शिक्षण योजना
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दिनांक
26.07.2026
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कक्षा
4
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विषय
हिन्दी
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पाठ |
समय
40 मिनट
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पाठ परिचय
प्रस्तुत पाठ "हमारा आदित्य" एक संवादात्मक एवं ज्ञानवर्धक पाठ है। इसमें शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच प्रश्नोत्तर के माध्यम से सूर्य के स्वरूप, उसकी विशेषताओं तथा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा प्रक्षेपित आदित्य-एल1 मिशन की जानकारी सरल भाषा में दी गई है। यह पाठ विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिज्ञासा, तर्कशील चिंतन तथा अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करता है। साथ ही यह बताता है कि वैज्ञानिक निरंतर अनुसंधान के माध्यम से प्रकृति के रहस्यों को समझने का प्रयास करते हैं।
अधिगम प्रतिफल
इस पाठ के अध्ययन के पश्चात विद्यार्थी सूर्य को एक तारे के रूप में पहचान सकेंगे तथा उसके महत्व को समझ पाएँगे। वे सूर्य और ग्रहों में अंतर स्पष्ट कर सकेंगे, आदित्य-एल1 मिशन के उद्देश्य तथा उसके महत्व का सरल वर्णन कर पाएँगे। साथ ही वैज्ञानिक तथ्यों को तर्कपूर्वक समझने, प्रश्न पूछने, अपने विचार व्यक्त करने, संवाद में सक्रिय भाग लेने तथा विज्ञान के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में सक्षम होंगे।
प्रकरण
इस पाठ में सूर्य के स्वरूप, उसकी विशेषताओं तथा इसरो के आदित्य-एल1 मिशन के माध्यम से सूर्य के वैज्ञानिक अध्ययन का सरल एवं रोचक परिचय कराया गया है।
शिक्षण-अधिगम सामग्री
- वीणा हिन्दी पाठ्यपुस्तक
- सूर्य, सौरमंडल एवं आदित्य-एल1 के चित्र
- ग्लोब एवं सौरमंडल का मॉडल (यदि उपलब्ध हो)
- भारत का मानचित्र तथा इसरो का लोगो
- श्यामपट्ट, रंगीन चॉक एवं फ्लैश कार्ड
- सूर्य के विभिन्न रंगों में लिए गए वास्तविक चित्र
- आदित्य-एल1 प्रक्षेपण का लघु वीडियो (यदि उपलब्ध हो)
- कार्यपत्रक एवं प्रश्न कार्ड
शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाएँ / गतिविधि
प्रथम दिवस
| क्रम | शिक्षण चरण | समय | आकलन का तरीका |
|---|---|---|---|
| 1 |
शिक्षक के आरंभ में : शिक्षक विद्यार्थियों का मुस्कुराकर स्वागत करेंगे तथा उनसे दैनिक जीवन से जुड़े सरल प्रश्न पूछेंगे—सुबह उठते ही सबसे पहले हमें क्या दिखाई देता है? यदि एक दिन सूर्य न निकले तो क्या होगा? क्या केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि पेड़-पौधे, पशु-पक्षी भी सूर्य पर निर्भर हैं? विद्यार्थियों के उत्तरों को बिना सही-गलत बताए स्वीकार करेंगे। इसके बाद सूर्य के चित्र अथवा सूर्योदय का दृश्य दिखाकर बच्चों में जिज्ञासा उत्पन्न करेंगे कि आज हम सूर्य के बारे में ऐसी बातें जानेंगे जिन्हें जानने के लिए भारत ने अंतरिक्ष में अपना विशेष मिशन भेजा है। |
8 मिनट | पूर्वज्ञान का आकलन, मौखिक प्रश्नोत्तर एवं सहभागिता |
| 2 |
शिक्षक के दौरान : शिक्षक पाठ का प्रारम्भिक भाग आदर्श, स्पष्ट तथा भावपूर्ण ढंग से पढ़ेंगे। वाचन के दौरान प्रत्येक संवाद पर रुककर बच्चों से उसका अर्थ पूछेंगे तथा सरल भाषा में समझाएँगे कि सूर्य कोई ग्रह नहीं बल्कि एक तारा है। चित्रों, ग्लोब तथा सौरमंडल के मॉडल (यदि उपलब्ध हो) की सहायता से बताएँगे कि पृथ्वी सहित सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं। सूर्य हमें प्रकाश, ऊष्मा और ऊर्जा प्रदान करता है, इसलिए पृथ्वी पर जीवन संभव है। कठिन शब्द जैसे—आदित्य, तारा, ग्रह, ऊष्मा, ऊर्जा आदि का अर्थ उदाहरणों एवं चित्रों के माध्यम से स्पष्ट करेंगे। समय-समय पर छोटे-छोटे प्रश्न पूछकर सुनिश्चित करेंगे कि प्रत्येक बच्चा पाठ को समझ रहा है, चाहे उसे पहले से कोई जानकारी न हो। |
25 मिनट | वाचन कौशल, प्रश्नोत्तर, चित्र अवलोकन एवं अवधारणा की समझ |
| 3 |
शिक्षक के बाद : शिक्षक विद्यार्थियों से चर्चा करेंगे कि आज उन्होंने सूर्य के बारे में कौन-कौन सी नई बातें सीखीं। विद्यार्थियों से अपने शब्दों में बताने के लिए कहेंगे कि सूर्य ग्रह है या तारा तथा वह हमारे लिए क्यों आवश्यक है। दो-तीन विद्यार्थियों से पूरी कक्षा के सामने उत्तर प्रस्तुत करवाएँगे। अंत में यह जिज्ञासा उत्पन्न करेंगे कि यदि सूर्य इतना दूर है, तो वैज्ञानिक उसके बारे में जानकारी कैसे प्राप्त करते हैं? अगले दिवस में इसी प्रश्न का उत्तर आदित्य-एल1 मिशन के माध्यम से खोजने की भूमिका बनाई जाएगी। |
7 मिनट | मौखिक पुनरावृत्ति, अवधारणा की जाँच एवं अभिव्यक्ति |
द्वितीय दिवस
| क्रम | शिक्षण चरण | समय | आकलन का तरीका |
|---|---|---|---|
| 1 |
शिक्षक के आरंभ में : शिक्षक पिछले दिवस की पुनरावृत्ति करते हुए विद्यार्थियों से पूछेंगे—सूर्य ग्रह है या तारा? सूर्य हमारे लिए क्यों आवश्यक है? इसके बाद एक नया प्रश्न रखेंगे—यदि सूर्य पृथ्वी से लगभग 15 करोड़ किलोमीटर दूर है, तो वैज्ञानिक उसके बारे में जानकारी कैसे प्राप्त करते हैं? विद्यार्थियों के उत्तर सुनकर उन्हें बताएँगे कि भारत ने इसी उद्देश्य से आदित्य-एल1 नामक अंतरिक्ष मिशन भेजा है। इससे बच्चों में आगे के पाठ के प्रति उत्सुकता उत्पन्न होगी। |
5 मिनट | मौखिक पुनरावृत्ति, प्रश्नोत्तर एवं पूर्वज्ञान का आकलन |
| 2 |
शिक्षक के दौरान : शिक्षक पाठ के अगले भाग का आदर्श एवं भावपूर्ण वाचन करेंगे तथा चित्रों की सहायता से समझाएँगे कि आदित्य-एल1 भारत का पहला सूर्य अध्ययन मिशन है, जिसे इसरो ने प्रक्षेपित किया। सरल उदाहरणों द्वारा बताएँगे कि L1 ऐसा स्थान है जहाँ से सूर्य का लगातार अवलोकन किया जा सकता है। विद्यार्थियों को सूर्य की बाहरी परत (कोरोना), सौर ज्वालाएँ तथा अंतरिक्ष मौसम जैसी अवधारणाओं से अत्यंत सरल भाषा में परिचित कराएँगे। पाठ में दिए गए चित्रों का अवलोकन करवाकर सूर्य के विभिन्न रूपों पर चर्चा करेंगे तथा समय-समय पर छोटे प्रश्न पूछकर प्रत्येक विद्यार्थी की समझ सुनिश्चित करेंगे। |
28 मिनट | वाचन, चित्र अवलोकन, प्रश्नोत्तर एवं अवधारणा की समझ |
| 3 |
शिक्षक के बाद : विद्यार्थियों को जोड़ों अथवा छोटे समूहों में चर्चा करने के लिए प्रेरित किया जाएगा कि आदित्य-एल1 मिशन क्यों आवश्यक है तथा वैज्ञानिकों को इससे क्या लाभ होगा। कुछ विद्यार्थी अपने विचार पूरी कक्षा के सामने प्रस्तुत करेंगे। अंत में शिक्षक मुख्य बिंदुओं का पुनरावलोकन कर बताएँगे कि अगले दिवस में पूरे पाठ का समेकित अध्ययन, गतिविधियाँ तथा लेखन कार्य कराया जाएगा। |
7 मिनट | समूह चर्चा, मौखिक प्रस्तुतीकरण एवं अवधारणा का आकलन |
तृतीय दिवस
| क्रम | शिक्षण चरण | समय | आकलन का तरीका |
|---|---|---|---|
| 1 |
शिक्षक के आरंभ में : शिक्षक विद्यार्थियों से पिछले दोनों दिवसों में सीखी गई बातों की पुनरावृत्ति कराएँगे। प्रश्न पूछेंगे—सूर्य क्या है? हमें सूर्य से क्या-क्या प्राप्त होता है? आदित्य-एल1 मिशन किस उद्देश्य से भेजा गया है? इसके बाद विद्यार्थियों से पाठ के मुख्य बिंदुओं को अपने शब्दों में बताने के लिए प्रेरित करेंगे तथा पाठ के चित्रों का पुनः अवलोकन कराकर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करेंगे। |
5 मिनट | मौखिक पुनरावृत्ति, प्रश्नोत्तर एवं अवधारणा की जाँच |
| 2 |
शिक्षक के दौरान : शिक्षक विद्यार्थियों से पूरे पाठ का क्रमवार वाचन कराएँगे तथा आवश्यकतानुसार उच्चारण एवं भाव स्पष्ट करेंगे। इसके बाद पुस्तक में दिए गए “बातचीत के लिए” एवं “समझ की बात” अनुभाग के प्रश्नों पर चर्चा कराएँगे। विद्यार्थियों को यह अवसर देंगे कि वे अपने प्रश्न भी पूछ सकें। समूह गतिविधि के रूप में प्रत्येक समूह को एक विषय—सूर्य, तारा, आदित्य-एल1, इसरो अथवा सूर्य का महत्व—दिया जाएगा, जिस पर वे दो-तीन मिनट चर्चा कर पूरी कक्षा के सामने अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। शिक्षक आवश्यक सुधार एवं मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। |
25 मिनट | वाचन कौशल, समूह गतिविधि, प्रश्नोत्तर एवं प्रस्तुतीकरण |
| 3 |
शिक्षक के बाद : शिक्षक विद्यार्थियों से पाँच-छह वाक्यों में लिखवाएँगे कि उन्होंने इस पाठ से क्या नया सीखा। तत्पश्चात सम्पूर्ण पाठ का सार प्रस्तुत करते हुए वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा एवं अंतरिक्ष अनुसंधान के महत्व पर चर्चा करेंगे। अंत में विद्यार्थियों की समझ का मौखिक एवं लिखित आकलन करेंगे तथा उन्हें सूर्य और अंतरिक्ष से संबंधित अन्य रोचक जानकारियाँ खोजने के लिए प्रेरित करेंगे। |
10 मिनट | लिखित कार्य, मौखिक प्रस्तुतीकरण एवं समग्र आकलन |
कक्षा गतिविधियाँ
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सूर्य का महत्व बताइए
विद्यार्थियों से पूछें कि यदि एक दिन सूर्य न निकले तो पृथ्वी पर क्या-क्या परिवर्तन होंगे। वे अपने विचार कक्षा में साझा करें तथा शिक्षक सही निष्कर्ष तक पहुँचने में उनका मार्गदर्शन करें। -
चित्र पहचानो – जानकारी बताओ
सूर्य, पृथ्वी, सौरमंडल, इसरो तथा आदित्य-एल1 के चित्र दिखाकर विद्यार्थियों से उनकी पहचान करवाएँ और प्रत्येक चित्र के बारे में एक-दो वाक्य बोलने के लिए प्रेरित करें। -
समूह चर्चा
विद्यार्थियों को छोटे-छोटे समूहों में बाँटकर विषय दें—"सूर्य हमारे जीवन के लिए क्यों आवश्यक है?" प्रत्येक समूह अपने विचार पूरी कक्षा के सामने प्रस्तुत करे। -
मेरा नया ज्ञान
विद्यार्थी पाँच वाक्यों में लिखें कि उन्होंने इस पाठ से सूर्य अथवा आदित्य-एल1 मिशन के बारे में कौन-कौन सी नई बातें सीखीं।
आकलन
- सूर्य को ग्रह नहीं बल्कि तारा क्यों कहा जाता है?
- सूर्य हमारे जीवन के लिए क्यों आवश्यक है?
- आदित्य-एल1 मिशन किस संस्था द्वारा प्रक्षेपित किया गया है?
- आदित्य-एल1 मिशन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- यदि आपको सूर्य के बारे में अपने मित्र को बताना हो तो आप कौन-कौन सी बातें बताएँगे?
गृहकार्य
अपने अभिभावकों अथवा परिवार के किसी सदस्य से सूर्य के महत्व के बारे में चर्चा कीजिए तथा उनसे प्राप्त जानकारी के आधार पर सूर्य के महत्व पर 8–10 वाक्य लिखिए। यदि संभव हो तो अगले दिन सूर्योदय अथवा सूर्यास्त का चित्र बनाकर भी लाइए।
उपचारात्मक एवं समृद्धिकरण कार्य
उपचारात्मक कार्य :
जिन विद्यार्थियों को सूर्य, तारा, ग्रह अथवा आदित्य-एल1 की अवधारणा समझने में कठिनाई हो, उन्हें चित्रों, मॉडल तथा सरल उदाहरणों की सहायता से पुनः समझाया जाएगा। छोटे-छोटे प्रश्न पूछकर व्यक्तिगत रूप से उनकी समझ विकसित की जाएगी।
समृद्धिकरण कार्य :
प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को इसरो के अन्य अंतरिक्ष अभियानों (जैसे चंद्रयान, मंगलयान, गगनयान आदि) की जानकारी एकत्र करने तथा अगले दिवस कक्षा में संक्षिप्त प्रस्तुति देने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
आगामी कार्य योजना
अगले पाठ के अध्ययन से पूर्व विद्यार्थियों को प्रकृति, विज्ञान अथवा अंतरिक्ष से संबंधित रोचक तथ्य खोजकर लाने के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिससे आगामी पाठ को उनके अनुभवों एवं जिज्ञासाओं से जोड़ते हुए अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
शिक्षक टिप्पणी
विद्यार्थियों ने सूर्य के महत्व, उसके तारा होने तथा आदित्य-एल1 मिशन के उद्देश्य को उत्साहपूर्वक समझा। अधिकांश विद्यार्थियों ने चर्चा एवं समूह गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता की तथा वैज्ञानिक तथ्यों को अपने शब्दों में स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया। जिन विद्यार्थियों को कुछ अवधारणाओं में कठिनाई थी, उन्हें अतिरिक्त उदाहरणों एवं चित्रों की सहायता से पुनः अभ्यास कराया जाएगा।
| शिक्षक के हस्ताक्षर | प्रधानाध्यापक के हस्ताक्षर |
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