलाना है।

सही मार्ग (केवल संज्ञा शब्द):

मंत्री → घोड़ा → शेर → वीणा → महल → जहाज → तेनालीराम → कृष्णदेवराय → दरबार → आदमी → पिता → सिपाही → राजा

📖 कार्यपुस्तिका

📖 पाठ के भीतर
प्रश्न 1
निम्नलिखित प्रश्नों के एक से अधिक विकल्प सही हो सकते हैं। सही विकल्प/विकल्पों पर सही (✓) का चिह्न लगाइए।

(क) तेनालीराम किसके दरबार में विद्वत्ता एवं राज प्रशासनदाता थे?

✔ कृष्णदेव राय


(ख) राजा और तेनालीराम कौन-सा खेल खेलते थे?

✔ शतरंज


(ग) शतरंज के खेल में कौन-कौन सी मोहरे होती हैं?

  • ✔ राजा
  • ✔ मंत्री
  • ✔ घोड़ा
  • ✔ ऊँट

(घ) तेनालीराम ने अपने वालों पर कितनी अशर्फियाँ उधार ली थीं?

✔ पाँच हजार

प्रश्न 2
पाठ से बनी समझ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए।

(क) राजा हमेशा तेनालीराम की प्रशंसा क्यों किया करते थे?

क्योंकि तेनालीराम बहुत बुद्धिमान, चतुर तथा हाजिरजवाब थे। वे अपनी सूझ-बूझ से हर समस्या का समाधान निकाल देते थे।


(ख) घुँडेन कब-कब खाया जाता है? अपने अध्यापक से पूछकर लिखिए।

घुँडेन विशेष अवसरों, त्योहारों तथा पारंपरिक भोज के समय बनाया और खाया जाता है।


(ग) विपट्टूक किसे कहते हैं?

जो व्यक्ति विपत्ति आने पर भी धैर्य और बुद्धिमानी से काम ले, उसे विपट्टूक कहा जाता है।


(घ) तेनालीराम आँखें मूँदकर मंत्रों का उच्चारण क्यों करता था?

तेनालीराम अपनी योजना को सफल बनाने तथा सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए आँखें मूँदकर मंत्रों का उच्चारण करता था।

प्रश्न 3
बॉक्स में दिए गए शब्दों का प्रयोग करते हुए रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।

(i) विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय थे।


(ii) तेनालीराम का पूरा नाम तेनालीराम रामकृष्ण था।


(iii) तेनालीराम और राजा शतरंज का खेल खेलते थे।


(iv) तेनालीराम बहुत चतुर थे।

💡 सोचिए और लिखिए
प्रश्न 1
पाठ से संबंधित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए।

(क) राजा हमेशा प्रतियोगिता की प्रशंसा क्यों किया करता था?

राजा का मानना था कि प्रतियोगिता से बच्चों की प्रतिभा निखरती है, आत्मविश्वास बढ़ता है तथा आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।


(ख) मुठ्ठी-भर रुपये जान देने से भी बढ़कर लिखिए।

लेखक का आशय है कि थोड़े से पैसों के लिए अपने जीवन को जोखिम में नहीं डालना चाहिए। जीवन धन से कहीं अधिक मूल्यवान है।


(ग) विपदाएँ किसे डराती हैं?

विपदाएँ कमजोर मन वाले और हिम्मत हारने वाले लोगों को डराती हैं।


(घ) नेतालिराम अपनी उँगलियों का उपयोग किस प्रकार करता था?

नेतालिराम अपनी उँगलियों का उपयोग शतरंज की गोटियों को चलाने तथा खेल खेलने के लिए करता था।

प्रश्न 2
दिए गए शब्दों का प्रयोग करते हुए रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।

(i) प्रतियोगिता के राजा विजेता हैं।


(ii) नेतालिराम का ऐसा दुर्घटना था।


(iii) नेतालिराम और राजा शतरंज का खेल खेलते हैं।


(iv) नेतालिराम श्रेष्ठ खिलाड़ी थे।

✍️ भाषा की बात
प्रश्न 1
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए।

(क) राजा — नरेश, भूप


(ख) चिंता — फिक्र, चिंता


(ग) सभी — समस्त, सारे


(घ) भाग — हिस्सा, अंश


(ङ) नष्ट — बर्बाद, समाप्त

प्रश्न 2
निम्नलिखित शब्दों में से सही शब्द चुनकर वाक्य में लिखिए।

(i) विजयश्री


(ii) प्रशंसाएँ


(iii) प्रतिभा


(iv) खिलाड़ी


(v) अभ्यास

प्रश्न 3
दिए गए मुहावरों के अर्थ चुनकर उनके वाक्य में प्रयोग कीजिए।

(i) मुट्ठी में होनावश में होना

वाक्य : कठिन परिश्रम से सफलता हमारी मुट्ठी में होती है।


(ii) सिर उठानाविरोध करना

वाक्य : अन्याय के विरुद्ध सभी ने सिर उठाया।


(iii) हाथ पकड़नासहायता करना

वाक्य : शिक्षक ने कठिन समय में छात्र का हाथ पकड़ा।


(iv) पूर्ण विश्वास रखनाभरोसा करना

वाक्य : मुझे अपने मित्र पर पूर्ण विश्वास है।


(v) मुँह फेरनासाथ छोड़ देना

वाक्य : सच्चे मित्र कभी मुसीबत में मुँह नहीं फेरते।

प्रश्न 4
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए।

(i) विजय — पराजय


(ii) संभव — असंभव


(iii) कठोर — कोमल


(iv) हँसना — रोना


(v) कुशाग्र — मंदबुद्धि

📚 पाठ से आगे
प्रश्न 1
तेनालीराम की तरह मुगल सम्राट अकबर के दरबार में भी एक दरबारी थे। वे भी अपनी कुशाग्र बुद्धि और हाजिरजवाबी के लिए प्रसिद्ध थे। उनके विषय में अपने अध्यापक से बात करके लिखिए।

मुगल सम्राट अकबर के दरबार के प्रसिद्ध दरबारी बीरबल थे। वे अपनी कुशाग्र बुद्धि, चतुराई और हाजिरजवाबी के लिए प्रसिद्ध थे। वे कठिन से कठिन समस्या का समाधान सरलता से कर देते थे। अकबर उन्हें बहुत सम्मान देते थे।

प्रश्न 2
वर्तमान में शतरंज के खेल में खिलाड़ियों को ‘ग्रैंड मास्टर’ की उपाधि दी जाती है। भारत के दो पुरुष और दो महिला ग्रैंड मास्टरों के नाम पता करके लिखिए।

पुरुष

1. विश्वनाथन आनंद

2. डी. गुकेश


महिला

1. कोनेरू हम्पी

2. हरिका द्रोणावल्ली

🎯 आनंददायी गतिविधि
प्रश्न 1
अपनी पसंद के खेल में प्रयुक्त खेल सामग्री का चित्र बनाइए और उसमें रंग भरिए।

गतिविधि आधारित प्रश्न
विद्यार्थी अपनी पसंद के खेल (जैसे– शतरंज, क्रिकेट, फुटबॉल, बैडमिंटन आदि) की खेल सामग्री का चित्र स्वयं बनाएँ तथा उसमें आकर्षक रंग भरें।

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