📖 पाठ परिचय
यह शतरंज में मात (Shatranj Mein Maat) एक रोचक, हास्यपूर्ण और शिक्षाप्रद नाटक है। इसमें विजयनगर के बुद्धिमान मंत्री तेनालीराम अपनी चतुराई, सूझ-बूझ और हाजिरजवाबी से राजा कृष्णदेव राय के क्रोध से स्वयं को बचाते हैं। नाटक में शतरंज के खेल के माध्यम से बुद्धि, धैर्य और समझदारी का सुंदर चित्रण किया गया है।
यह पाठ विद्यार्थियों को सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में घबराने के बजाय शांत मन से सोचकर निर्णय लेना चाहिए। साथ ही यह भी प्रेरणा देता है कि बुद्धिमानी, विनम्रता और समयानुकूल उत्तर किसी भी बड़ी समस्या का समाधान बन सकते हैं।
इस Lesson में पाठ का सार, पात्र परिचय, शब्दार्थ (Word Meaning), प्रश्नोत्तर (Question Answers), Workbook Solutions शामिल हैं, जो विद्यार्थियों को पाठ को सरल, रोचक और प्रभावी ढंग से समझने में सहायता करते हैं।
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📖 भाव एवं सार
🌟 सीख
- बुद्धिमानी और सूझ-बूझ से बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान किया जा सकता है।
- बिना पूरी सच्चाई जाने किसी के बारे में निर्णय नहीं लेना चाहिए।
- क्रोध में लिया गया निर्णय अक्सर गलत सिद्ध होता है।
- कठिन परिस्थितियों में धैर्य और विवेक बनाए रखना चाहिए।
- हाजिरजवाबी और आत्मविश्वास सफलता की कुंजी हैं।
- विनम्रता और बुद्धिमत्ता व्यक्ति को सम्मान दिलाती है।
📚 शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| शतरंज | बुद्धि से खेला जाने वाला खेल |
| मात | हार, पराजय |
| दरबार | राजा की सभा |
| दरबारी | राजा की सभा का सदस्य |
| सम्राट | राजाओं का राजा |
| महाराज | राजा |
| मंत्री | राजकार्य में सहायता करने वाला व्यक्ति |
| तेनालीराम | बुद्धिमान और चतुर दरबारी |
| चतुराई | बुद्धिमानी |
| हाजिरजवाबी | समय पर उचित उत्तर देने की क्षमता |
| युक्ति | उपाय, तरकीब |
| आदेश | हुक्म |
| दंड | सज़ा |
| क्रोध | गुस्सा |
| सम्मान | आदर |
| पुरस्कार | इनाम |
| अशर्फी | सोने का सिक्का |
| सिर मुंडाना | बाल कटवाना |
| विनम्रता | नम्र स्वभाव |
| विवेक | सही-गलत की पहचान करने की क्षमता |
| धैर्य | सहनशीलता |
| प्रशंसा | सराहना |
| समस्या | कठिन परिस्थिति |
| निर्णय | फैसला |
| बुद्धिमत्ता | अधिक समझ और ज्ञान होने का गुण |
📋 प्रश्नोत्तर
किससे — दरबारियों से
किससे — राजा से
किससे — राजा से
किससे — राजा से
किससे — नाई से
| शब्द | समान अर्थ वाला शब्द |
|---|---|
| प्रशंसा | बड़ाई |
| युक्ति | उपाय |
| मात | हार |
| घाघ | चालाक |
| माहिर | कुशल |
| न्योता | आमंत्रण |
कुशल खिलाड़ी
गूढ़ चाल
चतुर चाल
महान तेनाली
बड़ा आदमी
पाँच हजार अशर्फियाँ
प्रसन्न — “आज मुझे प्रतियोगिता में प्रथम स्थान मिला है। मैं बहुत खुश हूँ।”
चकित — “अरे! यह कैसे हो गया? मुझे तो बिल्कुल विश्वास नहीं हो रहा।”
शांत — “घबराइए नहीं, पहले पूरी बात समझिए, फिर निर्णय लीजिए।”
दुखी — “मुझे अपनी गलती का बहुत पछतावा है। अब मैं ऐसा कभी नहीं करूँगा।”
(क) किसी को आने के लिए कहना — आमंत्रण
(ख) जाना का विपरीत अर्थ वाला शब्द — आना
(ग) किसी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना — आभार
(घ) किसी व्यक्ति या वस्तु का आना या पहुँचना — आगमन
(ङ) जो बहुत जरूरी हो — आवश्यक
| मोहरा | चाल |
|---|---|
| घोड़े की चाल | अंग्रेज़ी के L आकार में चलता है (दो घर सीधा और एक घर तिरछा)। |
| हाथी की चाल | सीधी दिशा में आगे, पीछे, दाएँ या बाएँ जितने घर चाहे चल सकता है। |
| मंत्री (वज़ीर) की चाल | सीधी तथा तिरछी सभी दिशाओं में जितने घर चाहे चल सकता है। |
| राजा की चाल | किसी भी दिशा में केवल एक घर चलता है। |
| ऊँट की चाल | केवल तिरछी दिशा में जितने घर चाहे चल सकता है। |
| प्यादे (सिपाही) की चाल | सामान्यतः एक घर आगे चलता है। पहली चाल में दो घर चल सकता है तथा तिरछे एक घर पर मारता है। |
| खेल का नाम | आपकी स्थानीय भाषा में नाम |
|---|---|
| लट्टू | लट्टू |
| साँप-सीढ़ी | साँप-सीढ़ी |
| राजा-मंत्री-चोर-सिपाही | राजा-मंत्री-चोर-सिपाही |
| गुट्टे | गिट्टियाँ / गुट्टे |
| अष्टा-चंगन | पचीसी / चौपड़ (स्थानीय नाम क्षेत्रानुसार भिन्न हो सकता है) |
मंत्री → घोड़ा → शेर → वीणा → महल → जहाज → तेनालीराम → कृष्णदेवराय → दरबार → आदमी → पिता → सिपाही → राजा
📖 कार्यपुस्तिका
(क) तेनालीराम किसके दरबार में विद्वत्ता एवं राज प्रशासनदाता थे?
✔ कृष्णदेव राय
(ख) राजा और तेनालीराम कौन-सा खेल खेलते थे?
✔ शतरंज
(ग) शतरंज के खेल में कौन-कौन सी मोहरे होती हैं?
- ✔ राजा
- ✔ मंत्री
- ✔ घोड़ा
- ✔ ऊँट
(घ) तेनालीराम ने अपने वालों पर कितनी अशर्फियाँ उधार ली थीं?
✔ पाँच हजार
(क) राजा हमेशा तेनालीराम की प्रशंसा क्यों किया करते थे?
क्योंकि तेनालीराम बहुत बुद्धिमान, चतुर तथा हाजिरजवाब थे। वे अपनी सूझ-बूझ से हर समस्या का समाधान निकाल देते थे।
(ख) घुँडेन कब-कब खाया जाता है? अपने अध्यापक से पूछकर लिखिए।
घुँडेन विशेष अवसरों, त्योहारों तथा पारंपरिक भोज के समय बनाया और खाया जाता है।
(ग) विपट्टूक किसे कहते हैं?
जो व्यक्ति विपत्ति आने पर भी धैर्य और बुद्धिमानी से काम ले, उसे विपट्टूक कहा जाता है।
(घ) तेनालीराम आँखें मूँदकर मंत्रों का उच्चारण क्यों करता था?
तेनालीराम अपनी योजना को सफल बनाने तथा सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए आँखें मूँदकर मंत्रों का उच्चारण करता था।
(i) विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय थे।
(ii) तेनालीराम का पूरा नाम तेनालीराम रामकृष्ण था।
(iii) तेनालीराम और राजा शतरंज का खेल खेलते थे।
(iv) तेनालीराम बहुत चतुर थे।
(क) राजा हमेशा प्रतियोगिता की प्रशंसा क्यों किया करता था?
राजा का मानना था कि प्रतियोगिता से बच्चों की प्रतिभा निखरती है, आत्मविश्वास बढ़ता है तथा आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
(ख) मुठ्ठी-भर रुपये जान देने से भी बढ़कर लिखिए।
लेखक का आशय है कि थोड़े से पैसों के लिए अपने जीवन को जोखिम में नहीं डालना चाहिए। जीवन धन से कहीं अधिक मूल्यवान है।
(ग) विपदाएँ किसे डराती हैं?
विपदाएँ कमजोर मन वाले और हिम्मत हारने वाले लोगों को डराती हैं।
(घ) नेतालिराम अपनी उँगलियों का उपयोग किस प्रकार करता था?
नेतालिराम अपनी उँगलियों का उपयोग शतरंज की गोटियों को चलाने तथा खेल खेलने के लिए करता था।
(i) प्रतियोगिता के राजा विजेता हैं।
(ii) नेतालिराम का ऐसा दुर्घटना था।
(iii) नेतालिराम और राजा शतरंज का खेल खेलते हैं।
(iv) नेतालिराम श्रेष्ठ खिलाड़ी थे।
(क) राजा — नरेश, भूप
(ख) चिंता — फिक्र, चिंता
(ग) सभी — समस्त, सारे
(घ) भाग — हिस्सा, अंश
(ङ) नष्ट — बर्बाद, समाप्त
(i) विजयश्री
(ii) प्रशंसाएँ
(iii) प्रतिभा
(iv) खिलाड़ी
(v) अभ्यास
(i) मुट्ठी में होना — वश में होना
वाक्य : कठिन परिश्रम से सफलता हमारी मुट्ठी में होती है।
(ii) सिर उठाना — विरोध करना
वाक्य : अन्याय के विरुद्ध सभी ने सिर उठाया।
(iii) हाथ पकड़ना — सहायता करना
वाक्य : शिक्षक ने कठिन समय में छात्र का हाथ पकड़ा।
(iv) पूर्ण विश्वास रखना — भरोसा करना
वाक्य : मुझे अपने मित्र पर पूर्ण विश्वास है।
(v) मुँह फेरना — साथ छोड़ देना
वाक्य : सच्चे मित्र कभी मुसीबत में मुँह नहीं फेरते।
(i) विजय — पराजय
(ii) संभव — असंभव
(iii) कठोर — कोमल
(iv) हँसना — रोना
(v) कुशाग्र — मंदबुद्धि
मुगल सम्राट अकबर के दरबार के प्रसिद्ध दरबारी बीरबल थे। वे अपनी कुशाग्र बुद्धि, चतुराई और हाजिरजवाबी के लिए प्रसिद्ध थे। वे कठिन से कठिन समस्या का समाधान सरलता से कर देते थे। अकबर उन्हें बहुत सम्मान देते थे।
पुरुष
1. विश्वनाथन आनंद
2. डी. गुकेश
महिला
1. कोनेरू हम्पी
2. हरिका द्रोणावल्ली
गतिविधि आधारित प्रश्न
विद्यार्थी अपनी पसंद के खेल (जैसे– शतरंज, क्रिकेट, फुटबॉल, बैडमिंटन आदि) की खेल सामग्री का चित्र स्वयं बनाएँ तथा उसमें आकर्षक रंग भरें।

